Tag: मुक्तक

तुमने मुझको छांटा था-शिशिर मधुकर

बचपन में ना जाने मुझको कितना तुमने डांटा था गलती मैं जब करता था गालों पर पड़ता चांटा था सबने पूछा जब तुमसे चुन लो एक सुन्दर सा बच्चा …

माँ की गोद बिछौना- शिशिर मधुकर

हर बच्चा अपनी माता की आँखों का नूर सलौना है उसके प्रेम के आगे जग का हर स्नेह कितना बौना है कैसी भी पीड़ा हो लेकिन नींद जहाँ आ …

ख्यालों के दरमियाँ – डी के निवातिया

  ख्यालों के दरमियाँ *** टूटे-फूटे शब्दों के खंगर जोड़-जोड़ कर ज़ज़्बातो के पत्थरों को तोड़-तोड़ कर बनाया था एक मकाँ ख्यालों के दरमियाँ गुम गए उसमे सपनो की …

मज़दूर दिवस – डी के निवातिया

मज़दूर दिवस मज़दूर दिवस पहचान बना है श्रम बलिदान का कर्म करना ही पहला धर्म हो हर एक इंसान का न जाने क्यों हीन दृष्टि से देखा जाता है …

कितना गम है – डी के निवातिया

कितना गम है *** दिल में दर्द उठता है,जुबाँ खामोश, आँखे नम है मत पूछो यारो हमसे, जिंदगी में कितना गम है किसी का पसीना भी बहे, तो खबर …

इंसानियत की सीमा – डी के निवातिया

इंसानियत की सीमा — सोया हुआ है सिंह, सियार दहाड़ मार रहा है छल-कपट की लड़ाई में शूरवीर हार रहा है जाने किस करवट बैठेगा हैवानियत का ऊँट इंसानियत …

बुलबुल-ऐ-चमन – डी के निवातिया

बुलबुल-ऐ-चमन * कफ़स-ऐ-क़ज़ा में कैद बुलबुल-ऐ-चमन अपना है बनाएंगे जन्नत-ऐ-शहर इसे लगे बस ये सपना है फ़िक्र किसे मशरूफ सब अपनी बिसात बिछाने में नियत में ,राम-राम जपना पराया …

जो प्रेम करते हैं – शिशिर मधुकर

आज भी बातों से उनकी फूल झरते हैं दिल से जुदा होते नहीं जो प्रेम करते हैं ढल गई है रात देखो दिन निकलने को रोशनी से इसमें चलो …

एक मुक्तक : न हो अब दिल्लगी दिल से…

दिखा प्रतिबिम्ब दर्पण में सहज यह भाव आया है. तुम्हारा साथ ऐ साथी हमारे मन को भाया है. समर्पित भावना हो यदि शिकायत ही कहाँ होगी, न हो अब …

ये फिसल जाएंगे सभी…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

पलकों पे आ के जो अश्क़ ठहरे हैं अभी… नमी की कमी है कदाचित इनमें अभी… शामें उल्फत की साँसों को तेज होने दे… ज़िन्दगी की तरह ये फिसल …

बचाना भी है — डी के निवातिया

आँगन — फूलों और कलियों से आँगन सजाना भी है, कीचड और काँटों से दामन बचाना भी है, महकेगा चमन-ऐ- गुलिस्तां अपना तभी, हर मौसम की गर्दिश से इसे …

यथासंभव — डी के निवातिया

यथासंभव — रक्षक,दक्षक,शिक्षक,भिक्षक सब दाम में बिकता है खरीददार अगर पक्का है तो सब कुछ मिलता है कौन कहता है सच कभी झूठा नहीं हो सकता कलयुग में तो …

धैर्य की परीक्षा – डी के निवातिया

    धैर्य की परीक्षा *** अब न खाली हो किसी माँ की गोद, कोई लाल अब न फ़ना हो कब तक देनी होगी धैर्य की परीक्षा, अब कोई …

बेरुखी -डी के निवातिया

बेरुखी *** करके बेवफाई, खुद को, नज़रें मिलाने के काबिल समझते हो बात बात पर देकर दुहाई मुहब्बत कि, हम ही से उलझते हो कहाँ से सीखा हुनर, इश्क …

मंजर – डी के निवातिया

मंजर *** हर मंजर से गुजर रहे है कुछ लोग, सियासत में अपना रूतबा जमाने को ! न जाने कितने गुलाब मसल डाले, फकत अपने नाम का गुल खिलाने …

सगा – डी के निवातिया

सगा *** वो न मेरा, न तेरा, न इसका, न उसका सगा था सैलाब हैवानियत का उसके जहन में जगा था ! परवाह कब थी उसने दुनिया में इंसानियत …

तेरे नाम – डी के निवातिया

तेरे नाम — सोचता हूँ एक ग़ज़ल तेरे नाम लिख दूँ राज़-ऐ-दिल मुहब्बत के तमाम लिख दूँ उठे गर नजरे तो रोशन ऐ आफताब कहें ज़रा झुके जो पलकें, …

बिना श्रद्धा- शिशिर मधुकर

बिना श्रद्धा आज साथी कोई जब साथ रहता है दिलों को तोड़ने वाली वो कड़वी बात कहता है चला था जिसके सहारे सोचकर मैं काटने जीवन उसकी मतलब परस्ती …

हम ही दुष्ट हो गए – डी के निवातिया

हम ही दुष्ट हो गए *** यार तमाम अपने अब रुष्ट हो गए करके माल हज़म हष्ट-पुष्ट हो गए हमने उन्हें ज़रा सा क्या रोका टोका नजरो में उनकी …

तृष्णा – शिशिर मधुकर

नदी सूखी पड़ी है जब प्यास आखिर बुझे कैसे बरस जा बदली जल्दी से बताऊँ अब तुझे कैसे पता था तुझको जब मौला मेरी तृष्णा पुरानी है बता कुछ …

शत शत नमन — डी के निवातिया

जय जवान – जय किसान के उद्घोषक भारत रत्न श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्य तिथि पर शत शत नमन २ अक्तू १९०४ – ११ जनवरी १९६६ *** …