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काल जीवन का – शिशिर मधुकर

मुहब्बत जिसने की मुझसे न संग उसने निभाया है अब तलक काल जीवन का ये मैंने तन्हा बिताया है सभी बस छल गए मुझको लुटा बैठा हूँ मैं अब …

धूप देखो तो ना खिली – शिशिर मधुकर (बिना रदीफ की ग़ज़ल )

लाख ढूंढा किया फिर भी मुहब्बत मुझको ना मिली रात गुजरी है दिन निकला धूप देखो तो ना खिली घाव देता रहा जो भी मिला उल्फ़त की राहों में …

तेरे इन्तज़ार में – सर्वजीत सिंह

तेरे इन्तज़ार में सुबह से शाम हो गई तेरे इन्तज़ार में अब देर ना करो तुम अपने दीदार में यहाँ पर तो लोग आते जाते बहुत हैं कोई खलल …

महोब्बत का मारा – सर्वजीत सिंह

महोब्बत का मारा महोब्बत को तेरी हमने नकारा नही पर तेरी बेरूखी भी हमें गवारा नहीं सुबह शाम किया है बस तुझे सजदा फिर भी लब से नाम तेरा …

सीने से लगा मुझको – शिशिर मधुकर

वो मेरे पास आया था दे गया पर दगा मुझको मुहब्बत में हर इंसा नें हमेशा ही ठगा मुझको वो मेरे साथ रहता है मगर मेरा नहीं दिखता ढूंढने …

वहम बना लिया – शिशिर मधुकर

तेरे ग़म को मैंने जो अपना ग़म बना लिया सूखी हुईं आँखों को बेहद नम बना लिया वर्षों के बाद एक रोशनी दिखती थी जो मुझे भटका जो फिर …

मशहूर ना रहते – शिशिर मधुकर

गर मेरी तरह तुम भी तड़पते फिर दूर ना रहते भुला सब कुछ नशे में ज़िन्दगी के चूर ना रहते अगर तुम ठान लेते साथ मुझको भी निभाना है …

कोई कारण तो होता है -शिशिर मधुकर

कोई भी सोच मेरी तो परे तुझ से ना जाती है मुहब्बत कौन सा रंग अब मुझे आके दिखाती है अधिकतर ज़िन्दगी गुजरी मगर तन्हा रहा हूँ मैं मिलन …

आईना तुम ज़रा देखो – शिशिर मधुकर

मुहब्बत कर तो ली तुमने मगर अब पैर खींचे हैं दर्द इतना हुआ सोचो आँख हम अब भी मींचे हैं आईना तुम ज़रा देखो खिली सूरत जो दिखती है …

वक्ती खेल – शिशिर मधुकर

आज हम गैर लगते हैं कभी पर थे तुम्हें प्यारे कोई शिकवा नहीं तुमसे ये वक्ती खेल हैं सारे खुदा ने दिल दिया है तो इसमें जज्बात होते हैं …

मेरी तकदीर हो तुम – शिशिर मधुकर

मेरी ग़ज़लों ने अब ये सच ज़माने को बताया है मुहब्बत में किसी अपने ने मेरा दिल दुखाया है कितने अशआर कह डाले मगर ग़म तो नही छूटे किसी …

अधूरापन मेरा – शिशिर मधुकर

अधूरापन मेरा अब तो मुझे परेशान करता है तेरा बदला रवैया हरदम मुझे हैरान करता है एक बुरे वक्त में हमने कई साझा किए थे दुख यही सब सोच …

मुकद्दर से सदा हारा – शिशिर मधुकर

मिलन की आग अब जलती नहीं है तेरे सीने में मुझे भी अब नहीं इच्छा लबों का जाम पीने में ज़माने ने मेरा पत्थर के माफिक रूप देखा है …

किसी को फर्क क्या – शिशिर मधुकर

मुहब्बत इंसान की इंसान से जब टूट जाती है लाख कोशिश करो ये कभी वापस न आती है तूने घायल किया मैंने तेरे से प्यार जब माँगा मेरे दिल …

मुकरनें से तुम्हारे – शिशिर मधुकर

मुहब्बत हो गई तुमसे मुझे अफसोस होता है तुम्हारी बेरुखी से तन्हाइयों में दिल ये रोता है कोई सपनों में आ के गर तुम्हें हरदम सताता है चैन की …

सच्ची मुहब्बत – शिशिर मधुकर

सच्ची मुहब्बत गर तूने मुझ से करी होती चुप्पी ये अपने होंठों पर न तूने धरी होती सर पे कफ़न सजा के जो हुंकार ले लेती तलवार ये समर …

दिल में ज़रा झांको – शिशिर मधुकर

बड़ा अफ़सोस है तुमने मुझे एकदम भुलाया है मुझको इस प्रेम ने अक्सर ज़माने में रूलाया है हर दफा चोट मिलती है और पीड़ा को झेला है मैंने तो …

खुद की मुसीबत है – शिशिर मधुकर

लाख मिन्नत करीं मैंने ना वो नज़दीक आते हैं हर समय दूर रहते हैं और दिल को दुखाते हैं उसके बिन ज़िंदगी मेरी एक उजड़े चमन सी है मगर …

नई धारा का रुख – शिशिर मधुकर

तेरे संग जो भी रिश्ता है मुझे अब तोड़ना होगा तेरे ख्वाबों में जीना भी मुझे अब छोड़ना होगा मेरी रूह को सुकून खाली बातों से नहीं मिलता मेरे …

ना तुमने करी कोशिश- शिशिर मधुकर

जुदा होकर समय जो तुमसे मैंने तन्हा काटा है दर्द सीने में रक्खा है किसी के संग ना बाटा है तुम्हारी ढाल बन जिनसे मैंने महफूज़ रक्खा था उन्होंने …

मुकाम बाकी है – डी के निवातिया

मुकाम बाकी है *** अभी तो बहुत से काम बाकी है जोड़ना नाम संग नाम बाकी है ! अपने हौसलों को ज़रा उड़ान दे अभी पाने कई मुकाम बाकी …

असल मस्तानगी ना थी-शिशिर मधुकर

मुहब्बत जिसने की मुझसे उसे दीवानगी ना थी ये तो किस्मत की बातें हैं मुझे हैरानगी ना थी रात भर पूजा करी जिसकी वो नज़दीक ना आया उसे पाने …