Tag: कुन्डली

राम राज़ की ओट में — डी के निवातिया

राम राज़ की ओट में *** राम राज़ की ओट में, पनपे रावण राज। जनसेवक राजन बने , गर्दन काटे आज । गर्दन काटे आज , वचन बोले कर …

कुण्डलिया छंद—कुण्डलियाकार: महावीर उत्तरांचली

(१. ) राधा-रानी कृषण की, थी बचपन की मीत मीरा ने भी सुन लिया, बंसी का संगीत बंसी का संगीत, हरे सुध-बुध तन-मन की मुरलीधर गोपाल, खबर तो लो …

प्रार्थना

(इमेज पढने में दिक्कत हो तो ब्लॉग पर जाएँ) समय अंतराल पर भिन्न सोच के रूप । पाहन से बात करते झुके मानव स्वरुप । झुके मानव स्वरुप कहें …

सोई जानो जगत में, उत्तम जीव सुभाग

सोई जानो जगत में, उत्तम जीव सुभाग । मधुर वचन निरमानता, सम दम तप बैराग ।। सम दम तप बैराग दया हिरदे में धारैं। मुख से बोलें सत्त सदा, …

शेरों में घर स्यार ने, छाया क्या है फेर

शेरों में घर स्यार ने, छाया क्या है फेर । पराक्रम बिन नाम से, हो नहीं सकता शेर ।। हो नहीं सकता शेर, कभी शेरों में बसकर । सिंह …

विष में अमृत होत है, भगवत वर परसाद

विष में अमृत होत है, भगवत वर परसाद । दुश्मन मित्तरवत सबी, तपवत् सब परमाद ।। तपवत् सब परमाद दया भगवत की जिनपै । सागर गो-पद-तुल्य राम राजी जिन …

लक्षण येई नीच के, तजै वेद मरजाद

लक्षण येई नीच के, तजै वेद मरजाद । कटुक वचन, मद, इर्षा, क्रोध, काम, परमाद ।। क्रोध काम परमाद बैर बिन कारण लावै । दगाबाज अन्याई पीठ पर चुगली …

मोहताजों की ख़बर ले, तेरी लें भगवान

मोहताजों की ख़बर ले, तेरी लें भगवान ।। जस परगट दो लोक में, होगा निश्चय जान ।। होगा निश्चय जान, मान वेदों का कहना । जो ठावे उपकार उदय …

मेरे तेरे में तुही, ये दो तुमसे दूर

मेरे तेरे में तुही, ये दो तुमसे दूर । तू मुझमें ना पवता, मैं तुझमें भरपूर ।। मैं तुझमें भरपूर भूलकर दूर बतावै । तू कहता परछिन्न वेद भरपूर …

माया मेरे हरी की, हरें हरी भगवान

माया मेरे हरी की, हरें हरी भगवान । भगत जगत में जो फँसे, करें बरी भगवान ।। करें बरी भगवान, भाग से भगवत अपने । इसे दीनदयाल हरी-हर चाहिये …

मान बड़ाई, इर्षा, आशा, तृष्णा, चार

मान बड़ाई, ईर्षा, आशा, तृष्णा, चार । ये चारों जब तक रहें, जप-तप सब रुजगार ।। जप-तप सब रुजगार नफा पावै हो टोटा । भरम चक्र में पड़ा रहे …