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पैरों में ज़ंजीरें – शिशिर मधुकर

इन पैरों में ज़ंजीरें हैं रिश्ते नातों की भारी कह दो कैसे कर लूँ फ़िर मैं खोज तुम्हारी तेरा प्रेम सचिदानंद सागर हैं एक अनोखा बड़ी देर से समझ …

राधा माधव – शिशिर मधुकर

राधा माधव मेरे अंदर जिस पल मैं उनको पहचानूं प्रेम की इस असली शक्ति को तब ही तो पूरा जानूं इनके बिना तो कोई प्राणी जीवन ना पा सकता …

खुद की खोज – शिशिर मधुकर

प्रेम को बाहर ना ढूँढो बस अपने भीतर ही टटोलो बिना खोट वाले रिश्ते कहाँ मिलते हैं तुम ही बोलो कोई दावा कितना भी करे कि वो छाया है …

आशा-1…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

आशा….. हम में ही निहित है…जन्म से… प्रकिर्ति में निहित है हमारे चारों तरफ… यत पिण्डे तत ब्रह्मांडे… जो भीतर है वही तो बाहर है…. रोज़ ही फूल पौधे …

अधूरापन – शिशिर मधुकर

पा लिया सब तो फ़िर आनँद ना कोई आएगा खुशी मिलेगी जब कोई दिल भी तेरा दुखाएगा अधूरापन भी मानव जीवन में बड़ा ज़रूरी है तभी तो प्यासा कोई …

जीवन का आधार है बेटी………… “मनोज कुमार”

जीवन का आधार है बेटी सुख शक्ति संसार है बेटी बदल देती जो दुनिया को ऐसा एक बदलाव है बेटी अत्याचार करो नही इनपे दुर्गा की अवतार है बेटी …

“साया”

“साया” १. आज पूरा मानव-जिन्दगी पर है, आतंक का साया कभी सोंचा हमसब ने, ऐसा हाल किसने बनाया ये है सलीका ? मानव तंत्र को जगाने का गुप्त प्रकृति …

दहेज प्रथा – शिशिर मधुकर

दहेज प्रथा वास्तबिक जीवन में कोई अभिशाप नहीँ कुछ लोगों ने इसे अपने फायदे को है बदनाम किया वो माँ बाप जो बेटियो को बस एक बोझ समझते हैं …

तर्पण —( डी. के. निवातिया )

करने आया था तर्पण अपने मात-पिता का अनायास ही मुझसे टकरा गया मैंने भी पूछ लिया, कैसे हो मित्र ! रुआंसा होकर बोला,  अच्छा हूँ मैंने फिर पूछ लिया, …

संत मदर टेरेसा – शिशिर मधुकर

दबे कुचले और बीमारों की सेवा में जो जीवन लगा दे ऐसा व्यक्ति इस जहाँ में कभी आम नही हो सकता है जब तक दिल निष्पाप दया करुणा से …

आजादी ……..

खुशनुमा माहोल में खोज रहा था ह्रदय आजादी के मायने उलझ कर रह गया खुद ही के सवालों में । क्या समझ पाया क्या नही, नामालूम बस द्वंद में …