Tag: शेर

कैसे कह दूँ – डी के निवातिया

कैसे कह दूँ *** *** *** कैसे कह दूँ उसको मै बेवफा, नब्ज चलती है हर पल मेरी उसका नाम पर ! कभी मुलाकात नही हुई तो क्या, मेरे …

सेज़ है सज़ायें- डी के निवातिया

सेज़ है सज़ायें- *** यह लो वो सज़ गए फिर से पहन सेहरा भी, अब तो कोई जाकर उन्हें हमारी याद दिलायें ! हम ख़ाक में मिल गए उनके …

मेरा पुराना घऱ

“जब कभी ज़हन में गाँव का मंज़र आया। याद  मुझको  मेरा  पुराना  घऱ  आया ।। वो  पड़ोसी,  अपनापन,  नीम की छांव । गांव  छोड़ा  क्यूँ  मैं  इस  शहर  आया …

चिराग-ऐ-मुहब्बत — डी के निवातिया

चिराग-ऐ-मुहब्बत *** तेरी तूफ़ान-ऐ-नफरत भला उसे क्या बर्बाद करे    चिराग-ऐ-मुहब्बत जिसने आँधियो में जलाये हो !! ! ! ! —-:: डी के निवातिया  ::—

लग गया है…………. रोग सजना |गीत| “मनोज कुमार”

लग गया है प्यार का ये रोग सजना जाता नही कैसा है ये रोग सजना लाइलाज बीमारी है तड़पूँ सजना लग गया है तुमसे ये दिल सजना लग गया …

ग़रीब की बेटी (विवेक बिजनोरी)

  “मुझको इस काबिल बनाया, खुद भूखे प्यासे रहकर, मेरे बाबा ने मुझको समझा है सबसे बेहतर। मैं ग़रीब की बेटी अपने बाबा का सम्मान करूँ, माफ़ करना हे …

मुफ़लिसी (विवेक बिजनोरी)

“गुलिस्तां -ऐ-जिंदगी में खुशबू सा बिखर के आया हूँ, हर एक तपिश पर थोड़ा निखर के आया हूँ इतना आसां कहाँ होगा मेरी हस्ती मिटा देना, मैं मुफ़लिसी के …

नशा क्या होता है — डी के निवातिया

हमने न शौक फरमाया था जिन्दगी में कभी मयकदे जाने का एक बार तेरी आँखों से पी तो समझ आया नशा क्या होता है !!  

दवाखाने में क्यूँ छोड़ा जरा चलते तो मैखाने

“बुरा क्या था अगर इस दर्द के मै साथ में दिलबर…  तुम्हारी याद भी चलकर मिटा लेता अगर थोड़ी…   दवाखाने में क्यूँ छोड़ा जरा चलते तो मैखाने…  दवा के …

हिन्दू मुसलमान

पहले अच्छे इंसान बनो फिर हिन्दू या मुसलमान बनो .. धर्म के नाम पर इंसानियत छोड़कर शैतान न बनो … इंसानियत सीखता है हर धर्म अपने धर्म को मानने …

कुछ यूँ जिया मैं….IBN

कुछ यूँ जिया मैं उससे,जुदा होके… जैसे बिखरा कोई कस्ती,तुफां मे फन्ना होके..! जुड़ा रिस्ता कुछ इस कदर,उसकी यादों से अब… जैसे ज़िंदगी बसी है,सांसो मे,रवाँ होके…!! ————————— Acct- …