Tag: लाचारी /विवस्तायों मे फंसी ज़िन्दगी

बजते नहीं अब साज – शिशिर मधुकर

आती नहीं आवाज़ कोई मेरे दिल से बाहर आज सूनी पड़ी है ज़िन्दगी और बजते नहीं अब साज महफिल उजाड़ कर जो समझते हैं खुद को वीर ऐसे कमजर्फ …

नैन पर फिर भी मिल गए – शिशिर मधुकर

छुपाया बहुत खुद को नैन पर फिर भी मिल गए असर ऐसा हुआ दिल पे फूल खुशियों के खिल गए खौफ ने इस कदर घोला है ज़हर फ़िज़ा में …

ख़ता मेरी ही थी- शिशिर मधुकर

तेरी तन्हाइयों में मैंने कभी तेरा साथ ना छोड़ा काश इस बात का एहसास कर लेते तुम ही थोड़ा जिस कदर तूने मुँह फेरा है भुला के प्रीत के …

प्रेम धागे का बंधन – शिशिर मधुकर

तेरे बिन दिन नहीं कटते तुझे कैसे बताएं हम तू ही जब पास ना आए तुझे कैसे सताएं हम तेरा वो रूठ जाना और मनाना याद आता है समझ …

गुजर गया अब के ये सावन -शिशिर मधुकर

गुजर गया अब के ये सावन बिना कोई बरसात हुए सब शिकवे हमने कह डाले बिन तेरी मेरी बात हुए प्यार लुटा के बैरी होना सबके बस की बात …

किस्मत के उलट फेरे – शिशिर मधुकर

मुहब्बत दिल में हो जिनके वो ही तो मान करते है मिटा के जिस्मों की दूरी उनको एक जान करते हैं उम्मीदें मैंने पाली थी नाज़ बन माथे पे …

फिर सो ना सका – शिशिर मधुकर

मैंने सोचा बहुत मैं भुला दूँ तुम्हें लेकिन ये मुझसे हो ना सका तेरी छवियां ना दिखला दें आंसू मेरे मैं तो जहाँ में रो ना सका उल्फ़त की …

नेतागिरी के अड्डे – शिशिर मधुकर

मुंबई की मोटर साइकिल सवार गड्डे में फिसल गई दिल्ली के अनिल गुप्ता की जान नाले में निकल गई नगर निगमों की लापरवाही पर जनता बहुत नाराज़ है खुलकर …

तेरी चाहतों के जैसा – शिशिर मधुकर

चाहा बहुत ना दिल से तुझे दूर कर सके भूलूँ तुम्हें ना वो मुझे मजबूर कर सके आनंद वो मैंने पा लिया जिसकी तलाश थी बाकी नशे ना मुझको …

किस्मत तुम्हारी है – शिशिर मधुकर

किसी का प्यार पाया है तो ये किस्मत तुम्हारी है वरना अब तो ज़माने में सबको अपनी खुमारी है दोस्ती रिश्ते नाते और सम्बंधो में केवल धोखा है कोई …

वो क्षण फिर से आएंगे – शिशिर मधुकर

कितने पास थे हम तुम जब भी ये सच विचारोगे दिल की गहराइयों से बस नाम मेरा ही पुकारोगे मुझे उम्मीद है जीवन में वो क्षण फिर से आएंगे …

प्यासा – शिशिर मधुकर

प्यासा हूँ तेरी दीद का किस बिधि कहूँ तुझसे ये तन्हाइयां अब तो ना सही जाती हैं मुझसे तेरा करम हो जाए ग़र इन मुश्किलों के बीच कुछ भी …

जिंदगी वीरान है- शिशिर मधुकर

तूने दिल से क्या रुखसत किया जिंदगी वीरान है सांसें बदन में तो चल रहीं बाकी ना कोई जान है लाखों जतन मैंने किए तुझे याद करना छोड़ दूँ …

नेह की बूंदें (हाइकु) – शिशिर मधुकर

मित्रों हाइकु के क्षेत्र में मेरा प्रथम प्रयास प्रेम खो गया स्वार्थ में अनबन उदास मन। उम्मीदें टूटीं बुझ गई रोशनी केवल तम। नेह की बूंदें बरसे जब जब …

अरमां नहीं जगते -शिशिर मधुकर

खुशी आने से भी मन में अब अरमां नहीं जगते तेरे बिन मेरे ख्वाबों को भी अब पर नहीं लगते मुहब्बत बिन बड़ी सूनी हुई हैं ये राहें जीवन …

जीवन पर अधिकार किसका ? (कविता)

तुम्हारे ही जीवन पर है अधिकार किसका ? तुम्हारा ? बिलकुल नहीं. तुम प्रयास करो सज्जन बनकर जहाँ में प्यार व् करुणा बाँटने का. सावधान ! तुम्हारे सर पर …

एक रैन मिल जाए – शिशिर मधुकर

तू बाहों में अगर भर ले मुझे तो चैन मिल जाए बड़े नज़दीक से तेरे नैनॊं से मेरे नैन मिल जाए बड़ी तन्हा सी गुजरी है अब तलक जिंदगी …