Tag: ज्योतिष कविता

मेष राशि परिचय

मेष राशि प्रष्टोदयी ठाकुर पुरुष प्रमान | रात्रि बली पावक सरिस वर्ण रक्त सम जान || वर्ण रक्त सम जान भौम को स्वामी मानौ | दक्षिण दिशा प्लवत्व पूर्व …

राशि क्रम विधान

मानौ मेष प्रथम सदा वृषभ दूसरी होय | मिथुन कर्क का क्रम बना सिंह पांचवीं सोय || सिंह पांचवी सोय कि कन्या षष्ठम जानौ | तुला औ वृश्चिक जोड़ …

नव ग्रहों के पद

राजा नवग्रह भास्कर रानी चन्द्र प्रमान | सेनापति अंगार है राजकुंवर बुध जान || राजकुंवर बुध जान शुक्र गुरु मंत्री होवै | दास शनिश्चर मान कुदृष्टी से सब रोवै …

पंचक नक्षत्र

अर्ध धनिष्ठा शतभिषा द्वै भाद्रपद प्रमान | रेवति साढ़े चार की पंचक संज्ञा मान || दक्षिण दिशि की यात्रा नहिं करना शवदाह | छत चारपाई काष्ठ का रोको कार्य …

अभुक्त मूल नक्षत्र विचार एवम फल

आश्लेखा जेष्ठा मूल की संज्ञा है अतिगंड | मघा अश्वनी रेवती को कहते उपगंड || ज्येष्ठा अंतिम आद्य मूल द्वै | घटी कहावै अभुक्त मूलमय | चरण अश्वनी प्रथम …

अग्निवास निर्णय

शुक्ल पक्ष प्रतिपदा प्रमाना |तिथि कर क्रम से करइ विधाना || वर्तमान तिथि तक गिनी जावै |पुनि संख्या में एक मिलावै || सूर्यवार से दिन कर गिनती |सबका जोडि …

दिशा शूल निवारण

रवि गुरु शुक्र रात्रि को जावै |सोम भौम शनि दिन को भावै || सूर्यवार ताम्बूल जो खाई | घृत के पिए दोष मिट जाई || सोमवार दर्पण कर दर्शन …

यात्रा में चन्द्र वास का फल

सन्मुख होइ जो चन्द्रमा सम्पति देइ अपार | दक्षिण में सुख सम्पदा का होता बिस्तार || पीछे से अति कष्ट दे बाये से धन नाश || सन्मुख सब बिधि …

चन्द्र वास निर्णय

मेष सिंह धनु पूरब करइ चन्द्रमा वास | कन्या वृषभ मकर में दक्षिण करइ निवास || तुला कुम्भ मिथुनादिक पश्चिम जानै जोग | वृश्चिक कर्क मीन में उतर कहइ …

विंशोत्तरी दशा क्रम एवम ग्रहों का समय

सूर्य चन्द्र कुज राहु गुरु ,शनि बुध केतु शुक्र | विंशोत्तरी महादशा का है क्रमवार सुचक्र || सूर्य समय छे वर्ष बखाना | दशम वर्ष बिधु अवधि प्रमाना || …

गोचर ग्रह फल समय ज्ञान

आदौ पाँच दिवस रवि जानौ | अंतिम घडी तीनि शशि मानौ || आठ दिवस आदौ कुज माना | बुद्ध सदा रह एक समाना || मध्य मास दुइ गुरु फलदाई …

तन्वादि संज्ञा

तनु लग्न मूर्ति तनु उदय वपु आद्य कल्प अंग जानु | द्वादश संज्ञा लग्न की भली भांति पहिचानु || धन स्व कोष अर्थ कुटुम्ब धन ये पंचम धन भाव …

ग्रहावस्था के अन्य विचार

गर्वित दीप्त एक सम जानौ |गुरु के संग ग्रह मुदित बखानौ || राहु केतु युति होवै पंचम |सो जानहु ग्रह है लज्जित सम || शनि कुज सूर्य संग ग्रह …

ग्रहावस्था विचार

उच्च दीप्त स्वस्थ निज राशी |मुदित मित्रग्रह ज्योतिष भाषी || शुभ ग्रह वर्ग शांत ग्रह जाना |उदित किरण युत शक्त बखाना || सूर्य संग ग्रह विकल कहावै |युद्ध पराजित …

ग्रहों का बलाबल

काल बल जातक जन्म पाव जो रजनी | काल बली कुज चन्द्र अरु शनी || जो जातक जन्मै दिन मांही | सूर्य  शुक्र  बुध  बली     कहाहीं || स्थान बल …

नैसर्गिक और तात्कालिक मैत्री से पंचधा मैत्री विचार

जो नैसर्गिक अरु तात्कालिक | मित्र होई अधिमित्र प्रमाणिक || नैसर्गिक सम तात्कालिक मित्रा | जानौ  ते  है  मित्र  विचित्रा || नैसर्गिक रिपु तात्कालिक प्रीती |तिनकी संज्ञा  सम परतीती …

ग्रहों की तात्कालिक मित्रता व शत्रुता

एकादश ,द्वादश ,त्रय ,जानहु |द्वय ,दश ,चतुर्थ मित्र ही मानहु || पंचम ,अष्टम ,नवम बखाना | प्रथम  षष्ठ  सातवं  रिपु  माना ||

ग्रहों के पर्मोच्चांश

दश रवि त्रय शशि कुज अट्ठाइस |बुध पंद्रह गुरु पाँच बताएसि || सत्ताइस शुक शनि कह  बीसा |  राहु  केतु  ग्रह   पंद्रह    दीसा || ये कह ग्रह के पर्मोच्चान्शः …

ग्रहों का मूल त्रिकोण

सूर्य बीस त्रय शशि कहहुं ,मंगल द्वादश मेष | मूल त्रिकोण के बाद में  कहलावै  स्वग्रहेश || बुध पंद्रह उच्च ही जाना |मूल त्रिकोण बीस तक माना || तीस …