Tag: शायरी

तमाशे–शेर -डी के निवातिया

न पूछो बेबसी, बेताबी का आलम यंहा कोई गुमशुम,  तो कोई हैरान नजर आता है ! ये जिंदगी भी कितने तमाशे दिखाये   इसकी महफ़िल में हर कोई परेशान …

मेरे घर में मेरे सिवा कोई………~Gursevak singh pawar jakhal

मेरे घर में मेरे सिवा कोई समझाने वाला नही था, मैं गर सो जाता तो कोई जगाने वाला नही था !! गमो के खंजर लगे थे सीने से मेरे …

ग़रीब की बेटी (विवेक बिजनोरी)

  “मुझको इस काबिल बनाया, खुद भूखे प्यासे रहकर, मेरे बाबा ने मुझको समझा है सबसे बेहतर। मैं ग़रीब की बेटी अपने बाबा का सम्मान करूँ, माफ़ करना हे …

किसान और जवान (विवेक बिजनोरी)

“राजनीति बन गयी तमाशा अपने हिंदुस्तान की, ये कीमत चुकाई है तुमने शहीदों के अहसान की लूट लूट गरीबों को अपनी तिजोरी भर रहे, सबका पेट पालने वाले आत्महत्या …

मुफ़लिसी (विवेक बिजनोरी)

“गुलिस्तां -ऐ-जिंदगी में खुशबू सा बिखर के आया हूँ, हर एक तपिश पर थोड़ा निखर के आया हूँ इतना आसां कहाँ होगा मेरी हस्ती मिटा देना, मैं मुफ़लिसी के …

धीरे-धीरे — डी के निवातिया

भोर की चादर से निकलकर शाम की और बढ़ रही है जिंदगी धीरे धीरे  ! योवन से बिजली सी गरजकर बरसते बादल सी ढल रही है जिंदगी धीरे धीरे …

स्याही में खून—डी. के. निवातिया

आज फिर कलम के निकले है आंसू जिनसे जमीन पर एक तस्वीर उभर आई है। जरुर हुई है सरहद पे कोई नापाक हरकत तभी स्याही में खून की झलक …

अफ़सोस ——डी. के. निवातिया

लुटाकर हर ख़ुशी उम्र भर रो सकता हूँ मैं एक सिर्फ तुझे हँसाने के लिये , अश्को के सागर में खुद को बहा सकता हूँ मैं तेरे कपोलो के …