Tag: जीवन- दर्शन

अधूरापन – शिशिर मधुकर

पा लिया सब तो फ़िर आनँद ना कोई आएगा खुशी मिलेगी जब कोई दिल भी तेरा दुखाएगा अधूरापन भी मानव जीवन में बड़ा ज़रूरी है तभी तो प्यासा कोई …

जीने के लिए ये जरूरी है भ्रम

सुनो मेरा ये भरम रहने दो कि तुम हो मेरे जीने के लिए ये जरूरी है. मुझे नहीं चाहिए तुम्हारा कांधा. तुम्हारा सीना. तुम्हारा रुमाल. या कि तुम्हारे शब्द.. …

बचपन (विवेक बिजनोरी)

” खुद पे ख़ुदा की आज भी मेहरबानी याद है, कच्चे-मकान, चूल्हे की रोटी, बारिश का पानी याद है” माँ का अपने हाथों से रोटी खिलाना भूख में, पापा …

देशों में ओ देश अपना …………..|गीत| “मनोज कुमार”

देशों में ओ देश अपना प्यारा हिन्द देश है अनोखी पहचान इसकी ऊँची अपनी शान है बहुरंगी संस्कृति इसकी भव्यता विशाल है मनमोहक है सुन्दरता वास्तुकला मिसाल है देशों …

राहों के कांटे – शिशिर मधुकर

भरोसा नहीँ हैं जब कोई जिंदगी का क्यूँ हम फ़िर दिल दुखाए किसी का चलो मिलजुल कर खुशियों को बांटे हटा दें सब अपनों की राहों के काँटे शिशिर …

कुछ भी नहीं – शिशिर मधुकर

कुछ भी नही होंने का एहसास बेहतरीन हैं ऐसा बन्दा सदा हर घृणा ईर्ष्या से विहीन हैं अहम का इस दशा में खुद अंत हो जाएगा कोई भी कलेश …

कुदरत का नूर – शिशिर मधुकर

मैंने आज एक ऐसा हसीन मुखड़ा देखा जिस पर कुदरत का नूर नज़र आता था उसकी मुस्कान पर राज़ सारा खोल गई ईर्ष्या से दूर दूर उसका न कोई …

जिंदगी-I

मैंने जिंदगी को रेलगाड़ी की तरह जाना। जिसका प्रारम्भ जन्म और मृत्यु गंतव्य है। मेरी इस यात्रा का मैं सारथी हूं। कई लोग आये और गये। कोई तत्काल ही …

आत्म दर्शन – शिशिर मधुकर (गुरु पूर्णिमा पर विशेष)

आत्म दर्शन के लिए अहं को त्यागना ज़रूरी है पर इसके फंदे में तो फँसी हुई ये दुनियाँ पूरी है इससे मुक्ति का कोई जादुई हल ना मिलता है …

संयोग ……. (अंश पाँच )

एक पुरानी रचना आप सुधीजनो के समक्ष पुन: प्रकाशित कर रहा हूँ जो पॉच भाग मे है, कृप्या पढकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करे …..अन्य भाग भी संयोग शीर्षक से …

पापा, चिज्जी ले आना…………. |गीत|– “मनोज कुमार”

बिटिया की खुवाइशों को गीत में ढ़ालने की कोशिश ……………… पापा पापा पापा, चिज्जी ले आना | जाओ जब बाजार, चिज्जी ले आना || टॉफी चाकलेट ज्यादा, तुम ले …

मैं खुश हूँ

मैं खुश हूँ अपेक्षाएं, आकांक्षाएं बड़ी हैं लाखों परेशानियां खड़ी हैं राह में बाँहें पसारे नाम लेकर मुझे पुकारे मैं खुश हूँ दूर रहूँ अरमानों के साये से वर्तमान …