Tag: लाचारी /विवस्तायों मे फंसी ज़िन्दगी

आस – शिशिर मधुकर

हवाएं नहीं चलती तेरी खुशबू हो जिनके पास बहारे फिर से आएँगी नहीं देता है कोई आस साँसें चल रही हैं यूँ तो जिम्मेदारी निभाने को चाहत बिना ये …

तुम्हारा साथ – शिशिर मधुकर

तुम्हारे साथ में हर दिन आसानी से कट जाता है सुख दुःख जीवन के सब सहने में मज़ा आता है मतलबी रिश्तों के लिए मगर संग मैंने छोड़ दिया …

मशीनों से बनो – शिशिर मधुकर

मशीनी युग में जीते हो मशीनों से बनो तुम भी कमानों से वो चलती हैं कमानों से चलो तुम भी मशीनें दिल नहीं रखतीं वो चलती हैं या रुकती …

भोर भी होगी – शिशिर मधुकर

घायल है मेरा मन किसे दिखलाऊँ चोटों को मैं सारी उम्र तरसा हूँ प्रेम के प्यासे होठों को अपना समझ के मैंने जिसे घर में बसाया था मेरे सम्मान …

फिरोजाबाद की गलियाँ देखो, यूपी की रंग-रलियाँ देखो,….~Gursevak singh pawar

फिरोजाबाद की गलियाँ देखो, यूपी की रंग-रलियाँ देखो, चन्द्रमा की रोशनी की ठंडक से भी ठंडा न होता, वहां का जीवन, लोगो का वो सुहाग बनती, अपने आप को …

तेरे अल्फाज – शिशिर मधुकर

तेरे अल्फाज सुनने को मैं ज्यों बेताब रहता हूँ निज मन की ये बात लो खुलकर के कहता हूँ तुम्हारे मान वर्धन से मुझको संतोष मिलता है खुशी के …

मालियों के हाथ – शिशिर मधुकर

अगर पौधा लगाया है उसे पानी तो देना है धूप मिलती रहे उसको सभी लोगों से कहना है अगर तुम भूल जाओगे तो वो फ़िर जड़ फैलाएगा जिधर से …

तैयार हो जाओ—डी. के. निवातिया

तैयार हो जाओ …. आया है मौसम चुनावी बरसात का, बरसाती मेंढक अब तैयार हो जाओ चल निकलेगी अब तुम्हारी लाटरी थाम झोला छतरी  तैयार हो जाओ !! जम …

देवमानव

देवमानव – 1 क्यों नहीं सारी स्त्रियां डूब कर मर जातीं पानी में क्यों नहीं सारे भूखे नंगे किसान मज़दूर मिलकर आत्मदाह कर लेते क्यों नहीं ज़हर खाकर मर …

महल और मचान – शिशिर मधुकर

जिन्दगी तूने मुझे ये कैसी अजब पहचान दी चोर सारे मिल गए शमशीरे मुझ पर तान दी जो बना मुझसे वो मैं सबके लिए करता रहा मैंने माँगा तो …

रोशनी मिलती नहीँ – शिशिर मधुकर

अब कहाँ होली दिवाली और कहाँ वो सिलसिले त्योहार बेमानी हुए आपस में जब ना दिल मिले दीप जलते है सभी फ़िर भी रोशनी मिलती नहीँ प्रेम का जब …

उत्पात – शिशिर मधुकर

मेरे सामाजिक जीवन में तुमने जो उत्पात मचाया है ऐसा लगता है मेरे पीछे कुछ काले प्रेतों का साया है जिस तरह से मुझे तन्हा करके मनमानी तुमने की …

खुदा और खुशी – शिशिर मधुकर

खुदगर्ज चालाक लोगों को कोई अपना नहीँ मिलता ऐसे बेजार बागॉ में मिलन का गुल भी नहीँ खिलता देख कर अतिथि अपने यहाँ जो हरदम मुस्कुराते है ऐसे घर …

अमानत में खयानत – शिशिर मधुकर

किसी की अमानत में खयानत का मुझको शौक नहीँ मैं तो मजलूमौ का मुसीबतो में बस हाथ थाम लेता हूँ जिस तरह गुरबत में कूछ फरिश्तो ने मेरा साथ …

रक्षाबंधन का दिन – शिशिर मधुकर

रक्षाबंधन का दिन हैं और राखी बँधवाने जाना हैं बहन तक पहुँचने को मगर जामो से पार पाना हैं कितनी भी मुश्किलें आए हम भारत के वासी हैं इन्हीं …

मय का प्याला – शिशिर मधुकर

मेरी किस्मत तॆरा ये अंदाज़ भी कैसा निराला है मैं पी नहीँ सकता हाथों में जो मय का प्याला है किसी को क्या पता किस नशे से ये जाम …

उरुज से गीरे सीतारे

कहानी अजीब सी थी उन उरुज से गीरे सीतारों की।. पलट कर कभी न देखेते थे ऐसे तकब्बुरी इन्सानो की। मेहनत ने दी दस्तक किस्मत के दरवाजे पर दुआओं …

गर्दिश के साथी – शिशिर मधुकर

तेरे नाम का चर्चा हमने सब अपनों के बीच कर दिया तेरी छवि का एक एहसास उनके भी मन में भर दिया छुपाने की कोशिशों से पाक रिश्ते भी …

गमों की दश्तें – शिशिर मधुकर

दिल के सबसे करीब रिश्ते जब झूठे निकलें इंसान टूट कर बस यहाँ ठगा सा रह जाता है कितनी भी कोशिशें करो फ़िर खुश रहने की बैचैन दिल को …