Tag: राजनैतिक कविता

किसान और जवान (विवेक बिजनोरी)

“राजनीति बन गयी तमाशा अपने हिंदुस्तान की, ये कीमत चुकाई है तुमने शहीदों के अहसान की लूट लूट गरीबों को अपनी तिजोरी भर रहे, सबका पेट पालने वाले आत्महत्या …

तैयार हो जाओ—डी. के. निवातिया

तैयार हो जाओ …. आया है मौसम चुनावी बरसात का, बरसाती मेंढक अब तैयार हो जाओ चल निकलेगी अब तुम्हारी लाटरी थाम झोला छतरी  तैयार हो जाओ !! जम …

देवमानव

देवमानव – 1 क्यों नहीं सारी स्त्रियां डूब कर मर जातीं पानी में क्यों नहीं सारे भूखे नंगे किसान मज़दूर मिलकर आत्मदाह कर लेते क्यों नहीं ज़हर खाकर मर …

जल रहा हैं हिन्दुस्तान

“आरक्षण की आग मे जल रहा हैं हिन्दुस्तान”, शिक्षा नौकरी पाने को बिक रहे हैं कई मकान, ठोकरे मिलती हैं यहा मिलता नही हैं ग्यान…. “आरक्षण की आग मे …

“कलयुग”-शीतलेश थुल

कैसे राज करेंगे राम, जब निशाना अर्जुन का चूक गया, क्यूँ करें कर्ण अब दान, जब सावित्री का सौभाग्य लूट गया, कैसे रहे अटल हरिशचंद्र, जब गांधी सत्याग्रह छोड़ …

कैसे कैसे हालात – शिशिर मधुकर

कौन कहता है कि सरकार आज ताकतवर है मुझे तो लगता नहीँ किसी को कहीँ कोई डर है बस एक मध्य वर्ग के लिए सारी कानूनी बाते है बाकी …

बुद्धिजीवी – शिशिर “मधुकर”

अपने जीवन में गर तुम इन बातों को सदा अपनाओगे तो निश्चित ही अपने भारत के बुद्धिजीवी कहलाओगे सबसे पहले हिन्दू मत का सीधा सीधा अपमान करो सभी लुटेरे …

पत्रकारों से ही पाइए – शिशिर “मधुकर”

मीडिया में आजकल बहुत देशभक्ति दिख रही है पठानकोट हमले पर ही सारी बहस चल रही है वो पूछते है जब सूचना थी तो कैसे हमला हो गया मोदी …

असहिंष्णुता के सपने – शिशिर “मधुकर”

कुछ बुद्धिजीवियों को बढ़ती असहिंष्णुता के सपने आ रहे हैं जिससे हुए व्यथित वो सरकारी सम्मान लौटा रहे हैं एक दादरी हिंसा पे इनकी आत्मा रोती है कश्मीरी हिन्दुओं …

आज के हालात – शिशिर “मधुकर”

आज के इन हालातों में नज़रों को ज़रा घुमाओ तो आसानी से मिल जाएगी तुमको ये कड़वी सच्चाई जीना उसका दुश्वार हुआ है जो जीवन में सच्चा है घुटकर …

* चुनावी त्योहार *

चुनाव का त्योहार आया होली का हुड़दंग भी जिस से सरमाया नेता एक दूजे पर कीचड़ उछालें समर्थन और विरोध में कसीदा काटें , कहते यह लोकतंत्र का पावन …

* मतदाता *

मतदाता जाग जाओ लोकतंत्र में अपनी तगत पहचान जाओ। आज वह तुम्हें हाथ जोड़ रहें पॉँच वर्ष फिर तुम हाथ जोड़ोगे आज भीड़ का हिस्सा बन रहे कल भीड़ …

माफ़ कीजियेगा….. कुछ भी लिखता हूँ !!

माफ़ कीजियेगा….. कुछ भी लिखता हूँ !! एक दिन राह चलते मुलाक़ात हुई एक नेताजी से मैंने पूछा,ये बदनामी का ताज तुहारे हिस्से क्यों है, प्रसन्न मुद्रा से बोला …

* नेताजी बने लेखक *

नेताजी बने लेखक लिखन लागे किताब एक तो उनकी नाम बढ़ी दूजे हुई लक्ष्मी की वरसात , वो करें एसी खुलासा जिस पर हो विवाद बढे उन्की प्रसिद्धि बनी …

ये खुशबू कहाँ से आ रही है रोटी की हवाओं में

आते जाते रहा चेहरा तेरा ख्यालों में रात भर, चाँद भटका है बहुत सावन की घटाओं में , भूख से लरजते बच्चे ने माँ से पूछा, माँ, ये खुशबू …

बहुत सेक चुके बातो पर रोटि

बहुत सेक चुके बातो पर रोटि अब कर्य पे बल होगा जिसकि नीयत देश हित की उसके साथ ही जन होगा वादे करना सोच समझ कर सकल पूरा करना …

मेरे भारत की छटा बड़ी निराली है

मेरे भारत की छटा बड़ी निराली है यंहा अंधे भक्तो की भीड़ भारी है सत्य, असत्य से सरोकार किसे है सब सुनी सुनाई पेलने के पुजारी है अपनी-२ पसंद …