Tag: जीवन पर कविता

खुद को हार कर देखो – शिशिर मधुकर

किसी को जीतना है तो खुद को हार कर देखो किसी के बिगड़े कामो को तुम संवार कर देखो ख़ुदा को यूँ ही नहीं इंसान यहाँ याद करता है …

फूल झरते रहें – शिशिर मधुकर

तुम हँसते रहो फूल झरते रहें मुहब्बत हम तुम से करते रहें व्यापार जीवन समझते हैं जो ना होगा वहाँ रिश्तों का चमन उल्फ़त जिसे ना हुई हो कभी …

मेरी नाराज़गी – शिशिर मधुकर

मेरी नाराज़गी को तुम नहीं जब मोल देती हो निष्ठुर सी बन कड़वी बातें सारी बोल देती हो वो पल मुझे इस जीवन में ये महसूस कराते हैं मानो …

सदगुण – शिशिर मधुकर

अधिक पाने की इच्छाओं को पूरा त्यागना होगा वरना चिंता रहेगी मन में और नित भागना होगा बिन प्रेम के जीवन में सब इच्छाएं तनाव ही देंगी चेहरों का …

आशा की प्रदीप

आशा की प्रदीप —————— १ अंधकार की आँचल छोड़कर मैं सूर्यदेव की ओर बढूँगा दुःख और पराजय की पथ पर प्रदीप बहुत सारा जलाऊँगा। २ बुझती ख्वाहिश की डगर …

प्रेम का अंकुर – शिशिर मधुकर

मैं अजनबी लोगों के साथ घर में रहता हूँ बोझिल हुए रिश्तों के सारे बोझ सहता हूँ हर अंग चोटिल है मेरा अपनों के तीरों से दिल की पीर …

दिलों के राज़ -शिशिर मधुकर

दिलों के राज़ कितना भी छुपाओ छुप ना पाते हैं वक्त लग सकता है थोड़ा मगर सब जान जाते हैं लाख कोशिश करी हमने उनकी सोच को बदलें इंसा …

रिश्तों की पौध – शिशिर मधुकर

साफ दिल के साथी से जब नज़रें मिलाओगे वो हँसती हुई खुद की छवि तुम देख पाओगे प्रेम और विश्वास संग जो तुम घर बनाओगे सुख दुःख के हर …

समर्पण और चतुराई – शिशिर मधुकर

करती हो तुम समर्पण मुझको जीत लेती हो कसमें जिन्दगी की फिर सारी पुनीत देती हो जब जब भी तुमने मुझसे की है यहाँ चतुराई अपने दोनों हाथों से …

कुदरती रज़ा – शिशिर मधुकर

यादों को जिंदा रखने को मिलते रहो साथी धुंधली तस्वीरों में सूरते नज़र में नहीं आती जो रूकावटे ना हों बीच में धारा नहीं मचले पथरीली राहें तो मिलनी …

ढलती सी शाम – शिशिर मधुकर

ऐ दुनियाँ वालों तुमको यहाँ ना कोई काम है प्रेम को रुस्वा कर ही तुम्हें मिलता आराम है तुम क्यों ना समझते हो यही ईश्वर का रूप है हर …

नालों में बहते हैं – शिशिर मधुकर

फूल जो खुशबू देते हैं अक्सर कांटों में रहते है सच्चे इंसा भी ज़माने में बस कष्टों को सहते हैं वक्त जब साथ ना दे तो आखिर क्या करे …

नाम जब चाहा – शिशिर मधुकर

मैंने नाम जब चाहा तो फिर मैं प्यार को भूला नफे नुकसान की बातों में बस मन मेरा झूला बड़े महलों में भी अक्सर अकेले लोग रहते हैं जिसने …

मालियों के हाथ – शिशिर मधुकर

अगर पौधा लगाया है उसे पानी तो देना है धूप मिलती रहे उसको सभी लोगों से कहना है अगर तुम भूल जाओगे तो वो फ़िर जड़ फैलाएगा जिधर से …

परिवर्तन – शिशिर मधुकर

मुझको यकीं हैं अपने खुदा पे वो लम्हा भी आएगा अपने दिल में बसा के मेरी छवि कोई मुस्कुराऐगा फूल खिलते हैं ऋतुओं में कभी मन की नही होती …

अल्हड़ बेगाना—डी. के. निवातिया

न जगाओ मेरे जमीर को, मुझे नासमझ नादाँ ही रहने दो ! मैं ठहरा अल्हड़ बेगाना, जो कहे ज़माना बेशक कहने दो !! ! इंसानियत का मोल नही यंहा …