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चिड़िया

शाम बढ़ती जा रही थी बेचैनी उमड़ती जा रही थी शाख पर बैठी अकेली दूर नजरों को फिराती कुछ नजर आता नहीँ फिर भी फिराती चीं चीं करती मीत …

जमाना भूल जाता हूँ।

जब भी तुम्हारी चाहत में मै हद से ज्यादा   डूब जाता हूं। कोई  नयी पंक्ति की धुन  को जब जब भी  तुम्हे सुनाता हूँ। जब भी तुम सुनते-सुनते  हँस …