Tag: प्रेम सरिता

घाव तन्हाई का- शिशिर मधुकर

मुहब्बत का सुकूँ सबको कहाँ जीवन में मिलता हैं चमन पा लेने भर से तो ना उसमें फूल खिलता हैं उमंगे मर चुकी जिनकी और जहाँ जोश ठण्डा हो …

मुसीबत – शिशिर मधुकर

मुहब्बत भी करना बना अब मुसीबत नाराज़ होता है जिसको भी चाहो छुआ तो नहीं देखो मैंने किसी को ख़ता क्या है मेरी तुम ही बताओ खिला है अगर …

इश्क की दौलत – शिशिर मधुकर

बड़े हो मुझसे तुम थोड़े मगर मैं तो ना डरती हूँ तुम्हारी हर अदा को ए सनम मैं प्यार करती हूँ तुम्हारे नाम की बिंदी और ये माँग में …

मुहब्बत का सूरज- शिशिर मधुकर

ना तुम साथ में हो ना खुशबू तुम्हारी ये जीवन कहो अब कैसे कटेगा मुहब्बत का सूरज जो छुप सा गया है अँधेरा ये मन का कैसे छंटेगा प्यार …

वक्त का क्या पता – शिशिर मधुकर

जवानी सबकी ढल जाएगी ज्यों ही शाम आएगी तेरे इस रूप की मय देख फिर ना काम आएगी महल इतना भी ऊँचा ना बना अपनी हिफाजत को ज़िन्दगी जीने …

मेरा सहारा – शिशिर मधुकर

तेरी आवाज़ ही अब तो बनी मेरा सहारा है हजारों फूल खिलते हैं तूने जब भी पुकारा है तू मेरी सांस बनके इस तरह जीवन में छाया है तेरे …

लाचारी – शिशिर मधुकर

मिलन की आरजू पे डर ज़माने का जो भारी है तेरी मेरी मुहब्बत में अजब सी कुछ लाचारी है दोस्तों दोस्ती मुझको तो बस टुकडों में मिल पाई बड़ी …

मेरी फितरत – शिशिर मधुकर

मुझे तू प्यार करता है तो मैं सिमटी सी जाती हूँ खुशी से झूम उठती हूँ लाज संग मुस्कुराती हूँ मेरे मन में उमंगों का बड़ा सा ज्वार उठता …

पास हो तुम – शिशिर मधुकर

पास हो तुम दिल के इतने कैसे मैं तुमको छोड़ दूँ जिसमें हैं बस छवियां तेरी वो आईना क्यों तोड़ दूँ अविरल धार स्नेह की जो बहती है जानिब …

प्रीत के बिन – शिशिर मधुकर

तुम्हारी प्रीत के बिन तो बड़ा मुश्किल ये जीना है मुझे तो ज़िन्दगी का जाम नज़र से तेरी पीना है ना मेरे मर्ज को समझा ना मेरे दर्द को …

कर्मों के फल – शिशिर मधुकर

किसी के प्रेम की देखो राह अब भी मैं तकता हूँ मेरी उम्मीदें टूटी हैं मगर फिर भी ना थकता हूँ मेरे दिल में ज़रा झांको जख्म अब ही …

तेरी आवाज़ – शिशिर मधुकर

तेरी आवाज़ को सुनना सुकूँ एक रूह को देता है शिकायत है मगर मुझको ख़बर तू क्यों ना लेता है प्यार बरसेगा जो तेरा चैन कुछ आ ही जाएगा …

तेरी मुहब्बत – शिशिर मधुकर

मुझे तेरी मुहब्बत ने ही बस जीना सिखाया है जाम उल्फ़त का हौले हौले से पीना सिखाया है मैंने तो ज़िंदगी में आस रखना छोड़ डाला था तेरी बातों …