Tag: नज़्म

दो दूना बाइस — डी के निवातिया

दो दूना बाईस — बेवजह में वजह ढूंढने की गुंज़ाइश चाहिये ! काम हो न हो पर होने की नुमाइश चाहिये !! कौन कितना खरा है, किसमे कितनी खोट …

लफ्ज़ फिसलने लगे — डी के निवातिया

:””; लफ्ज़ फिसलने लगे ;””; +*””*.*””* + अधरों के पुष्प कँवल उनके खिलने लगे है ! लगता है सनम से अब वो मिलने लगे है !! कुछ तो असर …

शायद….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

सपनों से निकल हकीकत तुम बन जाओ…. चाँदनी बन मुझमें तुम कभी सिमट जाओ… रात रौशन हो जायेगी मेरी तुमसे ए सनम… आँचल से मुझपे तारों को छिटका जाओ… …

लफ्ज़ मेरे — डी के निवातिया

लफ्ज़ मेरे *** लफ्ज़ मेरे एक रोज़ ज़माना बोल रहा होगा रफ्ता रफ्ता सबके वो राज़ खोल रहा होगा !! ज्यों ज्यों पढ़े जायेंगे पन्ने उलझी डायरी के ना …

नज़्म – तुम ही बोलो ….सी.एम्.शर्मा (बब्बू)….

आज फिर तुमने, दिल मेरे पे, दस्तक दी है…. मेरे बालों में, तेरी उँगलियों ने, हरकत की है… एक सिहरन सी, बदन मेरे में, लहराई है…… ठहरे पानी में …

ढलता रहता हूँ — डी के निवातिया

ढलता रहता हूँ *** हर रोज़, दिन सा, ढलता रहता हूँ ! बनके दिया सा, जलता रहता हूँ !! कोई चिंगारी कहे, कोई चिराग !  यूँ नजरो में, बदलता …

बर्बादी का सबब

मेरी बर्बादी का सबब पूछेंगे। वो क्या, कैसे ओर कब पूछेंगे।। मेरी गजलों को पढ़कर लोग सभी। मेेरे शेरोंं का मतलब पूछेंगे। । मैं ख़ामोश हूँगा तू फ़िक्र ना …

घोंसला वो बदनाम — डी के निवातिया

घोंसला वो बदनाम   परिदो से भी बदतर आज का इंसान हो गया ! पाए थे जहा पंख घोंसला वो बदनाम हो गया !! रूह तरसती रही, जिस्म मालमाल …

ज्ञान का सागर अथाह मिलेगा — डी. के. निवातिया

ज्ञान का सागर अथाह मिलेगा  *** झिझक को अपनी तोड़ो तुम क्षमता को नया उत्साह मिलेगा ! ह्रदय चक्षुओं को खोलोगे तो, ज्ञान का सागर अथाह मिलेगा !! विद्वान …

नागफनी के बीच गुलाब — डी के निवातिया

नागफनी के बीच गुलाब <><><> वो जो नागफनी के बीच गुलाब खिला है। मेरी पाक मुहब्बत का नायाब सिला है।। अहसासों के मधुर पलो से सींचा है इसे तब …

दिल तो दिल है — डी के निवातिया

दिल तो दिल है परिंदो पर बंदिश है उड़ने की, ड्योढ़ी पे ताला पड़ने वाला है जाने कौन बिजली गिरने वाली है, या बादल फटने वाला है !! शहर …

कैसे मुकर जाओगे — डी के निवातिया

कैसे मुकर जाओगे +++   ***   +++ यंहा के तो तुम बादशाह हो बड़े शान से गुजर जाओगे । ये तो बताओ खुदा कि अदालत में कैसे मुकर जाओगे चार …

७८. जिन्दगी है तू ही…………………. तू ही प्रीत है |गीत| “मनोज कुमार”

जिन्दगी है तू ही और तू ही मीत है तू साँसें तू धड़कन तू ही गीत है तू आशा मिलन तू ही संगीत है तू चाहत है दौलत तू …

सर काटते रहे — डी के निवातिया

वो हमारे सर काटते रहे हम उन्हें बस डांटते रहे !! वो पत्थरो से मारते रहे हम उन्हें रेवड़ी बाटते रहे !! लालो की जान जाती रही हम खुद …

६५. दिल करता है……………. कर देता हूँ |गीत| “मनोज कुमार”

मैं और मेरी कलम…………….. दिल करता है जब जब में,लिख देता हूँ | मैं अपनी कलम से अपना, दर्द बयाँ कर देता हूँ || मैं और मेरी कलम हम …

६१. आ जाओ इस दिल में…………. सब मस्तियाँ |गीत| “मनोज कुमार”

आ जाओ इस दिल में तुम, खाली हैं कुछ जीबियाँ मैमोरी अभी फुल नही, सेव हैं सब मस्तियाँ आ जाओ इस दिल में……………………………… सब मस्तियाँ गूगल याहू पे खोजा …

६०. अब तो आजा ………………….|गीत| “मनोज कुमार”

अब तो आजा आजा आजा अब तो आजा आजा जानेजा जानेजा आजा आजा……….२ तेरी सूरत बिन देखे अरसा हो गया आजा आजा जानेजा जानेजा आजा आजा……….२ अब तो आजा …

५७. हमने तो सब कुछ खोया ………..जाने के बाद |गीत| “मनोज कुमार”

हमने तो सब कुछ खोया एक तेरे जाने के बाद मैं भी और दिल भी रोया एक तेरे जाने के बाद वीराने गुलशन लगते जब रहते दोनों संग साथ …

५६. जिससे था हमें प्यार ……………चला गया |गीत| “मनोज कुमार”

जिससे था हमें प्यार वो साजन चला गया हम रहते थे जिसके दीवाने चला गया हुई मुद्दतों अब तक जिसका पता नही हमें छोड़ अकेला तन्हा करके चला गया …