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शिकन तन्हाइयां – शिशिर मधुकर

मुहब्बत ज़िन्दगी में जब किसी के साथ होती है दवा हर ग़म की उस इंसा के अपने हाथ होती है जिन्हें मिलती नहीं ये नेमतें दुनिया में चाहत की …

पता चल जाता है – शिशिर मधुकर

पता चल जाता है अपना कोई जब याद करता है किसी की छवियां सीने में जो भी आबाद करता है नज़र के सामने आ जाए वो प्यारा हमकदम जल्दी …

मैं आधुनिक नारी हूँ

मै अबला नादान नहीं हूँ दबी हुई पहचान नहीं हूँ मै स्वाभिमान से जीती हूँ रखती अंदर ख़ुद्दारी हूँ मै आधुनिक नारी हूँ पुरुष प्रधान जगत में मैंने अपना …

हिंदी दिवस

मुक्त करो जंजीरों से हे व्यवस्था के सरदारों मैं हूँ हिंदी मातृभाषा मेरा रूप मिलकर संवारों घर के तिरष्कारों ने पराया बना दिया मुझको जागो युवाओं अब तुम ही …

समृद्धि

पहले मन को धोइये फिर घर-आँगन द्वार मधुर वचन बोलिये तजिये रूखा व्यवहार पावन मन से सजेगा घर-परिवार देश-समाज लक्ष्मी स्वयं ही आएँगी करेंगी समृद्ध अपार. विजय कुमार सिंह …

थोड़ी सी बेरुखी – शिशिर मधुकर

मेरी थोड़ी सी बेरुखी से ही तुम बेचैन हो गए मुझको यही सहते हुए कितने दिन रैन हो गए सोचो क्या गुजरी है मेरे तन्हा सीने पे उम्र भर …

दावत — डी के निवातिया

दावत *** मुबारक हो आपको बकरीद की दावत आई है ऊँट,गाय,भैस, बकरो की फिर सामत आई है हजरत इब्राहिम के हालात क्या थे कौन जाने जीवो पर दया के …

झूठ और पाखण्ड — डी के निवातिया

झूठ और पाखण्ड शिक्षा में कितने  भी अग्रणी हो जाइएगा भले आप मंगल और चाँद पे हो आइएगा ढोंगी बाबाओ से जब तक मुक्ति न मिले झूठ – पाखण्ड …

इंतज़ाम करो — D. K Nivatiya

इंतज़ाम करो *** विकास का दम भरते हो, कुछ जनता के भी काम करो निश दिन रेल होती डी-रेल,  इसका भी इंतज़ाम करो कितनी जिंदगियां बे-मौत चढ़ जाती है …

मरने दो — डी के निवातिया

मरने दो *** *** *** रेल पटरी से जनता की उतरी है, उतरने दो। हादसे होते है तो लोग भी मरते है, मरने दो। हम देश चलाते है हवाई …

अपना देश – डी के निवातिया

अपना देश *** *** *** अलग अलग है भाषा अपनी, अलग अलग है वेश राम चन्द्र जी जहाँ धरे थे, सन्यासी का भेष बहें प्रेम की गंगा जमुना, आपस …

बजते नहीं अब साज – शिशिर मधुकर

आती नहीं आवाज़ कोई मेरे दिल से बाहर आज सूनी पड़ी है ज़िन्दगी और बजते नहीं अब साज महफिल उजाड़ कर जो समझते हैं खुद को वीर ऐसे कमजर्फ …

ख़ता मेरी ही थी- शिशिर मधुकर

तेरी तन्हाइयों में मैंने कभी तेरा साथ ना छोड़ा काश इस बात का एहसास कर लेते तुम ही थोड़ा जिस कदर तूने मुँह फेरा है भुला के प्रीत के …