Tag: दार्शनिक कविता

* जी चाहता सब दान कर दूँ *

नजर दान कर दूँ जिगर दान कर दूँ ह्रिदय फेफङा किडनी सब अंग दान कर दूँ , दान करने में मेरा कुछ जाता नहीं उल्टा नाम प्रशन्सा पाता यही …

* अछूत *

छुत-अछूत की अजब-गजब विडम्बना किस ने इसे बनाए कार्य उसका शुभ वह कैसे अशुभ हो जाए। बिना उसके लोग तरे नाही जीवन में जव भर ससरे नाही बिन उसके …