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सगा – डी के निवातिया

सगा *** वो न मेरा, न तेरा, न इसका, न उसका सगा था सैलाब हैवानियत का उसके जहन में जगा था ! परवाह कब थी उसने दुनिया में इंसानियत …

तेरे नाम – डी के निवातिया

तेरे नाम — सोचता हूँ एक ग़ज़ल तेरे नाम लिख दूँ राज़-ऐ-दिल मुहब्बत के तमाम लिख दूँ उठे गर नजरे तो रोशन ऐ आफताब कहे ज़रा झुके जो पलके, …

बिना श्रद्धा- शिशिर मधुकर

बिना श्रद्धा आज साथी कोई जब साथ रहता है दिलों को तोड़ने वाली वो कड़वी बात कहता है चला था जिसके सहारे सोचकर मैं काटने जीवन उसकी मतलब परस्ती …

हम ही दुष्ट हो गए – डी के निवातिया

हम ही दुष्ट हो गए *** यार तमाम अपने अब रुष्ट हो गए करके माल हज़म हष्ट-पुष्ट हो गए हमने उन्हें ज़रा सा क्या रोका टोका नजरो में उनकी …

तृष्णा – शिशिर मधुकर

नदी सूखी पड़ी है जब प्यास आखिर बुझे कैसे बरस जा बदली जल्दी से बताऊँ अब तुझे कैसे पता था तुझको जब मौला मेरी तृष्णा पुरानी है बता कुछ …

शत शत नमन — डी के निवातिया

जय जवान – जय किसान के उद्घोषक भारत रत्न श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की पुण्य तिथि पर शत शत नमन २ अक्तू १९०४ – ११ जनवरी १९६६ *** …

गुनगुनी सी धूप — डी के निवातिया

गुनगुनी सी धूप शरद ऋतू में पीली सुनहरी गुनगुनी सी धूप कुहासे की श्वेत चादर में लिपटे रवि का रूप फुर्रफुराती कलँगी में डाल-डाल फुदकते पंछी अच्छा लगे अलसायी …

इक्कीसवीं सदीं का अट्ठारवां साल

इक्कीसवीं सदीं का अट्ठारवां साल *** इक्कीसवीं सदीं के, अठ्ठारवे साल का, जवानी में कदम देखेगी दुनिया, है कितना, मेरे वतन कि रवानी में दम दुश्मन, कितना भी कोशिश …

एक काम करे – डी के निवातिया

एक काम करे आओ मिलजुलकर एक काम करे मन के मैल का काम तमाम करे न रहे कोई गिला शिकवा आपसी तुम हमारा हम तुम्हारा नाम करे !! -*-*- …

आबरू कैद है — डी के निवातिया

आबरू कैद है @ आबरू कैद है हवा के झोंको में उसे बंद ही रहने दो हो न जाए सरेआम,खुशबू तंग है, तंग ही रहने दो बिसात न पूछो …

इंसानी फितरत — डी के निवातिया

इंसानी फितरत @ अपने पराये के फेर में दुनिया रहती है इंसानी फितरत है ये मेरी माँ कहती है हर दुःख दर्द का इलाज़ है आत्ममंथन कहने को भावो …

इंसानियत बड़ी — डी के निवातिया

इंसानियत बड़ी *** मंदिर बने या मस्जिद इस पर बहस लड़ी है ईश्वर रहेगा या अल्लाह इस पर बात अडी है जब पूछा जरूररतमंद, भूखे-प्यासे इंसान से बोला, मिले …

सच्चा प्यार — डी के निवातिया

सच्चा प्यार *** जिस ह्रदय में किसी को सराहने के पनपते विचार नहीं उसको भी सराहना पाने का बनता कोई अधिकार नहीं निसन्देह: त्याग के यथार्थ भाव का तात्पर्य …

भ्रम….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

चहुँ ओर नगाड़ों का शोर ही शोर बस सुनता है… बिजलियाँ चमकती हैं, ज्वार बादलों में उठता है…. भावों के धारों में, डूब जाते हैं तैराक भी कभी…. लुट …

लकीर के फकीर — डी के निवातिया

लकीर के फकीर ! अब से अच्छा तो, कल परसो का बीता जमाना था अनपढ़, लाचारी में, लकीर के फकीर बन जाना था क्या हुआ, पढ़-लिखकर, चाँद या मंगल …

हम अपनी कलम से हिंदुस्तान लिखते है …. (पीयूष राज)

मुक्तक हम ना हिन्दू ना मुसलमान लिखते है हम ना गीता ना कुरान लिखते है दिल की जज्बातो को शब्दों में पिरोकर हम अपनी कलम से हिंदुस्तान लिखते है …

वायदा मेरा — डी के निवातिया

वायदा मेरा ! जाने क्यों मिटाने में लगा है मुझको कायदा तेरा मेरे मिट जाने में दिखा क्या तुझको फायदा तेरा मिट भी गया तो दफ़न हो जाऊंगा तेरे …

मिलन की आस – शिशिर मधुकर

अब मेरी ये बेरुखी ना तुमको रास आएगी अपने प्रणय की हर घड़ी तुमको सताएगी तन्हाइयों में जब कभी मन बेचैन सा होगा मुझसे मिलन की आस ही तुमको …

अगर जो साथ मिल जाए – शिशिर मधुकर

तेरी सांसों की खुशबू ना कभी जीवन में भूलूँगा तेरे रुखसार की लाली को अधरों से मैं छू लूँगा अगर जो साथ मिल जाए मुझे तेरी मुहब्बत का मैं …