Tag: ज़िन्दगी पर कविता

ज़िन्दगी एक विश्वास है – अनु महेश्वरी

ज़िन्दगी, एक विश्वास है, थामे अपनों का हाथ, ज़िन्दगी, ख़ुशी के दो आंसू है, संघर्ष के बाद, ज़िन्दगी, कोमल कोंपल है, पतझड़ के बाद, ज़िन्दगी, बारिश की दो बुँदे …

ए ज़िन्दगी तू जरा आहिस्ता चल – अनु महेश्वरी

ए ज़िन्दगी, तू जरा आहिस्ता चल, मुझे जरा सा सुस्ता लेने दे, दुनिया के हर हंसी पल, अपनी झोली में, भर लेने दे| ठंडी हवा के झोंके, जो अक्सर …

चिड़िया

शाम बढ़ती जा रही थी बेचैनी उमड़ती जा रही थी शाख पर बैठी अकेली दूर नजरों को फिराती कुछ नजर आता नहीँ फिर भी फिराती चीं चीं करती मीत …

राह में कभी कभी – अनु महेश्वरी

राह में कभी कभी, ऐसे लोग मिल जाते है, अंजान होते हुए भी, हमे खुशियां दे जाते है| ऐसे लोगो से मिलकर, अक्सर यही लगता है, इंसानियत अभी भी, …

बात क्या करें – शिशिर मधुकर

मुहब्बत ना हो जब बीच में तो फिर बात क्या करें तड़पे ना जो मिलन को उससे मुलाक़ात क्या करें दिन ही जब इस शहर में मुश्किलों से गुज़रता …

मशगूल — डी के निवातिया

 मशगूल *** हंसगुल्लों  में मशगूल है जिंदगानी मतलब की बातो के लिये वक़्त किसके पास ! जब अपने ही नकार देते है अपनों को टुटा हुआ नर्वस दिल फिर …

तुझ में मिलूँ – शिशिर मधुकर

तुझसे मिलने जब भी मैं तन कर चला वक्त ने दिल तोड़ मेरा मुझको ही छला खुशियां सारी छिन गईं तब पल में सभी चैन प्यासी रूह को मिला …

ज़िन्दगी रूपी माला – अनु महेश्वरी

दुनिया देखोगें, नज़र से जैसी, तस्वीर इसकी, उभरेगी वैसी, हमेशा नहीं होता, सब कुछ काला या सफ़ेद जहाँ, और भी बहुत रंग है, ज़िन्दगी रूपी माला में यहाँ… अनु महेश्वरी …

जरुरत से बनते और बिगड़ते है रिश्ते – अनु महेश्वरी

जरुरत से बनते और बिगड़ते है, रिश्ते जहाँ, ऐसी दुनिया में कैसे मिले, सुकून किसीको यहाँ? न अपना कोई सगा यहाँ, न ही कोई है बेगाना यहाँ, बस मतलब …

ज़िन्दगी – अनु महेश्वरी

ज़िन्दगी भी कितनी अजीब है, एक ही परिस्थिति, किसी के लिए, खुशियां है लाती, किसी को केवल, गम है दे जाती| कोई यहाँ, गम को भी, अपने, मुस्कराहट के …

आँसुओं में खो न जाए कहीं – अनु महेश्वरी

अनमोल होती है ज़िन्दगी अपनी, देखो आँसुओं में खो न जाए कहीं| रोकर हुआ न हासिल कुछ किसी को, ज़िन्दगी की ख़ुशी, मुस्कुराहट में छिपी| गमो के साथ भी …

बदलते वक्त में -शिशिर मधुकर

क्या करूँ मैं तुम ही बोलो मेरा दिल तुमने तोड़ा है कहाँ ढूँढू सकूँ जब तेरे लिए ज़माने भर को छोड़ा है धारा रोक देने से नदिया घुट घुट …