Tag: लाचारी /विवस्तायों मे फंसी ज़िन्दगी

ये एहसान तेरा है – शिशिर मधुकर

कहाँ जाएं मिलें किस से बड़ी मुश्किल ने घेरा है मुझे अपनों नें क्या लूटा कोई दिखता ना मेरा है मुझे रिश्तों में जकडा है मगर ना प्यार बरसाया …

मिला ना वो मगर अब तक – शिशिर मधुकर

मुहब्बत जिस को होती है वो तो नज़दीक आता है खुद की हस्ती को साथी के लिए जड़ से मिटाता है जो रिश्ता निभाता है फ़कत एक आस के …

सैलाब की नीयत – शिशिर मधुकर

मैं तन्हा हूँ राह साथी की जाने कब से तकता हूँ फना होती हैं उम्मीदें ग़म का मारा सा थकता हूँ मेरी आँखों में आंसू तो नज़र ना आएंगे …

टूटने की भी सीमा है – शिशिर मधुकर

मन की बात खुलकर के जहाँ पे कह नहीं सकते ऐसे हालातों में इंसान कभी खुश रह नहीं सकते तेरे नज़दीक आते हैं तो फ़कत रुसवा ही होते हैं …

अगर दिल खूबसूरत है – शिशिर मधुकर

अगर दिल खूबसूरत है नज़र चेहरे पे आता है कोई मुखड़ा मुझे हरदम तभी इतना लुभाता है मुहब्बत वो नहीं समझा उम्र गुजरी है पर सारी साथ एक ऐसे …

अभी उम्मीद बाकी है – शिशिर मधुकर

वो मेरे साथ रहता है मगर फिर भी ना मेरा है फ़कत तन्हाइयों नें ज़िन्दगी में मुझको घेरा है बड़ी लम्बी हुईं है रात इस जीवन के मेले की …

कातिल ये बहरे हैं – शिशिर मधुकर

भुला दो तुम मुझे चारों तरफ़ बैरी के पहरे हैं रोशनी अब नहीं दिखती अंधेरे इतने गहरे हैं संभालो मत ना उठने दो तूफां को समुन्दर में लील जाएंगे …

मुलाकातें – शिशिर मधुकर

मुलाकातें बड़ी मुद्दत से अपनी हो ना पाई हैं तेरी राहें सदा तकती ये आँखें सो ना पाई हैं बड़ा तूफान आया था और बरखा हुईं जमकर निशां अपनी …

जालिम हुई है ज़िंदगी – शिशिर मधुकर

अधूरी पड़ी है ज़िंदगी ना चैन आता है कोई कहीं ख्वाबों में मुझको बुलाता है साथ जन्मों का तो हरदम टीस देता है तुम भुलाओ ये मगर फिर भी …

गुमसुम हैं सारे – शिशिर मधुकर

ताकत जब से बढ़ने लग गई कमरे की दीवारों में अब अपनी भी गिनती होती है तन्हाई के मारों में पढ़ लिख के गुमसुम है सारे बात करे न …

सुकून जो दिल को देते हैं – शिशिर मधुकर

बढ़ाओ हाथ कि अब रातें मेरी तन्हा ना कटती हैं मिली हैं जितनी भी सांसें हल्के हल्के सिमटती हैं एक सी ऋतु रहेगी तो कभी ना ये डाल महकेंगी …

तुमको मालूम तो होगा – शिशिर मधुकर

बड़ी मुश्किल से मैंने ज़िन्दगी में तुमको पाया था वरना तन्हाइयों में मेरे संग बस मेरा ही साया था ना कोई साथ था मेरे तन भी घावों से छलनी …

परचम जज्बातों का – शिशिर मधुकर

तुम सामने पड़े तो ये मन खुशियों से भर गया ढलका हुआ तेरा चेहरा भी थोड़ा निखर गया खुशियाँ मिली थी एक तरफ़ मायूसी कम नहीं गुल वो खिला …

कोई कारण तो होता है -शिशिर मधुकर

कोई भी सोच मेरी तो परे तुझ से ना जाती है मुहब्बत कौन सा रंग अब मुझे आके दिखाती है अधिकतर ज़िन्दगी गुजरी मगर तन्हा रहा हूँ मैं मिलन …

वक्ती खेल – शिशिर मधुकर

आज हम गैर लगते हैं कभी पर थे तुम्हें प्यारे कोई शिकवा नहीं तुमसे ये वक्ती खेल हैं सारे खुदा ने दिल दिया है तो इसमें जज्बात होते हैं …

मेरी तकदीर हो तुम – शिशिर मधुकर

मेरी ग़ज़लों ने अब ये सच ज़माने को बताया है मुहब्बत में किसी अपने ने मेरा दिल दुखाया है कितने अशआर कह डाले मगर ग़म तो नही छूटे किसी …

कोई बंधन नहीं टूटा – शिशिर मधुकर

लाख कोशिश करी रिश्ता मगर मैं तोड़ ना पाया तुम्हें घुट कर तड़पने को अकेला छोड़ ना पाया हवाएं कुछ चली ऐसीं तिनका तिनका बिखेरा है घरोँदा उड़ गया …

अधूरापन मेरा – शिशिर मधुकर

अधूरापन मेरा अब तो मुझे परेशान करता है तेरा बदला रवैया हरदम मुझे हैरान करता है एक बुरे वक्त में हमने कई साझा किए थे दुख यही सब सोच …

जो मन आपस में मिल जाएँ – शिशिर मधुकर

जो मन आपस में मिल जाएँ जुदा वो हो नहीं पाते जो मिल के भी नहीं मिलते वो तन्हा सो नहीं पाते अनोखा सा जो रिश्ता है दर्द ए …

मुकद्दर से सदा हारा – शिशिर मधुकर

मिलन की आग अब जलती नहीं है तेरे सीने में मुझे भी अब नहीं इच्छा लबों का जाम पीने में ज़माने ने मेरा पत्थर के माफिक रूप देखा है …

थक गया हूँ – शिशिर मधुकर

थक गया हूँ अब मैं तेरे इंतज़ार में वीरानी सी छा गई है मेरे दयार में नाराज़ होके मैंने जो भी तुझे कहा जुबान अब नही है मेरे इख्तियार …