Tag: माँ पर कविता

माता रानी के द्वार — डी के निवातिया

“माता रानी के द्वार” *** हुम्म्म्मम्म्म्म…………..चलो ..चलो ………….! चलो ..चलो ……………..चलो ..चलो ………….! चलो ..चलो ……………चलो ..चलो ………….! हुम्म्म्मम्म्म्म…………..चलो ..चलो ………..! चलो रे चलो माता रानी के द्वार दुःख …

मैं आधुनिक नारी हूँ

मै अबला नादान नहीं हूँ दबी हुई पहचान नहीं हूँ मै स्वाभिमान से जीती हूँ रखती अंदर ख़ुद्दारी हूँ मै आधुनिक नारी हूँ पुरुष प्रधान जगत में मैंने अपना …

माँ से प्यारा…… सुख सारा है |गीत| “मनोज कुमार”

माँ से प्यारा इस जग में ना, हमको कोई प्यारा है माँ की सेवा कर लो, इसके चरणों में सुख सारा है माँ से प्यारा……………………………. सुख सारा है ये …

मातृ दिवस — माँ पर कविता — डी. के निवातिया

माफ़ कर देना माँ तुझे मातृ दिवस पर याद नहीं किया मैंने शायद गुम गया कही मातृ दिवस तेरे निश्छल प्रेम की ओट में हर क्षण जो छायी रहती …

अम्मा(people chief minister)

दिनभर रोती आँखे पलक झपकाने से, कतराती रही कही अनहोनी ना हो जाये ख़बर मिलीं……….. तो आसं लगाये बैठी…. शायद अभी…. शायद अभी…. शायद अभी तो अम्मा ऊठ जाये, …

बचपन (विवेक बिजनोरी)

” खुद पे ख़ुदा की आज भी मेहरबानी याद है, कच्चे-मकान, चूल्हे की रोटी, बारिश का पानी याद है” माँ का अपने हाथों से रोटी खिलाना भूख में, पापा …

बहुत याद आती है माँ……

बहुत याद आती है माँ भूख – पयास की तडप उठी हो या अकेलेपन का हो अहसास गर किसी कठिनाई से हो सामना और व्यथित मन हो उठता उदास …

मेरी माँ, मेरा कावा कैलाश

*माँ (ताटंक छंद)* जीवनदात्री करुणामयि माँ! तू विश्वास हमारा है। तेरे पद में काशी-मक्का, शुचि सुरसरि की धारा है।। तुम काबा कैलाश तुम्ही हो, तुम में ईश्वर पाया माँ। …

मदर डे के विशेष अवसर माँ के नाम एक छोटी सी प्रार्थना…………

मदर डे के विशेष अवसर माँ के नाम एक छोटी सी प्रार्थना !! हे जग जननी, हे जग पालक, जीवन दायनी ! हे माते भवभामिनि तुझे कोटि कोटि प्रणाम …

* माता-पिता के चरणों में चारो धाम *

रघुपति राघव राजा राम माता-पिता के चरणों मर चारो धाम , पिता आकाश हैं तो माँ हैं धरातल इनके जैसा न है कोई यहाँ पर , निश्चछल प्रेम बरसे …

माँ मुझको फिर लोरी सुना दो………

माँ मुझको फिर लोरी सुना दो, अपनी गोद में मुझे सुला दो !! विरह व्यथित हु, दीन दुखी मै अब हार थककर चूर हुआ हूँ रखकर अपने पुष्प हाथो …

* माँ से बड़ा इस दुनियाँ में न कोई है *

माँ से बड़ा इस दुनियाँ में न कोई है जिसके पास माँ नहीं वो बड़ा बदनशीब है। माँ की आँचल की छाया सब की नसीब बनाया माँ के आशीष …