Tag: मुक्तक

भँवर – डी के निवातिया

  भँवर से निकलूँ तो किनारा मिले, ज़िंदगी को जीने का सहारा मिले बड़ी उलझन में है हर एक लम्हा काश किसी अपने का सहारा मिले !! ! डी …

नया बवाल – डी के निवातिया

नया बवाल ! न जाने लोगो ने जहन में क्या पाल रखा है, जिसे देखो सबके पास नया बवाल रखा है, फिक्रमंद जो दिखते ज्यादा मुल्क के लिए उन्होने …

दर्द किसी का – डी के निवातिया

दर्द किसी का कोई जब समझने लगे समझो आदमियत उसकी जगने लगे शराफत के आसमान में कुहासा घना है हैवानियत की गर्द भी कुछ छटने लगे !! ! ! …

समीक्षा- डी के निवातिया

समीक्षा *** संसद की गलियां भी कुछ अब तंग होनी चाहिए हुक्मरानो के खिलाफ भी एक जंग होनी चाहिए हकीकत में जो पा रहे क्या सच में पाने लायक …

मर्यादा पुरुषोत्तम राम – डी के निवातिया

मर्यादा पुरुषोत्तम राम *** मेरे रोम रोम में बसने वाले राम तुमने सुधारें सबके बिगड़े काम साक्षात् मर्यादा के तुम हो रक्षक तुम से सुबह मेरी तुम से शाम …

जी भर के इठलाती हूँ – शिशिर मधुकर

जब जब तुम पर मैं अपने अधिकारों को जतलाती हूँ तुम मेरे हो सब लोगों को इस सच को ही बतलाती हूँ मेरी बचकाना बातों पे जब भी तुम …

कल्पना का कोई छोर नहीं – डी के निवातिया

कल्पना का कोई छोर नहीं सृजन का इसके ठोर नहीं बिना पंख यह उड़े गगन में इसके आगे कोई और नहीं !! ! ! ! स्वरचित : डी के …

तुम्हारी अदा – डी के निवातिया

तुम्हारी अदा *** इतना प्यार करते हो, कभी न जताते हो तुम यदा कदा ही सही मगर, बहुत सतातें हो तुम कैसे न जां निसार करें हम तुम्हारी अदाओं …

मुझसे जीया नहीं जाता – शिशिर मधुकर

तेरे बिन इस ज़माने में मुझसे जीया नहीं जाता ज़हर का घूंट तन्हाई का भी ये पीया नहीं जाता लाख चाहा मगर ये घाव दिल के रिसते जाते हैं …

आईना तुम ज़रा देखो – शिशिर मधुकर

मुहब्बत कर तो ली तुमने मगर अब पैर खींचे हैं दर्द इतना हुआ सोचो आँख हम अब भी मींचे हैं आईना तुम ज़रा देखो खिली सूरत जो दिखती है …

जनसंख्या विस्फोट – शिशिर मधुकर

जनसंख्या विस्फोट है एक वोट का सारा खेल भारत का इसके कारण ही निकल रहा है तेल जाहिल जनता आँखें मूंदे भार बढ़ाती जाती है और अधिक भारत भूमि …

बिना तेरे – शिशिर मधुकर

मुहब्बत कर जो ली तुमसे कहो अब मैं रुकूं कैसे फ़कत डर कर ज़माने से कहो अब मैं झुकूं कैसे बिना तेरे मेरे जीवन में कोई खुशियां ना रहती …

मनवा तो हर पल पास था – शिशिर कुमार

मोहन भी दीवाने हो गए राधा में कुछ तो खास था दो बदन हों चाहे उनके मनवा तो हर पल पास था हर व्यक्ति को हर व्यक्ति से प्रीत …

आसक्ति – शिशिर मधुकर

राधा से पूरा प्रेम किया फिर मथुरा को निकल गए प्रेम की इस आसक्ति से तो केवल प्रेम ही बच पाया योगीराज ने कर्मयोग की शिक्षा संसार को दे …

जब प्रेम मिलेगा राधा सा – शिशिर मधुकर

जब प्रेम मिलेगा राधा सा कान्हा मोहन हो जाता है असली घी मिल जाने पर हलवा सोहन हो जाता है जो स्वार्थ बात में हावी हो और झूठ सदा …

चंदन की खुशबू – शिशिर मधुकर

मुझे चंदन की खुशबू सी तेरी सांसों में लगती है तेरी मुस्कान मुझको जाने क्यों धीरे से ठगती है तू नज़रों से मुझे जब भी ज़रा सा प्रेम करती …

माँ बाप का प्यार – डी के निवातिया

माँ बाप का प्यार *** किसी ने बेगैरत कहा, किसी ने पाप का प्यार न पूछो कितना महंगा ,पड़ा है आप का प्यार सारी दुनिया खोजी मैंने सुख दुःख …

ईर्ष्या को मन से त्याग दो – शिशिर मधुकर

खुशियां पानी है जीवन में ईर्ष्या को मन से त्याग दो झगडे फ़साद पर पानी डालो उनको ना कोई आग दो प्रेम ही जीवन बगिया में सुख की वर्षा …

शहर की आबो-हवा – डी के निवातिया

शहर की आबो-हवा रुक सा गया है वक़्त क्यूँ थम सा गया है रवानी से बहता लहू, अब जम सा गया है कुछ तो गड़बड़ है, शहर की आबो-हवा …

केवल निगाहों में – शिशिर मधुकर

मुहब्बत बह रही है तेरे मेरे बीच राहों में चलो लेलें एक दूजे को अपनी पनाहों में ज़माने को बताएंगे नहीं अपना ये रिश्ता साझा करेंगे खुशी अब केवल …