Tag: नारी पर कविता

नारी (मत्त सवैया या राधेश्यामी छंद)

नारी तुम! सुकुमार कुमुदुनी सौम्य स्नेह औ प्रेम प्रदाता धरती पर हो शक्ति स्वरूपा तुम रण चंडी भाग्य विधाता।। संस्कारों की शाला तुम हो तुम लक्ष्मी सावित्री सीता सत्कर्म …

मेरी माँ की कविता

आज दोपहर मेरी माँ मन में ठान लिया लिखेगी कविता कल, आज और कल की बातें बहुत सोचकर उन्हे शब्दों में पिरोने चाहा रचना चाहा कविता इतने पर दस्तक …

* नारी तेरी नारीत्व *

नारी तेरी नारीत्व नहीं किसी का मोहताज। तु ही दुर्गा तू ही काली तु ही लक्ष्मी तू ही सरस्वती तु है माया तू महामाया तुझ में यह सृष्टी समाया …

नारी एक नज़रिया

नारी एक नज़रिया जीवन को समझने का ज़रिया पर दुर्भाग्य हमारी, जो अर्धांग्नी कहलाये उसे हम आज तक समझ ना पाये जबसे हुई तेरी प्रस्तुति करते आये सभी स्तुति …

सबला नारी

सबला नारी भोर के प्रथम प्रहर से शुरू होती है दिनचर्या तिल-तिल तन-मन हार दौड़ती उसकी जिंदगानी !! (१) किसी के लिए माँ बनीं बनीं किसी की बहूरानी, एक …