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शिकवे गिले – शिशिर मधुकर

शिकवे गिले मुझे तुझसे बहुत हैं ऐ ज़िन्दगानी मेरी कुछ तो बता दे मेरे लिए आखिर क्या मंशा है तेरी जिसके लिए भी मैंने सब कुछ दाँव पर लगा …

उल्फ़त का नूर – शिशिर मधुकर

गुल तेरी मुहब्बत के खिलकर के झर गए मौसम बसंत के भी सब आकर गुज़र गए खुशबू दिलों दिमाग से तो मिट ना पाएगी भंवरे खुश है रस पीकर …

कातिल लुटेरा -शिशिर मधुकर

जिन्हें भी अपने सीने पर मैंने एक गुल सा सजाया था सभी ने मौका पा जहरीला काँटा ही मुझको चुभाया था लाख कोशिश करी मिल जाए मुझको सच्चा हमसफ़र …

कुदरती रज़ा – शिशिर मधुकर

यादों को जिंदा रखने को मिलते रहो साथी धुंधली तस्वीरों में सूरते नज़र में नहीं आती जो रूकावटे ना हों बीच में धारा नहीं मचले पथरीली राहें तो मिलनी …

मुँह जो फेरा है – शिशिर मधुकर

अपने हर अंश में तुम झाँक लो मेरा बसेरा है वक्त के साथ में छंट जाएगा जो भी अँधेरा है तुम्हे पाना मेरे लिए बस कुदरत की मर्जी थी …

तेरे सब गम चुरा लेंगे…………….. भी बुला लेंगे |गीत| “मनोज कुमार”

तेरे सब गम चुरा लेंगे तेरे सब दर्द मिटा देंगे छाया तेरा नशा दिल पे तेरे सब कर्ज मिटा देंगे माना ये दौर है मुश्किल ख़ुशी फिर भी चुरा …

प्रतिघात – शिशिर मधुकर

जिसका दिल ही ना हों साफ उससे बात क्या करें करता हों जो बस प्रतिघात उसपे विश्वास क्या धरें इतने मलिन चेहरों से मेरा तो हरदम सामना हुआ आखिर …

प्रेम की धवल धार – शिशिर मधुकर

माना डगर मुश्किल है तुम साथ ना छोड़ो मुसीबत के सहचरो के दिलों को ना तोडो प्रेम की धवल धार कहीँ जाए ना पूरी सूख स्नेह के मेघों के …

साफ दिल से – शिशिर मधुकर

साफ दिल से जब कोई यहाँ नज़दीक आता है सपनों में विचरता है और धड़कन में समाता है मिलकर बिछड़ जाता है जब रिश्ता कोई ऐसा इंसान घुट घुट …

अधूरा – शिशिर मधुकर

तुम्हें कैसे बताऊँ मैं यहाँ कितना अधूरा हूँ झूठे रिश्ते नातों संग कभी होता ना पूरा हूँ प्यार ढ़ूंढ़ा जहाँ मैंने वहाँ व्यापार भारी था तन्हा बैठा हूँ राहों …

एहसास – शिशिर मधुकर

मुहब्बत में खुदा तुमको यहाँ जिसने बनाया है अपनी बेरुखी से तुमने उसका दिल दुखाया है ज़रा ठहरो आँख मीँचो और चुपचाप ये सोचो तेरे हर रोये रोये में …

तृष्णा – शिशिर मधुकर

जो जगह मुझको दी तूने वहाँ किसको बसाया है मेरी आँखों में तो अब तक तेरा मुखड़ा समाया है मैं जन्मों का प्यासा हूँ तू जीवन दायिनी सुरसरिता अपनी …

बन्धन – शिशिर मधुकर

वो बन्धन जिनमें प्रेम ना हो होते हैं जहरीले तोड़े बिन उन सबको यहाँ कैसे कोई जी ले अन्दर छुपी हस्ती से ही तो आती है सुंदरता झूठे फरेबी …

कुदरत – शिशिर मधुकर

जिंदगी तू भी जाने कैसे कैसे रंग दिखाती है मुझसे नाराज़ हो के मुहब्बत भी दूर जाती है पतंग और डोर को जैसे भी बांधो साधो तुम हवायें साथ …

दरिया की तरह – शिशिर मधुकर

अपनी तंहाइयो में मैं तुम्ही को याद करता हूँ तेरा दीदार हो मुझको यही फरियाद करता हूँ दरिया की तरह तन्हा बहने की किस्मत है मेरी जो भी आता …

मुहब्बत चीज़ ऐसी है – शिशिर मधुकर

मुहब्बत चीज़ ऐसी है कभी सब को नहीँ मिलती कली मुस्कान की हर ईक बगिया में नहीँ खिलती जीने को तो फ़िर भी यहाँ जीये जाते है सारे लोग …