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कविता -स्वाभिमान

क्षमा क्यूँ माँगूँ हाथ जोडूँ मन को तोडूँ केवल तुम्हारा, रखूँ मान इसलिए कि मैं स्त्री हूँ ! मैं विवश रहूँ न लूँ साँस न खोलूँ पर न देखूँ …

स्त्री

स्त्री (ब्राज़ील के कवि म्यूरिलो मैंडस की रचना ‘अधचिडि़या’ पढ़ कर) अंतरिक्ष के आखिरी छोर पर खड़ी एक स्त्री पक्षियों को पंख पेट को अन्न आँखों को दृश्य कवियों …