Tag: प्यार पर कविता

तुम्हें गर याद ना कर लूँ – शिशिर मधुकर

तुम्हें गर याद ना कर लूँ मुझे न चैन आता है दर्द सीने में उठता है मुझे हर पल सताता है देख के मेरी हालत को वो कई तंज़ …

अगर तुम पास रहते हो – शिशिर मधुकर

अगर तुम पास रहते हो मुझे खुशबू सी आती है तेरे दिल की तमन्ना जो मुझे खुल कर बताती है अगर तुम दूर रहते हो तन्हाई मुझको डसती है …

निशान ए मुहब्बत – शिशिर मधुकर

दूरियां मुझको अब तुम जताने लगे हो अपना संग वो अनोखा भुलाने लगे हो तड़प कोई मिलने की दिखती नहीं अब खुद को महफिल से मेरी बचाने लगे हो …

मुझको भी ये एहसास हुआ – शिशिर मधुकर

तुम मेरे दिल में बसते हो मुझको भी ये एहसास हुआ दूजा देखा नज़दीक तेरे मुझे दर्द बहुत ही खास हुआ कुछ दूर हुए थे हम दोनों मौसम नें …

मेरी परवाज़ बन गए – शिशिर मधुकर

दुनिया से भिड़ गए मेरी आवाज़ बन गए प्यारे सनम तुम मन का मेरे राज़ बन गए खुद को भुला मैं जब तेरे आगोश में गिरी ऐ हमनवा तुम …

अगर दिल खूबसूरत है – शिशिर मधुकर

अगर दिल खूबसूरत है नज़र चेहरे पे आता है कोई मुखड़ा मुझे हरदम तभी इतना लुभाता है मुहब्बत वो नहीं समझा उम्र गुजरी है पर सारी साथ एक ऐसे …

कातिल ये बहरे हैं – शिशिर मधुकर

भुला दो तुम मुझे चारों तरफ़ बैरी के पहरे हैं रोशनी अब नहीं दिखती अंधेरे इतने गहरे हैं संभालो मत ना उठने दो तूफां को समुन्दर में लील जाएंगे …

जी भर के इठलाती हूँ – शिशिर मधुकर

जब जब तुम पर मैं अपने अधिकारों को जतलाती हूँ तुम मेरे हो सब लोगों को इस सच को ही बतलाती हूँ मेरी बचकाना बातों पे जब भी तुम …

मुलाकातें – शिशिर मधुकर

मुलाकातें बड़ी मुद्दत से अपनी हो ना पाई हैं तेरी राहें सदा तकती ये आँखें सो ना पाई हैं बड़ा तूफान आया था और बरखा हुईं जमकर निशां अपनी …

तुमको ख़बर होगी – शिशिर मधुकर

मेरी नज़रों से खुद को देख लो तुमको ख़बर होगी ये मेरी ज़िंदगी तेरे जलवों के बिन कैसे बसर होगी तेरी अपनी मुसीबत है ये सच स्वीकार है मुझको …

बारिश हुई जब प्रेम की – शिशिर मधुकर

सोचे बिना ये इश्क मैंने तुमसे जो कर लिया अपने वीरान सपनों को तेरे रंग से भर लिया कोई नहीं है ऊँच नीच अब तेरे मेरे दरम्यान तेरी हर …

मुहब्बत में वो ताकत है – शिशिर मधुकर

सुबह उठते ही जो मुझको तुम्हारी दीद मिल जाए मेरे मन के भीतर की हर कली फिर तो खिल जाए तू अपने मरमरी हाथों से मेरी जुल्फों को सहला …

जब भी तुम मिले – शिशिर मधुकर

राहों में जब भी तुम मिले यादें पुरानी आ गईं ऐसा लगा अम्बर में ज्यों काली घटाएँ छा गईं ये गुमां मुझ को हुआ कि तुम मेरे नज़दीक थे …

जालिम हुई है ज़िंदगी – शिशिर मधुकर

अधूरी पड़ी है ज़िंदगी ना चैन आता है कोई कहीं ख्वाबों में मुझको बुलाता है साथ जन्मों का तो हरदम टीस देता है तुम भुलाओ ये मगर फिर भी …

मुहब्बत गर जहन में हो – शिशिर मधुकर

मुहब्बत गर जहन में हो बयां बातों से होती है चमक दीए की कैसी है परख रातों से होती है जमीं ने पेड़ को सींचा है मन से या …

सुकून जो दिल को देते हैं – शिशिर मधुकर

बढ़ाओ हाथ कि अब रातें मेरी तन्हा ना कटती हैं मिली हैं जितनी भी सांसें हल्के हल्के सिमटती हैं एक सी ऋतु रहेगी तो कभी ना ये डाल महकेंगी …

तुमको मालूम तो होगा – शिशिर मधुकर

बड़ी मुश्किल से मैंने ज़िन्दगी में तुमको पाया था वरना तन्हाइयों में मेरे संग बस मेरा ही साया था ना कोई साथ था मेरे तन भी घावों से छलनी …