Tag: ज़िन्दगी पर कविता

सोच-अरूण कुमार झा बिट्टू

मत सोच की तू कमजोर हैं प्यारे हैं निर्बल नही ,तू जग का वीर हॉ सोचेगा मैं निर्बल हूं तो हो जाएगा निर्बल एक दिन अपनी भुजा से मसल …

ईश्वर के सवाल – अनु महेश्वरी

(देख दुनिया की हालात, व्याकुल हुए प्रभु खुद और कर बैठे इन्सान से कुछ सवाल, बस मेरी कल्पना भर है| कभी कभी ऐसा सोचने लगती हूँ. आखिर प्रभु को …

मुश्किल – अनु महेश्वरी

केवल बाहर के नजारो से, कभी अंदर की हालात का, जायजा लेना ही मुश्किल है, अक्सर आलीशान महलो में, रहने वाले लोग भी, भीतर से, वास्तव में बहुत अकेले …

अब तुम्हें अपनी तक़दीर लिखनी है – अनु महेश्वरी

खुद जैसी नज़र से, देखोगे, दुनिया भी वैसी ही, दिखेगी, दिल से भलाई अगर करोगे, तुम्हें भी अच्छाई ही मिलेगी| फिर से न कहना, मेरे साथ ही, ऐसा क्यों …

जाएँ फिर कहाँ – शिशिर मधुकर

रिश्तों में जब धोखा मिले तो जाएँ फिर कहाँ निज हाथों में खंजर लिए व्यक्ति बैठा है यहाँ दिल से दिल के मेल बना करते हैं जिस जगह अब …

कामों का बँटवारा – शिशिर मधुकर

प्रिय मित्रो अक्सर स्त्री विमर्श की रचनाओं में मैंने पुरुष के वर्चस्ववादी समाज को एक षड्यंत्र के रूप में निरूपित होते देखा है. जबकि मेरे विचार में स्त्री के …

वो बीज फिर भी खिल गया – शिशिर मधुकर

मैंने पानी दिया ना खाद वो मेरी मिट्टी में मिल गया उड़कर कहीं से आया वो बीज फिर भी खिल गया जिसको मैं सींचता रहा घर में खुद से …

बंजर संवर गया – शिशिर मधुकर

किस्मत ना हुई साथ मैं तो जिधर गया टकरा के सूखी चट्टान से मैं बिखर गया वो दूसरे हैं वक्त ने जिन पे करम किया प्यार की बारिश में …

फूलों की बहार – शिशिर मधुकर

ज़िन्दगी बस जिनके लिए व्यापार है उनको यहाँ मिलता ना कभी प्यार है आपस में दिल की जब ख़बर ना लगे उस घर में फिर रहती सदा तकरार है …

ख़ुशी – अनु महेश्वरी

मैंने ग़रीबी में भी लोगो को, मुस्कुरा, जीवन बिताते देखा है| अपनी चाहत को समेटे, मिल बाँट रहते देखा है| ज़िन्दगी को करीब से, देखा, तो जाना मैंने, खुश …

जो साथ सच्चा है – शिशिर मधुकर

मिले कुछ ना ज़माने में मगर जो साथ सच्चा है मेहरबान है खुदा तुम पे कि मददगार अच्छा है घृणा मन में पाले कोई जब हरदम संग रहता है …

दिलों में नहीं दूरी – शिशिर मधुकर

मुझे तुमसे नहीं शिकवा समझता हूँ मैं मजबूरी हूँ चाहे दूर नज़रों से फिर भी दिलों में नहीं दूरी यह जीवन तो औरों के लिए भी जीना पड़ता है …

अकेले सूरज से ही पुरे ब्रम्हांड में रोशनी होती है – अनु महेश्वरी

बिन मेहनत मिला धन कभी टिकता नहीं, मेहनत से मिली सफलता जाहिर होती है| बस पैसो से जो रिश्ते बनते वो टिकते नहीं, स्नेह से बंधा रिश्ता ही केवल …

तन्हा बेचारा – शिशिर मधुकर

मुझे छेड़ा ना गैरों ने फ़कत अपनों ने मारा है सारी उम्र गुजरी है मगर दिल तन्हा बेचारा है मोह ममता के रिश्तों ने मुझे भी बाँध रखा है …

चुनी जब राह मंजिल की – शिशिर मधुकर

चुनी जब राह मंजिल की तनिक सोचा नहीं मैंने लम्बे रस्ते में कपटी लोग लूट लेते है सभी गहने पिटा बैठा हूँ अब सब कुछ गँवा के कारवां से …