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प्रेम की कसमें – शिशिर मधुकर

Original मैं तुमको बुरा कहती हूँ लोग ये बताएँगे तुम दूर रहो मुझसे ये ही सब सिखाएँगे नादां हैं सभी लोग जो ये जानते नहीं हैं प्रेम की कसमें …

कुदरत का करिश्मा – शिशिर मधुकर

मैं जानती हूँ तुम बस मुझे देखना चाहते हो कैसे कहूँ तुम भी तो मेरे ख्वाबों में आते हो अचरज नहीं बात ये कुदरत का करिश्मा है हर पल …

मेरी मजबूरी – शिशिर मधुकर

भूली नहीं हूँ तुमको पर जानो मेरी मजबूरी मैं बस तुमको चाहती हूँ कहना नहीं ज़रूरी मैं तेरी दो बाहों में अब चाहे ना सिमट पाऊँ रूहों के बीच …

जुर्म—डी के निवातिया

वो करते सवाल तो जवाब हम देते हर जुर्म अपने सर आँखों पर लेते कम से कम गुनाह तो बताया होता फिर चाहे सजा-ऐ-मौत क्यों न देते।। ! ! ! …

नज़रों से मुहब्बत – शिशिर मधुकर

हूक सी उठती है तू जब भी मेरे पास होता है नज़रों से मुहब्बत का मजा तो खास होता है तुझे देखती हूँ जब भी ये दो निगाहें बचा …

एहसास-ऐ-गैर — डी के निवातिया

मुहब्बत के नाम का पाठ वो दिन रात रटता है। जरा सा छेड़ दो तो ज्वालामुखी सा फटता है।। क्या हालात हो गये आज दोस्ताना-ऐ-जहाँ के जिसे मानो अपना …

अरमां – शिशिर मधुकर

मुहब्बत पास है जिनके उनके चेहरे चमकते हैं अँधेरी रात में अरमां भी जुगनुओ से दमकते हैं लाख कोशिश करे दुनियाँ रूहों को सताने की प्रेम किश्ती में बैठे …

खुशबू सी-शिशिर मधुकर

तन्हाई में तुम जब भी कहीं जाओगे मेरी छवियों को सीने में दबा पाओगे जो बसती थी खुशबू सी तेरी साँसों में कैसे आखिर उसे पूरी तरह भुलाओगे शिशिर …

बेफिक्र सा – शिशिर मधुकर

तुम मुस्काते हो तो मुझको पता चल जाता है मेरा ख़याल अकेले में अब भी तुम्हे सताता है लाख कोशिश करूँ मैं बेफिक्र सा दिखाने की तेरी चाहत का …

तेरी यादों के सहारे – शिशिर मधुकर

तुझ से बात ना हो तेरी तस्वीर देख लेता हूँ कुछ इस तरह ही निज मन को सुकूँ देता हूँ बड़ी दूर हैं किनारे और लहरें भी मचलती हैं …

पीर का पानी – शिशिर मधुकर

यूँ ही नहीं मैं तुमको नित एक संदेशा भेजता हूँ तेरी आँखों के दर्पण में खुद की छवि देखता हूँ इस दर्पण पे कहीं धूल का गुबार जम ना …

शिकवे गिले – शिशिर मधुकर

शिकवे गिले मुझे तुझसे बहुत हैं ऐ ज़िन्दगानी मेरी कुछ तो बता दे मेरे लिए आखिर क्या मंशा है तेरी जिसके लिए भी मैंने सब कुछ दाँव पर लगा …

मुझको भी थाम ले -शिशिर मधुकर

ज्यों थामा था मैंने तुमको कोई मुझको भी थाम ले धड़कनों में बसा ले अपनी रात दिन मेरा ही नाम ले बड़ी किस्मत से यहाँ मिलते हैं ऐसे साथी …

कातिल लुटेरा -शिशिर मधुकर

जिन्हें भी अपने सीने पर मैंने एक गुल सा सजाया था सभी ने मौका पा जहरीला काँटा ही मुझको चुभाया था लाख कोशिश करी मिल जाए मुझको सच्चा हमसफ़र …

काश तुम साथ में होते – शिशिर मधुकर

काश तुम साथ में होते तो जीवन खुशनुमा होता तन्हाई का गहरा दाग़ तब ना कोई बदनुमा होता तेरी उल्फ़त में हर शै को मैं फिर कुर्बान कर देता …