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कब तक सहेगी और अत्याचार बेटियाँ

सूने से जो आंगन मे रंगोली सजा दे, चाहे वो जिस दिन को भी दिवाली बना दे, हर एक दिन को बेटियां त्योहार बना दे, मामूली घर मे खुशियो …