Tag: गंभीर काव्य

सोच-सोच घबराता हूँ

ये सोच-सोच घबराता हूँ…….. *** पिता नही मेरी ताकत है, छत्र-छाया में उनकी रहता हूँ महफूज उनके संरक्षण में, निडर हो बेफिक्री से जीता हूँ छोड़ जायेंगे एक दिन …

स्वंय से तुम युद्ध करो – डी के निवातिया

स्वंय से तुम युद्ध करो बुद्ध को तुम प्रबुद्ध करो आत्मा को शुद्ध करो चैतन्य सर्व प्रबल हो स्वंय से तुम युद्ध करो !! अभीष्‍टता आस करो सत्य का …

गीत झूठे खुशहाली के – डी के निवातिया

गीत झूठे खुशहाली के *** ऐ राजनीति झूठे वादों पर मत जा बंद नयनो को ज़रा खोलकर देख ! आसमा छूने वाले धरा पर मति ला हकीकत को सच …

मै भारत माता बोल रही हूँ – डी के निवातिया

मै भारत माता बोल रही हूँ *** जंजीरों में जकड़ी हूँ मै भारत माता बोल रही हूँ ह्रदय में उठती पीड़ा चन्द शब्दों में खोल रही हूँ ।। कोई …

बोझ….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

मन, काल कोठरी में बंद… दीवारों से टकराता है… गहरे डूब जाता है… कभी… ठक ठक सुनायी देती है… धीमें से दबे पाँव… चलता हो जैसे कोई… या डूबने …

कुछ यादें बीते साल की – सोनू सहगम –

-: कुछ यादें बीते साल की :- कुछ यादें बीते साल की, नये साल में बहुत याद आयेगी कुछ यादें माना आँखें करेंगी नाम कुछ यादें चहरे पर मुस्कान …

चिड़िया

शाम बढ़ती जा रही थी बेचैनी उमड़ती जा रही थी शाख पर बैठी अकेली दूर नजरों को फिराती कुछ नजर आता नहीँ फिर भी फिराती चीं चीं करती मीत …

मशगूल — डी के निवातिया

 मशगूल *** हंसगुल्लों  में मशगूल है जिंदगानी मतलब की बातो के लिये वक़्त किसके पास ! जब अपने ही नकार देते है अपनों को टुटा हुआ नर्वस दिल फिर …

आज फिसल गया — डी के निवातिया

आज फिसल गया *** वक़्त भी अपनी चाल से आगे निकल गया भविष्य की चाहत में वर्तमान निगल गया भूत अपनी पहचान बनाने में अक्षम हुआ कल से कल …

काव्य रो रहा है — डी के निवातिया

काव्य रो रहा है *** साहित्य में रस छंद अलंकारो का कलात्मक सौंदर्य अब खो रहा है। काव्य गोष्ठीयो में कविताओं की जगह जुमलो का पाठ हो रहा है …

कहाँ झूलेंगी बिटिया रानी — डी के निवातिया

कहाँ झूलेंगी बिटिया रानी *** बरगद, पीपल, शीशम, नीम पुराने सब काट दिये घर के आँगन और चौबारे छोटे टुकड़ो में बाँट दिये कहाँ झूलेंगी बिटिया रानी,  कैसे गाये …

जीवन पर अधिकार किसका ? (कविता)

तुम्हारे ही जीवन पर है अधिकार किसका ? तुम्हारा ? बिलकुल नहीं. तुम प्रयास करो सज्जन बनकर जहाँ में प्यार व् करुणा बाँटने का. सावधान ! तुम्हारे सर पर …

पर्यावरण दिवस — डी के निवातिया

  पर्यावरण दिवस चलो, हम भी सब की तरह झूठ मूठ की परम्परा निभा लेते है इस बार भी पांच जून को फिर से पर्यावरण दिवस मना लेते है …

चित्तचोर — डी के निवातिया

+++ चित्तचोर +++ —————-@@@————— चित्तचोर का चित्त चुराती   चंचल चितवन चपल चकोर चंद्र चांदनी की चकाचौंध में चैन चुरा गयी रमणी चोर !! चतुर चक्षु के चंचु-प्रहार से   …

कैसे मुकर जाओगे — डी के निवातिया

कैसे मुकर जाओगे +++   ***   +++ यंहा के तो तुम बादशाह हो बड़े शान से गुजर जाओगे । ये तो बताओ खुदा कि अदालत में कैसे मुकर जाओगे चार …