Tag: शायरी

मेरा पुराना घऱ

“जब कभी ज़हन में गाँव का मंज़र आया। याद  मुझको  मेरा  पुराना  घऱ  आया ।। वो  पड़ोसी,  अपनापन,  नीम की छांव । गांव  छोड़ा  क्यूँ  मैं  इस  शहर  आया …

बर्बादी का सबब

मेरी बर्बादी का सबब पूछेंगे। वो क्या, कैसे ओर कब पूछेंगे।। मेरी गजलों को पढ़कर लोग सभी। मेेरे शेरोंं का मतलब पूछेंगे। । मैं ख़ामोश हूँगा तू फ़िक्र ना …

अंदाज़-ऐ-एतराज — डी के निवातिया

अंदाज़-ऐ-एतराज *** क्यों आज फिर मौसम का मिजाज बदला है क्या सनम ने आशिक़ी का अंदाज बदला है ! दिल तो पहले ही डूबा है, अश्क-ऐ-समंदर में फिर क्यों …

हुस्न और इश्क़ — डी के निवातिया

हुस्न और इश्क़ हुस्न और इश्क़ पर किस्से आम लिख दिये कविता ग़ज़ल,नज़्म,शेर,तमाम लिख दिये कोई वीरानी कहे कोई कहे खुदा की इबादत, हमने तो ख़ुशी-गम सब तेरे नाम …

सुबह का फ़रमान

सुबह का जब फ़रमान आता है, कुछ कसकसाते हैं, कुछ मसमसाते हैं। कुछ उठ जाते हैं , कुछ सिमटकर रह जाते हैं। कुछ इसका इस्तकेबाल करते हैं। कुछ तार-तार …

लग गया है…………. रोग सजना |गीत| “मनोज कुमार”

लग गया है प्यार का ये रोग सजना जाता नही कैसा है ये रोग सजना लाइलाज बीमारी है तड़पूँ सजना लग गया है तुमसे ये दिल सजना लग गया …

जब जब महकती ये यादें तुम्हारी हैं- आशीष अवस्थी

अब मिलता नहीं, जो आंसू छुपा के रखा था कहीं ना ही वो जिंदगी जो तन्हा गुज़ारी है ना ही वो बातें जो तुम करती थी कभी ना ही …

७२. मेरी खातिर……………….. जैसी घरवाली |गीत| “मनोज कुमार”

मेरी खातिर कर देती है, इच्छाओं की क़ुरबानी जान से ज्यादा मुझको प्रिय, जन्नत जैसी घरवाली मेरी खातिर……………………………………………………… जैसी घरवाली कभी जो गुस्सा करती है तो, उसमें भी है …

६९. क्या कहूँ अब तुमसे………. तेरी हो गयी |गीत| “मनोज कुमार”

क्या कहूँ अब तुमसे तो ये रूह दीवानी हो गयी मीरा सी दीवानी ये दीवानी तेरी हो गयी क्या कहूँ अब तुमसे…………………………………… तेरी हो गयी कल तक थे गरीब …

६७. यूँ रूठो ना……………..इतराया ना करो |गीत| “मनोज कुमार”

यूँ रूठो ना करो, यूँ गुस्सा ना करो इतना ना सताओ तुम, इतराया ना करो यूँ रूठो ना……………………………………………..इतराया ना करो हम प्यार तुम्हें जां प्यार से ज्यादा करते हैं …

चाह – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

चाह दिल की ये चाह थी के बहुत प्यार करेंगे हम अपनी चाहत से ………………….. पर जिसको चाहा हमनें उसकी चाहत कोई ओर था …………………….. शायर : सर्वजीत सिंह …

shayariya-1

1)किसी अधूरी मुलाकात की बिखरी-बिखरी बात हो तुम, शायद बादलों से छनकर आती धूप सी सौगात हो तुम। 2)कहाँ अंधेरों में भटक रहा है कब से, वो अक्स है …

दामन – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

दामन किस्मत ने साथ दिया होता अगर तो हम भी मोहब्बत कर ही लेते ………………. पर बदनसीबी ने पकड़ा है दामन ऐसा के अब किसी से क्या गिला करें …

मैं अक्सर भूल जाता हूँ।

जबसे दूर तू मुझसे हुआ है ऐ मेरे हमदम, हर किसी बात में तेरा ज़िक्र आ ही जाता है; सुनकर भी तुझको अनसुना कर देता हूँ मगर, तेरा नाम मेरे मन की …

हे तमाश-बीं ये दुनिया, तमाशा हो तुम; बेतकल्लुफी से फेरेंगे निगाहें, मन भर तो जाने दो ज़रा। -प्रान्जल जोशी।

तमाशे–शेर -डी के निवातिया

न पूछो बेबसी, बेताबी का आलम यंहा कोई गुमशुम,  तो कोई हैरान नजर आता है ! ये जिंदगी भी कितने तमाशे दिखाये   इसकी महफ़िल में हर कोई परेशान …

मेरे घर में मेरे सिवा कोई………~Gursevak singh pawar jakhal

मेरे घर में मेरे सिवा कोई समझाने वाला नही था, मैं गर सो जाता तो कोई जगाने वाला नही था !! गमो के खंजर लगे थे सीने से मेरे …

ग़रीब की बेटी (विवेक बिजनोरी)

  “मुझको इस काबिल बनाया, खुद भूखे प्यासे रहकर, मेरे बाबा ने मुझको समझा है सबसे बेहतर। मैं ग़रीब की बेटी अपने बाबा का सम्मान करूँ, माफ़ करना हे …

किसान और जवान (विवेक बिजनोरी)

“राजनीति बन गयी तमाशा अपने हिंदुस्तान की, ये कीमत चुकाई है तुमने शहीदों के अहसान की लूट लूट गरीबों को अपनी तिजोरी भर रहे, सबका पेट पालने वाले आत्महत्या …

मुफ़लिसी (विवेक बिजनोरी)

“गुलिस्तां -ऐ-जिंदगी में खुशबू सा बिखर के आया हूँ, हर एक तपिश पर थोड़ा निखर के आया हूँ इतना आसां कहाँ होगा मेरी हस्ती मिटा देना, मैं मुफ़लिसी के …