Tag: Raquim Ali ki Kavitaayein

अब तक वे एक नहीं हो पाए हैं…Raquim Ali

आसमान, जमीन, सितारे, शय्यारे, सूरज, खला समुन्दर, पहाड़, नदियां, झील, पानी, चाँद, हवा; जो सब ये चीजें आज मौजूद हैं, कभी तो पैदा किए गए होंगे कोई तो होगा …

‘मगर, वह है कि नहीं आती’ के बाद…Raquim Ali

(‘मगर, वह है कि नहीं आती’ के बाद) भाग-2 (07.06.2017) कुछ दिनों बाद: वो बुलबुल फिर से खाली पड़े कमरे में आने लगी थी पुराने घोंसले पर बैठ जाती …

बहुत मुश्क़िल है, उन्हें पा जाना… Raquim Ali

बहुत मुश्क़िल है बेलगाम नौकरशाही को पटरी पर ला पाना। बहुत मुश्क़िल है किसी से, बिना दबाव के नुक़्ते भर का सुधार करवा पाना। बहुत मुश्क़िल है गर्दिश में …

टिमटिमाता हुआ, एक चिराग़ … Raquim Ali

अगर, घनघोर घटा छाई हो आंधियां चल रही हों बारिश मूसलाधार हो; अगर, अमावस की रात हो हर सिम्त में फैला हुआ बेइंतहा अंधकार हो। अगर, मेरे हाथ में …