Tag: नज़्म

दिल के कोने से…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

मेरे ज़हन-ओ-दिल में छुपे रहते हो…. न जाने क्या क्या करते रहते हो…. रात को नींद नहीं आती…. दिन में भटकाते रहते हो….. हसीं मेरी अफ़साना बन गयी…… मुस्कुराके …

मुहब्बत की शाम—डी. के. निवातिया

वफ़ा होने से पहले मुहब्बत की शाम न हो जाये ! प्यार के इम्तिहान में, कही नाकाम न हो जाये !! बेवफ़ा लोगों की सौबत में रहना क़िस्मत ही …

बेइमान बहुत है—–(डी.के. निवातियाँ )

लोग शहर के अनजान,एक दूजे से हैरान बहुत है ! देखकर हालात इंसानियत के, दिल परेशान बहुत है !! बिकता है देखो मजहब आज आतंक के इस बाजार में …

गुनाह—गजल-नज्म— डी. के. निवातिया

क़त्ल न कोई गुनाह किया हमने ! बस दर्द ऐ दिल बयाँ किया हमने !! जाने क्यों नुक्ताचीनी होने लगी ! जरा लबो को जो हिला दिया हमने !! …

तुम आना ज़रूर…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

तुम लौट कर नहीं आये…. सांसें आ जा रही थी… प्राण नहीं आये…. तुम लौट कर नहीं आये….. शरीर निर्जीव हो गया है मेरा… प्राण हैं की इंतज़ार में…. …

कुछ पल मुस्कुराये होते—डी के निवातिया

तुम अगर मेरी जिंदगी में आये होते तो हम भी कुछ पल मुस्कुराये होते !! न रहते जिंदगी में तुम भी यूँ तन्हा न अकेले में हमने आँसू बहाये …

इस “मैं” को समझाऊँ क्या….सी.एम्. शर्मा (बब्बू) ….

तुझ बिन रात और दिन है क्या… तुझ को मैं समझाऊँ क्या… स्याह रात दिल की तन्हाई… अपने को समझाऊँ क्या…. दर्द है मेरा जिगर भी मेरा… तुम को …

सौगात —डी. के. निवातिया

आयी फिर याद भूली बात की तरह ! गुजरी है लश्कर-ऐ-बारात की तरह !! ! कितने बदल गये यार सब अपने वक़्त – बेवक़्त हालात की तरह ! ! …

दे कलम को धार — ग़ज़ल-नज्म — डी. के. निवातियाँ

दे कलम को धार अब तलवार बनाना होगा ! भर लफ्जो की हुंकार हथियार बनाना होगा !! जब बात बने ना मान मुनव्वल से, जान लो अपने डंडे की …

काश ! तुम सिर्फ हमारे होते…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

काश ! तुम सिर्फ हमारे होते…नज़्म… काश!! तुम सिर्फ हमारे होते…. किस्मत में दोनों के सितारे होते… तेरी आँखों से रोज़ ही पीते हम… नशे किसी और के ना …

करीब तो आने दे —-डी. के निवातियाँ

एक बार मुझे तू अपने करीब तो आने दे ! हसरत आज इस दिल की ये मिट जाने दे !! किस तरह तड़पा है ये दिल,  एक तेरे बैगर …

तुमसे मिलता…… संसार सनम |गीत| “मनोज कुमार”

तुमसे मिलता है अपनापन तुमसे महके मेरा घर आँगन तुमसे ही हैं जज्बात सनम तुम साँस मेरी संसार सनम तुमसे मिलता……………………… संसार सनम अंजाम मेरा मेरी भोर हो तुम …

खाबों में तुम हो……….|गीत| “मनोज कुमार”

खाबों में तुम हो जवाबों में तुम हो ख्यालों में तुम हो सवालों में तुम हो जब भी मैं देखूँ बहारों में तुम हो खाबों में तुम हो………………………………………….. मिट …

टूट गयी अपनी ……….|गीत| “मनोज कुमार”

टूट गयी अपनी पुरानी महोब्बत रूठ गयी अपनी दीवानी महोब्बत मनाया भी हमने ना मानी महोब्बत दिल का भी हाल ना जानी महोब्बत टूट गयी अपनी………………………….. जानी महोब्बत क्या …

तुमसे है ये कैसा नाता …………|गीत | “मनोज कुमार”

तुमसे है ये कैसा नाता दिल को यही तो भाता है तेरे बिना हम मर जायेंगे मन को तू ही भाता है तुमसे है ये कैसा……………………………….तू ही भाता है …

नही सुने थे वो हमारी ……..|गीत| “मनोज कुमार”

नही सुने थे वो हमारी उसने भी अनसुनी की वो लौटे ने मौसम लौटा सपनों ने अनसुनी की हम भी थे खामोश मगर वो चेहरे से ही समझ गयी …

तुमको महोब्बत वापस…………..“मनोज कुमार”

तुमको महोब्बत वापस लाकर रहेगी गुल फिर खिलायेगी मिलाके रहेगी हमको भूलकर खुश तुम रहना सकोगे तुमको तो विरह मेरी रुलाती रहेगी जी ना सकोगे हाँ तुम सो ना …

चुपके चुपके साजन मेरे…………..“मनोज कुमार” |गीत |

चुपके चुपके साजन मेरे दिल में चले आना तेरे बगैर जाऊँगी मर दिल में चले आना उजड़े ना संसार आजा आके तू बचाना चुपके चुपके साजन मेरे दिल को …

हैरत कि बात क्या …………

हैरत कि बात क्या ………… दिल से दिल गर ना मिले ऐसे बंधन कि जात क्या जज्बातो कि न हो कदर वहां रिश्तों कि बात क्या ।। लगी जो …

सफर…

सफर… छोटा ही सही खूबसूरत था ये सफर मुक़्तलिफ रंग देखे हसीं थी सुबहें ,शायराना हर पहर दीवानगी बना मेरा साया ख्वाब के बुलबुले में मैं तैरने लगी ज़िन्दगी …