Tag: कविता

सबकी अपनी कहानी यहाँ – अनु महेश्वरी

सबकी अपनी कहानी यहाँ, सबकी अपनी परेशानी है। किसी की आँखों में दर्द यहाँ, किसी के आँखों में पानी है। सबकी अपनी किस्मत यहाँ, सबकी अपनी तक़दीर है। कोई …

होली

होली मना रहे हैं आज होली। रंगाते हुए धोती और चोली। रिस-राग त्याग कर देखो, भूल कर सब तीता बोली। होली है भाई होली है कहते, खाते पीते भंग …

जो रिश्ते थे बनाए……………राकेश राठी

जो रिश्ते थे बनाए, वो टूट गये क्यूँ हाये। बेगाने तो बेगाने,अपने भी हुए पराये। धरती तो क्या, आसमान भी देख घबराये। जो रिश्ते थे बनाए, वो टूट गये …

कालचक्र

कालचक्र की इस नियती से कौन यहाँ बच पाया है? निषकंलक निरपराध सीता पर भी यहाँ सवाल उठाया है! सत्य प्रेम की उस मूरत को अग्नि पर भी चलवाया …

बिटिया रानी…..चली गयी –डी. के. निवातिया

(यह रचना बिटिया की विदाई के बाद घर में उपजे माहौल पर प्रकाश डालती है, इसका पूर्ण आनंद लेने के लिए ह्रदयतल की गहराइयो में उतर कर रसास्वादन करे …

रोशनी की तलाश

रोशनी की अगर तुम्हे तलाश है तो बाहर मत देखो बाहर तो सिर्फ़ अंधेरा और सिर्फ़ अंधेरा है ढूँढते रह जाओगे और अंधेरो मे गहरे कहीं खो जाओगे तुम्हारे …

मैं नारी हूँ —डी. के. निवातिया

जग जननी हूँ, जग पालक हूँ   मैं नारी हूँ, न किसी से हारी हूँ निःशेष लोक जन्मा मेरे उर से   फिर भी मैं ही कोख में मारी …

रोना—डी के निवातिया

रोना तो बस मन का बहलावा रोकर इंसान हर दर्द सह जाता आंसुओं में अगर होती ताकत ये ज़माना कब का बह जाता । मत लुटाना ये बेशकीमती मोती …

ज़िन्दगी को खुल के हम जी लें – अनु महेश्वरी

जी लें जी लें ज़िन्दगी को खुलके हम जी लें रुक जाए साँसे उसके पहले जी लें जी लें ज़िन्दगी को खुल के हम जी लें। हँस लें हँस …

मधुमास — डी के निवातिया

इस बार मधुमास में फिर खेलेंगे होली हम  तेरी यादो संग   मोतियों से भी बेशकीमती शबनमी अश्रु जल में घुले होंगे अनेको अनूठे रंग कुछ प्रेम के, कुछ …

मांझी—डी. के. निवातिया

लड़ाई गर मुद्दे पर हो तो लड़ने में मजा आता है उलझकर उलझनों में जीने का आनद आता है चिकनी सडको पर रफ़्तार आजमा लेते है सभी तूफानी लहरो …

नेकचंद ///// ~Gursevak singh pawar

अरे दूर-दूर तूं जाकर अपने सपने देख है पाया, जगह-जगह तूं जाकर अलग-अलग पत्थर है ला पाया, लोग कूड़ा कर्कट फेंक है देते, उसे उठा तूं है लाया, तराश …