Tag: जीवन पर कविता

समर्पण और चतुराई – शिशिर मधुकर

करती हो तुम समर्पण मुझको जीत लेती हो कसमें जिन्दगी की फिर सारी पुनीत देती हो जब जब भी तुमने मुझसे की है यहाँ चतुराई अपने दोनों हाथों से …

कुदरती रज़ा – शिशिर मधुकर

यादों को जिंदा रखने को मिलते रहो साथी धुंधली तस्वीरों में सूरते नज़र में नहीं आती जो रूकावटे ना हों बीच में धारा नहीं मचले पथरीली राहें तो मिलनी …

ढलती सी शाम – शिशिर मधुकर

ऐ दुनियाँ वालों तुमको यहाँ ना कोई काम है प्रेम को रुस्वा कर ही तुम्हें मिलता आराम है तुम क्यों ना समझते हो यही ईश्वर का रूप है हर …

नालों में बहते हैं – शिशिर मधुकर

फूल जो खुशबू देते हैं अक्सर कांटों में रहते है सच्चे इंसा भी ज़माने में बस कष्टों को सहते हैं वक्त जब साथ ना दे तो आखिर क्या करे …

नाम जब चाहा – शिशिर मधुकर

मैंने नाम जब चाहा तो फिर मैं प्यार को भूला नफे नुकसान की बातों में बस मन मेरा झूला बड़े महलों में भी अक्सर अकेले लोग रहते हैं जिसने …

मालियों के हाथ – शिशिर मधुकर

अगर पौधा लगाया है उसे पानी तो देना है धूप मिलती रहे उसको सभी लोगों से कहना है अगर तुम भूल जाओगे तो वो फ़िर जड़ फैलाएगा जिधर से …

परिवर्तन – शिशिर मधुकर

मुझको यकीं हैं अपने खुदा पे वो लम्हा भी आएगा अपने दिल में बसा के मेरी छवि कोई मुस्कुराऐगा फूल खिलते हैं ऋतुओं में कभी मन की नही होती …

अल्हड़ बेगाना—डी. के. निवातिया

न जगाओ मेरे जमीर को, मुझे नासमझ नादाँ ही रहने दो ! मैं ठहरा अल्हड़ बेगाना, जो कहे ज़माना बेशक कहने दो !! ! इंसानियत का मोल नही यंहा …

कुदरत – शिशिर मधुकर

जिंदगी तू भी जाने कैसे कैसे रंग दिखाती है मुझसे नाराज़ हो के मुहब्बत भी दूर जाती है पतंग और डोर को जैसे भी बांधो साधो तुम हवायें साथ …

बेमेल – शिशिर मधुकर

जिन्दगी तेरे भी अजब गजब खेल हैं सारे इंसानों की इस भीड़ में रिश्ते बेमेल हैं सारे जिन्हें अपना बनाने को अपने छूट जाते हैं वही अक्सर यहाँ पर …

बनेगी जिंदगी जन्नत – शिशिर मधुकर

मिलना बिछड़ना तो हरदम चलता ही रहता है पीड़ा नहीँ मिटती कोई जब तन्हाईयां सहता है मिटा दो दूरियां दिल की हटा दो स्वार्थ के पहरे बनेगी जिंदगी जन्नत …

कलियाँ नहीं खिलती – शिशिर मधुकर

चालाक लोगों को यहाँ कभी मुहब्बत नहीं मिलती गर माफिक ना हो आबो हवा कलियाँ नहीं खिलती दुर्भाग्य से जीवन में जब आते है इस तरह के लोग इस …

अधूरा – शिशिर मधुकर

अपना स्त्रीत्व मुझे दें दो मैं अपना पुरुषत्व तुम्हें दूँगा गर तुम सीमाएँ तोडोगी तो मैं भी तुम संग न बोलुँगा क्या तुमको ये मालूम नहीँ मैं तुम बिन …

खास रिश्ते – शिशिर मधुकर

जब दिल में दर्द होता है अपनों की याद आती है तब ही तो ये दुनियाँ सभी खास रिश्ते निभाती है अपनी पीड़ा तुम्हें बताऊँ मैं कब से तड़प …

शिकायतें – शिशिर मधुकर

तुम जब भी बात करती हो शिकायते ही रहती हैं आखिर तुम्हारे मन में इतनी नफ़रते क्यों रहती हैं वो सब कुछ जिंदगी में हो जाए जो भी तुम …

सत्य की खातिर – शिशिर मधुकर

सत्य की खातिर लड़ो और अत्याचार कभी ना सहो सर को सदा ऊँचा रखो और अपनी सारी बातें कहो मेरी इस शिक्षा को ही तो मेरी संतान ने ग्रहण …

टूट गयी अपनी ……….|गीत| “मनोज कुमार”

टूट गयी अपनी पुरानी महोब्बत रूठ गयी अपनी दीवानी महोब्बत मनाया भी हमने ना मानी महोब्बत दिल का भी हाल ना जानी महोब्बत टूट गयी अपनी………………………….. जानी महोब्बत क्या …