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कल्पना – डी के निवातिया

आऒ जानें ….कल्पना क्या है ……….!! *** प्रत्यक्षानात्मक अनुभवों की ये कुँजी है बिंबों और सृजन विचारों की ये पूँजी है विचारणात्मक स्तर की रचनात्मकता ‘कल्पना’ नियोजन पक्ष की …

भाग्य ना कोई बांच सका है – शिशिर मधुकर

वक्त की ज़द में कुछ भी हो तुम फिर भी रहना पड़ता है तेरे बिन इस तन्हाई का ग़म मुझको भी सहना पड़ता है कितना भी कोई संयम रख …

आसक्ति – शिशिर मधुकर

राधा से पूरा प्रेम किया फिर मथुरा को निकल गए प्रेम की इस आसक्ति से तो केवल प्रेम ही बच पाया योगीराज ने कर्मयोग की शिक्षा संसार को दे …

सृजन 1….सी.एम्.शर्मा (बब्बू) ….

सृजन करने निकला था…. अपनी दुनियाँ का मैं…. खुद को ग़ुम सा पाता हूँ…. मैं खुद को पाना चाहता हूँ…. हर कोई जानता है मुझे… पर मैं भूल जाता …

खुदा का है दरबार – अनु महेश्वरी

  जग में हम सभी किरायेदार, दुनिया खुदा की है दरबार, अस्थायी है अपना निवास, बाकी बातें सभी निराधार| सभी को जाना है एकबार, मन में क्यों रखे फिर भार, …

मौन बड़ा अनमोल – डी के निवातिया

मौन बड़ा अनमोल *** मौन बड़ा अनमोल प्यारे, नही इसका कोई मोल मौन के आगे सब हारे, बोलो कितने कड़वे बोल !! मौन जब तक मौन है, दुनिया में …

स्वंय से तुम युद्ध करो – डी के निवातिया

स्वंय से तुम युद्ध करो बुद्ध को तुम प्रबुद्ध करो आत्मा को शुद्ध करो चैतन्य सर्व प्रबल हो स्वंय से तुम युद्ध करो !! अभीष्‍टता आस करो सत्य का …

मन रुपी मानुष – डी के निवातिया

मन रुपी मानुष.. श्रावण छवि धारण कर ली, मन-मस्तिष्क के घुमड़ते मेघो ने, वर्षा होने लगी है अब, नयनो के समुन्द्र से अश्को की, ध्वंसावशेष के अवयव में, कुछ …

यह जीव -हत्या क्यों और कब तक ! (कविता )

यह बेजुबान जानवर, यह भोले जानवर , इंसान की नियत से बेखबर , यह मासूम जानवर . घर पर तो लाते हैं, बड़ा प्यार-दुलार देते हैं, लेकिन जब निकल …

एक की ख़ामोशी भी खलती है – अनु महेश्वरी

गलत या सही मापने का कोई पैमाना नहीं, पर मुश्किल होती, जब सिमित रख दायरा, अपनी समझ को ही, सब बस माने है सही। सब कुछ अपने हिसाब से …

खुद से करते रहे वादें – अनु महेश्वरी

गैरो पे कैसे होगा, भला एतबार, जब घायल, अपनो के हाथों हुआ होगा? भरोसा गर चोटिल हो बार बार, फिर दुनिया में, जीना भी दुश्वार होगा| दूर से देख, …

अमर गीत “आएगा आने वाला” व “महल” से जुड़ी त्रासदियाँ

जी हैं, शीर्षक से सही पहचाना आप सबने। मैं ज़िक्र कर रहा हूँ “महल” (1949) की फ़िल्म का। जिसके निर्देशक थे कमाल अमरोही। संगीतकार थे खेमचन्द प्रकाश। चार गीत (नक्शब …

बस रहे हम हिंदुस्तानी – अनु महेश्वरी

केवल अँधेरे की बातें करने से, यह दूर नहीं होगा, हर एक को दीया जला, जहाँ रोशन करना होगा| शिकायतों का दौर छोड़ अब कुछ कर दिखाना है, अपना …