Tag: नदी पर कविता

सबरनाखा……… चंद्र मोहन किस्कु

मैं सबरनाखा सोना माई बहते चल रहा हूँ सोहराय,करम, माघे की नृत्य और गीत के ताल में रसीली हाँड़िया और महुआ शराब की नशे मे हर्ष -आनन्द के साथ …