Tag: ज़िन्दगी पर कविता

काल जीवन का – शिशिर मधुकर

मुहब्बत जिसने की मुझसे न संग उसने निभाया है अब तलक काल जीवन का ये मैंने तन्हा बिताया है सभी बस छल गए मुझको लुटा बैठा हूँ मैं अब …

टूटने की भी सीमा है – शिशिर मधुकर

मन की बात खुलकर के जहाँ पे कह नहीं सकते ऐसे हालातों में इंसान कभी खुश रह नहीं सकते तेरे नज़दीक आते हैं तो फ़कत रुसवा ही होते हैं …

अगर दिल खूबसूरत है – शिशिर मधुकर

अगर दिल खूबसूरत है नज़र चेहरे पे आता है कोई मुखड़ा मुझे हरदम तभी इतना लुभाता है मुहब्बत वो नहीं समझा उम्र गुजरी है पर सारी साथ एक ऐसे …

उसी उदास शाम की राह तकते हुए

थकी हुई उदास शाम, रोज की तरह, फिर आई है मेरे साथ वक्त बिताने, मैं सोचता हूँ उसे कोई नया तोहफा दे दूं, मुस्कराने की कोई वजह दे दूं, …

अभी उम्मीद बाकी है – शिशिर मधुकर

वो मेरे साथ रहता है मगर फिर भी ना मेरा है फ़कत तन्हाइयों नें ज़िन्दगी में मुझको घेरा है बड़ी लम्बी हुईं है रात इस जीवन के मेले की …

जालिम हुई है ज़िंदगी – शिशिर मधुकर

अधूरी पड़ी है ज़िंदगी ना चैन आता है कोई कहीं ख्वाबों में मुझको बुलाता है साथ जन्मों का तो हरदम टीस देता है तुम भुलाओ ये मगर फिर भी …

मुहब्बत गर जहन में हो – शिशिर मधुकर

मुहब्बत गर जहन में हो बयां बातों से होती है चमक दीए की कैसी है परख रातों से होती है जमीं ने पेड़ को सींचा है मन से या …

कोई कारण तो होता है -शिशिर मधुकर

कोई भी सोच मेरी तो परे तुझ से ना जाती है मुहब्बत कौन सा रंग अब मुझे आके दिखाती है अधिकतर ज़िन्दगी गुजरी मगर तन्हा रहा हूँ मैं मिलन …

वक्ती खेल – शिशिर मधुकर

आज हम गैर लगते हैं कभी पर थे तुम्हें प्यारे कोई शिकवा नहीं तुमसे ये वक्ती खेल हैं सारे खुदा ने दिल दिया है तो इसमें जज्बात होते हैं …

भाग्य ना कोई बांच सका है – शिशिर मधुकर

वक्त की ज़द में कुछ भी हो तुम फिर भी रहना पड़ता है तेरे बिन इस तन्हाई का ग़म मुझको भी सहना पड़ता है कितना भी कोई संयम रख …

जीवन का ये खेल निराला – शिशिर मधुकर

दिल की बातें सब से कहना मुश्किल होता है तन्हाई में अक्सर ये इंसान घुट घुट के रोता है मोह माया से कौन बचा है बात करो कुछ भी …

बंधन तोड़ कर देखो – शिशिर मधुकर

ये बंधन तोड़ कर देखो कितनी राहें बुलाती हैं अगर धक्का नहीं दोगे झूलें भी ना झुलाती हैं अगर बच्चा नहीं रोए तो ममता दिख नही पाती तभी तो …

दिन तो हर हाल में होगा – शिशिर मधुकर

रात कितनी भी लम्बी हो दिन तो हर हाल में होगा भला जिसका भी होना है वो अपने काल में होगा बुनी जिसने तरक्की रोकने को मेरी ये साज़िश …

बरसते हैं जो सावन से- शिशिर मधुकर

किसी को दिल की गहराई से गर हम प्यार करते हैं कद्र उसकी तमन्नाओं की फिर तो हर बार करते हैं खास रिश्तों की दुनिया में जो दिल की …

खेल ये कैसे – शिशिर मधुकर

अँधेरा जब किसी इंसान के जीवन में आया है तन्हा चलना पड़ा है साथ में रहता ना साया है बड़ी मजबूरियों में रोशनी बिन उम्र गुजरी है सफ़र ये …

मेरे दिल क्यूँ मचलता है-शिशिर मधुकर

मेरे दिल क्यूँ मचलता है तुझे तन्हा ही चलना है आग अपने लगाते हैं तो फिर जलना ही जलना है हिम से खुद को ढके देखो वो पर्वत मुस्कुराता …

ना होते फिर ये वीराने -शिशिर मधुकर

कहो किसको सुनाएं हम मुहब्बत के वो अफ़सानें यहाँ अपना पराया कौन है अब तक ना पहचाने सदा बदनाम होते हैं झूठ वो कह नहीं सकते सबको खुद सा …

तड़प सीने में होती है – शिशिर मधुकर

चोट खा के समझ आया कितने बेईमान चेहरे हैं पीर मिटती नहीं मन की घाव कुछ इतने गहरे हैं सुकूं हम ढूढ़ने को उसके सीने से लगें कैसे बड़ी …