Tag: शायरी

प्यार की दिवाली – मेरी शायरी ……. बस तेरे लिए

प्यार की दिवाली दीपों का त्योहार है दिवाली हंसी खुशी और प्यार है दिवाली ………………. मोहब्बत का रंग जब चढ़े किसी पर फिर दिलभर का इज़हार है दिवाली ……………………. …

राज़ – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

राज़ दिल का हर राज़ मैं आज तुमको बता दूंगा ……………………. पर शर्त ये है के तुम भी अपना दिल खोल कर रख दो ………………………. शायर : सर्वजीत सिंह …

मंज़िल – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

मंज़िल कई बार घबरा जाता है ये दिल देख कर ज़िन्दगी की मुश्किलें …………………… पर कभी मैं टूटा नहीं हौसला छोड़ा नहीं क्योंकि लगता है के मंज़िल बहुत करीब …

अश्क़ – मेरी शायरी ……. बस तेरे लिए

अश्क़ अश्क़ बहुत बहाये मैंने तेरी मोहब्बत में ……………… पर मुद्दत के बाद जाना के तू पत्थर का ईक बुत है …………………….. ! ! ! शायर : सर्वजीत सिंह …

ठेस — डी के निवातिया

ठेस ◊♦◊♦◊ जिसको जितना चाहा उससे उतना दूर हो गये जब-जब किया हौंसला तब-तब मज़बूर हो गये उनकी नज़रो ने हमें पत्थर से शीशा बना डाला    लगी क्या …

गलतफहमी – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

गलतफहमी दिल की ये तमन्ना थी कि हमसफ़र मिले कोई अपने जैसे मिज़ाज का मिल तो गया लेकिन अब पछता रहा हूँ ये सोच सोच कर कि कितनी बड़ी …

ठोकर – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

ठोकर ठोकर ना मारो मुझे रास्ते का पत्थर समझ कर ………………… अगर किस्मत ने उठा के मंदिर में रख दिया तो मैं पूजा जाऊँगा …………………………………….. शायर : सर्वजीत सिंह …

चिड़िया

शाम बढ़ती जा रही थी बेचैनी उमड़ती जा रही थी शाख पर बैठी अकेली दूर नजरों को फिराती कुछ नजर आता नहीँ फिर भी फिराती चीं चीं करती मीत …

ग़म ज़दा – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

ग़म ज़दा कोई आवाज़ ना दो मुझको ………………… अब मुझे कुछ सुनाई ही नहीं देता क्योंकि दिल के टूटने के बाद ……………………. ग़म ज़दा हुआ पड़ा हूँ मै शायर …

झंकार – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

झंकार दिल धड़कने लगता है बड़ी जोर से सुनके तेरी पायल की झंकार ……………… ज़रा आहिस्ता आहिस्ता चला करो कुछ वक़्त तो मिले बेकरार दिल को संभालने का ……………… …

दस्तक – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

दस्तक सीने में उठा है इक पुराना दर्द आज फिर से ………………… लगता है के दिल के दरवाजे पे मोहब्बत ने फिर से दस्तक दी है ……………….. शायर : …

ख़बर – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

ख़बर ख़बर उसके आने की सुन कर …………………. दिल झूम उठा पागल हो कर पर इस नासमझ को कौन समझाये ……………………… के अभी तो उससे …. अपनी जान पहचान …

मेरा पुराना घऱ

“जब कभी ज़हन में गाँव का मंज़र आया। याद  मुझको  मेरा  पुराना  घऱ  आया ।। वो  पड़ोसी,  अपनापन,  नीम की छांव । गांव  छोड़ा  क्यूँ  मैं  इस  शहर  आया …

बर्बादी का सबब

मेरी बर्बादी का सबब पूछेंगे। वो क्या, कैसे ओर कब पूछेंगे।। मेरी गजलों को पढ़कर लोग सभी। मेेरे शेरोंं का मतलब पूछेंगे। । मैं ख़ामोश हूँगा तू फ़िक्र ना …

अंदाज़-ऐ-एतराज — डी के निवातिया

अंदाज़-ऐ-एतराज *** क्यों आज फिर मौसम का मिजाज बदला है क्या सनम ने आशिक़ी का अंदाज बदला है ! दिल तो पहले ही डूबा है, अश्क-ऐ-समंदर में फिर क्यों …

हुस्न और इश्क़ — डी के निवातिया

हुस्न और इश्क़ हुस्न और इश्क़ पर किस्से आम लिख दिये कविता ग़ज़ल,नज़्म,शेर,तमाम लिख दिये कोई वीरानी कहे कोई कहे खुदा की इबादत, हमने तो ख़ुशी-गम सब तेरे नाम …

सुबह का फ़रमान

सुबह का जब फ़रमान आता है, कुछ कसकसाते हैं, कुछ मसमसाते हैं। कुछ उठ जाते हैं , कुछ सिमटकर रह जाते हैं। कुछ इसका इस्तकेबाल करते हैं। कुछ तार-तार …