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मेरे दुश्मन – शिशिर मधुकर

मेरे दुश्मन मैं तुझको ये साफ़ पैग़ाम देता हूँ तेरी हरकत के कारण ही तुझे ये नाम देता हूँ तुझसे निपटने के मुझ पे भी इंतज़ाम हैं सारे मगर …

छोड़ दी है………….तेरे ही लिये |गीत| “मनोज कुमार”

छोड़ दी है नौकरी भी तेरे ही लिये लगने लगे चक्कर गली तेरे ही लिये देखा तुझे गाने लगा गीत भी दिल तेरे इस मुखड़े पे ये मरने लगा …

तेरे चेहरे पे तो…….. तोड़ लायेंगे |गीत| “मनोज कुमार”

तेरे चेहरे पे तो हम मर मिट जायेंगे तेरे लिये हम चाँद तारे तोड़ लायेंगे तेरे चेहरे पे तो………………………….. तोड़ लायेंगे किस दुनिया से लायी हो रूप रानी प्यार …

भोर भी होगी – शिशिर मधुकर

घायल है मेरा मन किसे दिखलाऊँ चोटों को मैं सारी उम्र तरसा हूँ प्रेम के प्यासे होठों को अपना समझ के मैंने जिसे घर में बसाया था मेरे सम्मान …

६०. अब तो आजा ………………….|गीत| “मनोज कुमार”

अब तो आजा आजा आजा अब तो आजा आजा जानेजा जानेजा आजा आजा……….२ तेरी सूरत बिन देखे अरसा हो गया आजा आजा जानेजा जानेजा आजा आजा……….२ अब तो आजा …

५९ .आइना जैसा………….. जान दिल |गीत| “मनोज कुमार”

आइना जैसा नाजुक है दिल बड़ा कमजोर मेरा है दिल टुकड़े टुकड़े हो जायेगा ये घूरो तोड़ो नही जान दिल आइना जैसा………….. जान दिल इसमें जब भी कोई देखता …

५७. हमने तो सब कुछ खोया ………..जाने के बाद |गीत| “मनोज कुमार”

हमने तो सब कुछ खोया एक तेरे जाने के बाद मैं भी और दिल भी रोया एक तेरे जाने के बाद वीराने गुलशन लगते जब रहते दोनों संग साथ …

दर्द का रिश्ता – शिशिर मधुकर

झगडे मुहब्बत के तो मुझको मंजूर थे सारे तुम दिल से पर ना हो सके कभी भी हमारे जब दर्द का रिश्ता ना कोई तुमने बनाया है कैसे करूँ …

मिलन का खेल – शिशिर मधुकर

किसी के साथ में रहते ये ज़माने गुजर गए किसी की धड़कनो में हम पल में उतर गए बड़े अरमानों के संग जिंदगी सौंपी थी हमने आशियाँ सपनो के …

नफ़रत का अँधेरा – शिशिर मधुकर

जीवन में ये मुकाम जाने कैसा आ गया नफ़रत का अँधेरा मेरे हर ओर छा गया जिससे भी मैंने यहाँ फूलों की आस की हर आदमी मुझको एक नश्तर …

फूल झरते रहें – शिशिर मधुकर

तुम हँसते रहो फूल झरते रहें मुहब्बत हम तुम से करते रहें व्यापार जीवन समझते हैं जो ना होगा वहाँ रिश्तों का चमन उल्फ़त जिसे ना हुई हो कभी …

५६. जिससे था हमें प्यार ……………चला गया |गीत| “मनोज कुमार”

जिससे था हमें प्यार वो साजन चला गया हम रहते थे जिसके दीवाने चला गया हुई मुद्दतों अब तक जिसका पता नही हमें छोड़ अकेला तन्हा करके चला गया …

५५. गुजरे वक्त की याद…………………रुलाती है |गीत| “मनोज कुमार”

गुजरे वक्त की याद याद आती है | चुपसा रहता है दिल वो रुलाती है || जबसे छीनी है प्यार की दौलत | बनके हम तो फ़क़ीर बैठे है …

ज़िन्दगानी गुजरती है – शिशिर मधुकर

हुई ना प्रेम की बारिश मेरा मन आँगन सूखा है मिलन की आस संजोए हरदम रहता ये भूखा है दीवारें देख कर मैंने मकां एक घर समझ डाला इसके …

नई खुशी की आशा- शिशिर मधुकर

तेरा मुझको मालूम नहीं मैं अपने दिल की कहता हूँ चोट लगीं जो अपनों से उनकी सब पीड़ाए सहता हूँ वो ही दुनियाँ है जीवन है और गर्दिश में …