Tag: गीत चंदेल

इर्ष्या से अधर सजाये….

यह स्वार्थ सिन्धु का गौरव अति पारावार प्रबल है। सर्वश्व समाहित इसमें, आतप मार्तंड सबल है॥ मृदुभाषा का मुख मंडल, है अंहकार की दारा। सिंदूर -मोह-मद-चूनर, भुजपाश क्रोध की …

जीवन है केवल छाया

जीवन सरिता का पानी , लहरों की आँख मिचौनी । मेघों का मतवालापन , बरखा की मौन कहानी॥ गल बाहीं डाले कलियाँ, है लता कुंज में हँसती। चलना,जलना , …

क्या पतन समझ पायेगा…

मानव का इतिहास यही, मानस की इतनी गाथा। आँखें खुलते रो लेना , फिर झँपने की अभिलाषा ॥ जग का क्रम आना-जाना, उत्थान पतन की सीमा । दुःख-वारिद , …