Tag: कविता

सगा – डी के निवातिया

सगा *** वो न मेरा, न तेरा, न इसका, न उसका सगा था सैलाब हैवानियत का उसके जहन में जगा था ! परवाह कब थी उसने दुनिया में इंसानियत …

कौन मेरे भीतर और मैं हूँ कौन…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

मेरी आँखों की नींद चुरा कर… है मेरे सपने सजाता कौन…. चुरा के लाली वो अरुण की…. मेरी आँखों को है देता कौन…. जब होता दिल कभी बोझिल…. झोँका …

एक यात्रा है ज़िन्दगी – अनु महेश्वरी

कोई गणित नहीं ज़िन्दगी, फिर क्यों हम लाभ हानि का हिसाब करे? आश की उम्मीद है ज़िन्दगी, रास्ते, चाहे हो, उतार-चढ़ाव भरे| जंग का मैदान नहीं ज़िन्दगी, फिर क्यों …

छोटा मेरा आशियाँ…सी.एम् शर्मा (बब्बू)…

छोटा मेरा आशियाँ… बेटी..तुझमें मेरा जहां… आँखों में तेरी मैं देखूं… तारों भरा आसमाँ…. शोर पवन में सन्न सन्न सन्न सन्न…. पायल तेरी ज्यूं छन् छन्… चहके बुलबुल कूके …

नूर हूँ मै – डी के निवातिया

नूर हूँ मै @ तेरे मुखमंडल की आभा से प्रज्वलित होता दीप हूँ मैं तेरे ही आशीर्वचनो से फलीभूत होता आशीष हूँ मै तुम कारक, कारण तुम ही तुम …

बस रहे हम हिंदुस्तानी – अनु महेश्वरी

केवल अँधेरे की बातें करने से, यह दूर नहीं होगा, हर एक को दीया जला, जहाँ रोशन करना होगा| शिकायतों का दौर छोड़ अब कुछ कर दिखाना है, अपना …

स्वेटर माँ के हाथ का – डी के निवातिया

स्वेटर माँ के हाथ का — सर्दी से बचने के लिए, आज लबादों से लदा हूँ, महंगे सूट पहनकर ! मगर वो गर्माहट नहीं मिलती, जो माँ के हाथ …

काश, ऐसे भारत का निर्माण अब हकीकत हो – अनु महेश्वरी

हर इंसान बने, अब अच्छा, नाता जोड़े, लोगो से सच्चा, छल कपट और दुर्भावना का यहाँ न कोई स्थान न हो, देश तोड़ने वालो का इस जहाँ में अब …

हाँ मैं वही बसंत हूँ – डी के निवातिया

हाँ मैं वही बसंत हूँ …. =+= जो कभी नई कोंपलो में दिखता था कलियों में फूल बनकर खिलता था हवाओ संग ख़ुशबू लिए फिरता था चेहरों पे नई …

काहे भरमाये — डी के निवातिया

काहे भरमाये *** काहे भरमाये, बन्दे काहे भरमाये नवयुग का ये मेला है बस कुछ पल का खेला है आनी जानी दुनिया के रंग मंच पे नहीं तू अकेला …

शिक्षा ही वरदान है – डी के निवातिया

शिक्षा ही वरदान है *** कल ही की बात है गावं से मैं गुज़र रहा था बुजर्गो की जमात से चौपाल जगमगा रहा था चर्चा बड़ी आम चली थी …

न्यारा हिन्दुस्तान हमारा…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

करें स्वागत नव वर्ष का कुछ इस तरह से… ले प्रण हर कोई अपनी ही समर्था से… भूखा होगा न कोई नंगा यहां इस धरा पे… मिलजुल करें ऐसा …

भारत का नव वर्ष…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

प्रकीर्ति जब अपने उजलेपन में नहाई होगी… हर और यौवन सी मस्त छटा बिखरी होगी…. कोहरा होगा न सर्दी, न मौसम में गर्मी होगी…. मन घूमर बन नाचेगा सुनहरी …

कुछ यादें बीते साल की – सोनू सहगम –

-: कुछ यादें बीते साल की :- कुछ यादें बीते साल की, नये साल में बहुत याद आयेगी कुछ यादें माना आँखें करेंगी नाम कुछ यादें चहरे पर मुस्कान …

ले शपथ — नूतन वर्ष — डी के निवातिया

ले शपथ *** फिर से आया नूतन वर्ष, शीश नवां प्रणाम करे ले शपथ, बुराइयों से निपटने का इंतज़ाम करे !! *** नई उम्मीदों के साथ, बढ़ाकर खुद अपना …

फिर एक हादसा – अनु महेश्वरी

फिर जांच आयोग बैंठेगा, फिर शिकायतों का दौर चलेगा, फिर टीवी चैनलों पे वाद-विवाद होगा, फिर एक दूसरे पे दोषारोपण भी होगा| पर जिन्होंने भी जान गवाई, उनका क्या …

इक्कीसवीं सदीं का अट्ठारवां साल

इक्कीसवीं सदीं का अट्ठारवां साल *** इक्कीसवीं सदीं के, अठ्ठारवे साल का, जवानी में कदम देखेगी दुनिया, है कितना, मेरे वतन कि रवानी में दम दुश्मन, कितना भी कोशिश …

दिल को तेरी बातें सुनाऊँ…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

दिल को तेरी बातें सुनाऊँ…. ऐसे अपना मन बहलाऊँ… गर बात करे तेरी कोई मुझसे… उसको दुनिया के ढंग समझाऊँ…. तुमको उन सबसे छुपाऊं…. उल्फत का मैं धर्म निभाऊं…. …

इंसान है हम इंसान ही बने रहे – अनु महेश्वरी

इंसान है हम, इंसान ही बने रहे, सोचे, समझे, फिर, कुछ कहे, अपने बोले किसी शब्द से, कभी, किसी का दिल न दुख जाए| इंसान है हम, इंसान ही …

एक काम करे – डी के निवातिया

एक काम करे आओ मिलजुलकर एक काम करे मन के मैल का काम तमाम करे न रहे कोई गिला शिकवा आपसी तुम हमारा हम तुम्हारा नाम करे !! -*-*- …

ज़िन्दगी की गाड़ी – अनु महेश्वरी

आज वक़्त ने जिस दहलीज पे ला खड़ा किया है, खामोशी में बस अपनी ही आवाज़ सुनाई देती है| आज काफ़ी रिश्तो से जैसे साथ ही छूट गया है, …