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चिड़िया

शाम बढ़ती जा रही थी बेचैनी उमड़ती जा रही थी शाख पर बैठी अकेली दूर नजरों को फिराती कुछ नजर आता नहीँ फिर भी फिराती चीं चीं करती मीत …

ख़्वाब ।

तूने कैसी नज़र से देखा, आकर के मेरे ख़्वाब में? तेरे मुताल्लिक, सारे ख़्वाब, जल गए मेरे ख़्वाब में…! मुताल्लिक = संबंधित; मार्कण्ड दवे । दिनांकः १६ नवम्बर २०१६.

साथ ।

बुरे वक़्त में, साथ दिया था जिन-जिन का, हर वक़्त मैंने, कह कर, आज धतकार दिया, सब ने, `हम तुम्हें जानते नहीं..!` धतकारना = अपमानित करना; मार्कण्ड दवे । …