Tag: चिंतन /दर्शन /बिवेचना

खुदा का है दरबार – अनु महेश्वरी

  जग में हम सभी किरायेदार, दुनिया खुदा की है दरबार, अस्थायी है अपना निवास, बाकी बातें सभी निराधार| सभी को जाना है एकबार, मन में क्यों रखे फिर भार, …

मौन बड़ा अनमोल – डी के निवातिया

मौन बड़ा अनमोल *** मौन बड़ा अनमोल प्यारे, नही इसका कोई मोल मौन के आगे सब हारे, बोलो कितने कड़वे बोल !! मौन जब तक मौन है, दुनिया में …

स्वंय से तुम युद्ध करो – डी के निवातिया

स्वंय से तुम युद्ध करो बुद्ध को तुम प्रबुद्ध करो आत्मा को शुद्ध करो चैतन्य सर्व प्रबल हो स्वंय से तुम युद्ध करो !! अभीष्‍टता आस करो सत्य का …

मन रुपी मानुष – डी के निवातिया

मन रुपी मानुष.. श्रावण छवि धारण कर ली, मन-मस्तिष्क के घुमड़ते मेघो ने, वर्षा होने लगी है अब, नयनो के समुन्द्र से अश्को की, ध्वंसावशेष के अवयव में, कुछ …

यह जीव -हत्या क्यों और कब तक ! (कविता )

यह बेजुबान जानवर, यह भोले जानवर , इंसान की नियत से बेखबर , यह मासूम जानवर . घर पर तो लाते हैं, बड़ा प्यार-दुलार देते हैं, लेकिन जब निकल …

एक की ख़ामोशी भी खलती है – अनु महेश्वरी

गलत या सही मापने का कोई पैमाना नहीं, पर मुश्किल होती, जब सिमित रख दायरा, अपनी समझ को ही, सब बस माने है सही। सब कुछ अपने हिसाब से …

खुद से करते रहे वादें – अनु महेश्वरी

गैरो पे कैसे होगा, भला एतबार, जब घायल, अपनो के हाथों हुआ होगा? भरोसा गर चोटिल हो बार बार, फिर दुनिया में, जीना भी दुश्वार होगा| दूर से देख, …

अमर गीत “आएगा आने वाला” व “महल” से जुड़ी त्रासदियाँ

जी हैं, शीर्षक से सही पहचाना आप सबने। मैं ज़िक्र कर रहा हूँ “महल” (1949) की फ़िल्म का। जिसके निर्देशक थे कमाल अमरोही। संगीतकार थे खेमचन्द प्रकाश। चार गीत (नक्शब …

बस रहे हम हिंदुस्तानी – अनु महेश्वरी

केवल अँधेरे की बातें करने से, यह दूर नहीं होगा, हर एक को दीया जला, जहाँ रोशन करना होगा| शिकायतों का दौर छोड़ अब कुछ कर दिखाना है, अपना …

शब्द विवेचन- मेरा आईना- प्रेम

शब्द विवेचन – “प्रेम”   शब्द माला के “प” वर्ग के प्रथम और व्यंजन माला के इक्कीस वे अक्षर के साथ स्वर संयोजन के बना “अढाई अक्षर” का शब्द …

फिर एक हादसा – अनु महेश्वरी

फिर जांच आयोग बैंठेगा, फिर शिकायतों का दौर चलेगा, फिर टीवी चैनलों पे वाद-विवाद होगा, फिर एक दूसरे पे दोषारोपण भी होगा| पर जिन्होंने भी जान गवाई, उनका क्या …

इंसान है हम इंसान ही बने रहे – अनु महेश्वरी

इंसान है हम, इंसान ही बने रहे, सोचे, समझे, फिर, कुछ कहे, अपने बोले किसी शब्द से, कभी, किसी का दिल न दुख जाए| इंसान है हम, इंसान ही …

उत्थान हर कोई कर रहा है – डी के निवातिया

उत्थान हर कोई कर रहा है भूखा बचपन, ममतत्व के आँचल में सिमटकर पूछे उत्थान हर कोई कर रहा है, मगर न जाने किसका !! सुदूर गाँव आज भी …

प्यार और विश्वास – अनु महेश्वरी

इस जहाँ में, कब वक़्त बदल जाए, न तुझको खबर है, न मुझको खबर है, अनचाही दूरियां, राह मे चाहे आ भी जाए, दिलों में फासले, देखो, कभी आने …

इंसानियत बड़ी — डी के निवातिया

इंसानियत बड़ी *** मंदिर बने या मस्जिद इस पर बहस लड़ी है ईश्वर रहेगा या अल्लाह इस पर बात अडी है जब पूछा जरूररतमंद, भूखे-प्यासे इंसान से बोला, मिले …