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मेरा मन तर नहीं होता – शिशिर मधुकर

अगर दीवानगी होती तो फिर ये डर नहीं होता तुम भी तन्हा नहीं रहते सूना ये घर नहीं होता मैं तो मुद्दत से प्यासा हूँ आस बारिश की रखता …

कर्मों के फल – शिशिर मधुकर

किसी के प्रेम की देखो राह अब भी मैं तकता हूँ मेरी उम्मीदें टूटी हैं मगर फिर भी ना थकता हूँ मेरे दिल में ज़रा झांको जख्म अब ही …

मुहब्ब्त की प्यास – शिशिर मधुकर

मिलन की चाह की देखो फ़कत बातें वो करता है कभी कोशिश करे ना कुछ पास आने से डरता है कोई सच्ची मुहब्बत अब न उसके पास है देखो …

मतलब की यारी – शिशिर मधुकर

मुहब्बत ना रखी दिल में फ़कत मतलब की यारी है ज़िन्दगी किस तरह आखिर तुमने मेरी संवारी है मेरे सपने सभी टूटे तेरे संग फिर भी रहता हूँ जिम्मेदारी …

करार – शिशिर मधुकर

सुन ले मैं थक चुका हूँ तेरे इंतज़ार में दूरी ये अच्छी नहीं इतनी भी प्यार में दुश्वारियां कबूल थी जब साथ में चले खामोशी मगर थी नहीं अपने …

पास आते तुम – शिशिर मधुकर

कमी तुम को अगर महसूस होती पास आते तुम यूँ ही रूठे ना रहते मुस्कान दे मुझको मनाते तुम लम्बी राहें मुहब्बत की कभी आसां ना होती हैं जलजलों …

काल जीवन का – शिशिर मधुकर

मुहब्बत जिसने की मुझसे न संग उसने निभाया है अब तलक काल जीवन का ये मैंने तन्हा बिताया है सभी बस छल गए मुझको लुटा बैठा हूँ मैं अब …

धूप देखो तो ना खिली – शिशिर मधुकर (बिना रदीफ की ग़ज़ल )

लाख ढूंढा किया फिर भी मुहब्बत मुझको ना मिली रात गुजरी है दिन निकला धूप देखो तो ना खिली घाव देता रहा जो भी मिला उल्फ़त की राहों में …

तेरे इन्तज़ार में – सर्वजीत सिंह

तेरे इन्तज़ार में सुबह से शाम हो गई तेरे इन्तज़ार में अब देर ना करो तुम अपने दीदार में यहाँ पर तो लोग आते जाते बहुत हैं कोई खलल …

मोहब्बत का मारा – सर्वजीत सिंह

मोहब्बत का मारा मोहब्बत को तेरी हमने नकारा नही पर तेरी बेरूखी भी हमें गवारा नहीं सुबह शाम किया है बस तुझे सजदा फिर भी लब से नाम तेरा …

सीने से लगा मुझको – शिशिर मधुकर

वो मेरे पास आया था दे गया पर दगा मुझको मुहब्बत में हर इंसा नें हमेशा ही ठगा मुझको वो मेरे साथ रहता है मगर मेरा नहीं दिखता ढूंढने …

वहम बना लिया – शिशिर मधुकर

तेरे ग़म को मैंने जो अपना ग़म बना लिया सूखी हुईं आँखों को बेहद नम बना लिया वर्षों के बाद एक रोशनी दिखती थी जो मुझे भटका जो फिर …

मशहूर ना रहते – शिशिर मधुकर

गर मेरी तरह तुम भी तड़पते फिर दूर ना रहते भुला सब कुछ नशे में ज़िन्दगी के चूर ना रहते अगर तुम ठान लेते साथ मुझको भी निभाना है …

कोई कारण तो होता है -शिशिर मधुकर

कोई भी सोच मेरी तो परे तुझ से ना जाती है मुहब्बत कौन सा रंग अब मुझे आके दिखाती है अधिकतर ज़िन्दगी गुजरी मगर तन्हा रहा हूँ मैं मिलन …

आईना तुम ज़रा देखो – शिशिर मधुकर

मुहब्बत कर तो ली तुमने मगर अब पैर खींचे हैं दर्द इतना हुआ सोचो आँख हम अब भी मींचे हैं आईना तुम ज़रा देखो खिली सूरत जो दिखती है …

वक्ती खेल – शिशिर मधुकर

आज हम गैर लगते हैं कभी पर थे तुम्हें प्यारे कोई शिकवा नहीं तुमसे ये वक्ती खेल हैं सारे खुदा ने दिल दिया है तो इसमें जज्बात होते हैं …

मेरी तकदीर हो तुम – शिशिर मधुकर

मेरी ग़ज़लों ने अब ये सच ज़माने को बताया है मुहब्बत में किसी अपने ने मेरा दिल दुखाया है कितने अशआर कह डाले मगर ग़म तो नही छूटे किसी …

अधूरापन मेरा – शिशिर मधुकर

अधूरापन मेरा अब तो मुझे परेशान करता है तेरा बदला रवैया हरदम मुझे हैरान करता है एक बुरे वक्त में हमने कई साझा किए थे दुख यही सब सोच …

मुकद्दर से सदा हारा – शिशिर मधुकर

मिलन की आग अब जलती नहीं है तेरे सीने में मुझे भी अब नहीं इच्छा लबों का जाम पीने में ज़माने ने मेरा पत्थर के माफिक रूप देखा है …