Tag: जीवन पर कविता

दिलों में नहीं दूरी – शिशिर मधुकर

मुझे तुमसे नहीं शिकवा समझता हूँ मैं मजबूरी हूँ चाहे दूर नज़रों से फिर भी दिलों में नहीं दूरी यह जीवन तो औरों के लिए भी जीना पड़ता है …

तन्हा बेचारा – शिशिर मधुकर

मुझे छेड़ा ना गैरों ने फ़कत अपनों ने मारा है सारी उम्र गुजरी है मगर दिल तन्हा बेचारा है मोह ममता के रिश्तों ने मुझे भी बाँध रखा है …

चुनी जब राह मंजिल की – शिशिर मधुकर

चुनी जब राह मंजिल की तनिक सोचा नहीं मैंने लम्बे रस्ते में कपटी लोग लूट लेते है सभी गहने पिटा बैठा हूँ अब सब कुछ गँवा के कारवां से …

हम सब यहाँ एक इम्तिहान रोज देते है – अनु महेश्वरी

हम सब यहाँ एक इम्तिहान, रोज देते है, जिस का परचा, खुद ईश्वर लिखते है| जो भी इसे, सरलता से ले लेता, वही, जीवन, सादगी से जी लेता| जो …

आज अकेले यूँ न तुम रहते – अनु महेश्वरी

अब क्यों रोए, भाग्य को अपने, जब चेता नहीं कभी समय रहते| सारा जीवन बिता दिया, बस धन इकट्ठा करने में, कभी न समय दे पाए, मित्र और परिजन …

मिलन बेहद ज़रूरी है – शिशिर मधुकर

तेरे बिन कलम चलती नहीं कविता अधूरी है तेरी खामोशी कुछ ऐसी है ये होती ना पूरी है प्रकृति बिन पुरुष बिखरा हुआ बेचैन रहता है उसको आधार देने …

बात छोटी सी – शिशिर मधुकर

जब तकरार में अधिकार हो ना हो परायापन बातें बुरी लगती नहीं तब लगता है केवल मन जिनको समझ आ जाती है ये बात छोटी सी रिश्तों का असली …

कितने अजीब – शिशिर मधुकर

कितने अजीब इस ज़िन्दगी के ये खेल हैं सारे इंसानी बस्तियों में रिश्ते भी बड़े बेमेल है सारे जिन्हें अपना समझ हम सभी को छोड़ देते हैं अक्सर वो …

एहसास – शिशिर मधुकर

जहाँ गुलाब हों कांटों का तो वास होता है शैतान भी अक्सर खुशबू के साथ सोता है केवल फूल ही ईश्वर के मुकुट में सजते हैं शूलों को क्यूँ …

कैसे कैसे मोड़ – शिशिर मधुकर

जिन्दगी कैसे कैसे मोड़ तू जीवन में लाती है नज़र के सामने है जिन्दगी पर ना मिलाती है बिन कारण तो जीवन में ना कुछ भी होता है कौन …

अँधेरों में जो रहते हैं – शिशिर मधुकर

वो पौधे नहीं फलते अँधेरों में जो रहते हैं कई लोग जीवन में वक्त ऐसा है कहते हैं कोई माली जो न रोपे उन्हें नर्म सी धूप में बिन …

ज़िन्दगी का खेल – शिशिर मधुकर

तुम्हारे ग़म को समझा है तभी तो ख्याल आया है किसी ने किस कदर आखिर तेरा दिल दुखाया है क्या करें ज़िन्दगी का खेल ये सब है ही कुछ …

निश्छल प्यार – अनु महेश्वरी

प्यार, इश्क़, मोहब्बत, कभी समझ न आए, समय के साथ इसके मायने भी, बदलते नज़र आए| बचपन में माँ के बिना, ज़िन्दगी सोची भी नहीं जाती, फिर जीवन में दोस्त …

“एक सफ़र” – दुर्गेश मिश्रा

– एक सफ़र देखे मैंने इस सफर में दुनिया के अद्भुत नज़ारे, दूर बैठी शोर गुल से यमुना को माटी में मिलते | की देखा मैंने इस सफर में….. …

समय बलशाली होता है – शिशिर मधुकर

समय बलशाली होता है नहीं रहता ये हरदम साथ ना छोड़ो मुफलिसी में तुम कभी भी दोस्तों के हाथ चलेँगी आँधियां तो कोई भी ना इनको रोक पाएगा जमीं …

सुनो-सुनाओ – अनु महेश्वरी

क्यों, इतनी मेहनत भी, सुख-सुविधा के लिए? चलो दो पल साथ बिताए, कुछ पल जिए अपने लिए| कुछ तुम मेरी सुनो, कुछ तुम अपनी सुनाओ| क्यों, छुटियाँ बिताने भी, …

असल पैगाम – शिशिर मधुकर

जिन आँखों में मुहब्बत का नशीला जाम मिलता है उन्हीं सीनों से लगने में ही तो आराम मिलता है जुबां का क्या करोगे झूठ वो तो कह ही सकती …

क्यूँ अपनी जां निसार करता है- शिशिर मधुकर

बड़ा दर्द होता है जब कोई शब्दों से वार करता है तेरे मेरे स्नेह का एक ओछा सा तिरस्कार करता है जो इंसान की वक़त को निपट रुपयों से …