Tag: जीवन दर्शन

रिश्तों का तानाबाना – अनु महेश्वरी

बचपन से बुढ़ापे तक के सफर में, रिश्तों का तानाबाना बुनते बुनते, हम एक जाल सा बुन तो लेते है, पर ज़िन्दगी के अंतिम पड़ाव में, कुछ, साथ छोड़ …

मैं सैनिक हूँ

मैं सैनिक हूँ मैं जगता हूँ रातभर चौकस निगाहें गड़ाए हुए उस जगह जहाँ अगली सुबह देख पाऊं इसमे भी संशय है उसके लिए जो अभी अभी छाती से …

खो रहे संस्कार – अनु महेश्वरी

आधी अधूरी अंग्रेजी बोल, ज्ञानी खुद को है माने, राम को कहे है देखो रामा, और वेद को कहे है वेदा| अपने गलतियों से मुँह मोड़, ज़माने में ढूंढे …

माटी का पुतला — डी के निवातिया

माटी का पुतला ◊ हे मानुष ! जीता है किस गुमान में पलता, बढ़ता है जाने किस अभिमान में !-! जानकर भी हर कोई अन्जान है कहते है यही …

ईश्वर के सवाल – अनु महेश्वरी

(देख दुनिया की हालात, व्याकुल हुए प्रभु खुद और कर बैठे इन्सान से कुछ सवाल, बस मेरी कल्पना भर है| कभी कभी ऐसा सोचने लगती हूँ. आखिर प्रभु को …

मिथ्या प्रेम — डी के निवातिया

मिथ्या प्रेम *** एक बकरा पाला था राम किशन ने एक बकरा पाला था रहीम खान ने मर मिटते उनकी  जवानी देखकर कहते थे दोनों, पाला है दिल-ओ-जान से …

प्रकृति के हर रचना से हमे कुछ सिख मिलती है – अनु महेश्वरी

देखो गुलाब के साथ कांटे भी रहते है यहाँ, जो हमें सतर्क रहना भी सिखाते है और, हर परिस्थिति में शांत रहना भी सिखाते है, प्रकृति के हर रचना …

काश ऐसा हो जाए – अनु महेश्वरी

कोई हमसे रूठे ना, कोई रिश्ता छूटे ना, सबका साथ बना रहे, सब में प्यार बना रहे, काश ऐसा हो जाए| सब मुस्कुराते रहे, औरो को हसाते रहे, खुशियाँ जीवन …

ख़ुशी – अनु महेश्वरी

मैंने ग़रीबी में भी लोगो को, मुस्कुरा, जीवन बिताते देखा है| अपनी चाहत को समेटे, मिल बाँट रहते देखा है| ज़िन्दगी को करीब से, देखा, तो जाना मैंने, खुश …

उत्तरदायी हम सभी है – अनु महेश्वरी

सूरत की कायल हुई, दुनिया जब से, सीरत पीछे रह गयी, धन की पूजा होने लगी जब से, ईमानदारी पीछे छूट गई| भारत के इस हालात के लिए, उत्तरदायी …

विरोधाभास – अनु महेश्वरी

पत्थरों को, ईश्वर मान पूजा जाता है जहाँ, कभी कभी वही, जवानो पे भी, बरसते है| नौरात्र में कन्या की पूजा होती है जहाँ, वही कन्या भ्रूण की भी, …

एहसास – शिशिर मधुकर

जहाँ गुलाब हों कांटों का तो वास होता है शैतान भी अक्सर खुशबू के साथ सोता है केवल फूल ही ईश्वर के मुकुट में सजते हैं शूलों को क्यूँ …

रंग बदलते रहना – अनु महेश्वरी

समय अनुसार रंग बदलते रहना, सब की हाँ में हाँ, मिलाते रहना, खुद को हमेशा लाचार दिखाना, मुश्किल है ऐसे लोगों को समझना|   अनु महेश्वरी चेन्नई