Tag: माँ पर कविता

अम्मा(people chief minister)

दिनभर रोती आँखे पलक झपकाने से, कतराती रही कही अनहोनी ना हो जाये ख़बर मिलीं……….. तो आसं लगाये बैठी…. शायद अभी…. शायद अभी…. शायद अभी तो अम्मा ऊठ जाये, …

बचपन (विवेक बिजनोरी)

” खुद पे ख़ुदा की आज भी मेहरबानी याद है, कच्चे-मकान, चूल्हे की रोटी, बारिश का पानी याद है” माँ का अपने हाथों से रोटी खिलाना भूख में, पापा …

माँ

हमारी ऊँगली पकड़कर वो हमें चलना सिखाती है खुद भूखी रहकर भी हमें पेट भर खिलाती है जो गिरे कभी हमारे आंसू वो समंदर बहा देती है देखने को …

बहुत याद आती है माँ……

बहुत याद आती है माँ भूख – पयास की तडप उठी हो या अकेलेपन का हो अहसास गर किसी कठिनाई से हो सामना और व्यथित मन हो उठता उदास …

मेरी माँ, मेरा कावा कैलाश

*माँ (ताटंक छंद)* जीवनदात्री करुणामयि माँ! तू विश्वास हमारा है। तेरे पद में काशी-मक्का, शुचि सुरसरि की धारा है।। तुम काबा कैलाश तुम्ही हो, तुम में ईश्वर पाया माँ। …

मदर डे के विशेष अवसर माँ के नाम एक छोटी सी प्रार्थना…………

मदर डे के विशेष अवसर माँ के नाम एक छोटी सी प्रार्थना !! हे जग जननी, हे जग पालक, जीवन दायनी ! हे माते भवभामिनि तुझे कोटि कोटि प्रणाम …

* माता-पिता के चरणों में चारो धाम *

रघुपति राघव राजा राम माता-पिता के चरणों मर चारो धाम , पिता आकाश हैं तो माँ हैं धरातल इनके जैसा न है कोई यहाँ पर , निश्चछल प्रेम बरसे …

माँ मुझको फिर लोरी सुना दो………

माँ मुझको फिर लोरी सुना दो, अपनी गोद में मुझे सुला दो !! विरह व्यथित हु, दीन दुखी मै अब हार थककर चूर हुआ हूँ रखकर अपने पुष्प हाथो …

* माँ से बड़ा इस दुनियाँ में न कोई है *

माँ से बड़ा इस दुनियाँ में न कोई है जिसके पास माँ नहीं वो बड़ा बदनशीब है। माँ की आँचल की छाया सब की नसीब बनाया माँ के आशीष …

शिकवा बेटी का ……

क्यों कहती माँ तुम “बेटा” मुझको क्यों मेरी पहचान मिटाती हो ! मेरा भी अपना असितत्व है, दुनिया में उसे क्यों छिपाती हो !! क्यों कहती………………………!! जन्म हुआ होगा …

सिर्फ एक “माँ” कर सकती है

सहकर कष्ट अपार जीवन दुसरो का जीवन बना सकती है करने को जीवन प्रदान किसी को खुद की जान दाँव पे लगा सकती है वो सिर्फ एक माँ ही …

!! एक शब्द माँ के नाम !!

मेरा एक शब्द मेरी जननी के नाम जब पहली बार, मुख से निकला होगा वो प्रिय शब्द जिसको मात्र उसी ने सुना होगा, फुले नही समायी होगी, सुनकर दौड़ी …

माँ ,मम्मी, अम्मी या आई

“””””””””माँ,मम्मी,अम्मी या आई”””””””””” कैसे समझाऊँ?, कैसे बतलाऊं?, वो नारी मेरा मान है सबसे है अलग, सबसे है जुदा, वो मेरा अभिमान है | सिर्फ दर्द नही, हर ख़ुशी में …