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आहें सी भरते हैं -शिशिर मधुकर

फूल कितने भी सुन्दर हों मगर शाखों से झरते हैं दर्द से बच नहीं पाते….मुहब्बत जो भी करते हैं कभी वो पास थे अपने तो मन खुशियों में डूबा …