Tag: माँ पर कविता

“माँ”…इंतज़ार… सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

    जिन नैनों से देखा तुमने आज उनमे रही ज्योत नहीं… जिन बाहों ने संभाला तुझको बची उनमें ताकत नहीं… ममता का समंदर छलकता अब भी पहले जैसा …

“माँ”…सी. एम् शर्मा (बब्बू)

  धागे प्रेम के…. कच्चे कहाँ होते हैं… देखो ‘माँ’ ड्योढ़ी पे है खड़ी… अकेली….भूखी…प्यासी…. स्थिर काया…एकटुक निहारती… वीरान सी पगडण्डी लगती है उसे… भीड़ इतनी आती जाती में …

तुमने मुझको छांटा था-शिशिर मधुकर

बचपन में ना जाने मुझको कितना तुमने डांटा था गलती मैं जब करता था गालों पर पड़ता चांटा था सबने पूछा जब तुमसे चुन लो एक सुन्दर सा बच्चा …

माँ की गोद बिछौना- शिशिर मधुकर

हर बच्चा अपनी माता की आँखों का नूर सलौना है उसके प्रेम के आगे जग का हर स्नेह कितना बौना है कैसी भी पीड़ा हो लेकिन नींद जहाँ आ …

नूर हूँ मै – डी के निवातिया

नूर हूँ मै @ तेरे मुखमंडल की आभा से प्रज्वलित होता दीप हूँ मैं तेरे ही आशीर्वचनो से फलीभूत होता आशीष हूँ मै तुम कारक, कारण तुम ही तुम …

स्वेटर माँ के हाथ का – डी के निवातिया

स्वेटर माँ के हाथ का — सर्दी से बचने के लिए, आज लबादों से लदा हूँ, महंगे सूट पहनकर ! मगर वो गर्माहट नहीं मिलती, जो माँ के हाथ …

माता रानी के द्वार — डी के निवातिया

“माता रानी के द्वार” *** हुम्म्म्मम्म्म्म…………..चलो ..चलो ………….! चलो ..चलो ……………..चलो ..चलो ………….! चलो ..चलो ……………चलो ..चलो ………….! हुम्म्म्मम्म्म्म…………..चलो ..चलो ………..! चलो रे चलो माता रानी के द्वार दुःख …

मैं आधुनिक नारी हूँ

मै अबला नादान नहीं हूँ दबी हुई पहचान नहीं हूँ मै स्वाभिमान से जीती हूँ रखती अंदर ख़ुद्दारी हूँ मै आधुनिक नारी हूँ पुरुष प्रधान जगत में मैंने अपना …

माँ से प्यारा…… सुख सारा है |गीत| “मनोज कुमार”

माँ से प्यारा इस जग में ना, हमको कोई प्यारा है माँ की सेवा कर लो, इसके चरणों में सुख सारा है माँ से प्यारा……………………………. सुख सारा है ये …

मातृ दिवस — माँ पर कविता — डी. के निवातिया

माफ़ कर देना माँ तुझे मातृ दिवस पर याद नहीं किया मैंने शायद गुम गया कही मातृ दिवस तेरे निश्छल प्रेम की ओट में हर क्षण जो छायी रहती …

अम्मा(people chief minister)

दिनभर रोती आँखे पलक झपकाने से, कतराती रही कही अनहोनी ना हो जाये ख़बर मिलीं……….. तो आसं लगाये बैठी…. शायद अभी…. शायद अभी…. शायद अभी तो अम्मा ऊठ जाये, …

बचपन (विवेक बिजनोरी)

” खुद पे ख़ुदा की आज भी मेहरबानी याद है, कच्चे-मकान, चूल्हे की रोटी, बारिश का पानी याद है” माँ का अपने हाथों से रोटी खिलाना भूख में, पापा …

बहुत याद आती है माँ……

बहुत याद आती है माँ भूख – पयास की तडप उठी हो या अकेलेपन का हो अहसास गर किसी कठिनाई से हो सामना और व्यथित मन हो उठता उदास …

मेरी माँ, मेरा कावा कैलाश

*माँ (ताटंक छंद)* जीवनदात्री करुणामयि माँ! तू विश्वास हमारा है। तेरे पद में काशी-मक्का, शुचि सुरसरि की धारा है।। तुम काबा कैलाश तुम्ही हो, तुम में ईश्वर पाया माँ। …

मदर डे के विशेष अवसर माँ के नाम एक छोटी सी प्रार्थना…………

मदर डे के विशेष अवसर माँ के नाम एक छोटी सी प्रार्थना !! हे जग जननी, हे जग पालक, जीवन दायनी ! हे माते भवभामिनि तुझे कोटि कोटि प्रणाम …