Tag: प्रेम सरिता

तेरी खुशबुओं में घिर गया- शिशिर मधुकर

अभी कुछ दिनों की तो बात है तुम कितने मेरे करीब थे हर शख़्स मुझसे जल गया कुछ ऐसे अपने नसीब थे तुम फूल थे जिस बाग़ के मैं …

मुहब्बत का असर – शिशिर मधुकर

तेरी सांसों की ख़ुशबू जब मेरी सांसों में रहती थी मेरा चेहरा चमकता था खुशी नस नस में बहती थी सभी ग़म भूल कर यारों सदा जीने की इच्छा …

जो प्रेम करते हैं – शिशिर मधुकर

आज भी बातों से उनकी फूल झरते हैं दिल से जुदा होते नहीं जो प्रेम करते हैं ढल गई है रात देखो दिन निकलने को रोशनी से इसमें चलो …

मुहब्बत और पूजा – शिशिर मधुकर

तूने सौंपा मुझे सब कुछ अहम दिल से मिटाया है मेरे हर क़तरे क़तरे में नाम तेरा समाया है मुहब्बत और पूजा में फर्क कोई नहीँ होता इन्हीं के …

आईने की छवि- शिशिर मधुकर

मुहब्बत ग़र समझता वो तो यूँ रूठा नहीं होता अलि के चूम लेने से फूल झूठा नहीं होता ना संग जाएगा कुछ तेरे ना संग जाएगा कुछ मेरे समझता …

मुहब्बत का सरूर – शिशिर मधुकर

देख के मन लगे गर किसी को पाने में हो गई उस से मुहब्बत तुम्हें ज़माने में अकेले तुम रहोगे बीच में जो लोगों के तन्हा खुद को नहीं …

घटाएं प्यार की- शिशिर मधुकर

प्यार जब दिल में होता है तो आँखों से झलकता है यार ग़र सामने हो सांसों में शोला दहकता है मुहब्बत ज़िन्दगी में फूलों की खुशबू के जैसी है …

नूर हूँ मै – डी के निवातिया

नूर हूँ मै @ तेरे मुखमंडल की आभा से प्रज्वलित होता दीप हूँ मैं तेरे ही आशीर्वचनो से फलीभूत होता आशीष हूँ मै तुम कारक, कारण तुम ही तुम …

यशोदा तेरा ललन बड़ा निराला – डी के निवातिया

यशोदा तेरा ललन बड़ा निराला *** हलधर का भाई, नन्द का लाला, यशोदा तेरा ललन बड़ा निराला, बड़ा निराला, मैया बड़ा निराला, यशोदा तेरा ललन बड़ा निराला !! कमर …

उम्मीद है ये मुझको – शिशिर मधुकर

उम्मीद है ये मुझको इंतजार करोगे फिर से अपनी प्रीत का इकरार करोगे जो ना कह सके देख ज़माने को सामने तन्हाइयों में फिर से वो इजहार करोगे अधूरी …

गुनगुनी सी धूप — डी के निवातिया

गुनगुनी सी धूप शरद ऋतू में पीली सुनहरी गुनगुनी सी धूप कुहासे की श्वेत चादर में लिपटे रवि का रूप फुर्रफुराती कलँगी में डाल-डाल फुदकते पंछी अच्छा लगे अलसायी …

अगन ये इश्क की – शिशिर मधुकर

तेरी ज़ुल्फ़ों के लहराने से जब खुशबू निकलती है तुझे अपना बना लूँ फिर तो हर धड़कन मचलती है मिलन की आस हो मन में तो फिर दूरी है …

वो केवल मुस्कुराते हैं-शिशिर मधुकर

मुहब्बत करके जो मझधार में संग छोड़ जाते हैं लाख चाहा किया भूलें वो फिर भी याद आते हैं अगर बनता है हर इंसान केवल एक मिट्टी से कहो …

सच्चा प्यार — डी के निवातिया

सच्चा प्यार *** जिस ह्रदय में किसी को सराहने के पनपते विचार नहीं उसको भी सराहना पाने का बनता कोई अधिकार नहीं निसन्देह: त्याग के यथार्थ भाव का तात्पर्य …

किस काम की सांसें – शिशिर मधुकर

मुहब्बत छोड़ दी तुमने– मेरा सुख चैन खोया है बचे ना अब तो आंसू भी ये मनवा इतना रोया है हर तरफ आग नफरत की मेरा तन मन जलाती …

नई शुरुआत करते हैं – शिशिर मधुकर

भले ही मुद्दतों से हम ना तुमसे बात करते हैं तेरे ख़्वाबों में ही लेकिन बसर दिन रात करते हैं ये माना बाग़ उजड़ा है बहारें अब ना आती …

अगर जो साथ मिल जाए – शिशिर मधुकर

तेरी सांसों की खुशबू ना कभी जीवन में भूलूँगा तेरे रुखसार की लाली को अधरों से मैं छू लूँगा अगर जो साथ मिल जाए मुझे तेरी मुहब्बत का मैं …