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मेरी नाराज़गी – शिशिर मधुकर

मेरी नाराज़गी को तुम नहीं जब मोल देती हो निष्ठुर सी बन कड़वी बातें सारी बोल देती हो वो पल मुझे इस जीवन में ये महसूस कराते हैं मानो …

मुहब्बत किस कद्र बदनाम हुई — डी के. निवातिया

ना पूछो मुहब्बत किस कद्र बदनाम हुई फ़ज़ीहत आजकल जमाने में आम हुई जिस्म के भूखे है लोग, प्रेम क्या जाने सुबह मिले, शाम तक काम तमाम हुई !! …

श्रद्धा – शिशिर मधुकर

श्रद्धा अगर सच्ची है तो कभी होंगी ना दूरियां बिन कहे समझेगा कोई तब सकल मजबूरियां रुकमनी लड़ती रही और वो ना कभी दे सकी राधा और मीरा से …

प्रेम का अंकुर – शिशिर मधुकर

मैं अजनबी लोगों के साथ घर में रहता हूँ बोझिल हुए रिश्तों के सारे बोझ सहता हूँ हर अंग चोटिल है मेरा अपनों के तीरों से दिल की पीर …

होली मनाते -शिशिर मधुकर

जिन्दगी में काश ऐसे हसीन लम्हे भी आते तुझे आगोश में ले गालों पर हम रंग लगाते तुझे बस प्रेम कर हाथों से तेरा श्रॄंगार करते कुछ इस तरह …

होली – शिशिर मधुकर

खुशियों का त्योहार है होली रस प्रेम का चहुं दिस बरसे मेरे साजन हैं दूर देश में प्यासा जियरा मिलन को तरसे लाख बताए मुझे कोई उनके ना आ …

फ़कत प्यार – शिशिर मधुकर

तू हँसती है तो मैं गुलाबों को झरते देखता हूँ तेरी महफिल में फ़कत प्यार भरते देखता हूँ मैंने नज़रों से जब भी तुझे कोई पैगाम दिया तुझे नज़रों …

खुशियों के हरसिंगार – शिशिर मधुकर

जो अपने दिल की गहराई से तुमको प्यार करते हैं उनके पहलू में तुमसे खुशियों के हरसिंगार झरते हैं डुबा दो सुखा दो और कितना उनको जला दो तुम …

निज धर्म – शिशिर मधुकर

कोई जब बात कर तुमसे हरदम मुस्कुराता है कुछ अनकहे एहसासों को सीने में छुपाता है कभी ऐसा भी होता है फल आता ना पेड़ों पर छाँव देने का …

प्रेम की कसमें – शिशिर मधुकर

Original मैं तुमको बुरा कहती हूँ लोग ये बताएँगे तुम दूर रहो मुझसे ये ही सब सिखाएँगे नादां हैं सभी लोग जो ये जानते नहीं हैं प्रेम की कसमें …

कुदरत का करिश्मा – शिशिर मधुकर

मैं जानती हूँ तुम बस मुझे देखना चाहते हो कैसे कहूँ तुम भी तो मेरे ख्वाबों में आते हो अचरज नहीं बात ये कुदरत का करिश्मा है हर पल …

मेरी मजबूरी – शिशिर मधुकर

भूली नहीं हूँ तुमको पर जानो मेरी मजबूरी मैं बस तुमको चाहती हूँ कहना नहीं ज़रूरी मैं तेरी दो बाहों में अब चाहे ना सिमट पाऊँ रूहों के बीच …

जुर्म—डी के निवातिया

वो करते सवाल तो जवाब हम देते हर जुर्म अपने सर आँखों पर लेते कम से कम गुनाह तो बताया होता फिर चाहे सजा-ऐ-मौत क्यों न देते।। ! ! ! …

नज़रों से मुहब्बत – शिशिर मधुकर

हूक सी उठती है तू जब भी मेरे पास होता है नज़रों से मुहब्बत का मजा तो खास होता है तुझे देखती हूँ जब भी ये दो निगाहें बचा …

एहसास-ऐ-गैर — डी के निवातिया

मुहब्बत के नाम का पाठ वो दिन रात रटता है। जरा सा छेड़ दो तो ज्वालामुखी सा फटता है।। क्या हालात हो गये आज दोस्ताना-ऐ-जहाँ के जिसे मानो अपना …

अरमां – शिशिर मधुकर

मुहब्बत पास है जिनके उनके चेहरे चमकते हैं अँधेरी रात में अरमां भी जुगनुओ से दमकते हैं लाख कोशिश करे दुनियाँ रूहों को सताने की प्रेम किश्ती में बैठे …

खुशबू सी-शिशिर मधुकर

तन्हाई में तुम जब भी कहीं जाओगे मेरी छवियों को सीने में दबा पाओगे जो बसती थी खुशबू सी तेरी साँसों में कैसे आखिर उसे पूरी तरह भुलाओगे शिशिर …

बेफिक्र सा – शिशिर मधुकर

तुम मुस्काते हो तो मुझको पता चल जाता है मेरा ख़याल अकेले में अब भी तुम्हे सताता है लाख कोशिश करूँ मैं बेफिक्र सा दिखाने की तेरी चाहत का …

तेरी यादों के सहारे – शिशिर मधुकर

तुझ से बात ना हो तेरी तस्वीर देख लेता हूँ कुछ इस तरह ही निज मन को सुकूँ देता हूँ बड़ी दूर हैं किनारे और लहरें भी मचलती हैं …