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हमने भुला दिया – शिशिर मधुकर

देखी जो तेरी बेरुखी हमने भुला दिया अपने हर अरमान को नीदें सुला दिया मुद्दतें गुज़री थी नमी आँखों से दूर थी तेरी जफ़ा ने फिर से उनको रुला …

इख्तियार नहीं है – शिशिर मधुकर

जब तुमको ही अब मेरा इंतज़ार नहीं है मेरा दिल भी परेशान हो बेकरार नहीं है बेडियां जब प्यार की टूटा करी हैं आज कोई किसी के हाथों में …

तीर निज दिल पे झेले हैं -शिशिर मधुकर

मुहब्बत के मैंने जीवन में जो भी खेल खेले हैं हार हिस्से में आई है और अब फिर से अकेले हैं दर्द सहने की शक्ति जब किसी की बढ़ती …

सांवरे तेरे प्यार में……………….दीवानी हो गयी |भजन| “मनोज कुमार”

सांवरे तेरे प्यार में, गिरधर बातों के जाल में राधा तेरी रानी, दीवानी हो गयी, दीवानी हो गयी कानन कुंडल की ये, मोहिनी मूरत की ये मोहन तेरी रानी, …

ख़ता मेरी ही थी- शिशिर मधुकर

तेरी तन्हाइयों में मैंने कभी तेरा साथ ना छोड़ा काश इस बात का एहसास कर लेते तुम ही थोड़ा जिस कदर तूने मुँह फेरा है भुला के प्रीत के …

वो लम्हें निकल गए – शिशिर मधुकर

जिनमें सुकूं मिला मुझे वो लम्हें निकल गए सपनों के सभी आशियां धू धू हो जल गए चट्टान सा मिला ना मुझे रिश्ता कोई यहाँ मौसम गर्म हुआ तो …

किस्मत के उलट फेरे – शिशिर मधुकर

मुहब्बत दिल में हो जिनके वो ही तो मान करते है मिटा के जिस्मों की दूरी उनको एक जान करते हैं उम्मीदें मैंने पाली थी नाज़ बन माथे पे …

बदलते वक्त में -शिशिर मधुकर

क्या करूँ मैं तुम ही बोलो मेरा दिल तुमने तोड़ा है कहाँ ढूँढू सकूँ जब तेरे लिए ज़माने भर को छोड़ा है धारा रोक देने से नदिया घुट घुट …

कुमकुम बना के – शिशिर मधुकर

कोई सागर नहीं ऐसा ना जिसमें ज्वार आते हों वो लोचन ना आशिक के जो ना अश्रु बहाते हों ऐसी चाहत ज़माने में कभी भी सुख ना देती है …

सांसों में शामिल – शिशिर मधुकर

मुहब्बत करना आसां है निभाना है बहुत मुश्किल याद रक्खो तुम ये सच लगाओ जब कहीं भी दिल जिसको आदत हो आसानी से चेहरे भूल जाने की कभी ना …

स्वार्थ की बातें – शिशिर मधुकर

जब रिश्तों में विश्वास ना हो केवल स्वार्थ की बातें हो कोई नहीं चाहता उस व्यक्ति से अक्सर मुलाकातें हों चाँद रहेगा तो इस अन्धकार में कुछ राहें तो …

किस्मत तुम्हारी है – शिशिर मधुकर

किसी का प्यार पाया है तो ये किस्मत तुम्हारी है वरना अब तो ज़माने में सबको अपनी खुमारी है दोस्ती रिश्ते नाते और सम्बंधो में केवल धोखा है कोई …

अंजान बनते हैं -शिशिर मधुकर

कभी पहलू में थे जो आज वो अंजान बनते हैं जो छाया नहीं रखते वो ही खजूरों से तनते हैं स्वार्थ भरी फितरत से पार कोई पाए भी कैसे …

दिल टूटने का खेल – शिशिर मधुकर

तुम्हारा हाथ क्या पकड़ा ज़माना भर खफा हुआ ना मुहब्बत मिली मुझको ना ही कोई नफ़ा हुआ यूँ तो पहले भी मेरी ज़िन्दगी में रब ना था कोई मगर …

मैल असली – शिशिर मधुकर

तूफानों में ही रिश्तों की ताकत का पता चलता है आवरण धुलने पर मैल असली बाहर निकलता है छुपी गन्दगी दिलों की जब दो आँखों के सामने हो मजबूरी …

जाएँ फिर कहाँ – शिशिर मधुकर

रिश्तों में जब धोखा मिले तो जाएँ फिर कहाँ निज हाथों में खंजर लिए व्यक्ति बैठा है यहाँ दिल से दिल के मेल बना करते हैं जिस जगह अब …