Tag: प्रेम सरिता

खुदा जितना सिमरते थे – शिशिर मधुकर

तुमसे मिलने की खातिर ही तो हम इतना संवरते थे जाने मन जान लो हम तुम से प्यार कितना करते थे तुम्हारे मुस्कुराते चेहरे का जब हसी दीदार होता …

मुहब्बत चीज़ ऐसी है (2)- शिशिर मधुकर

मुहब्बत चीज़ ऐसी है करती मेहरबानियां हरदम ज़िन्दगी रूठ जाती है अगर हों तन्हाईयां हरदम दूर तुम हो गए मुझ से ये सितारों की मर्जी थी फिर भी रहती …

गुजरे लम्हे – शिशिर मधुकर

मेरे नगमों को वो पढ़ते हैं तो घबरा से जाते हैं गुजरे लम्हे कई लफ्जों में पा शरमा से जाते हैं सम्भल के सोचते है जब उमंगे मन में …

मुहब्बत चीज़ ऐसी है – शिशिर मधुकर

मुहब्बत चीज़ ऐसी है सभी को चाहिए हरदम ज़िंदगी रुठ जाती है अगर हो जाती है ये कम दूर तुम हो गए मुझ से ये सितारों की मर्जी थी …

गुजरे वक्त की याद…………………रुलाती है |गीत| “मनोज कुमार”

गुजरे वक्त की याद याद आती है | चुपसा रहता है दिल वो रुलाती है || जबसे छीनी है प्यार की दौलत | बनके हम तो फ़क़ीर बैठे है …

हर पल सिमरते थे – शिशिर मधुकर

तुमसे मिलने की खातिर ही तो हम सजते संवरते थे जाने मन जान लो हम तुम से कितना प्यार करते थे तुम्हारे मुस्कुराते चेहरे का जब हसी दीदार होता …

श्रद्धा – शिशिर मधुकर

श्रद्धा अगर सच्ची है तो कभी होंगी ना दूरियां बिन कहे समझेगा कोई तब सकल मजबूरियां रुकमनी लड़ती रही और वो ना कभी दे सकी राधा और मीरा से …

मुक़ाम ए बन्दगी – शिशिर मधुकर

मुहब्बत की झलक देखी पर ना देखी है दीवानगी तूफ़ान में वो डगमगा गए उनसे उम्मीदें जब जगीं उनकी तस्वीर दिल दिमाग में कुछ ऐसी बस गई लाख चाहा …

होली – शिशिर मधुकर

खुशियों का त्योहार है होली रस प्रेम का चहुं दिस बरसे मेरे साजन हैं दूर देश में प्यासा जियरा मिलन को तरसे लाख बताए मुझे कोई उनके ना आ …

फ़कत प्यार – शिशिर मधुकर

तू हँसती है तो मैं गुलाबों को झरते देखता हूँ तेरी महफिल में फ़कत प्यार भरते देखता हूँ मैंने नज़रों से जब भी तुझे कोई पैगाम दिया तुझे नज़रों …

तेरी सोहबत – शिशिर मधुकर

मेरी नज़रों ने ही तुमको एक हसी मूरत बनाया है देख के मेरी मुहब्बत ख्याल अब सबको आया है तुम्हारा हाथ जब पकड़ा तन्हाई मन में हावी थी तेरे …

खुशियों के हरसिंगार – शिशिर मधुकर

जो अपने दिल की गहराई से तुमको प्यार करते हैं उनके पहलू में तुमसे खुशियों के हरसिंगार झरते हैं डुबा दो सुखा दो और कितना उनको जला दो तुम …

निज धर्म – शिशिर मधुकर

कोई जब बात कर तुमसे हरदम मुस्कुराता है कुछ अनकहे एहसासों को सीने में छुपाता है कभी ऐसा भी होता है फल आता ना पेड़ों पर छाँव देने का …

प्रेम की कसमें – शिशिर मधुकर

Original मैं तुमको बुरा कहती हूँ लोग ये बताएँगे तुम दूर रहो मुझसे ये ही सब सिखाएँगे नादां हैं सभी लोग जो ये जानते नहीं हैं प्रेम की कसमें …

कुदरत का करिश्मा – शिशिर मधुकर

मैं जानती हूँ तुम बस मुझे देखना चाहते हो कैसे कहूँ तुम भी तो मेरे ख्वाबों में आते हो अचरज नहीं बात ये कुदरत का करिश्मा है हर पल …

मेरी मजबूरी – शिशिर मधुकर

भूली नहीं हूँ तुमको पर जानो मेरी मजबूरी मैं बस तुमको चाहती हूँ कहना नहीं ज़रूरी मैं तेरी दो बाहों में अब चाहे ना सिमट पाऊँ रूहों के बीच …

नज़रों से मुहब्बत – शिशिर मधुकर

हूक सी उठती है तू जब भी मेरे पास होता है नज़रों से मुहब्बत का मजा तो खास होता है तुझे देखती हूँ जब भी ये दो निगाहें बचा …

अरमां – शिशिर मधुकर

मुहब्बत पास है जिनके उनके चेहरे चमकते हैं अँधेरी रात में अरमां भी जुगनुओ से दमकते हैं लाख कोशिश करे दुनियाँ रूहों को सताने की प्रेम किश्ती में बैठे …