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प्रतीक्षा…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

आखिर क्यूँ तुम मुझको तलाशते रहते हो……. बदहवास से इधर उधर भटकते रहते हो….. जीए होते निस्वार्थ प्यार में तुम एक पल भी…. कह उठते खुद कि तुम मेरे …

रोमांच — डी के निवातिया

रोमांच बदन संगमरमर है या तराशा हुआ टुकड़ा कांच सा शबनम की बूँद ढले तो लगे है तपता कनक आंच सा नजर है की उसके उत्कृष्ट बदन पर ठहरती …

कुमकुम बना के – शिशिर मधुकर

कोई सागर नहीं ऐसा ना जिसमें ज्वार आते हों वो लोचन ना आशिक के जो ना अश्रु बहाते हों ऐसी चाहत ज़माने में कभी भी सुख ना देती है …

सांसों में शामिल – शिशिर मधुकर

मुहब्बत करना आसां है निभाना है बहुत मुश्किल याद रक्खो तुम ये सच लगाओ जब कहीं भी दिल जिसको आदत हो आसानी से चेहरे भूल जाने की कभी ना …

बदन संगेमरमर — डी के निवातिया

बदन संगेमरमर बदन संगेमरमर है या तराशा हुआ टुकड़ा कांच सा शबनम की बूँद ढले तो लगे तपता कनक आंच सा नजर है की उस उत्कृष्ट जिस्म पर ठहरती …

एक नजर — डी के निवातिया

***एक नजर *** बुझती नहीं प्यास साकी अब सिर्फ जाम से दिल झूमने लगता है सूरज ढलते ही शाम से फकत एक नजर जी भर के देख लेने दो …

स्वार्थ की बातें – शिशिर मधुकर

जब रिश्तों में विश्वास ना हो केवल स्वार्थ की बातें हो कोई नहीं चाहता उस व्यक्ति से अक्सर मुलाकातें हों चाँद रहेगा तो इस अन्धकार में कुछ राहें तो …

किस्मत तुम्हारी है – शिशिर मधुकर

किसी का प्यार पाया है तो ये किस्मत तुम्हारी है वरना अब तो ज़माने में सबको अपनी खुमारी है दोस्ती रिश्ते नाते और सम्बंधो में केवल धोखा है कोई …

वो क्षण फिर से आएंगे – शिशिर मधुकर

कितने पास थे हम तुम जब भी ये सच विचारोगे दिल की गहराइयों से बस नाम मेरा ही पुकारोगे मुझे उम्मीद है जीवन में वो क्षण फिर से आएंगे …

तू ही इक हमारा है…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

कोई रिश्ता नहीं तुमसे फिर भी, तू सबसे प्यारा है…. ज़मीं से आसमान तक, सिर्फ तू ही इक हमारा है…. कर के जहां से मोहब्बत, खो दिया था सब …

अति विश्वास – शिशिर मधुकर

अति विश्वास में अक्सर यहाँ धोखा ही मिलता है सर्प कैसा भी हो वो तो केवल बिष ही उगलता है करो ना ज़िंदगी के फैसले कभी भी जल्दबाजी में …

प्यासा – शिशिर मधुकर

प्यासा हूँ तेरी दीद का किस बिधि कहूँ तुझसे ये तन्हाइयां अब तो ना सही जाती हैं मुझसे तेरा करम हो जाए ग़र इन मुश्किलों के बीच कुछ भी …

अंजान बनते हैं -शिशिर मधुकर

कभी पहलू में थे जो आज वो अंजान बनते हैं जो छाया नहीं रखते वो ही खजूरों से तनते हैं स्वार्थ भरी फितरत से पार कोई पाए भी कैसे …

मेरा पुराना घऱ

“जब कभी ज़हन में गाँव का मंज़र आया। याद  मुझको  मेरा  पुराना  घऱ  आया ।। वो  पड़ोसी,  अपनापन,  नीम की छांव । गांव  छोड़ा  क्यूँ  मैं  इस  शहर  आया …

गाथा एक वीर की — डी के निवातिया !!

मेरे दिल की सबसे अजीज मेरी एक रचना आज आपके समक्ष रख रहा हूँ , इस रचना को मैं लिखते हुए भी रोया था,,, और जब भी पढता हूँ …

सीने से लग जाओ – शिशिर मधुकर

मुझे कह दे तो कोई प्यार से सीने से लग जाओ मेरी आँखों में आँखें डाल के नींदों से जग जाओ मुहब्बत की पनाहों में सुख कुछ मिलता है …

बरसात — डी के निवातिया

बरसात *** मनभावन सावन वही, वही बरसात है। दिल में उमंग भी वही, वही जज्बात है। मेंढक की टर्र-टर्र, सोंधी माटी की खुशबु नाचते मयूर, अब कहां मिलती वो …