Tag: प्यार पर कविता

पुनीता – शिशिर मधुकर

ज़रा सा चैन पाने को ये मय इंसान पीता है पिला के प्रेम रस देखो मैंने तुमको जीता है मिलन की कोशिशें तेरी नहीं बेकार जाएंगी जवानी का समय …

करार – शिशिर मधुकर

सुन ले मैं थक चुका हूँ तेरे इंतज़ार में दूरी ये अच्छी नहीं इतनी भी प्यार में दुश्वारियां कबूल थी जब साथ में चले खामोशी मगर थी नहीं अपने …

अभिमान – शिशिर मधुकर

देखती हूँ तुझे तो मुझको ये अभिमान होता है सिमट के बाहों में तेरी कितना सम्मान होता है अपनी आँखों से तूने मुझपे जैसी प्रीत बरसाई वही पाने का …

खजाना – शिशिर मधुकर

मैं तो तेरी दीवानी हूँ तू भी मेरा दीवाना हैं हर हाल में हमको तो ये रिश्ता निभाना है तलाशा उम्र भर जिसको उसे मैं छोड़ दूँ कैसे मुहब्बत …

मेरा साया – शिशिर मधुकर

मुहब्बत किसको कहते हैं मुझे तूने सिखाया है चली हूँ जिस भी पथ पे मैं बना तू मेरा साया है चोट जब भी लगी दिल पे सफ़र में ज़िन्दगानी …

ये सरदी का मौसम – शिशिर मधुकर (प्रणय गीत )

ये सरदी का मौसम ये ठण्डी हवाएं चल आ मुहब्बत को फिर से निभाएं तुम जो करम अपना मुझ पे करोगी मेरा दिल ये तुमको ही देगा दुआएं नहीं …

सर झुकाते है – शिशिर मधुकर

अकेले ख्वाब बस तेरे हमें हर पल सताते हैं तभी हम हाले दिल ए सनम तुमको सुनाते हैं हर इंसा के सीने में छुपी कुछ बात हैं देखो मगर …

धरती का फेरा – शिशिर मधुकर ( बिना रदीफ की ग़ज़ल )

मुहब्बत तूने दी मुझको तभी मैं हो गया तेरा तू आई मेरी बाहों में मिट गया सारा अँधेरा जब से सूरज हुआ मद्धिम बशर देखा नहीं कोई मगर उम्मीद …

मुकद्दर का सिकंदर – शिशिर मधुकर

जो तेरे हुस्न का, बस एक यहाँ, दीदार हो जाए हर एक इंसान को, केवल तुझी से, प्यार हो जाए मुकद्दर का सिकंदर, दिल की दुनिया, में बनेगा वो …

नेह की धारा – शिशिर मधुकर (बिना रदीफ जी ग़ज़ल )

मुहब्बत हो गई तुमसे, करे क्या, दिल ये बेचारा तन्हा बैठा है यादों में, मगर हिम्मत, नहीं हारा आस तो अब भी, जिंदा है, इस जीवन के, मेले में …

जुदाई तुमको भाती है – शिशिर मधुकर

ये कैसा प्रेम है, मुझको नहीं तुम, याद करते हो मैं कैसे मान लूँ, तुम मेरी छवि, सीने में धरते हो दर्द तुमको अगर होता, तो चेहरे से, बयां …

साथ और विश्वास – शिशिर मधुकर

अगर तूने मुझे आगोश में अपने लिया होता तेरी आँखों का जाम झूम कर मैंने पिया होता काश तुम माँग लेते हाथ मेरा चल पड़े थे जब मैंने सब …