Tag: देश पर कविता

घर घर दीप जलाए हैं – शिशिर मधुकर

मेरे देश के सैनिक वीरॉ मेरा नमन स्वीकार करो दुश्मन चैन नहीँ पाए तुम ऐसा प्रबल प्रहार करो जिन लालों ने सीमाओं पर अपने प्राण लुटायें हैं उनकी यादों …

जल रहा हैं हिन्दुस्तान

“आरक्षण की आग मे जल रहा हैं हिन्दुस्तान”, शिक्षा नौकरी पाने को बिक रहे हैं कई मकान, ठोकरे मिलती हैं यहा मिलता नही हैं ग्यान…. “आरक्षण की आग मे …

देशों में ओ देश अपना …………..|गीत| “मनोज कुमार”

देशों में ओ देश अपना प्यारा हिन्द देश है अनोखी पहचान इसकी ऊँची अपनी शान है बहुरंगी संस्कृति इसकी भव्यता विशाल है मनमोहक है सुन्दरता वास्तुकला मिसाल है देशों …

विघ्वंस धरा पर क्यों? —“आलोक पान्डेय “

तेरी यादों में जन मुरझाये हुए हैं सोच सोच कर भी सुखाये हुए हैं; क्या यही हश्र होता रहेगा देश कब तक लाल खोता रहेगा! भावनावों में जन आज …

गद्दारो का कुछ करना हैं – शिशिर मधुकर

भारत की रग रग में गर ताकत हम सबको भरना हैं सबसे पहले घर में बैठे इन गद्दारो का कुछ करना हैं भारत को जब चोट लगे तो जो …

सत्तर सालों से – शिशिर मधुकर

जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है बार बार क्यू बतलाते हो ऐसा कह कह कर खुद तुम इसे एक विवादित मुद्दा जतलाते हो अगर ये अभिन्न अंग है …

शक्ति – पुंज

धन -धान्य संपदा यौवन जिनके भूतल में समाये जन्मभूमि के रक्षक जिनने अनेकों प्राण गवाये। जिनके आत्म- शक्ति धैर्य से अगणित अरि का दमन हुआ देखा जग अकूत शौर्य …

कर्त्तव्य पूरा निभाएंगे – शिशिर मधुकर

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बाढ़ से तबाही मुख्य मंत्रियों ने अफसरों के साथ समीक्षा की उत्तर प्रदेश में सभी नदियों का जलस्तर बढ़ा मुख्यमंत्री और उनके चाचा एक …

उन्नति की इच्छाएं – शिशिर मधुकर

छोटी से सफलता से देश में जो लहर दौड़ जाती हैं वो देशवासियों की उन्नति की इच्छाए ही बताती हैं पर कुछ गुंडे बेईमानों ने सारा समाज ऐसा तोड़ा …

मुकद्दर – शिशिर मधुकर

बड़ी मुश्किल से हमें जीने का सहारा मिला था तूफां में घिरी कश्ती को एक किनारा मिला था वैसे तो जिन्दगी यहाँ मुद्दतों से आबाद नहीँ थी अपनों ने …

बहुमूल्य आज़ादी – शिशिर मधुकर

आज दिन हैं देशवासियों पन्द्रह अगस्त का जब जश्न मनाते हैं हम अँग्रेजी शिकस्त का इस अपने राज के लिए कई पीढ़ी खप गई अमर वीरों की गाथाएँ सब …

मुझे भारत कह कर पुकारो ना …..( कविता)

मुझे भारत कह कर पुकारो ना …..( कविता) मत पुकारो मुझे तुम India, मुझे मेरे नाम से पुकारो न , निहित है जिसमें प्यार व् अपनापन , मुझे भारत …

ओलम्पिक पदक – शिशिर मधुकर

एक सौ छब्बीस करोड़ का देश एक बड़ा खेल मंत्रालय लंबी लंबी बातें और खेलों को दुनियां भर की सौगाते दिन भर कान को खाएँ और जी भरकर के …

कभी जो झुका नहीं …………

कभी जो झुका नहीं दुश्मन से डरा नहीं नाम का आजाद था काम से आजाद था भारत माँ का पुजारी जिसके लिए जान वारी गोरो की नाक में किया …

उरुज से गीरे सीतारे

कहानी अजीब सी थी उन उरुज से गीरे सीतारों की।. पलट कर कभी न देखेते थे ऐसे तकब्बुरी इन्सानो की। मेहनत ने दी दस्तक किस्मत के दरवाजे पर दुआओं …

शासन में अनुशासन – शिशिर मधुकर

अपने भारत जैसा धरती पर कोई देश नहीं हैं और ईमानदार यहाँ धक्के खाते हैं और चोर मचाएं शोर संघीय ढाँचे के नाम पर हरदम राज्य शोर मचाते हैं …

कश्मीर में हिंसा – शिशिर मधुकर

कश्मीर में हिंसा और घाटी में अलगाववाद इस सच से आजकल सब दो चार हो रहे हैं और जाकिर नाईक के भड़काऊ उपदेशों पर एक दूसरे पर भद्दे राजनैतिक …