Tag: देश पर कविता

मै भारत माता बोल रही हूँ – डी के निवातिया

मै भारत माता बोल रही हूँ *** जंजीरों में जकड़ी हूँ मै भारत माता बोल रही हूँ ह्रदय में उठती पीड़ा चन्द शब्दों में खोल रही हूँ ।। कोई …

अमर रहेगा नाम तुम्हारा — डी के निवातिया

अमर रहेगा नाम तुम्हारा *** तुम योग्य लफ्ज़ नहीं पास मेरे, कैसे करुँ गुणगान तुम्हारा राजगुरु, सुखदेव, भगत सिंह, कितना है अहसान तुम्हारा देश प्रेम के सूचक थे तुम …

धैर्य की परीक्षा – डी के निवातिया

    धैर्य की परीक्षा *** अब न खाली हो किसी माँ की गोद, कोई लाल अब न फ़ना हो कब तक देनी होगी धैर्य की परीक्षा, अब कोई …

राष्ट्रोत्कर्ष-उत्थान

यह राष्ट्र मुझे करता अभिसींचित् प्रतिपल मलय फुहारों से , प्रतिदानों में मिले ठोकरों , धिकारों, दुत्कारों से , जो लूट रहे मुझको हर क्षण ,उन कायर कुधारों से …

बस रहे हम हिंदुस्तानी – अनु महेश्वरी

केवल अँधेरे की बातें करने से, यह दूर नहीं होगा, हर एक को दीया जला, जहाँ रोशन करना होगा| शिकायतों का दौर छोड़ अब कुछ कर दिखाना है, अपना …

काश, ऐसे भारत का निर्माण अब हकीकत हो – अनु महेश्वरी

हर इंसान बने, अब अच्छा, नाता जोड़े, लोगो से सच्चा, छल कपट और दुर्भावना का यहाँ न कोई स्थान न हो, देश तोड़ने वालो का इस जहाँ में अब …

काश ! हम बच्चे ही होते…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

काश ! हम बच्चे ही होते…. दिल से हम फिर सच्चे होते…. न कोई होता वैरी अपना… न हम किसी के दुश्मन होते… काश ! हम बच्चे ही होते…. …

इक्कीसवीं सदीं का अट्ठारवां साल

इक्कीसवीं सदीं का अट्ठारवां साल *** इक्कीसवीं सदीं के, अठ्ठारवे साल का, जवानी में कदम देखेगी दुनिया, है कितना, मेरे वतन कि रवानी में दम दुश्मन, कितना भी कोशिश …

दिवंगतों को मत बदनाम करो — डी के निवातिया

दिवंगतों को मत बदनाम करो *** अपने पूर्वजो की गैरत कटघरे ला दी तुमने आकर मीठी बातो में ! सत्तर साल की कामयाबी मिटा दी तुमने आकर के जज्बातो …

मैं सैनिक हूँ

मैं सैनिक हूँ मैं जगता हूँ रातभर चौकस निगाहें गड़ाए हुए उस जगह जहाँ अगली सुबह देख पाऊं इसमे भी संशय है उसके लिए जो अभी अभी छाती से …

आला-रे-आला — डी के निवातिया

आला-रे-आला *** आला-रे-आला, सुन मेरे लाला, लगा ले अपनी जुबान पे ताला जो बोलेगा सच्ची सच्ची बाते, किया जायेगा उसका मुँह काला वतन व्यवस्था का टूटा पलंग है चरमारती …

स्‍वप्‍न देखा था कभी : अटल बिहारी वाजपेयी

स्‍वप्‍न देखा था कभी जो आज हर धडकन में है         एक नया भारत बनाने का इरादा मन में है एक नया भारत, कि जिसमें एक नया विश्‍वास हो …

वतन की किस्मत — डी के निवातिया

वतन की किस्मत *** गूंगो – बहरो ने मिलकर महफ़िल सजाई है मिलजुलकर खाने खिलाने की कसमे खाई है बारी बारी से बदलते रहते है अपनी कुर्सियां क्या खूब …

चिराग बुझने न दें….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

जलाएं है चिराग घर हमारे, शहीदों ने अपना लहू देके… जात, पात और धर्म की आग से आओ इसे बुझने न दें… \ /सी.एम्. शर्मा (बब्बू) (साइट की प्रॉब्लम …

तुम कर्णधार हो – अनु महेश्वरी

उठो, जागो, नौजवानों, तुम पर ही, अब, भारत का सब, भार है, विश्वास हमें है पूरा तुम पे, तुम रखोंगे, इसे सम्भाल के| जब जब दुश्मन वार करें, शीश …

सेना सदा महान है – शिशिर मधुकर

सेना सदा महान है उससे ही हिन्दुस्तान है लेकिन हमारी कमज़ोरियों से बढ़ती ना उसकी शान है जब भी कोई सैनिक अपना शहीद होता है हर नागरिक का मन …

राष्ट्र की खातिर- शिशिर मधुकर

एक मेरे मित्र हैं जो मुझसे बहुत नाराज़ हैं उनको पसंद आते ना मेरे मलमली अल्फ़ाज़ हैं राष्ट्र की खातिर वो कहते हैं की मैं रचना लिखूं एक भारत …

न झगड़े आपस में हम – अनु महेश्वरी

कठिन है राहे, मुश्किल है रास्ते, गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, भ्रष्टाचार, और न जाने कितने, अनगिनत परेशानिया के साथ है सफ़र, मंजिल अभी दूर है, पर साथ रहे अगर, भरोशा, …

घर घर में आतंकी – शिशिर मधुकर

बाहरी दुश्मन की ज़रूरत नहीं है भारत को वो घर घर में यहाँ आसानी से मिल जाएंगे टीवी पर्दे पे अपने कारोबार की तरक्की को बुरहान वानी की बरसी …

गाथा एक वीर की — डी के निवातिया !!

मेरे दिल की सबसे अजीज मेरी एक रचना आज आपके समक्ष रख रहा हूँ , इस रचना को मैं लिखते हुए भी रोया था,,, और जब भी पढता हूँ …

बस इस देश का परचम लहराए – अनु महेश्वरी

राह सबकी अलग हो सकती जहाँ, पर मंजिल सबकी एक ही है यहाँ| सही रास्ते पे चले हर इंसान, हुआ इसलिए धर्म का निर्माण| धर्म के भी ठेकेदारों ने …

इन्तजाम- अरूण कुमार झा बिट्टू

आजादी के दशको बीते फिर भी दिन बेहाल हैं उफ आज भी मेेरे भारत में भूखे सोते परिवार हैं बच्चो की माशूमियत दर दर भटकती फिरती हैं लाल बत्ती …