Tag: कविता

कभी देशद्रोही, तुम मत बनना – अनु महेश्वरी

अगर भला न कर सको, चलेगा, कभी किसी का बुरा मत करना| अगर दानवीर न बन सको, चलेगा, कभी किसी के हक़ का मत छीनना| प्यार से बात न …

विरोधाभास – अनु महेश्वरी

पत्थरों को, ईश्वर मान पूजा जाता है जहाँ, कभी कभी वही, जवानो पे भी, बरसते है| नौरात्र में कन्या की पूजा होती है जहाँ, वही कन्या भ्रूण की भी, …

अकेले सूरज से ही पुरे ब्रम्हांड में रोशनी होती है – अनु महेश्वरी

बिन मेहनत मिला धन कभी टिकता नहीं, मेहनत से मिली सफलता जाहिर होती है| बस पैसो से जो रिश्ते बनते वो टिकते नहीं, स्नेह से बंधा रिश्ता ही केवल …

* शब्द का शब्दार्थ *

* शब्द का शब्दार्थ * शब्द का शब्दार्थ भिन्न है या मानसिकता का है बिसात आइए आपको सुनाता हूँ जीवन का एक बात, मित्र का मेहमान ने पूछा क्या …

मेरे घर को बाँट दिया — डी के निवातिया

मेरे घर को बाँट दिया *** मेरे घर को बाँट दिया है, धर्म के कुछ ठेकेदारो ने ! मातृभूमि से छल किया है, वतन के ही गद्दारो ने !! …

हम सब यहाँ एक इम्तिहान रोज देते है – अनु महेश्वरी

हम सब यहाँ एक इम्तिहान, रोज देते है, जिस का परचा, खुद ईश्वर लिखते है| जो भी इसे, सरलता से ले लेता, वही, जीवन, सादगी से जी लेता| जो …

जो मिल जाते तुम एक बार……सी.एम्. शर्मा (बब्बू)..

खवाब मेरे सच हो जाते… जो मिल जाते तुम एक बार… मिल जाता मुझे संसार… जो मिल जाते तुम एक बार… पलकों पे बिठाता तुम्हें… नयन जल नहलाता तुम्हें… …

८३. मेरे पापा हैं…………..“मनोज कुमार”

मेरे पापा हैं पापा हैं तो क्या है ? पापा हैं विश्वाश हैं उत्सुकता और आस है शक्ति का संचार है मम्मी का भी प्यार है सबसे अच्छे यार …

गृहस्थी एक वृक्ष — डी के निवातिया

गृहस्थी एक वृक्ष जिंदगी एक खूबसूरत साज है सरगम जैसा बजा लिया करो पल ख़ुशी के हो या गम के हो मुस्कुराकर बिता लिया करो !! गृहस्थी एक वृक्ष …

अच्छी यादो का ही निर्माण – अनु महेश्वरी

जब चाँद के दाग को भूल, बस उसकी शीतलता को, याद रखते सभी| फिर क्यों न बुराईयां भूल, बस लोगो की अच्छाइयों को, याद करते सभी? राह में शत्रु …

* अंधियारा *

*अंधियारा* हमें अंधियारा पसंद है जहाँ शान्ति का संगम है, बहुत लोग हैं इसे बुरा मानते बुराई का प्रतिक हैं इसे जानते , सारे प्रकाश का यह केंद्र है …

आज अकेले यूँ न तुम रहते – अनु महेश्वरी

अब क्यों रोए, भाग्य को अपने, जब चेता नहीं कभी समय रहते| सारा जीवन बिता दिया, बस धन इकट्ठा करने में, कभी न समय दे पाए, मित्र और परिजन …

मानव धर्म को निभा सकें हम – अनु महेश्वरी

हे प्रभु हमें इतना संतोष दे दो, ताकी पास जो है हमारे, उसमे, खुश रह सकें हम| हे प्रभु हम में इतनी दया भर दो, ताकी सामर्थ्य अनुसार औरो …

प्राथमिकता – अनु महेश्वरी

सुबह सुबह न्यूज़ चैनल लगा, देश में क्या हो रहा कहाँ, देखने का मन बना, बैठी, टीवी के सामने, पहला न्यूज़ चैनल लगाया, वहाँ मैंने कुछ ऐसा पाया, कोनसा …

रब की अनुपम सौगात

सुविचारों को धारण किए, सौम्य आपकी काया है मुख-मण्डल की शोभा सौम्य‍, सौम्य आपका साया है शोभा सिर की बढा रहे ये काले श्यामल केश सौम्य आप पर लगता …

तेरी नजरो में — डी के निवातिया

तेरी नजरो में *** मुझे सुनते तो सभी है समझो अगर तुम तो मानू चाहत तो सभी को है पहचानो अगर तुम तो जानू क्या फर्क पड़ता है अच्छा …