Tag: रिश्तो पर कविता

वर्तमान परिवेश में रिश्ते

रिश्तों का अर्थ बदल रहा प्रीत नफरत में उबल रहा वाचाल बना हर कोई यहाँ अपनों को बस कुचल रहा कभी प्रीत की भाषा थी मौन आज बिन बोले …

कैसा परिवर्तन -शिशिर “मधुकर”

जीवन में ना जाने ये कैसा परिवर्तन अब आया है मिटते रिश्तों की छवियों ने मन को वीरान बनाया है कभी ना सोचा था जो हमने कैसा आज नज़ारा …

रिश्तों का विज्ञान -शिशिर “मधुकर”

रिश्तों का विज्ञान समझना सबके बस की बात नहीं जिनको ज्ञान है इस विद्या का उनको लगता आघात नहीं जो होता नहीं वो दिखता है यहाँ जो दिखता नहीं …

मैं तुम्हारी पत्नी हूँ – शिशिर “मधुकर”

मैं तुम्हारी पत्नी हूँ और तुम्हारे साथ हूँ तुम्हे इसका एहसास जब होता नहीं तो मैं क्या करूँ . हाँ मैंने तुम्हे शादी के बाद सबसे प्रिय व्यक्ति नहीं …

पत्नी का जन्मदिन – शिशिर “मधुकर”

मेरे जीवन का साथी इस दिन इस दुनिया में आया गूँज उठी ये दसों दिशाए और रंग फ़िज़ाओं में छाया सोच रहा हूँ इस अवसर पर मैं उसको क्या …

मेरे अपने- शिशिर “मधुकर”

हाँ तुम मेरे अपने हो ये कब मैंने इंकार किया नैनों के प्यारे सपने हो ये तो मैंने स्वीकार किया आखिर ये पीड़ाये भी तो अपनेपन की अनमोल निधि …

अपनेपन की छाँव – शिशिर “मधुकर”

रोज़ की मुस्कराहटों के बाद आखिर तुमने पूछ ही लिया मुझसे मेरी तन्हाई का सबब. लेकिन तुम क्या जानो कि मैं तुमसे सब कुछ छुपा गया और तुम्हारे हर …

रिश्तों की दुनियाँ में – शिशिर “मधुकर”

मुझसे नाराज़ होकर सब चले गए पूछा भी ना कि मैं नाराज़ क्यों हूँ. अपनी पीड़ा को आंसुओं को तो दिखा दिया ये किसी ने ना समझा कि मैं …