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हम अपनी कलम से हिंदुस्तान लिखते है …. (पीयूष राज)

मुक्तक हम ना हिन्दू ना मुसलमान लिखते है हम ना गीता ना कुरान लिखते है दिल की जज्बातो को शब्दों में पिरोकर हम अपनी कलम से हिंदुस्तान लिखते है …

वायदा मेरा — डी के निवातिया

वायदा मेरा ! जाने क्यों मिटाने में लगा है मुझको कायदा तेरा मेरे मिट जाने में दिखा क्या तुझको फायदा तेरा मिट भी गया तो दफ़न हो जाऊंगा तेरे …

मिलन की आस – शिशिर मधुकर

अब मेरी ये बेरुखी ना तुमको रास आएगी अपने प्रणय की हर घड़ी तुमको सताएगी तन्हाइयों में जब कभी मन बेचैन सा होगा मुझसे मिलन की आस ही तुमको …

अगर जो साथ मिल जाए – शिशिर मधुकर

तेरी सांसों की खुशबू ना कभी जीवन में भूलूँगा तेरे रुखसार की लाली को अधरों से मैं छू लूँगा अगर जो साथ मिल जाए मुझे तेरी मुहब्बत का मैं …

तुमने जब डोर ना थामी – शिशिर मधुकर

तुमने जब डोर ना थामी मुझे तो दूर जाना था ज़माने भर की रुसवाई से तुमको बचाना था भले ही लाख दुख सहता रहूँ मैं अपने सीने पे तुमसे …

सहज पके सो ही मीठा होये…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

जीवन की राह कठिन, होये तो होये… जीओ शान से मन निर्मल जब होये… बेसबर न हो हर पल तुम फल को… जो सहज पके सो ही मीठा होये…. …

तन्हा — डी के निवातिया

तन्हा -♦-◊-♦- बड़ी तन्हा गुज़री है ये जिंदगी तेरे बिन खुशहाल तू भी नहीं रहा कभी मेरे बिन ! एक दूजे कि आरज़ू में गुज़री उम्र तमाम तजवीज़ बहुत …

प्यार तो बस महकता महकाता है…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…..

प्यार  का  अंदाज़  मैंने  तुम  से है सीखा…. नज़रें  चुराना भी  तो  तुम्हीं  से है सीखा… इज़हारे  जज़्बात  ब्यान कैसे करूं तेरा… सिले होंठों से आँखों में मुस्काना सीखा…. …

चुप से रहते हैं – शिशिर मधुकर

हमेशा बोलने वाले हम आज चुप से रहते हैं तुम्हें कैसे बताएं दिल में कितनी पीर सहते हैं हमें तो मिल के लूटा है यहाँ पे ख़ास अपनों ने …

लकीर – शिशिर मधुकर

आधी अधूरी चाहत यहाँ बस पीर देती है बेबसी में डूबी हुई अक्सर तकदीर देती है ज़िन्दगी जिसके निकट तन्हा सी रहती है ना मिटने वाली वो तो एक …

घावों की पीड़ा – शिशिर मधुकर

हर तरफ़ आग नफ़रत की यहाँ मुझको जलाती है मेरी रूह चैन पाने को ही तो बस तुझको बुलाती है इस कदर मुझको तोड़ा है ज़माने भर में अपनों …

राहत नहीं होती – शिशिर मधुकर

बदल जाए समय के संग जो चाहत नहीं होती तन्हा रहना पड़े जीवन में तो राहत नहीं होती काश उनसे उल्फ़त की हम आदत बदल पाते ये रूह इस …

ठेस — डी के निवातिया

ठेस ◊♦◊♦◊ जिसको जितना चाहा उससे उतना दूर हो गये जब-जब किया हौंसला तब-तब मज़बूर हो गये उनकी नज़रो ने हमें पत्थर से शीशा बना डाला    लगी क्या …

दोस्त – शिशिर मधुकर

बुरे वक्त में भी जो तुम्हारा साथ ना छोड़े और राहों से हटा दे सब मुश्किल भरे रोड़े किस्मत से मिलता है जीवन में ऐसा दोस्त ऐसे रिश्ते को …

विश्वास पूरा है – शिशिर मधुकर

भले तुम दूर हो मुझसे मगर विश्वास पूरा है तेरे बिन ये सपनों का जहाँ एकदम अधूरा है सुरक्षा तेरी हस्ती की सदा नज़दीक रहती है किसी भी आँख …

गुणगान — डी के निवातिया

गुणगान *** तुम अपनों का गुणगान करो हम अपनों का गुणगान करें आओ मिलजुलकर हम तुम अहले वतन का उत्थान करें !!   डी के निवातिया