Tag: कविता

युग पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी….

“बेनकाब चेहरे हैं, दाग बड़े गहरे हैं, टूटता तिलस्म, आज सच से भय खाता हूँ । गीत नही गाता हूँ ” (श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी) सच में तुमने …

सबसे पहले है देश – अनु महेश्वरी

बधाई हो बधाई हो, स्वतंत्रता दिवस की सबको बधाई हो। पाने के लिए ये आज़ादी, पुर्वजों ने दी है कुर्बानी, देखो इसे अब न कोई, ज़ख्म दे जाए। बधाई …

मिटटी – डी. के. निवातिया

मिटटी *** जीवन का सार है, उत्पत्ति का आधार है जल हो या वायु संपूर्ण जगत की प्राण है मिटटी !! अम्बर को शीश धारे, प्रकृति को सीने पे …

खुदा का है दरबार – अनु महेश्वरी

  जग में हम सभी किरायेदार, दुनिया खुदा की है दरबार, अस्थायी है अपना निवास, बाकी बातें सभी निराधार| सभी को जाना है एकबार, मन में क्यों रखे फिर भार, …

उलझा हुआ वो भी – अनु महेश्वरि

पुरुष शक्तिशाली या नारी, कोन किसपे परे है भारी, ये बहस तो चलती आयी है, सदियों तक चलती भी रहेगी। मेरा अनुभव तो कहता है, पुरुष भी मन से …

सोच-सोच घबराता हूँ

ये सोच-सोच घबराता हूँ…….. *** पिता नही मेरी ताकत है, छत्र-छाया में उनकी रहता हूँ महफूज उनके संरक्षण में, निडर हो बेफिक्री से जीता हूँ छोड़ जायेंगे एक दिन …

पुष्प बेल – डी के निवातिया

पुष्प बेल ***** मेरे आँगन में ख़ुशियाँ खिलखिलाती है मन उपवन तितलियाँ सी फुरफुराती है धरा सी माता नभ से पिता की छाँव में बेटियों के रूप में पुष्प …

स्वंय से तुम युद्ध करो – डी के निवातिया

स्वंय से तुम युद्ध करो बुद्ध को तुम प्रबुद्ध करो आत्मा को शुद्ध करो चैतन्य सर्व प्रबल हो स्वंय से तुम युद्ध करो !! अभीष्‍टता आस करो सत्य का …

विधा : कहमुक़री

सुबह शाम   मैं   उसे   रिझाऊँ नैन पलक पर  जिसे    बिठाऊँ बिन  उसके   दिल    है  बेहाल क्यों सखि साजन?ना गोपाल घड़ी – घड़ी   मैं   राह   निहारूँ सुबह  शाम  …

गीत झूठे खुशहाली के – डी के निवातिया

गीत झूठे खुशहाली के *** ऐ राजनीति झूठे वादों पर मत जा बंद नयनो को ज़रा खोलकर देख ! आसमा छूने वाले धरा पर मति ला हकीकत को सच …

मन रुपी मानुष – डी के निवातिया

मन रुपी मानुष.. श्रावण छवि धारण कर ली, मन-मस्तिष्क के घुमड़ते मेघो ने, वर्षा होने लगी है अब, नयनो के समुन्द्र से अश्को की, ध्वंसावशेष के अवयव में, कुछ …

यह जीव -हत्या क्यों और कब तक ! (कविता )

यह बेजुबान जानवर, यह भोले जानवर , इंसान की नियत से बेखबर , यह मासूम जानवर . घर पर तो लाते हैं, बड़ा प्यार-दुलार देते हैं, लेकिन जब निकल …

भेजा क्यूँ परदेस…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)….

कृष्णा…. भेजा क्यूँ परदेस…. मोहे… क्यूँ भेजा परदेस… कृष्णा….. पांच तत्व देह डोली बिठा कर…. खूं की महंदी में मुझ को रचा कर…. धर दिया कैसा भेस….. कृष्णा…. क्यूँ …

पायल – डी के निवातिया

“पायल” *** तुम जितना धीरे चलती हो, पायल उतना शोर करती है ! धड़कने दिल कि बहक जाती है, ये गज़ब का जोर करती है !! रह-रहकर यूँ सताती …

मिलन….सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

क्यूँ वीणा है मौन मेरी… नयनं में भी नीर नहीं… विरह सलिल तृषित नहीं… हृदय में क्यूँ पीड़ नहीं… क्यूँ पंक में पंकज खिले… सरिता सागर में क्यूँ मिले… …

सुकून – डी के निवातिया

सुकून *** जब मन उदास होता है यादो के बादल घुमड़ आते है गरजते है, बरसते है, तड़पाते है, डराते है, तन्हा मन घबराने लगता है फिर, झूम-झूम कर, …

दिल के बातें…दिल ही जानें…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

क़ त रा क़ त रा दिल… आँखों में.. फांसी पे आ लटका…. होंठ लरजते…शब्द तड़पते रहे… बधिर…भाव विहीन…मेरे सम्मुख… मेरा प्यार…मेरा आफताब* था… पूर्णिमा का चाँद नभ पे …

मेरे जीवन साथी – डी के निवातिया

परिणय बंधन कि वर्षगाँठ पर अर्धांगिनी को समर्पित मेरे ह्रदय के भाव *** मेरे जीवन साथी, मेरे मनमीत हो तुम मेरे जीवन पथ का, मधुर संगीत हो तुम तुम …

हरी रहने दो ये धरती – अनु महेश्वरी

वृक्षो को रख, हरी रहने दो ये धरती, मत उजाड़ो, अपने मतलब से सृष्टि, विकास के नाम, चमन को जो उजाड़ा बंजर हुई धरा, तो कैसे होगा गुजारा। सूरज …

मुझे शिकवा ज़िन्दगी से नही – अनु महेश्वरी

मुझे शिकवा ज़िन्दगी से नही है, मुझे ईर्ष्या भी किसी से नही है। ज़खम मैंने खूब जीवन में झेले, मुझे उम्मीदें कहीं से नहीं है। अगर साथी ज़िन्दगी में …

ज्ञान बांच रहा है – डी के निवातिया

ज्ञान बांच रहा है +++ जिसे देखो आज वो ही ज्ञान बांच रहा है बच्चा बूढ़ा और जवान संग नाच रहा है धर्म-कर्म की गंगा बह रही है कलयुग …