Tag: जीवन- दर्शन

इंसानियत बड़ी — डी के निवातिया

इंसानियत बड़ी *** मंदिर बने या मस्जिद इस पर बहस लड़ी है ईश्वर रहेगा या अल्लाह इस पर बात अडी है जब पूछा जरूररतमंद, भूखे-प्यासे इंसान से बोला, मिले …

सृजन फिर से नया होगा – शिशिर मधुकर

अँधेरे जब कभी इंसान के जीवन में आते हैं तभी तो चाँद दिखता है ये तारे टिमटिमाते हैं सरद रातें हुईं लम्बी तो ग़म किस बात का प्यारे सुबह …

महात्मा ज्योतिबा फूले को नमन : ‘गोपी’

महात्मा ज्योतिबा फूले को नमन (28 नवम्‍बर : महात्‍मा ज्‍योतिबा फूले की पूण्‍य तिथि पर श्रद्धा सुमन) महाराष्ट्र पूना में मां चिमनाबाई की कोख में लिया आकार गोविन्‍द जी …

ज़िन्दगी का सच – अनु महेश्वरी

कुछ, पाकर खोया, कुछ, खोकर पाया यही तो है, ज़िन्दगी का सच, कोई नहीं, सकता इससे बच, जाना जिसने, इस राज को, समझदार, कहलाता है वो, जीवन भी उसका, …

ज़िन्दगी एक विश्वास है – अनु महेश्वरी

ज़िन्दगी, एक विश्वास है, थामे अपनों का हाथ, ज़िन्दगी, ख़ुशी के दो आंसू है, संघर्ष के बाद, ज़िन्दगी, कोमल कोंपल है, पतझड़ के बाद, ज़िन्दगी, बारिश की दो बुँदे …

मुस्कुरा बोलना सीखे हम – अनु महेश्वरी

ज़िन्दगी उतनी भी कठिन नहीं है, जितनी मुश्किल हमने खड़ी की है| थोड़ा सा, अहंकार अपना करे कम, थोड़ा सा, मुस्कुरा बोलना सीखे हम| किसी से बराबरी, अगर न …

राह में कभी कभी – अनु महेश्वरी

राह में कभी कभी, ऐसे लोग मिल जाते है, अंजान होते हुए भी, हमे खुशियां दे जाते है| ऐसे लोगो से मिलकर, अक्सर यही लगता है, इंसानियत अभी भी, …

समाज की सूरत – अनु महेश्वरी

जब तक बदलेगी नहीं, मानसिकता हमारी, केवल बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे से, कैसे बनेगी समाज की सूरत ही प्यारी? मुस्कुराके करो स्वागत, बेटी का, जनम से, बिखरेगी …

ज़िन्दगी – अनु महेश्वरी

ज़िन्दगी भी कितनी अजीब है, एक ही परिस्थिति, किसी के लिए, खुशियां है लाती, किसी को केवल, गम है दे जाती| कोई यहाँ, गम को भी, अपने, मुस्कराहट के …

धैर्य का महत्व – अनु महेश्वरी

बेवजह किसी बात को तूल न देकर, मैंने ज़िन्दगी में खुश रहना सीख लिया| दिखावा को जीवन से दूर रख कर, मैंने ज़िन्दगी में सादगी को अपना लिया| जो …

अंगदान अपनाए – ज़िन्दगी बचाए – अनु महेश्वरी

जमीं से उठे हम, मिट्टी में ही मिल जाएंगे, अंगदान जो किया तो, किसी के काम आएंगे| कई ज़िंदगिया सवारेंगे हम, किया अंगदान जो औरो के लिए, मरके भी …

दूर होगा एकदिन यह अंधेरा – अनु महेश्वरी

जब विरोध के लिए ही, विरोध होता है, तब कहाँ किसी का कभी भला होता है, सब चमकाते राजनीति, अपनी, जनता रह जाती बस, ठगी सी, बेमतलब की बहस …

आँसुओं में खो न जाए कहीं – अनु महेश्वरी

अनमोल होती है ज़िन्दगी अपनी, देखो आँसुओं में खो न जाए कहीं| रोकर हुआ न हासिल कुछ किसी को, ज़िन्दगी की ख़ुशी, मुस्कुराहट में छिपी| गमो के साथ भी …

मौलीक अधिकार – अनु महेश्वरी

अपने अधिकारो में फंसे हम ऐसे, सामने वाले का अधिकार भूल बैठे, किसी बात पे, शर्म नहीं आती, आज हमे, सारी बाते, लगती मौलीक अधिकार, हमे| बेमतलब की वहस …

बेटियों, से ज़िन्दगी होती है – अनु महेश्वरी

समय कब पंख लगा उड़ गया, कितना कुछ अब है बदल गया, जिसे अंगुल पकड़, मैंने चलना सिखाया था, आज वह चलते वक़्त, मेरा हाथ थाम लेती है, जिस …

न झगड़े आपस में हम – अनु महेश्वरी

कठिन है राहे, मुश्किल है रास्ते, गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, भ्रष्टाचार, और न जाने कितने, अनगिनत परेशानिया के साथ है सफ़र, मंजिल अभी दूर है, पर साथ रहे अगर, भरोशा, …

रक्षा बंधन पे, दे दें यह उपहार, – अनु महेश्वरी

कोन तय करेगा हद क्या है, मेरे, चलने की, खाने की, बोलने की, हँसने की, घूमने की, कपड़ो की, मैं या मेरे अपने या यह समाज, क्यों हम इतना …

दया धर्म को बस अपना लो – अनु महेश्वरी

घर के अंदर रहे जब हम, माने किसी भी पंथ को हम, सिख, ईसाई, हिन्दू, मुसलमान, घर के बाहार, बस रहे हम इंसान| मह्जब हम्हारा हो इंसानियत, धर्म हम्हारा हो …