Tag: लाचारी /विवस्तायों मे फंसी ज़िन्दगी

कोशिशें – शिशिर मधुकर

मुहब्बत दिल में थी जब तो प्यार आँखों से झरता था मैंने उल्फत का तब हर पल तेरे संग हंस के बरता था कोशिशें गर तेरी मुझको सुकूं देने …

मुकरता गया – शिशिर मधुकर

करम ना तेरा हुआ समय यूँ ही गुजरता गया संभलना चाहा मगर मैं तो बस बिखरता गया खुदा मिले ना मिले पूजा मेरी तो सच्ची थी मैं उसका नाम …

उल्फ़त का ये अंदाज़ – शिशिर मधुकर

फ़कत आवाज़ सुनने से नहीं अब काम चलता है तुझे पाने का सपना मेरी इन अंखियॊं में पलता है तू मुझसे दूर रहती है मगर रिश्ता नहीं तोड़ा तेरी …

उल्फ़त में दीवाने – शिशिर मधुकर

अरे उल्फ़त में दीवाने मेरे पीछे क्यों आता है घूम के जुड़ ही जाएगा अगर जन्मों का नाता है समय से ही मिला करती हैं सारी नेमतें जग में …

गुनाह- शिशिर मधुकर

अरमान टूटते हैं जब उल्फ़त की राह में दिल में मिलेगा दर्द एक ऐसी ही चाह में नज़रों से मैंने आज भी उसको किया दुलार लेकिन दिखी ना तिश्नगी …

मेरा मन तर नहीं होता – शिशिर मधुकर

अगर दीवानगी होती तो फिर ये डर नहीं होता तुम भी तन्हा नहीं रहते सूना ये घर नहीं होता मैं तो मुद्दत से प्यासा हूँ आस बारिश की रखता …

लाचारी – शिशिर मधुकर

मिलन की आरजू पे डर ज़माने का जो भारी है तेरी मेरी मुहब्बत में अजब सी कुछ लाचारी है दोस्तों दोस्ती मुझको तो बस टुकडों में मिल पाई बड़ी …

तेरी आवाज़ – शिशिर मधुकर

तेरी आवाज़ को सुनना सुकूँ एक रूह को देता है शिकायत है मगर मुझको ख़बर तू क्यों ना लेता है प्यार बरसेगा जो तेरा चैन कुछ आ ही जाएगा …

मुहब्ब्त की प्यास – शिशिर मधुकर

मिलन की चाह की देखो फ़कत बातें वो करता है कभी कोशिश करे ना कुछ पास आने से डरता है कोई सच्ची मुहब्बत अब न उसके पास है देखो …

कर्तव्य की गठरी – शिशिर मधुकर

एक बात मन की दोस्तों तुमको बतानी है कुछ दर्द में डूबी फ़कत अपनी कहानी है ढूंढा जिसे उल्फ़त मुझे न कोई मिल सकी ग़म झेलती देखो तन्हा कब …

मतलब की यारी – शिशिर मधुकर

मुहब्बत ना रखी दिल में फ़कत मतलब की यारी है ज़िन्दगी किस तरह आखिर तुमने मेरी संवारी है मेरे सपने सभी टूटे तेरे संग फिर भी रहता हूँ जिम्मेदारी …

ख्वाब उल्फ़त का – शिशिर मधुकर

सोचता खुद की तो ये रिश्ता नहीं जोड़ा होता सफ़र के बीच यूँ ही तेरा हाथ ना छोड़ा होता घरोँदा तेरा वो अगर मुझको अजीज ना होता रुख तूफां …

करार – शिशिर मधुकर

सुन ले मैं थक चुका हूँ तेरे इंतज़ार में दूरी ये अच्छी नहीं इतनी भी प्यार में दुश्वारियां कबूल थी जब साथ में चले खामोशी मगर थी नहीं अपने …