Tag: जीवन पर कविता

मालियों के हाथ – शिशिर मधुकर

अगर पौधा लगाया है उसे पानी तो देना है धूप मिलती रहे उसको सभी लोगों से कहना है अगर तुम भूल जाओगे तो वो फ़िर जड़ फैलाएगा जिधर से …

परिवर्तन – शिशिर मधुकर

मुझको यकीं हैं अपने खुदा पे वो लम्हा भी आएगा अपने दिल में बसा के मेरी छवि कोई मुस्कुराऐगा फूल खिलते हैं ऋतुओं में कभी मन की नही होती …

अल्हड़ बेगाना—डी. के. निवातिया

न जगाओ मेरे जमीर को, मुझे नासमझ नादाँ ही रहने दो ! मैं ठहरा अल्हड़ बेगाना, जो कहे ज़माना बेशक कहने दो !! ! इंसानियत का मोल नही यंहा …

कुदरत – शिशिर मधुकर

जिंदगी तू भी जाने कैसे कैसे रंग दिखाती है मुझसे नाराज़ हो के मुहब्बत भी दूर जाती है पतंग और डोर को जैसे भी बांधो साधो तुम हवायें साथ …

बेमेल – शिशिर मधुकर

जिन्दगी तेरे भी अजब गजब खेल हैं सारे इंसानों की इस भीड़ में रिश्ते बेमेल हैं सारे जिन्हें अपना बनाने को अपने छूट जाते हैं वही अक्सर यहाँ पर …

बनेगी जिंदगी जन्नत – शिशिर मधुकर

मिलना बिछड़ना तो हरदम चलता ही रहता है पीड़ा नहीँ मिटती कोई जब तन्हाईयां सहता है मिटा दो दूरियां दिल की हटा दो स्वार्थ के पहरे बनेगी जिंदगी जन्नत …

कलियाँ नहीं खिलती – शिशिर मधुकर

चालाक लोगों को यहाँ कभी मुहब्बत नहीं मिलती गर माफिक ना हो आबो हवा कलियाँ नहीं खिलती दुर्भाग्य से जीवन में जब आते है इस तरह के लोग इस …

अधूरा – शिशिर मधुकर

अपना स्त्रीत्व मुझे दें दो मैं अपना पुरुषत्व तुम्हें दूँगा गर तुम सीमाएँ तोडोगी तो मैं भी तुम संग न बोलुँगा क्या तुमको ये मालूम नहीँ मैं तुम बिन …

खास रिश्ते – शिशिर मधुकर

जब दिल में दर्द होता है अपनों की याद आती है तब ही तो ये दुनियाँ सभी खास रिश्ते निभाती है अपनी पीड़ा तुम्हें बताऊँ मैं कब से तड़प …

शिकायतें – शिशिर मधुकर

तुम जब भी बात करती हो शिकायते ही रहती हैं आखिर तुम्हारे मन में इतनी नफ़रते क्यों रहती हैं वो सब कुछ जिंदगी में हो जाए जो भी तुम …

सत्य की खातिर – शिशिर मधुकर

सत्य की खातिर लड़ो और अत्याचार कभी ना सहो सर को सदा ऊँचा रखो और अपनी सारी बातें कहो मेरी इस शिक्षा को ही तो मेरी संतान ने ग्रहण …

टूट गयी अपनी ……….|गीत| “मनोज कुमार”

टूट गयी अपनी पुरानी महोब्बत रूठ गयी अपनी दीवानी महोब्बत मनाया भी हमने ना मानी महोब्बत दिल का भी हाल ना जानी महोब्बत टूट गयी अपनी………………………….. जानी महोब्बत क्या …

प्यार की दो बूँदों की खातिर – शिशिर मधुकर

मेरे सपनों का महल कई बार मेरे सामने ही ढ़ह गया टूटा तो मैं पूरी तरह पर फ़िर भी सारी पीर सह गया एक समय था हर पल इस …

मजबूरीयां – शिशिर मधुकर

जिन्दगी है तो मजबूरीयां भी यहाँ आम है चाहने भर से तो पूरे होते ना सभी काम हैं लाख तड़पा करें प्रेमी मिलन की आशा में सबको हाँसिल कभी …

देशों में ओ देश अपना …………..|गीत| “मनोज कुमार”

देशों में ओ देश अपना प्यारा हिन्द देश है अनोखी पहचान इसकी ऊँची अपनी शान है बहुरंगी संस्कृति इसकी भव्यता विशाल है मनमोहक है सुन्दरता वास्तुकला मिसाल है देशों …

प्रेम की प्यास – शिशिर मधुकर

प्रीत के रिश्तों में जो भी कड़वाहट पैदा करता है ऐसे साथी के संग इंसा तिल तिल करके मरता है प्रेम की प्यास मिटाने को एक रिश्ता नाकाफी है …

दहेज प्रथा – शिशिर मधुकर

दहेज प्रथा वास्तबिक जीवन में कोई अभिशाप नहीँ कुछ लोगों ने इसे अपने फायदे को है बदनाम किया वो माँ बाप जो बेटियो को बस एक बोझ समझते हैं …

पढ़ने से तो अच्छा होता ……“मनोज कुमार” |गीत|

पढ़ने से तो अच्छा होता अनपढ़ ही रहते दूर ना जाते घर से गाँव की मिट्टी में रहते जॉब ना लगने का डर रहता ना बचपन खोते माँ बाबा …

जिन्दगी – शिशिर मधुकर

जिन्दगी अपने हँसी रंग तू दिखाती चल नए नए चेहरों को मुझसे तू मिलाती चल समय के साथ में मौसम तो यहाँ बदलेंगे हर मौसम में मुझे जीना तू …