Tag: प्रेम सरिता

खता मेरी ना थी कोई – शिशिर मधुकर

मुहब्बत हो गई तुमसे खता मेरी ना थी कोई खुदा ने चाहा जो इस जहाँ में होता है वो ही नहीं होता है सबके भाग में प्यार का मिलना …

एक रैन मिल जाए – शिशिर मधुकर

तू बाहों में अगर भर ले मुझे तो चैन मिल जाए बड़े नज़दीक से तेरे नैनॊं से मेरे नैन मिल जाए बड़ी तन्हा सी गुजरी है अब तलक जिंदगी …

मुस्कान फिर भी आए – शिशिर मधुकर

मुसीबत में जां फँसी हो पर मुस्कान फिर भी आए काश ऐसी मुहब्बत मुझको इस जहाँ में मिल जाए कुछ पाने या खोने से कोई सुख दुःख तब ना …

ये नज़रें ना हिलती हैं- शिशिर मधुकर

चाहे कुछ भी मिले मुझको जो खुशी तुझसे मिलती है ऐसा लगता है ज्यों मानो जूही की कलियाँ खिलती है मिलन दिल का किसी से जब रब की मर्ज़ी …

सदा दूरियां रहीं – शिशिर मधुकर

तेरे ख़याल बिन मेरे जीवन में कुछ नहीं याद आती हैं वो बातें जो तूने मुझे कहीं कैसे अजीब खेल हैं ज़िन्दगी में पर यहाँ दिल के करीब लोगों …

तेरा जो साथ मिलता – शिशिर मधुकर

तेरा चेहरा जो दिख जाता वहीँ बरसात हो जाती बिना बोले ही नज़रो से दिलों की बात हो जाती अगर तुम चाँद के जैसा खुद का श्रृंगार कर लेते …

लग गया है…………. रोग सजना |गीत| “मनोज कुमार”

लग गया है प्यार का ये रोग सजना जाता नही कैसा है ये रोग सजना लाइलाज बीमारी है तड़पूँ सजना लग गया है तुमसे ये दिल सजना लग गया …

मंजिल बुलाती है – शिशिर मधुकर

तड़प ख़त्म होती नहीं कोई मंजिल बुलाती है किसकी तमन्ना आखिर मुझे हरदम सताती है जब तक मिलन होगा ना पूर्ण तरसूंगा मैं यूँ ही बिछडी हुई कोई रूह …

फूलों की बहार – शिशिर मधुकर

ज़िन्दगी बस जिनके लिए व्यापार है उनको यहाँ मिलता ना कभी प्यार है आपस में दिल की जब ख़बर ना लगे उस घर में फिर रहती सदा तकरार है …

लो अब छोड़ दिया – शिशिर मधुकर

तुमको मनाना हमने लो अब छोड़ दिया ख्वाबों में चले आना लो अब छोड़ दिया तेरी तंहाइया बस तुझको ही मुबारक हों हमने ये दिल दुखाना लो अब छोड़ …

चित्तचोर — डी के निवातिया

+++ चित्तचोर +++ —————-@@@————— चित्तचोर का चित्त चुराती   चंचल चितवन चपल चकोर चंद्र चांदनी की चकाचौंध में चैन चुरा गयी रमणी चोर !! चतुर चक्षु के चंचु-प्रहार से   …

दिखता शिवाला है – शिशिर मधुकर

तुम्हें मैंने सम्भाला है मुझे तुमने सम्भाला है एक दूसरे के दुःखों का भी हल निकाला है पापी लोगों को प्रेम में व्याभिचार दिखता है साधुओं को इसमें मगर …

जो अंतःकरण में ठान लेता है – शिशिर मधुकर

कोई जब दिल की गहराई से तुमको मान लेता है मुहब्बत क्या बला है अच्छी तरह वो जान लेता है लाख कोशिश करे फिर कोई दूजा साथ पाने की …

आँखें नहीं रोईं – शिशिर मधुकर

मुझको ना थी दरकार एक तेरे सिवा कोई तेरे बिन तन्हा रातों में मेरी नींदें भी हैं खोईं सबको कह सकता नहीं ये ग़म भी ऐसा है दिल दुखता …