Tag: प्यार पर कविता

प्रेम की कसमें – शिशिर मधुकर

Original मैं तुमको बुरा कहती हूँ लोग ये बताएँगे तुम दूर रहो मुझसे ये ही सब सिखाएँगे नादां हैं सभी लोग जो ये जानते नहीं हैं प्रेम की कसमें …

कुदरत का करिश्मा – शिशिर मधुकर

मैं जानती हूँ तुम बस मुझे देखना चाहते हो कैसे कहूँ तुम भी तो मेरे ख्वाबों में आते हो अचरज नहीं बात ये कुदरत का करिश्मा है हर पल …

मेरी मजबूरी – शिशिर मधुकर

भूली नहीं हूँ तुमको पर जानो मेरी मजबूरी मैं बस तुमको चाहती हूँ कहना नहीं ज़रूरी मैं तेरी दो बाहों में अब चाहे ना सिमट पाऊँ रूहों के बीच …

नज़रों से मुहब्बत – शिशिर मधुकर

हूक सी उठती है तू जब भी मेरे पास होता है नज़रों से मुहब्बत का मजा तो खास होता है तुझे देखती हूँ जब भी ये दो निगाहें बचा …

अरमां – शिशिर मधुकर

मुहब्बत पास है जिनके उनके चेहरे चमकते हैं अँधेरी रात में अरमां भी जुगनुओ से दमकते हैं लाख कोशिश करे दुनियाँ रूहों को सताने की प्रेम किश्ती में बैठे …

खुशबू सी-शिशिर मधुकर

तन्हाई में तुम जब भी कहीं जाओगे मेरी छवियों को सीने में दबा पाओगे जो बसती थी खुशबू सी तेरी साँसों में कैसे आखिर उसे पूरी तरह भुलाओगे शिशिर …

बेफिक्र सा – शिशिर मधुकर

तुम मुस्काते हो तो मुझको पता चल जाता है मेरा ख़याल अकेले में अब भी तुम्हे सताता है लाख कोशिश करूँ मैं बेफिक्र सा दिखाने की तेरी चाहत का …

तेरी यादों के सहारे – शिशिर मधुकर

तुझ से बात ना हो तेरी तस्वीर देख लेता हूँ कुछ इस तरह ही निज मन को सुकूँ देता हूँ बड़ी दूर हैं किनारे और लहरें भी मचलती हैं …

एहसास ए मुहब्बत – शिशिर मधुकर

तुमसे कैसे कहें हम तुमको कितना याद करते हैं एहसास ए मुहब्बत क्या कभी चाहने से मरते हैं गमों की खाई से तुमने ही तो हमको निकाला था तुम्हारा …

पीर का पानी – शिशिर मधुकर

यूँ ही नहीं मैं तुमको नित एक संदेशा भेजता हूँ तेरी आँखों के दर्पण में खुद की छवि देखता हूँ इस दर्पण पे कहीं धूल का गुबार जम ना …

मुझको भी थाम ले -शिशिर मधुकर

ज्यों थामा था मैंने तुमको कोई मुझको भी थाम ले धड़कनों में बसा ले अपनी रात दिन मेरा ही नाम ले बड़ी किस्मत से यहाँ मिलते हैं ऐसे साथी …

माथे का कुमकुम – शिशिर मधुकर

मेरी जिंदगी में सब कुछ छोड़ कर गर जो आते तुम तुम्हारे मरमरी चेहरे की मय पी मैं रहता नशे में गुम बड़ा वीराना रहता है मेरी मुहब्बतों का …

नूर फिर से लौटा है – शिशिर मधुकर

प्यार ही प्यार था तेरी इन हंसी निगाहों में मैं खुद को भूल गया तूने भरा जो बाहों में जिंदगी में हर ईक चीज तुमको मिल जाए खुशी मिलती …

चालाकी से गहते हैं -शिशिर मधुकर

मुहब्बत को भुला दें हम वो हमसे ये कहते हैं दर्द का क्या पता उनको जो ना चोट सहते हैं ईंट गारे का घर भी तोड़ना आसां ना होता …

प्रीत का रंग – शिशिर मधुकर

हाथ छूटे हैं जीवन में मगर बंधन तो नहीं टूटे दूरीयां चाहे हों जैसी ना तुम रूठे ना हम रूठे समय का फेर है सारा इसका क्या करे कोई …

तेरी खुशबू से -शिशिर मधुकर

तेरी खुशबू से हम तुझको यहाँ पहचान ही लेंगे तू आई है हवाओं के रुख से ये भी जान ही लेंगे सरद मौसम ज्यों बीतेगा नरम सी धूप बिखरेगी …

काश तुम साथ में होते – शिशिर मधुकर

काश तुम साथ में होते तो जीवन खुशनुमा होता तन्हाई का गहरा दाग़ तब ना कोई बदनुमा होता तेरी उल्फ़त में हर शै को मैं फिर कुर्बान कर देता …

जीवन्त मूरत – शिशिर मधुकर

तुमसे कैसे कहूँ तुम मेरी कितनी ज़रूरत हो मुझे सुख चैन देने वाली एक भोली सूरत हो हर अंग में जिसके छवि दिखती है बस मेरी प्रेम के रंगो …

तेरे सब गम चुरा लेंगे…………….. भी बुला लेंगे |गीत| “मनोज कुमार”

तेरे सब गम चुरा लेंगे तेरे सब दर्द मिटा देंगे छाया तेरा नशा दिल पे तेरे सब कर्ज मिटा देंगे माना ये दौर है मुश्किल ख़ुशी फिर भी चुरा …