Tag: ज़िन्दगी पर कविता

एक यात्रा है ज़िन्दगी – अनु महेश्वरी

कोई गणित नहीं ज़िन्दगी, फिर क्यों हम लाभ हानि का हिसाब करे? आश की उम्मीद है ज़िन्दगी, रास्ते, चाहे हो, उतार-चढ़ाव भरे| जंग का मैदान नहीं ज़िन्दगी, फिर क्यों …

बिना श्रद्धा- शिशिर मधुकर

बिना श्रद्धा आज साथी कोई जब साथ रहता है दिलों को तोड़ने वाली वो कड़वी बात कहता है चला था जिसके सहारे सोचकर मैं काटने जीवन उसकी मतलब परस्ती …

कुछ यादें बीते साल की – सोनू सहगम –

-: कुछ यादें बीते साल की :- कुछ यादें बीते साल की, नये साल में बहुत याद आयेगी कुछ यादें माना आँखें करेंगी नाम कुछ यादें चहरे पर मुस्कान …

इंसान है हम इंसान ही बने रहे – अनु महेश्वरी

इंसान है हम, इंसान ही बने रहे, सोचे, समझे, फिर, कुछ कहे, अपने बोले किसी शब्द से, कभी, किसी का दिल न दुख जाए| इंसान है हम, इंसान ही …

ज़िन्दगी की गाड़ी – अनु महेश्वरी

आज वक़्त ने जिस दहलीज पे ला खड़ा किया है, खामोशी में बस अपनी ही आवाज़ सुनाई देती है| आज काफ़ी रिश्तो से जैसे साथ ही छूट गया है, …

ज़िन्दगी….सी.एम्.शर्मा (बब्बू)….

भीतर द्वन्द है अपने आप से… जीने मरने का… शोक उल्लहास का… ज़िन्दगी के हर पल का… जो जीया, जो नहीं जीया… व्यथा उभरती है कभी.. संतुष्टि साँसों से …

प्यार और विश्वास – अनु महेश्वरी

इस जहाँ में, कब वक़्त बदल जाए, न तुझको खबर है, न मुझको खबर है, अनचाही दूरियां, राह मे चाहे आ भी जाए, दिलों में फासले, देखो, कभी आने …

सृजन फिर से नया होगा – शिशिर मधुकर

अँधेरे जब कभी इंसान के जीवन में आते हैं तभी तो चाँद दिखता है ये तारे टिमटिमाते हैं सरद रातें हुईं लम्बी तो ग़म किस बात का प्यारे सुबह …

ज़िन्दगी का सच – अनु महेश्वरी

कुछ, पाकर खोया, कुछ, खोकर पाया यही तो है, ज़िन्दगी का सच, कोई नहीं, सकता इससे बच, जाना जिसने, इस राज को, समझदार, कहलाता है वो, जीवन भी उसका, …

रिश्तों का तानाबाना – अनु महेश्वरी

बचपन से बुढ़ापे तक के सफर में, रिश्तों का तानाबाना बुनते बुनते, हम एक जाल सा बुन तो लेते है, पर ज़िन्दगी के अंतिम पड़ाव में, कुछ, साथ छोड़ …

मैं सैनिक हूँ

मैं सैनिक हूँ मैं जगता हूँ रातभर चौकस निगाहें गड़ाए हुए उस जगह जहाँ अगली सुबह देख पाऊं इसमे भी संशय है उसके लिए जो अभी अभी छाती से …

नादान परिंदे — डी के निवातिया

नादान परिंदे ***♣***   क्या कल के भारत की तस्वीर बनेगी, ये तो गुजरा वक़्त ही बतलायेगा पहले हमको हमारा आज दिला दो, तब कल का हिन्दोस्ताँ बन पायेगा …

जिन्‍दगी : रामगोपाल सांखला ‘गोपी’

जिन्‍दगी रूकना तो मौत है, चलने का नाम जिन्‍दगी गम का सागर है तो, खुशियों का जाम भी है जिन्‍दगी प्‍यार भरे दिलों की आह, मोहब्‍बत का पैगाम है …

माटी का पुतला — डी के निवातिया

माटी का पुतला ◊ हे मानुष ! जीता है किस गुमान में पलता, बढ़ता है जाने किस अभिमान में !-! जानकर भी हर कोई अन्जान है कहते है यही …

ज़िन्दगी एक विश्वास है – अनु महेश्वरी

ज़िन्दगी, एक विश्वास है, थामे अपनों का हाथ, ज़िन्दगी, ख़ुशी के दो आंसू है, संघर्ष के बाद, ज़िन्दगी, कोमल कोंपल है, पतझड़ के बाद, ज़िन्दगी, बारिश की दो बुँदे …

ए ज़िन्दगी तू जरा आहिस्ता चल – अनु महेश्वरी

ए ज़िन्दगी, तू जरा आहिस्ता चल, मुझे जरा सा सुस्ता लेने दे, दुनिया के हर हंसी पल, अपनी झोली में, भर लेने दे| ठंडी हवा के झोंके, जो अक्सर …

चिड़िया

शाम बढ़ती जा रही थी बेचैनी उमड़ती जा रही थी शाख पर बैठी अकेली दूर नजरों को फिराती कुछ नजर आता नहीँ फिर भी फिराती चीं चीं करती मीत …