Tag: किताबों पर कविता

किताबें

खोल देती हैं वे हम में सदियों से बंद आँखें उन से टपकने लगते हैं पछतावे अपने बहुत छोटे और मामूली होने के पन्नों पर उगे रहते हैं पठार …