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माटी का पुतला — डी के निवातिया

माटी का पुतला ◊ हे मानुष ! जीता है किस गुमान में पलता, बढ़ता है जाने किस अभिमान में !-! जानकर भी हर कोई अन्जान है कहते है यही …

फर्क — डी के निवातिया

फर्क *** मै भी तो जर्रा हूँ उस बनौरी का जिसके सदा तुम सजदे करते हो ! क्या फर्क है उसमें और मुझमे उसे शिखर, मुझे तलवे रखते हो …

चिड़िया

शाम बढ़ती जा रही थी बेचैनी उमड़ती जा रही थी शाख पर बैठी अकेली दूर नजरों को फिराती कुछ नजर आता नहीँ फिर भी फिराती चीं चीं करती मीत …

मुस्कुरा बोलना सीखे हम – अनु महेश्वरी

ज़िन्दगी उतनी भी कठिन नहीं है, जितनी मुश्किल हमने खड़ी की है| थोड़ा सा, अहंकार अपना करे कम, थोड़ा सा, मुस्कुरा बोलना सीखे हम| किसी से बराबरी, अगर न …

राह में कभी कभी – अनु महेश्वरी

राह में कभी कभी, ऐसे लोग मिल जाते है, अंजान होते हुए भी, हमे खुशियां दे जाते है| ऐसे लोगो से मिलकर, अक्सर यही लगता है, इंसानियत अभी भी, …

कैसे बनेगी कोई बात – अनु महेश्वरी

कैसे सुधरेंगे हालात, कैसे बनेगी कोई बात, कथनी और करनी में, जब तक रहेगा विरोधाभास| कैसे कायम रहेगा विश्वास, कैसे बढ़ेगा सच का मान, चलता रहेगा झूठ धरल्ले से, …

मैं आधुनिक नारी हूँ

मै अबला नादान नहीं हूँ दबी हुई पहचान नहीं हूँ मै स्वाभिमान से जीती हूँ रखती अंदर ख़ुद्दारी हूँ मै आधुनिक नारी हूँ पुरुष प्रधान जगत में मैंने अपना …

तुझ में मिलूँ – शिशिर मधुकर

तुझसे मिलने जब भी मैं तन कर चला वक्त ने दिल तोड़ मेरा मुझको ही छला खुशियां सारी छिन गईं तब पल में सभी चैन प्यासी रूह को मिला …

समाज की सूरत – अनु महेश्वरी

जब तक बदलेगी नहीं, मानसिकता हमारी, केवल बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे से, कैसे बनेगी समाज की सूरत ही प्यारी? मुस्कुराके करो स्वागत, बेटी का, जनम से, बिखरेगी …

ज़िन्दगी रूपी माला – अनु महेश्वरी

दुनिया देखोगें, नज़र से जैसी, तस्वीर इसकी, उभरेगी वैसी, हमेशा नहीं होता, सब कुछ काला या सफ़ेद जहाँ, और भी बहुत रंग है, ज़िन्दगी रूपी माला में यहाँ… अनु महेश्वरी …

जरुरत से बनते और बिगड़ते है रिश्ते – अनु महेश्वरी

जरुरत से बनते और बिगड़ते है, रिश्ते जहाँ, ऐसी दुनिया में कैसे मिले, सुकून किसीको यहाँ? न अपना कोई सगा यहाँ, न ही कोई है बेगाना यहाँ, बस मतलब …

ज़िन्दगी – अनु महेश्वरी

ज़िन्दगी भी कितनी अजीब है, एक ही परिस्थिति, किसी के लिए, खुशियां है लाती, किसी को केवल, गम है दे जाती| कोई यहाँ, गम को भी, अपने, मुस्कराहट के …

फहराएंगे कल तिरंगा आराम से

हाकिम का नया क़ायदा है रहिये आराम से, गुनहगार अब पकडे जायेंगे नाम से, हाकिम को पता है उसकी बेगुनाही, वो तो सजावार है उसके नाम से, उसका सर …

धैर्य का महत्व – अनु महेश्वरी

बेवजह किसी बात को तूल न देकर, मैंने ज़िन्दगी में खुश रहना सीख लिया| दिखावा को जीवन से दूर रख कर, मैंने ज़िन्दगी में सादगी को अपना लिया| जो …

अंगदान अपनाए – ज़िन्दगी बचाए – अनु महेश्वरी

जमीं से उठे हम, मिट्टी में ही मिल जाएंगे, अंगदान जो किया तो, किसी के काम आएंगे| कई ज़िंदगिया सवारेंगे हम, किया अंगदान जो औरो के लिए, मरके भी …

दूर होगा एकदिन यह अंधेरा – अनु महेश्वरी

जब विरोध के लिए ही, विरोध होता है, तब कहाँ किसी का कभी भला होता है, सब चमकाते राजनीति, अपनी, जनता रह जाती बस, ठगी सी, बेमतलब की बहस …

आँसुओं में खो न जाए कहीं – अनु महेश्वरी

अनमोल होती है ज़िन्दगी अपनी, देखो आँसुओं में खो न जाए कहीं| रोकर हुआ न हासिल कुछ किसी को, ज़िन्दगी की ख़ुशी, मुस्कुराहट में छिपी| गमो के साथ भी …