Tag: ज़िन्दगी पर कविता

सृजन फिर से नया होगा – शिशिर मधुकर

अँधेरे जब कभी इंसान के जीवन में आते हैं तभी तो चाँद दिखता है ये तारे टिमटिमाते हैं सरद रातें हुईं लम्बी तो ग़म किस बात का प्यारे सुबह …

ज़िन्दगी का सच – अनु महेश्वरी

कुछ, पाकर खोया, कुछ, खोकर पाया यही तो है, ज़िन्दगी का सच, कोई नहीं, सकता इससे बच, जाना जिसने, इस राज को, समझदार, कहलाता है वो, जीवन भी उसका, …

रिश्तों का तानाबाना – अनु महेश्वरी

बचपन से बुढ़ापे तक के सफर में, रिश्तों का तानाबाना बुनते बुनते, हम एक जाल सा बुन तो लेते है, पर ज़िन्दगी के अंतिम पड़ाव में, कुछ, साथ छोड़ …

मैं सैनिक हूँ

मैं सैनिक हूँ मैं जगता हूँ रातभर चौकस निगाहें गड़ाए हुए उस जगह जहाँ अगली सुबह देख पाऊं इसमे भी संशय है उसके लिए जो अभी अभी छाती से …

नादान परिंदे — डी के निवातिया

नादान परिंदे ***♣***   क्या कल के भारत की तस्वीर बनेगी, ये तो गुजरा वक़्त ही बतलायेगा पहले हमको हमारा आज दिला दो, तब कल का हिन्दोस्ताँ बन पायेगा …

जिन्‍दगी : रामगोपाल सांखला ‘गोपी’

जिन्‍दगी रूकना तो मौत है, चलने का नाम जिन्‍दगी गम का सागर है तो, खुशियों का जाम भी है जिन्‍दगी प्‍यार भरे दिलों की आह, मोहब्‍बत का पैगाम है …

माटी का पुतला — डी के निवातिया

माटी का पुतला ◊ हे मानुष ! जीता है किस गुमान में पलता, बढ़ता है जाने किस अभिमान में !-! जानकर भी हर कोई अन्जान है कहते है यही …

ज़िन्दगी एक विश्वास है – अनु महेश्वरी

ज़िन्दगी, एक विश्वास है, थामे अपनों का हाथ, ज़िन्दगी, ख़ुशी के दो आंसू है, संघर्ष के बाद, ज़िन्दगी, कोमल कोंपल है, पतझड़ के बाद, ज़िन्दगी, बारिश की दो बुँदे …

ए ज़िन्दगी तू जरा आहिस्ता चल – अनु महेश्वरी

ए ज़िन्दगी, तू जरा आहिस्ता चल, मुझे जरा सा सुस्ता लेने दे, दुनिया के हर हंसी पल, अपनी झोली में, भर लेने दे| ठंडी हवा के झोंके, जो अक्सर …

चिड़िया

शाम बढ़ती जा रही थी बेचैनी उमड़ती जा रही थी शाख पर बैठी अकेली दूर नजरों को फिराती कुछ नजर आता नहीँ फिर भी फिराती चीं चीं करती मीत …

राह में कभी कभी – अनु महेश्वरी

राह में कभी कभी, ऐसे लोग मिल जाते है, अंजान होते हुए भी, हमे खुशियां दे जाते है| ऐसे लोगो से मिलकर, अक्सर यही लगता है, इंसानियत अभी भी, …

बात क्या करें – शिशिर मधुकर

मुहब्बत ना हो जब बीच में तो फिर बात क्या करें तड़पे ना जो मिलन को उससे मुलाक़ात क्या करें दिन ही जब इस शहर में मुश्किलों से गुज़रता …

मशगूल — डी के निवातिया

 मशगूल *** हंसगुल्लों  में मशगूल है जिंदगानी मतलब की बातो के लिये वक़्त किसके पास ! जब अपने ही नकार देते है अपनों को टुटा हुआ नर्वस दिल फिर …

तुझ में मिलूँ – शिशिर मधुकर

तुझसे मिलने जब भी मैं तन कर चला वक्त ने दिल तोड़ मेरा मुझको ही छला खुशियां सारी छिन गईं तब पल में सभी चैन प्यासी रूह को मिला …

ज़िन्दगी रूपी माला – अनु महेश्वरी

दुनिया देखोगें, नज़र से जैसी, तस्वीर इसकी, उभरेगी वैसी, हमेशा नहीं होता, सब कुछ काला या सफ़ेद जहाँ, और भी बहुत रंग है, ज़िन्दगी रूपी माला में यहाँ… अनु महेश्वरी …

जरुरत से बनते और बिगड़ते है रिश्ते – अनु महेश्वरी

जरुरत से बनते और बिगड़ते है, रिश्ते जहाँ, ऐसी दुनिया में कैसे मिले, सुकून किसीको यहाँ? न अपना कोई सगा यहाँ, न ही कोई है बेगाना यहाँ, बस मतलब …