Tag: हास्य कविता

गधों का मता…..सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…..

यह राजनीति भी कैसी राजनीति है…. बिना सर पैर सरपट भागती है…. मुद्दे सब पीछे छूट जाते हैं… जनता भौचक्की ताकती रह जाती है…. इलेक्शन आते ही नेताओं के …

कलयुगी कृष्ण – शिशिर मधुकर

कल शाम टी वी देख बड़ा आनन्द आ रहा था मोर पंख धारी लालू सुत बाँसुरी बजा रहा था कलयुगी कृष्ण का लगा अवतार फ़िर हुआ है विवेकी जनों …

रक्षाबंधन का दिन – शिशिर मधुकर

रक्षाबंधन का दिन हैं और राखी बँधवाने जाना हैं बहन तक पहुँचने को मगर जामो से पार पाना हैं कितनी भी मुश्किलें आए हम भारत के वासी हैं इन्हीं …

जब से मेरी शादी हो गई है – शिशिर मधुकर

मितरो जब से मेरी शादी हो गई है बेमतलब की एक बर्बादी हो गई हैं सोचा था मौज मनाऊंगा जी भर के मगर मेरी शांति भी आधी हो गई …

बीबी के नाम पर हसना मना है

सच है यारों शादी के बाद अपना राज चलाती बीबी चाहो न चाहो सिर पर काटों का ताज सजाती बीबी जो बनते हैं बब्बर शेर उनको बंदर सा नचाती …

मनोविनोद ……

मनोविनोद …… सुना है जोडियाँ स्वर्ग मे बनती है, अगर यह वास्तविकता है तो…… वजिब है वहां भी हो घोटालो और रिश्वत का बोलबाला …। क्योकि——->>> हमने तो jयहां …

उन दिनों की “यादें”

काशी सर्व विद्या की राजधानी यहाँ पढ़ कर लोग बन जाते विद्वान् मै भी पढूँ काशी में, किसी ने दिया पिता जी को ऐसा ज्ञान।। पिता जी के अरमानों …

झगड़ा शुरू हो गया

एक दिन कोई फिल्म, देख रहा था टीवी पर। अचानक ध्यान गया घर में घुसती बीबी पर।। अभी अभी वो चली आ रही थी बाजार से। क्या देख रहे …

दीपक बुझाने गये है

बचपन मे एक बार मै पहुचा दिल्ली अपने सगे चाचा के पास। दुआ सलाम हुआ हमारे बीच पर मैने पाया उन्हे गम्भीर उदास।। शादी के दस सालों मे एक …

जनसख्या वृद्धि और मेरा सुझाव

यूँही दर रहा जनसख्या वृद्धि का हम सब जल्द बेघर हो जायेंगे जब सोने को जगह नहीं मिलेगा तब खड़े खड़े हनीमून मनाएंगे गरीबी भुखमरी व बेकारी का जनसख्या …

विचित्र बीमारी – शिशिर मधुकर

हम सब कवि मित्रों की प्रायः एक विचित्र बीमारी है जिसके आगे नतमस्तक हो कर सारी दुनियाँ हारी है इनकी रचनाओं को अगर भोला श्रोता मिल जाता है पेट …

ईर्ष्या – शिशिर मधुकर

औरत को पुरुषों ने जब भी यथोचित सम्मान दिया औरत की ईर्ष्या ने ही तो फिर उसका नुक्सान किया सारी नारियाँ केवल यहाँ महिला उत्थान की बात करें लेकिन …

शक्की पत्नी और लाचार पति

एक शक्की पत्नी का पति जब भी कहीं से घर आता। पत्नी उसकी जाँच पड़ताल करती लाचार पति बेबस घबराता।। अगर पति के कपड़ों पर कोई बाल भी दिखाई …

मर्द

जिज्ञासु बेटा मेरा, नित्य, प्रश्नों में मुझे उलझाता है । उसको प्रश्नों का जबाब देने में , मेरा पसीना छूट जाता है ।। कल ही उसने मुझसे पूछा, पापा …

रब ही जाने ……..ये क्या हो रहा है …………!!

रब ही जाने ……..ये क्या हो रहा है …………!! कोई रोते – रोते हँसता फिरे कोई हँसते – हँसते रो रहा है कोई सोते हुए भी जागा लगे कोई …

जूते की व्यथा

मैं बेबस लाचार पड़ा, अपनी बात बताता हूं | मैं जूता सुन यार तुझे, किस्से आज सुनाता हूं || शोभा नही हमारे बिन, राजा हो रँक फकीर की | …