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ख़ुश्बू प्यार की….सी.एम्.शर्मा (बब्बू)….

रिश्तों में प्यार की सचाई तुम क्या जानों… कैसे होती दिल से बात तुम क्या जानों…. रहते हो तुम जो ज़मीं से सदा ही ऊपर… कैसी होती सोंधी ख़ुश्बू …

तुम्हारा साथ – शिशिर मधुकर

तुम्हारे साथ में हर दिन आसानी से कट जाता है सुख दुःख जीवन के सब सहने में मज़ा आता है मतलबी रिश्तों के लिए मगर संग मैंने छोड़ दिया …

फूलों से सजाऊँगा – शिशिर मधुकर

आईना देखो तो मैं तुमको नज़र आऊँगा बिजलियां प्यार की तेरे हुस्न पे गिराऊँगा भले ना बात करो तुम ज़माने भर से डरो तेरे ख्वाबों में मैं झुक कर …

कोई नाराज नहीं चाहिये — डी के निवातिया

कोई नाराज नहीं चाहिये   कितने अमन पसंद लोग है यहाँ किसी को कोई आवाज नही चाहिये। रसूख तो खुदा के फरिश्ते जैसा हो पर रोजा -ऐ- नमाज नही …

स्नेह सम्मान – शिशिर मधुकर

स्नेह सम्मान जो दिल में हो तो दिख जाता है झूठे चेहरों पे फरेब बड़ा साफ़ नज़र आता है कोई चुपचाप है और तुमसे कुछ नहीं कहता अक्सर मजबूरी …

जिन्दगी संग जुआ

जिन्दगी संग जुआ जिन्दगी के संग जुआ खेलता हूँ , रोज़ एक नया तजुर्बा झेलता हूँ , नीचता की भी परिसीमा होती है नेकी के नाम बदी करते देखता …

सत्ता कितनी प्यारी — डी के निवातिया

सत्ता कितनी प्यारी मेरे देश के हुक्मरानो को सत्ता कितनी प्यारी है रोज़ मरे मजदूर किसान सैनिको ने जान वारी है आदि से अंत तक का इतिहास उठाकर देख …

असली चाहत का संसार – शिशिर मधुकर

नहीं है कोई भी शिकवा जानता हूँ मैं मजबूरी एक घर बनाने में गुज़र जाती है ये उमर पूरी असली चाहत का संसार तो दिल में बसता है दिखाएं …

स्नेह धागा – शिशिर मधुकर

सुन बात धोबी की प्रभु ने सिय को त्यागा था माता के जीवन में ये पल कितना अभागा था मुश्किलें कितनी भी आईं वो नैहर नहीं लौटी प्रभु सम्मान …

शिव कहाता है – शिशिर मधुकर

मेरा अपमान करने वाले तू ये भूल जाता है इज्जत उतारने का गुर मुझको भी आता है मगर बिष को ग्रहण करना आसां नहीं होता इसको पी लेने वाला …

मेरे दुश्मन – शिशिर मधुकर

मेरे दुश्मन मैं तुझको ये साफ़ पैग़ाम देता हूँ तेरी हरकत के कारण ही तुझे ये नाम देता हूँ तुझसे निपटने के मुझ पे भी इंतज़ाम हैं सारे मगर …

छोड़ दी है………….तेरे ही लिये |गीत| “मनोज कुमार”

छोड़ दी है नौकरी भी तेरे ही लिये लगने लगे चक्कर गली तेरे ही लिये देखा तुझे गाने लगा गीत भी दिल तेरे इस मुखड़े पे ये मरने लगा …

सोशल साईट हुई मेहरबान — डी. के. निवातिया

नवयुग में लोगो पर सोशल साईट हुई मेहरबान है व्हाट्सएप, फेसबुक पर हर कोई बाँट रहा ज्ञान है सीखने वाले भी वही यंहा, सिखाने वाले भी वो ही फिर …