Tag: जीवन- दर्शन

ज़िन्दगी एक विश्वास है – अनु महेश्वरी

ज़िन्दगी, एक विश्वास है, थामे अपनों का हाथ, ज़िन्दगी, ख़ुशी के दो आंसू है, संघर्ष के बाद, ज़िन्दगी, कोमल कोंपल है, पतझड़ के बाद, ज़िन्दगी, बारिश की दो बुँदे …

मुस्कुरा बोलना सीखे हम – अनु महेश्वरी

ज़िन्दगी उतनी भी कठिन नहीं है, जितनी मुश्किल हमने खड़ी की है| थोड़ा सा, अहंकार अपना करे कम, थोड़ा सा, मुस्कुरा बोलना सीखे हम| किसी से बराबरी, अगर न …

राह में कभी कभी – अनु महेश्वरी

राह में कभी कभी, ऐसे लोग मिल जाते है, अंजान होते हुए भी, हमे खुशियां दे जाते है| ऐसे लोगो से मिलकर, अक्सर यही लगता है, इंसानियत अभी भी, …

समाज की सूरत – अनु महेश्वरी

जब तक बदलेगी नहीं, मानसिकता हमारी, केवल बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे से, कैसे बनेगी समाज की सूरत ही प्यारी? मुस्कुराके करो स्वागत, बेटी का, जनम से, बिखरेगी …

ज़िन्दगी – अनु महेश्वरी

ज़िन्दगी भी कितनी अजीब है, एक ही परिस्थिति, किसी के लिए, खुशियां है लाती, किसी को केवल, गम है दे जाती| कोई यहाँ, गम को भी, अपने, मुस्कराहट के …

धैर्य का महत्व – अनु महेश्वरी

बेवजह किसी बात को तूल न देकर, मैंने ज़िन्दगी में खुश रहना सीख लिया| दिखावा को जीवन से दूर रख कर, मैंने ज़िन्दगी में सादगी को अपना लिया| जो …

अंगदान अपनाए – ज़िन्दगी बचाए – अनु महेश्वरी

जमीं से उठे हम, मिट्टी में ही मिल जाएंगे, अंगदान जो किया तो, किसी के काम आएंगे| कई ज़िंदगिया सवारेंगे हम, किया अंगदान जो औरो के लिए, मरके भी …

दूर होगा एकदिन यह अंधेरा – अनु महेश्वरी

जब विरोध के लिए ही, विरोध होता है, तब कहाँ किसी का कभी भला होता है, सब चमकाते राजनीति, अपनी, जनता रह जाती बस, ठगी सी, बेमतलब की बहस …

आँसुओं में खो न जाए कहीं – अनु महेश्वरी

अनमोल होती है ज़िन्दगी अपनी, देखो आँसुओं में खो न जाए कहीं| रोकर हुआ न हासिल कुछ किसी को, ज़िन्दगी की ख़ुशी, मुस्कुराहट में छिपी| गमो के साथ भी …

मौलीक अधिकार – अनु महेश्वरी

अपने अधिकारो में फंसे हम ऐसे, सामने वाले का अधिकार भूल बैठे, किसी बात पे, शर्म नहीं आती, आज हमे, सारी बाते, लगती मौलीक अधिकार, हमे| बेमतलब की वहस …

बेटियों, से ज़िन्दगी होती है – अनु महेश्वरी

समय कब पंख लगा उड़ गया, कितना कुछ अब है बदल गया, जिसे अंगुल पकड़, मैंने चलना सिखाया था, आज वह चलते वक़्त, मेरा हाथ थाम लेती है, जिस …

न झगड़े आपस में हम – अनु महेश्वरी

कठिन है राहे, मुश्किल है रास्ते, गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, भ्रष्टाचार, और न जाने कितने, अनगिनत परेशानिया के साथ है सफ़र, मंजिल अभी दूर है, पर साथ रहे अगर, भरोशा, …

रक्षा बंधन पे, दे दें यह उपहार, – अनु महेश्वरी

कोन तय करेगा हद क्या है, मेरे, चलने की, खाने की, बोलने की, हँसने की, घूमने की, कपड़ो की, मैं या मेरे अपने या यह समाज, क्यों हम इतना …

दया धर्म को बस अपना लो – अनु महेश्वरी

घर के अंदर रहे जब हम, माने किसी भी पंथ को हम, सिख, ईसाई, हिन्दू, मुसलमान, घर के बाहार, बस रहे हम इंसान| मह्जब हम्हारा हो इंसानियत, धर्म हम्हारा हो …

कुछ प्रश्न अनसुलझे से – अनु महेश्वरी

आजकल अक्सर जब अकेली रहती हूँ, काफी सवाल मेरे मन में उमड़ते रहते है, कुछ बाते समझने की कोशिश करती हूँ, पर कुछ प्रश्न, अनसुलझे से रह जाते है| …

दहेज़ प्रथा (हाइकू)- अनु महेश्वरी

नाज़ो से पली बाबुल घर छोड़ा ससुराल में| दहेज़ प्रथा दानव बन गई निगल गई| बेटी भी पढ़े आत्मनिर्भर बने कुप्रथा रुके| सन्मान मिले ख़ुशी से है महके घर-आँगन| …

बस इस देश का परचम लहराए – अनु महेश्वरी

राह सबकी अलग हो सकती जहाँ, पर मंजिल सबकी एक ही है यहाँ| सही रास्ते पे चले हर इंसान, हुआ इसलिए धर्म का निर्माण| धर्म के भी ठेकेदारों ने …

रिश्ते हर पल नहीं बदल सकते हम – अनु महेश्वरी

आज के व्यस्त जीवन में, अपने अंतर मन में झांके, और एक सवाल पूछे सभी, अपने आप से, क्या “मै” खुश हूँ? अगर जवाब में “हाँ” का अहसास होता …