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एक की ख़ामोशी भी खलती है – अनु महेश्वरी

गलत या सही मापने का कोई पैमाना नहीं, पर मुश्किल होती, जब सिमित रख दायरा, अपनी समझ को ही, सब बस माने है सही। सब कुछ अपने हिसाब से …

खुद से करते रहे वादें – अनु महेश्वरी

गैरो पे कैसे होगा, भला एतबार, जब घायल, अपनो के हाथों हुआ होगा? भरोसा गर चोटिल हो बार बार, फिर दुनिया में, जीना भी दुश्वार होगा| दूर से देख, …

अमर गीत “आएगा आने वाला” व “महल” से जुड़ी त्रासदियाँ

जी हैं, शीर्षक से सही पहचाना आप सबने। मैं ज़िक्र कर रहा हूँ “महल” (1949) की फ़िल्म का। जिसके निर्देशक थे कमाल अमरोही। संगीतकार थे खेमचन्द प्रकाश। चार गीत (नक्शब …

बस रहे हम हिंदुस्तानी – अनु महेश्वरी

केवल अँधेरे की बातें करने से, यह दूर नहीं होगा, हर एक को दीया जला, जहाँ रोशन करना होगा| शिकायतों का दौर छोड़ अब कुछ कर दिखाना है, अपना …

शब्द विवेचन- मेरा आईना- प्रेम

शब्द विवेचन – “प्रेम”   शब्द माला के “प” वर्ग के प्रथम और व्यंजन माला के इक्कीस वे अक्षर के साथ स्वर संयोजन के बना “अढाई अक्षर” का शब्द …

फिर एक हादसा – अनु महेश्वरी

फिर जांच आयोग बैंठेगा, फिर शिकायतों का दौर चलेगा, फिर टीवी चैनलों पे वाद-विवाद होगा, फिर एक दूसरे पे दोषारोपण भी होगा| पर जिन्होंने भी जान गवाई, उनका क्या …

इंसान है हम इंसान ही बने रहे – अनु महेश्वरी

इंसान है हम, इंसान ही बने रहे, सोचे, समझे, फिर, कुछ कहे, अपने बोले किसी शब्द से, कभी, किसी का दिल न दुख जाए| इंसान है हम, इंसान ही …

उत्थान हर कोई कर रहा है – डी के निवातिया

उत्थान हर कोई कर रहा है भूखा बचपन, ममतत्व के आँचल में सिमटकर पूछे उत्थान हर कोई कर रहा है, मगर न जाने किसका !! सुदूर गाँव आज भी …

प्यार और विश्वास – अनु महेश्वरी

इस जहाँ में, कब वक़्त बदल जाए, न तुझको खबर है, न मुझको खबर है, अनचाही दूरियां, राह मे चाहे आ भी जाए, दिलों में फासले, देखो, कभी आने …

इंसानियत बड़ी — डी के निवातिया

इंसानियत बड़ी *** मंदिर बने या मस्जिद इस पर बहस लड़ी है ईश्वर रहेगा या अल्लाह इस पर बात अडी है जब पूछा जरूररतमंद, भूखे-प्यासे इंसान से बोला, मिले …

दिवंगतों को मत बदनाम करो — डी के निवातिया

दिवंगतों को मत बदनाम करो *** अपने पूर्वजो की गैरत कटघरे ला दी तुमने आकर मीठी बातो में ! सत्तर साल की कामयाबी मिटा दी तुमने आकर के जज्बातो …

ज़िन्दगी का सच – अनु महेश्वरी

कुछ, पाकर खोया, कुछ, खोकर पाया यही तो है, ज़िन्दगी का सच, कोई नहीं, सकता इससे बच, जाना जिसने, इस राज को, समझदार, कहलाता है वो, जीवन भी उसका, …

रुआना आ गया – डी के निवातिया

रुआना आ गया ! कागज़, कलम, दवात, डायरी के पन्ने, ये सब तो अब बीते ज़माने कि बाते है व्हाट्सप्प, ट्वीटर, फेसबुक, भी छोडो वीडियो कॉलिंग का ज़माना आ …