Tag: ज़िन्दगी पर कविता

स्नेह सम्मान – शिशिर मधुकर

स्नेह सम्मान जो दिल में हो तो दिख जाता है झूठे चेहरों पे फरेब बड़ा साफ़ नज़र आता है कोई चुपचाप है और तुमसे कुछ नहीं कहता अक्सर मजबूरी …

स्नेह धागा – शिशिर मधुकर

सुन बात धोबी की प्रभु ने सिय को त्यागा था माता के जीवन में ये पल कितना अभागा था मुश्किलें कितनी भी आईं वो नैहर नहीं लौटी प्रभु सम्मान …

शिव कहाता है – शिशिर मधुकर

मेरा अपमान करने वाले तू ये भूल जाता है इज्जत उतारने का गुर मुझको भी आता है मगर बिष को ग्रहण करना आसां नहीं होता इसको पी लेने वाला …

मीठी यादें – अनु महेश्वरी

चलते चलते इस ज़िन्दगी में, लोग भी मिलते रहेंगे राहों में, कुछ चलेंगे अपने साथ, कुछ छोड़ जाएंगे साथ, कुछ बस दो पल का ही देंगे साथ| जो छूट …

हिम्मत न हार बन्दे

हिम्मत न हार बन्दे सब कुछ तेरे हाथ हैं मेहनत के नीव पर ही होते सब काज हैं दर्द के तुफान में भी हौसला बनाए रख उम्मीद की ज्योती के लौ को तू जलाए रख तप कर ही सोने पर आता नीखार हैं हिम्मत न हार……………   किश्मत निगोरी भी कब तक भरमायेगी कोशिसो की गर्मि से ये भी पिघल जाएगी अर्जुन सा मन्जिल पे नजरे टिकाए रख विश्वास के साथ अपनी चाल को बनाए रख मुहाम्मद गौरी का अ भी जिन्दा इतिहास हैं हिम्मत न.…………… मानता हूं उसके मर्जी बिन पत्ता भी नही हिलता हैं पर भूलता हैं क्यो तू वो पिता हम बच्चा हैं लायक हो बच्चे तो मां बाप भी झुक जाते हैं बच्चे की खाहिस के लिए हद से गुजर जाते हैं वो भी गुजरेगा जो तु लगन से करे काज हैं हीम्मत …

अब मुझको वो कर दिखाना है — डी. के. निवातिया

( उपेक्षा के शिकार सकारात्मक भाव रखने वाले बालको को उत्साह पूर्ण जीवन शैली के लिए प्रेरित करती मेरी और से नव पीढ़ी को समर्पित रचना )   —:: …

आहत – शिशिर मधुकर

किसी के माँगने से तो यहाँ चाहत नहीं मिलती मुहब्बत ढूंढ़ने वालों को भी राहत नहीं मिलती करम सब पे हो उसका ये ज़रूरी नहीं है दोस्त ज़माने में …

दर्द छलक जाता है -शिशिर मधुकर

अपनों से मिलता हूँ तो आनंद मुझे आता है जिसके मन में हो प्रेम वही रिश्ते निभाता है अपनों के कारण ही ये दिल टूटता है जिनका हर बात …

फूल झरते रहें – शिशिर मधुकर

तुम हँसते रहो फूल झरते रहें मुहब्बत हम तुम से करते रहें व्यापार जीवन समझते हैं जो ना होगा वहाँ रिश्तों का चमन उल्फ़त जिसे ना हुई हो कभी …

मेरी नाराज़गी – शिशिर मधुकर

मेरी नाराज़गी को तुम नहीं जब मोल देती हो निष्ठुर सी बन कड़वी बातें सारी बोल देती हो वो पल मुझे इस जीवन में ये महसूस कराते हैं मानो …

सदगुण – शिशिर मधुकर

अधिक पाने की इच्छाओं को पूरा त्यागना होगा वरना चिंता रहेगी मन में और नित भागना होगा बिन प्रेम के जीवन में सब इच्छाएं तनाव ही देंगी चेहरों का …

प्रेम का अंकुर – शिशिर मधुकर

मैं अजनबी लोगों के साथ घर में रहता हूँ बोझिल हुए रिश्तों के सारे बोझ सहता हूँ हर अंग चोटिल है मेरा अपनों के तीरों से दिल की पीर …

दिलों के राज़ -शिशिर मधुकर

दिलों के राज़ कितना भी छुपाओ छुप ना पाते हैं वक्त लग सकता है थोड़ा मगर सब जान जाते हैं लाख कोशिश करी हमने उनकी सोच को बदलें इंसा …

चली जिन्दगी अपने रस्ते – शिशिर मधुकर

साथ मिला होता जो मुझ को तेरी इन दो बाहों का नूर कभी न मिटने देता मैं भी इन पाक निगाहों का मौका था तब मैंने भी दिल का …

रिश्तों की पौध – शिशिर मधुकर

साफ दिल के साथी से जब नज़रें मिलाओगे वो हँसती हुई खुद की छवि तुम देख पाओगे प्रेम और विश्वास संग जो तुम घर बनाओगे सुख दुःख के हर …

समर्पण और चतुराई – शिशिर मधुकर

करती हो तुम समर्पण मुझको जीत लेती हो कसमें जिन्दगी की फिर सारी पुनीत देती हो जब जब भी तुमने मुझसे की है यहाँ चतुराई अपने दोनों हाथों से …