Tag: कविता

“दुआ मागूँगा तुम्हारे लिए रब से ,तुम मुस्कराना प्रिये!”

मैं जागूँगा अब से रातों में तुम सो जाना प्रिये! दुआ मागूँगा तुम्हारे लिए रब से ,तुम मुस्कराना प्रिये!! न कुछ कहूंगा तुमसे ,न कोई शिकायत है मेरी , …

हाँ !दिल ए जान से प्यार ,मुझसे करते हो तुम।

जुवां की भाषा निरर्थक रही ,दिल की जुवां को समझते हो तुम। वीरानियों में घिरुं मैं जब भी , प्रेम की बारिश से बर्षते हो तुम। लड़खड़ाते हो ,गिरते …

ग़रीब की बेटी (विवेक बिजनोरी)

  “मुझको इस काबिल बनाया, खुद भूखे प्यासे रहकर, मेरे बाबा ने मुझको समझा है सबसे बेहतर। मैं ग़रीब की बेटी अपने बाबा का सम्मान करूँ, माफ़ करना हे …

इंसान कहाँ इंसान रहा (विवेक बिजनोरी)

“आज सोचता हूँ कि कैसा है इंसान हुआ, इंसान कहाँ इंसान रहा अब वो तो है हैवान हुआ कभी जिसको पूजा जाता था नारी शक्ति के रूप में, उसकी …

कुछ बाते जानी है मैंने – अनु महेश्वरी

अगर खुश रहना है सोचो मत ज़्यादा बेवजह सोचेने वाले दुखी रहते ज़्यादा न करो कोशिश कभी खुश करने की सबको दे पाया यहाँ सारी खुशी कभी कौन भला …

किसान और जवान (विवेक बिजनोरी)

“राजनीति बन गयी तमाशा अपने हिंदुस्तान की, ये कीमत चुकाई है तुमने शहीदों के अहसान की लूट लूट गरीबों को अपनी तिजोरी भर रहे, सबका पेट पालने वाले आत्महत्या …

तस्वीर….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

तस्वीर बनायी है इक मैंने… कुछ आढी तिरछी रेखाओं से… उलझी सी ज़ुल्फें उसकी… सुलझाने की कोशिश में.. हाथ बढ़ाया मैंने… की रंग से भरने लगे…. तकदीर में उसकी… …

क्यों याद रखूँ – अनु महेश्वरी

मैं जब पलटने लगी पन्ने ज़िन्दगी के किताब के उसमे लिखें मिले कुछ खट्टे कुछ मीठे पल हर तरह के फिर मैंने कुछ निश्चय किया……… जो पाया मैंने ज़िन्दगी …

आज का नवयुवक—डी. के. निवातिया

आज का नवयुवक अजीब हाल में दिखता है आज का नवयुवक जागा है मगर कुछ खोया खोया सा हँसता भी है पर कुछ रोया-रोया सा जीवन संघर्ष की इस …

भोर का आगमन…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)….

भोर होने को वक़्त था अभी…. हलचल बाहर की ने मुझे समय से पहले जगा दिया… ठिठुरती सर्दी में बाहर पड़ोस में… कुछ लोग खड़े बातें कर रहे थे… …

प्रथम किरण—डी. के . निवातिया

दरख्तों से पत्तियो तक लुढ़कती शबनम सिमटती पुष्प कपोल ! निशा छिपती नजर आये, ज्यो रवि की प्रथम किरण से मिले भोर !! ! ! ! डी. के . …

मुफ़लिसी (विवेक बिजनोरी)

“गुलिस्तां -ऐ-जिंदगी में खुशबू सा बिखर के आया हूँ, हर एक तपिश पर थोड़ा निखर के आया हूँ इतना आसां कहाँ होगा मेरी हस्ती मिटा देना, मैं मुफ़लिसी के …

कुछ साल बाद जब बुढ़ापा दस्तक देगा – अनु महेश्वरी

मेरी ज़िम्मेदारीयाँ कुछ कम होगी तब भूलने की आदत सी बनेगी लोगो के नाम, चेहरे शायद भूलने लगूँगी न सुबह जल्दी उठने की ज़रुरत होगी पर शायद आँखों से …

“काश” (विवेक बिजनोरी)

“काश कोई जुल्फों से पानी झटक के जगाता, काश कोई ऐसे हमको भी सताता काश कोई बतियाता हमसे भी घंटो, काश कोई होता जो तन्हाई मिटाता” काश कोई जुल्फों …

मेरी बिटिया – अनु महेश्वरी

तेरी हंसी हंसाती मुझे, तेरी खुशी देती खुशियाँ मुझे, खुश रहे तू हमेशा यही दूआ है मेरी। न देख पाऊ आंसू आँखों में तेरी, तेरा गम देख नम होती …

चमके भारत संग भाग्य हमारा…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…..

नभ में जब तक चाँद सितारे…. रहे आँगन ख़ुशी अपार तुम्हारे…. नित नूतन दिन सुनहरा हो तुम्हारा… मन आँगन रहे हर पल उजियारा…. हर पल प्यार की खुशबू महके…. …

नूतन वर्ष मनाये—डी के निवातिया

आओ मिलकर ऐसे नूतन वर्ष मनाये किसी उदास चेहरे पर मुस्कान लाये करे शपथ प्रेम व् सद्भाव अपनाने की हर गुलशन को आदमियत से महकाये । आओ मिलकर ऐसे …

यह दुनिया है एक मेला – अनु महेश्वरी

यह दुनिया है एक मेला यहाँ भांति भांति लोगो का है रेला और एक साल बीत गया हर तरह के लोग मिले यहाँ कोई दूसरे को हंसा कर प्रसन्न …