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जिससे था हमें प्यार ……………चला गया |गीत| “मनोज कुमार”

जिससे था हमें प्यार वो साजन चला गया हम रहते थे जिसके दीवाने चला गया हुई मुद्दतों अब तक जिसका पता नही हमें छोड़ अकेला तन्हा करके चला गया …

गुजरे वक्त की याद…………………रुलाती है |गीत| “मनोज कुमार”

गुजरे वक्त की याद याद आती है | चुपसा रहता है दिल वो रुलाती है || जबसे छीनी है प्यार की दौलत | बनके हम तो फ़क़ीर बैठे है …

ज़िन्दगानी गुजरती है – शिशिर मधुकर

हुई ना प्रेम की बारिश मेरा मन आँगन सूखा है मिलन की आस संजोए हरदम रहता ये भूखा है दीवारें देख कर मैंने मकां एक घर समझ डाला इसके …

नई खुशी की आशा- शिशिर मधुकर

तेरा मुझको मालूम नहीं मैं अपने दिल की कहता हूँ चोट लगीं जो अपनों से उनकी सब पीड़ाए सहता हूँ वो ही दुनियाँ है जीवन है और गर्दिश में …

रिश्तों की पौध – शिशिर मधुकर

साफ दिल के साथी से जब नज़रें मिलाओगे वो हँसती हुई खुद की छवि तुम देख पाओगे प्रेम और विश्वास संग जो तुम घर बनाओगे सुख दुःख के हर …

समर्पण और चतुराई – शिशिर मधुकर

करती हो तुम समर्पण मुझको जीत लेती हो कसमें जिन्दगी की फिर सारी पुनीत देती हो जब जब भी तुमने मुझसे की है यहाँ चतुराई अपने दोनों हाथों से …

खुशबू सी-शिशिर मधुकर

तन्हाई में तुम जब भी कहीं जाओगे मेरी छवियों को सीने में दबा पाओगे जो बसती थी खुशबू सी तेरी साँसों में कैसे आखिर उसे पूरी तरह भुलाओगे शिशिर …

तेरी यादों के सहारे – शिशिर मधुकर

तुझ से बात ना हो तेरी तस्वीर देख लेता हूँ कुछ इस तरह ही निज मन को सुकूँ देता हूँ बड़ी दूर हैं किनारे और लहरें भी मचलती हैं …

शिकवे गिले – शिशिर मधुकर

शिकवे गिले मुझे तुझसे बहुत हैं ऐ ज़िन्दगानी मेरी कुछ तो बता दे मेरे लिए आखिर क्या मंशा है तेरी जिसके लिए भी मैंने सब कुछ दाँव पर लगा …

उल्फ़त का नूर – शिशिर मधुकर

गुल तेरी मुहब्बत के खिलकर के झर गए मौसम बसंत के भी सब आकर गुज़र गए खुशबू दिलों दिमाग से तो मिट ना पाएगी भंवरे खुश है रस पीकर …

कातिल लुटेरा -शिशिर मधुकर

जिन्हें भी अपने सीने पर मैंने एक गुल सा सजाया था सभी ने मौका पा जहरीला काँटा ही मुझको चुभाया था लाख कोशिश करी मिल जाए मुझको सच्चा हमसफ़र …

कुदरती रज़ा – शिशिर मधुकर

यादों को जिंदा रखने को मिलते रहो साथी धुंधली तस्वीरों में सूरते नज़र में नहीं आती जो रूकावटे ना हों बीच में धारा नहीं मचले पथरीली राहें तो मिलनी …

मुँह जो फेरा है – शिशिर मधुकर

अपने हर अंश में तुम झाँक लो मेरा बसेरा है वक्त के साथ में छंट जाएगा जो भी अँधेरा है तुम्हे पाना मेरे लिए बस कुदरत की मर्जी थी …

तेरे सब गम चुरा लेंगे…………….. भी बुला लेंगे |गीत| “मनोज कुमार”

तेरे सब गम चुरा लेंगे तेरे सब दर्द मिटा देंगे छाया तेरा नशा दिल पे तेरे सब कर्ज मिटा देंगे माना ये दौर है मुश्किल ख़ुशी फिर भी चुरा …