Tag: प्यार पर कविता

कोई बंधन नहीं टूटा – शिशिर मधुकर

लाख कोशिश करी रिश्ता मगर मैं तोड़ ना पाया तुम्हें घुट कर तड़पने को अकेला छोड़ ना पाया हवाएं कुछ चली ऐसीं तिनका तिनका बिखेरा है घरोँदा उड़ गया …

अधूरापन मेरा – शिशिर मधुकर

अधूरापन मेरा अब तो मुझे परेशान करता है तेरा बदला रवैया हरदम मुझे हैरान करता है एक बुरे वक्त में हमने कई साझा किए थे दुख यही सब सोच …

गैर हम हो नहीं सकते – शिशिर मधुकर

कोई परदा नहीं जब बीच गैर हम हो नहीं सकते किसी और की बाहों में अब तुम सो नहीं सकते बड़ी मुश्किल से मिलती हैं दौलतें प्रेम की जग …

जो मन आपस में मिल जाएँ – शिशिर मधुकर

जो मन आपस में मिल जाएँ जुदा वो हो नहीं पाते जो मिल के भी नहीं मिलते वो तन्हा सो नहीं पाते अनोखा सा जो रिश्ता है दर्द ए …

तेरी मुस्कान का जादू – शिशिर मधुकर

समां वो याद है मुझको जो तुम आँखों में भरते थे बड़े नज़दीक आ कर के अपनों सी बात करते थे मुहब्बत किस से हो जाए नहीं कोई नियम …

बिना तेरे – शिशिर मधुकर

मुहब्बत कर जो ली तुमसे कहो अब मैं रुकूं कैसे फ़कत डर कर ज़माने से कहो अब मैं झुकूं कैसे बिना तेरे मेरे जीवन में कोई खुशियां ना रहती …

थक गया हूँ – शिशिर मधुकर

थक गया हूँ अब मैं तेरे इंतज़ार में वीरानी सी छा गई है मेरे दयार में नाराज़ होके मैंने जो भी तुझे कहा जुबान अब नही है मेरे इख्तियार …

बड़ा गहरा समुन्दर है – शिशिर मधुकर

तुम्हें तो पा लिया मैंने अब तो बस चैन पाना है किसी भी हाल मे ये साथ तो हरदम निभाना है बड़ी जालिम है ये दुनिया ढूंढ़ती रहती है …

देख के तेरी सूरत – शिशिर मधुकर

मेरे जीवन में जब जब भी घोर निराशा छाती है देख के तेरी सूरत फिर जीने की इच्छा आती है बिंधा हुआ है दिल ये मेरा दुनिया भर के …

कोई पूछे खुदा से आज – शिशिर मधुकर

तुमने मुझ को सताया है चलो आपस में अब बोलें छुपे हैं दिल के भीतर जो राज़ जल्दी से सब खोलें ज़माने ने करीं साजिश तन्हा हो कर रहें …

तुम जान जाओगे – शिशिर मधुकर

ज़रा शीशे में खुद को देख लो तुम जान जाओगे परख मेरी दो नज़रों की भी तुम पहचान जाओगे तुम्हीं सबसे हसीं हो इस जहां में कह दिया मैंने …

मनवा तो हर पल पास था – शिशिर कुमार

मोहन भी दीवाने हो गए राधा में कुछ तो खास था दो बदन हों चाहे उनके मनवा तो हर पल पास था हर व्यक्ति को हर व्यक्ति से प्रीत …

आईने दिल के- शिशिर मधुकर

मुहब्बत जो भी करते हैं कभी रूठा नहीं करते फ़कत चेहरा घुमाने से ये संग छूटा नहीं करते जिसे अपना बना के प्यार में हर चीज़ दे डाली हवस …

डोर ये स्नेह की – शिशिर मधुकर

कभी तुम भूल जाते हो कभी पहलू में आते हो आखिर कौन से रिश्ते को तुम मुझसे निभाते हो कभी तुमको नहीं परवाह मुझे सन्देश देते हो कभी मैं …

अगर पक्का इरादा है – शिशिर मधुकर

अगर पक्का इरादा है तो रस्ता बन ही जाता है कहीं भी रोक लो पानी जमीं में छन ही जाता है ये दलदल मुहब्बत का बहुत गहरा सा होता …

तड़पती हूँ मगर – शिशिर मधुकर

सुनो नाराज़ ना होना मैं तुमको याद करती हूँ नज़र से दूर लोगों की सदा आहें सी भरती हूँ बड़ा बैरी ज़माना है कहीं रुसवाई ना कर दे तड़पती …

जब प्रेम मिलेगा राधा सा – शिशिर मधुकर

जब प्रेम मिलेगा राधा सा कान्हा मोहन हो जाता है असली घी मिल जाने पर हलवा सोहन हो जाता है जो स्वार्थ बात में हावी हो और झूठ सदा …

प्रेम अंकुर – शिशिर मधुकर

मैं तुमसे बात करता हूँ तभी अरमान जगते हैं तेरे ये बोल जाने क्यूं असल अमृत से लगते हैं तेरे नैनॊं का ये जादू होंठों की सुर्ख सी लाली …

अजीब रिश्ते – शिशिर मधुकर

अजीब रिश्ते हैं हम तो जिन्हें ना तोड़ पाते हैं मुहब्बत देने वालों को ना संग में जोड़ पाते हैं मोह माया के बन्धन तो सदा मजबूत होते हैं …

अपने खास लगते हो – शिशिर मधुकर

कभी तुम दूर लगते हो कभी तुम पास लगते हो हर क्षण मगर मुझको तुम अपने खास लगते हो ज़माना दौड़ता है हर तरफ़ पर इंसान तन्हा है तुम …

तेरी आवाज़ सुन के – शिशिर मधुकर

मुझको इकरार है कि मैं तुम्हीं से प्यार करती हूँ तुम्हारा घर सदा महके तभी फूलों सी झरती हूँ तुम मेरे साथ रहते हो मुझे ग़म की नहीं परवाह …