Tag: Raquim Ali’s Poems

रक्षाबंधन…Raquim Ali

रक्षाबंधन जब-जब आता है, रक्षाबंधन का यह प्यारा त्योहार चित्त प्रसन्न हो जाता है, झूम जाता है सारा परिवार फिर से बढ़ जाता है, भाई-बहन में आपस का प्यार। …

अगर त्योहार न आते…Raquim Ali

अगर त्योहार न आते कैसा लगता? बेहद फीका-फीका लगता इतने चुस्त-दुरुश्त न हो पाते हम इतने रोमांचित न हो पाते। जवान न इतना मचल पाते बच्चे, गुब्बारे न उड़ाते …

मगर, वह है कि नहीं आती (भाग-3)…Raquim Ali

भाग-3 29.06.2017, सुबह: पांच दिन के बाद जब मैं निवास पर वापस अकेले लौटा: दो बच्चे आँखे बंद, घोंसले में सुस्त पड़े दिखे मुझको तीसरे अंडे का क्या हुआ, …

‘मगर, वह है कि नहीं आती’ के बाद…Raquim Ali

(‘मगर, वह है कि नहीं आती’ के बाद) भाग-2 (07.06.2017) कुछ दिनों बाद: वो बुलबुल फिर से खाली पड़े कमरे में आने लगी थी पुराने घोंसले पर बैठ जाती …

मुस्कुराहट…Raquim Ali

मुस्कुराहट 1. अपनों की: देखीं, ख़ुशी की कभी शरारत की मुस्कुराहटें। ममता भरी जो मुस्कराहटें थीं अभी याद हैं। डांट से युक्त वालिद की मुस्कानें लाज़वाब थीं। ………………………. 2. …

ख़ुदा उनके, वे ख़ुदा के क़रीब रहते हैं…Raquim Ali

*ख़ुदा उनके, वे ख़ुदा के क़रीब रहते हैं* इल्म व आमाल से, जो हैं रोशन जिंदा हैं वे, जिंदग़ी है उनकी वाज़ करते हैं जो सीधी राहों की और …

वाह रे इंसान-Raquim Ali

…भाग -१… वाह रे इंसान कहां पहाड़-समंदर-गहरी खान छोटा-सा कद, पर लेता है सबको छान आकाश छू लेने का पाले रहता अरमान! प्रतिफल है उसकी प्रबल इच्छा-शक्ति का दुनिया …

किस्मत में है इनके मिट जाना–Raquim Ali

ये हवाएं, ये फ़िज़ाएं ये बहारें, ये नज़ारे चंद दिनों के हैं; ये अदाएं, ये सदाएं ये तरानें, ये फ़साने चंद दिनों के हैं। ये जवानियां, ये रवानियां ये …