Tag: ज़िन्दगी पर कविता

जमाने ने यह कैसी करवट ली – अनु महेश्वरि

जमाने ने यह कैसी करवट ली है, शोर के बीच एक खामोशी सी है। यह कैसे वक़्त का आगाज हुआ, हर कोई यहाँ देखो नाख़ुश ही है। बैचेनी का …

खुद से करते रहे वादें – अनु महेश्वरी

गैरो पे कैसे होगा, भला एतबार, जब घायल, अपनो के हाथों हुआ होगा? भरोसा गर चोटिल हो बार बार, फिर दुनिया में, जीना भी दुश्वार होगा| दूर से देख, …

नहीं हो तुम कमज़ोर – अनु महेश्वरी

  रोज़ हो रहा चीरहरण, पर बचाने, कोन है आएगा? उठो, बनो वीरांगना, खुद को ही सम्भलना होगा, मूक बने इस समाज में खुद को ही बचाना होगा| इस …

एक यात्रा है ज़िन्दगी – अनु महेश्वरी

कोई गणित नहीं ज़िन्दगी, फिर क्यों हम लाभ हानि का हिसाब करे? आश की उम्मीद है ज़िन्दगी, रास्ते, चाहे हो, उतार-चढ़ाव भरे| जंग का मैदान नहीं ज़िन्दगी, फिर क्यों …

बिना श्रद्धा- शिशिर मधुकर

बिना श्रद्धा आज साथी कोई जब साथ रहता है दिलों को तोड़ने वाली वो कड़वी बात कहता है चला था जिसके सहारे सोचकर मैं काटने जीवन उसकी मतलब परस्ती …

कुछ यादें बीते साल की – सोनू सहगम –

-: कुछ यादें बीते साल की :- कुछ यादें बीते साल की, नये साल में बहुत याद आयेगी कुछ यादें माना आँखें करेंगी नाम कुछ यादें चहरे पर मुस्कान …

इंसान है हम इंसान ही बने रहे – अनु महेश्वरी

इंसान है हम, इंसान ही बने रहे, सोचे, समझे, फिर, कुछ कहे, अपने बोले किसी शब्द से, कभी, किसी का दिल न दुख जाए| इंसान है हम, इंसान ही …

ज़िन्दगी की गाड़ी – अनु महेश्वरी

आज वक़्त ने जिस दहलीज पे ला खड़ा किया है, खामोशी में बस अपनी ही आवाज़ सुनाई देती है| आज काफ़ी रिश्तो से जैसे साथ ही छूट गया है, …

ज़िन्दगी….सी.एम्.शर्मा (बब्बू)….

भीतर द्वन्द है अपने आप से… जीने मरने का… शोक उल्लहास का… ज़िन्दगी के हर पल का… जो जीया, जो नहीं जीया… व्यथा उभरती है कभी.. संतुष्टि साँसों से …

प्यार और विश्वास – अनु महेश्वरी

इस जहाँ में, कब वक़्त बदल जाए, न तुझको खबर है, न मुझको खबर है, अनचाही दूरियां, राह मे चाहे आ भी जाए, दिलों में फासले, देखो, कभी आने …

सृजन फिर से नया होगा – शिशिर मधुकर

अँधेरे जब कभी इंसान के जीवन में आते हैं तभी तो चाँद दिखता है ये तारे टिमटिमाते हैं सरद रातें हुईं लम्बी तो ग़म किस बात का प्यारे सुबह …

ज़िन्दगी का सच – अनु महेश्वरी

कुछ, पाकर खोया, कुछ, खोकर पाया यही तो है, ज़िन्दगी का सच, कोई नहीं, सकता इससे बच, जाना जिसने, इस राज को, समझदार, कहलाता है वो, जीवन भी उसका, …

रिश्तों का तानाबाना – अनु महेश्वरी

बचपन से बुढ़ापे तक के सफर में, रिश्तों का तानाबाना बुनते बुनते, हम एक जाल सा बुन तो लेते है, पर ज़िन्दगी के अंतिम पड़ाव में, कुछ, साथ छोड़ …