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ढलती सी शाम – शिशिर मधुकर

ऐ दुनियाँ वालों तुमको यहाँ ना कोई काम है प्रेम को रुस्वा कर ही तुम्हें मिलता आराम है तुम क्यों ना समझते हो यही ईश्वर का रूप है हर …

जीवन्त मूरत – शिशिर मधुकर

तुमसे कैसे कहूँ तुम मेरी कितनी ज़रूरत हो मुझे सुख चैन देने वाली एक भोली सूरत हो हर अंग में जिसके छवि दिखती है बस मेरी प्रेम के रंगो …

नालों में बहते हैं – शिशिर मधुकर

फूल जो खुशबू देते हैं अक्सर कांटों में रहते है सच्चे इंसा भी ज़माने में बस कष्टों को सहते हैं वक्त जब साथ ना दे तो आखिर क्या करे …

नाम जब चाहा – शिशिर मधुकर

मैंने नाम जब चाहा तो फिर मैं प्यार को भूला नफे नुकसान की बातों में बस मन मेरा झूला बड़े महलों में भी अक्सर अकेले लोग रहते हैं जिसने …

दिल की खोली — डी के निवातिया

खाली है दिल कि खोली इसको भर दो कुछ दौलत अपनी हमे  ईनाम कर दो नहीं चाहिये कुबेर या जमीं का टुकड़ा थोड़ी सी चाहत अपनी मेरे नाम कर …

तेरे अल्फाज – शिशिर मधुकर

तेरे अल्फाज सुनने को मैं ज्यों बेताब रहता हूँ निज मन की ये बात लो खुलकर के कहता हूँ तुम्हारे मान वर्धन से मुझको संतोष मिलता है खुशी के …

भूमिका—डी. के. निवातिया

आजकल प्रत्येक कार्य में प्रतियोगिता हो गयी भूमिका अहम् इसमें सोशल साइट की हो गयी परिवर्तन और विकास की ये कैसी लहर चली वास्तविकता क्षेत्र की जिसमे कही गुम …

इंसान कहाँ इंसान रहा (विवेक बिजनोरी)

“आज सोचता हूँ कि कैसा है इंसान हुआ, इंसान कहाँ इंसान रहा अब वो तो है हैवान हुआ कभी जिसको पूजा जाता था नारी शक्ति के रूप में, उसकी …

पाक ज्वाला – शिशिर मधुकर

तुम दावा करो कुछ भी सत्य चेहरे पे दिखता है मुहब्बत की दुनियाँ में क्या कभी झूठ बिकता है दिल में ना सुलगती हो जो नेह की पाक ज्वाला …

प्रतिघात – शिशिर मधुकर

जिसका दिल ही ना हों साफ उससे बात क्या करें करता हों जो बस प्रतिघात उसपे विश्वास क्या धरें इतने मलिन चेहरों से मेरा तो हरदम सामना हुआ आखिर …

प्रेम की धवल धार – शिशिर मधुकर

माना डगर मुश्किल है तुम साथ ना छोड़ो मुसीबत के सहचरो के दिलों को ना तोडो प्रेम की धवल धार कहीँ जाए ना पूरी सूख स्नेह के मेघों के …

रंज ओ ग़म – शिशिर मधुकर

मेरा दिल ये करता है मैं तेरे रंज ओ ग़म ले लूँ तुझे बाहों में महफूज़ रखूं तेरे गेसुओ से खेलूं मुझे तेरी मुहब्बत का गर मिल जाएगा अमृत …

जिन्ह प्रेम कियो तिन्ह ही प्रभ पायो….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)..

मैं पागल हो भया पढ़ पढ़ सारी रात…. फिर उसपे लिखता रहा ज्यूं हुई प्रभात… पढ़-पढ़ लिख-लिख के ज्ञान भयो बहुतेरो… व्यर्थ भयो सब ही जो ना समझा प्रेम …

महज व्यापार – शिशिर मधुकर

मुहब्बत जहाँ होती है वहाँ टकरार होती है न इसमें जीत होती है न कभी हार होती है हर पल जो रिश्ते में नफे नुकसान की सोचें उन लोगों …

साफ दिल से – शिशिर मधुकर

साफ दिल से जब कोई यहाँ नज़दीक आता है सपनों में विचरता है और धड़कन में समाता है मिलकर बिछड़ जाता है जब रिश्ता कोई ऐसा इंसान घुट घुट …

नया साल – शिशिर मधुकर

परिवर्तन की आशायें जब हो जाती हैं विशाल जान लो आ पहुँचा है द्वार फ़िर एक नया साल आशाओं से जन्मती है उमंग धड़कते दिलों में बनती है जिनसे …

अधूरा – शिशिर मधुकर

तुम्हें कैसे बताऊँ मैं यहाँ कितना अधूरा हूँ झूठे रिश्ते नातों संग कभी होता ना पूरा हूँ प्यार ढ़ूंढ़ा जहाँ मैंने वहाँ व्यापार भारी था तन्हा बैठा हूँ राहों …

हरसिंगार झरते हैं – शिशिर मधुकर

जिन्दगी में जो भी जन तुमसे प्यार करते हैं वो बोलते हैं जब तो बस हरसिंगार झरते हैं मिलते हैं ऐसे लोग गर जीवन में किसी को लाखो रंग …

एहसास – शिशिर मधुकर

मुहब्बत में खुदा तुमको यहाँ जिसने बनाया है अपनी बेरुखी से तुमने उसका दिल दुखाया है ज़रा ठहरो आँख मीँचो और चुपचाप ये सोचो तेरे हर रोये रोये में …

मधुर मुस्कान – शिशिर मधुकर

तुमको मुझ से मुहब्बत है ज़माने भर से ये कह दो तेरी पेशानी को चूमू मैं झुकी नजरों से वो शह दो देख कर जिसको बागो में हजारों फूल …

पैरों में ज़ंजीरें – शिशिर मधुकर

इन पैरों में ज़ंजीरें हैं रिश्ते नातों की भारी कह दो कैसे कर लूँ फ़िर मैं खोज तुम्हारी तेरा प्रेम सचिदानंद सागर हैं एक अनोखा बड़ी देर से समझ …