Tag: प्रेम सरिता

अपनी पीर सुना जाएं – शिशिर मधुकर

ए वक्त करम कर दे अपना वो बाहों में फिर आ जाएं एक प्रेम भरी बदली बन के तन्हा जीवन में छा जाएं वो दूर हुए संगीत मेरे जीवन …

खुद की मुसीबत है – शिशिर मधुकर

लाख मिन्नत करीं मैंने ना वो नज़दीक आते हैं हर समय दूर रहते हैं और दिल को दुखाते हैं उसके बिन ज़िंदगी मेरी एक उजड़े चमन सी है मगर …

अगर दीवानगी होती – शिशिर मधुकर

अगर दीवानगी होती तो तुम पहलू में आ जाते तरसती आँखों को मेरी हसीं सूरत दिखा जाते एक उलझन की खातिर तुम मेरे नज़दीक आए थे मुहब्बत असली होती …

जो मेरा बस चले – शिशिर मधुकर

जो मेरा बस चले कभी तुम्हें ना दूर जाने दूँ कहीं गैरों के साथ तुमको ना हुज़ूर जाने दूँ तुमको ख़ुशी देने से सुकून मिलता है मुझको नशीली अँखियों …

मेरे दिल में बसे हो तुम – शिशिर मधुकर

ना तेरा साथ मिलता है ना तुझको भूल पाती हूँ प्रीत तुम से लगी है जो उसी को अब निभाती हूँ भले मुँह से ना कुछ बोलूं दिल तो …

प्रेम की छाँव – शिशिर मधुकर

लोग मेरी मुहब्बत पे जाने क्यों तंज़ कसते हैं जो भी सम्मान देते हैं वही तो दिल में बसते हैं ज़ख्म देते रहे दिल पे नतीजा सामने है जब …

तुम्हें भी नाज़ तो होगा – शिशिर मधुकर

अधूरा हूँ तुम्हारे बिन तुमको अंदाज़ तो होगा अनकहा तेरे होठों पे कोई अल्फ़ाज़ तो होगा ये माना देख चेहरे को बयां कुछ भी नहीं होता मगर दिल में …

तेरा ही दास है – शिशिर मधुकर

आँखों में तेरे ख्वाब हैं पर तू ना पास है तन्हा सी मेरी ज़िन्दगी कितनी उदास है यूँ तो राहें ज़िंदगी में अपने भी मिल गए कोई भी मगर …

जीने का मन करता है– शिशिर मधुकर

जब जब देखूं तेरी सूरत, जीने का मन करता है जाम नशीले नज़र से तेरी,पीने का मन करता है चोट अगर तुझको लग जाए,दर्द मुझे भी होता है तेरी …

असल अंदाज – शिशिर मधुकर

तेरी खुशबू को मैंने अपनी सांसों में बसाया है मुहब्बत का असल अंदाज़ ये मैंने निभाया है मिले हो जब से तुम मुझको बहारें मुस्कुराई हैं सिवा तेरे ना …

बरसते हैं जो सावन से- शिशिर मधुकर

किसी को दिल की गहराई से गर हम प्यार करते हैं कद्र उसकी तमन्नाओं की फिर तो हर बार करते हैं खास रिश्तों की दुनिया में जो दिल की …

कोई धागा नहीं पिरता – शिशिर मधुकर

कैसे कह दूँ प्यार मैं तुमसे नहीं करता घाव ये दिल का मेरे कब से नहीं भरता हाथ तुम ना छोड़ते फिर ये नहीं होता ज़िंदगी की राहों में …

तब ही जीवन सफल होगा – शिशिर मधुकर

मेरी मुहब्बत अब तेरी बातों में दिखती है एक तेरी सूरत ही मुझे रातों में दिखती है आबाद है ये पेड़ इस बगिया की मिट्टी में सच्चाई ये उसके …

मुझे तुझमे समाना है – शिशिर मधुकर

घने बादल बरसते हैं हुआ मौसम सुहाना है कहाँ पे छुप गए चंदा तुम्हें बाहों में आना है बदन पे हो रही वर्षा कुछ ऐसी मार करती है जिससे …

गीला गीला मौसम- शिशिर मधुकर

गीला गीला मौसम मन बेकल करता है तेरा ये दीवाना तुझ पे हर पल मरता है पेड़ों पे बादल की ज्यों बौछारें पड़ती हैं प्रेम की वर्षा का पानी …

प्रेम के बंधन – शिशिर मधुकर

तसव्वुर में तुम्हारे कट रहे हैं रात दिन अब तो ऐसे ही पास जीवन में नहीं आ पाते हैं सब तो तुम्हें नाराज़ होने का मैंने हक़ दे दिया …

दरिया से बहते हैं – शिशिर मधुकर

मुहब्बत कर तो ली हमने मगर अब दर्द सहते हैं तन्हाई तोड़ती है पर किसी को कुछ ना कहते है समय की धार को बदले नहीं ऐसा कोई जग …

देखा तुम्हें तो – शिशिर मधुकर

देखा तुम्हें तो दिल में कई अरमान जग गए खुद ही तुम्हारी राहों में फिर तो ये पग गए जिस प्रेम की तलाश थी तुमसे मुझे मिला वरना मुझे …

प्रणय के देवता-शिशिर मधुकर

दिल के तुम्हारे पास हूँ पर नज़रों से दूर हूँ रिश्तों के जाल में फंसी मैं यहाँ मजबूर हूँ तुमने जो मेरे होंठ से पीया था मय का जाम …