Tag: ज़िन्दगी पर कविता

दिन तो हर हाल में होगा – शिशिर मधुकर

रात कितनी भी लम्बी हो दिन तो हर हाल में होगा भला जिसका भी होना है वो अपने काल में होगा बुनी जिसने तरक्की रोकने को मेरी ये साज़िश …

बरसते हैं जो सावन से- शिशिर मधुकर

किसी को दिल की गहराई से गर हम प्यार करते हैं कद्र उसकी तमन्नाओं की फिर तो हर बार करते हैं खास रिश्तों की दुनिया में जो दिल की …

खेल ये कैसे – शिशिर मधुकर

अँधेरा जब किसी इंसान के जीवन में आया है तन्हा चलना पड़ा है साथ में रहता ना साया है बड़ी मजबूरियों में रोशनी बिन उम्र गुजरी है सफ़र ये …

मेरे दिल क्यूँ मचलता है-शिशिर मधुकर

मेरे दिल क्यूँ मचलता है तुझे तन्हा ही चलना है आग अपने लगाते हैं तो फिर जलना ही जलना है हिम से खुद को ढके देखो वो पर्वत मुस्कुराता …

ना होते फिर ये वीराने -शिशिर मधुकर

कहो किसको सुनाएं हम मुहब्बत के वो अफ़सानें यहाँ अपना पराया कौन है अब तक ना पहचाने सदा बदनाम होते हैं झूठ वो कह नहीं सकते सबको खुद सा …

तड़प सीने में होती है – शिशिर मधुकर

चोट खा के समझ आया कितने बेईमान चेहरे हैं पीर मिटती नहीं मन की घाव कुछ इतने गहरे हैं सुकूं हम ढूढ़ने को उसके सीने से लगें कैसे बड़ी …

भीतरी मन तो मैले हैं – शिशिर मधुकर

ज़िन्दगी जी ले कोई क्या झमेले ही झमेले हैं भीड़ है हर तरफ लेकिन यहाँ फिर भी अकेले हैं बड़े आराम से वो भेष भी अपने बदलता है मगर …

कैसे गिराएं अब दीवारों को -शिशिर मधुकर

कोई तो बात है अदावत है जो हमसे हज़ारों को चाँद को कुछ नहीं होगा जा के कह दो सितारों को जलो कितना भी तुम सूरज ताप अपना दिखाने …

जमाने ने यह कैसी करवट ली – अनु महेश्वरि

जमाने ने यह कैसी करवट ली है, शोर के बीच एक खामोशी सी है। यह कैसे वक़्त का आगाज हुआ, हर कोई यहाँ देखो नाख़ुश ही है। बैचेनी का …

खुद से करते रहे वादें – अनु महेश्वरी

गैरो पे कैसे होगा, भला एतबार, जब घायल, अपनो के हाथों हुआ होगा? भरोसा गर चोटिल हो बार बार, फिर दुनिया में, जीना भी दुश्वार होगा| दूर से देख, …

नहीं हो तुम कमज़ोर – अनु महेश्वरी

  रोज़ हो रहा चीरहरण, पर बचाने, कोन है आएगा? उठो, बनो वीरांगना, खुद को ही सम्भलना होगा, मूक बने इस समाज में खुद को ही बचाना होगा| इस …

एक यात्रा है ज़िन्दगी – अनु महेश्वरी

कोई गणित नहीं ज़िन्दगी, फिर क्यों हम लाभ हानि का हिसाब करे? आश की उम्मीद है ज़िन्दगी, रास्ते, चाहे हो, उतार-चढ़ाव भरे| जंग का मैदान नहीं ज़िन्दगी, फिर क्यों …

बिना श्रद्धा- शिशिर मधुकर

बिना श्रद्धा आज साथी कोई जब साथ रहता है दिलों को तोड़ने वाली वो कड़वी बात कहता है चला था जिसके सहारे सोचकर मैं काटने जीवन उसकी मतलब परस्ती …