Tag: Raquim Ali ki Kavitaayein

बहुत मुश्क़िल है, उन्हें पा जाना… Raquim Ali

बहुत मुश्क़िल है बेलगाम नौकरशाही को पटरी पर ला पाना। बहुत मुश्क़िल है किसी से, बिना दबाव के नुक़्ते भर का सुधार करवा पाना। बहुत मुश्क़िल है गर्दिश में …

टिमटिमाता हुआ, एक चिराग़ … Raquim Ali

अगर, घनघोर घटा छाई हो आंधियां चल रही हों बारिश मूसलाधार हो; अगर, अमावस की रात हो हर सिम्त में फैला हुआ बेइंतहा अंधकार हो। अगर, मेरे हाथ में …