Tag: देश पर कविता

दिवंगतों को मत बदनाम करो — डी के निवातिया

दिवंगतों को मत बदनाम करो *** अपने पूर्वजो की गैरत कटघरे ला दी तुमने आकर मीठी बातो में ! सत्तर साल की कामयाबी मिटा दी तुमने आकर के जज्बातो …

मैं सैनिक हूँ

मैं सैनिक हूँ मैं जगता हूँ रातभर चौकस निगाहें गड़ाए हुए उस जगह जहाँ अगली सुबह देख पाऊं इसमे भी संशय है उसके लिए जो अभी अभी छाती से …

आला-रे-आला — डी के निवातिया

आला-रे-आला *** आला-रे-आला, सुन मेरे लाला, लगा ले अपनी जुबान पे ताला जो बोलेगा सच्ची सच्ची बाते, किया जायेगा उसका मुँह काला वतन व्यवस्था का टूटा पलंग है चरमारती …

स्‍वप्‍न देखा था कभी : अटल बिहारी वाजपेयी

स्‍वप्‍न देखा था कभी जो आज हर धडकन में है         एक नया भारत बनाने का इरादा मन में है एक नया भारत, कि जिसमें एक नया विश्‍वास हो …

वतन की किस्मत — डी के निवातिया

वतन की किस्मत *** गूंगो – बहरो ने मिलकर महफ़िल सजाई है मिलजुलकर खाने खिलाने की कसमे खाई है बारी बारी से बदलते रहते है अपनी कुर्सियां क्या खूब …

चिराग बुझने न दें….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

जलाएं है चिराग घर हमारे, शहीदों ने अपना लहू देके… जात, पात और धर्म की आग से आओ इसे बुझने न दें… \ /सी.एम्. शर्मा (बब्बू) (साइट की प्रॉब्लम …

तुम कर्णधार हो – अनु महेश्वरी

उठो, जागो, नौजवानों, तुम पर ही, अब, भारत का सब, भार है, विश्वास हमें है पूरा तुम पे, तुम रखोंगे, इसे सम्भाल के| जब जब दुश्मन वार करें, शीश …

सेना सदा महान है – शिशिर मधुकर

सेना सदा महान है उससे ही हिन्दुस्तान है लेकिन हमारी कमज़ोरियों से बढ़ती ना उसकी शान है जब भी कोई सैनिक अपना शहीद होता है हर नागरिक का मन …

राष्ट्र की खातिर- शिशिर मधुकर

एक मेरे मित्र हैं जो मुझसे बहुत नाराज़ हैं उनको पसंद आते ना मेरे मलमली अल्फ़ाज़ हैं राष्ट्र की खातिर वो कहते हैं की मैं रचना लिखूं एक भारत …

न झगड़े आपस में हम – अनु महेश्वरी

कठिन है राहे, मुश्किल है रास्ते, गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, भ्रष्टाचार, और न जाने कितने, अनगिनत परेशानिया के साथ है सफ़र, मंजिल अभी दूर है, पर साथ रहे अगर, भरोशा, …

घर घर में आतंकी – शिशिर मधुकर

बाहरी दुश्मन की ज़रूरत नहीं है भारत को वो घर घर में यहाँ आसानी से मिल जाएंगे टीवी पर्दे पे अपने कारोबार की तरक्की को बुरहान वानी की बरसी …

गाथा एक वीर की — डी के निवातिया !!

मेरे दिल की सबसे अजीज मेरी एक रचना आज आपके समक्ष रख रहा हूँ , इस रचना को मैं लिखते हुए भी रोया था,,, और जब भी पढता हूँ …

बस इस देश का परचम लहराए – अनु महेश्वरी

राह सबकी अलग हो सकती जहाँ, पर मंजिल सबकी एक ही है यहाँ| सही रास्ते पे चले हर इंसान, हुआ इसलिए धर्म का निर्माण| धर्म के भी ठेकेदारों ने …

इन्तजाम- अरूण कुमार झा बिट्टू

आजादी के दशको बीते फिर भी दिन बेहाल हैं उफ आज भी मेेरे भारत में भूखे सोते परिवार हैं बच्चो की माशूमियत दर दर भटकती फिरती हैं लाल बत्ती …

आतंक के अंत की तैयारी : “गोपी”

आतंक के अंत की तैयारी उडी में पाक ने नापाक इरादे से कायराना हमला किया भारत ने सर्जिकल स्टराइक कर ईंट का जवाब पत्थर से दिया सेना ने जो …

तुम्हे दोस्ती या दुश्मनी चाहिए – अनु महेश्वरी

हम गाँधी के वंशज है, जो शांति के पुजारी थे, तो हम सुभाष और भगत सिंह, के भी वंशज है, यह ध्यान रहे, किसी भी भ्रांति में मत रहना …

सर्वशक्ती उन्नती का एक यही वरदान हैं- बिट्टू

सर्वशक्ती उन्नती का एक यही वरदान हैं सहयोग हो हर एक जन का ,तभी सरल हर काम हैं वो महल भी बिखर गया है जहा दिलो मे खटास हैं …

मेरे घर को बाँट दिया — डी के निवातिया

मेरे घर को बाँट दिया *** मेरे घर को बाँट दिया है, धर्म के कुछ ठेकेदारो ने ! मातृभूमि से छल किया है, वतन के ही गद्दारो ने !! …

मैं शरीफ था इसलिए चुप रहा- आशीष अवस्थी

मैं शरीफ था इसलिए चुप रहा लोगों ने समझा मुझे जवाब नहीं आता जब से शराफत निकाल के फेंकी मैंने अब लोगों को सवाल नहीं आता  कुछ सोच कर …

अब तक क्यों ना ठानी है – शिशिर मधुकर

जब भी मेरी भारत माता का कोई लाल बलि चढ़ जाता है कायरता का रोना धोना अपने अखबारों में छप जाता है दुर्दांत पड़ोसी से सभ्य व्यवहार की आकांक्षाएँ …

देश के लाल फना हो जाते है — डी. के. निवातिया

देश के लाल फना हो जाते है *** पुराने जख्म भरते नहीं की नये फिर से मिल जाते है सेनापतियों की गैरत पे जाने क्यों ताले पड़ जाते है …