Tag: कविता

मर्यादा पुरुषोत्तम राम – डी के निवातिया

मर्यादा पुरुषोत्तम राम *** मेरे रोम रोम में बसने वाले राम तुमने सुधारें सबके बिगड़े काम साक्षात् मर्यादा के तुम हो रक्षक तुम से सुबह मेरी तुम से शाम …

मिलन – विदाई…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

छत पे कोआ कांव कांव कर रहा है…. कोई और तो अपना है नहीं…शायद… तुम आ रही हो कहीं… मिलोगी मुझसे तो बताऊंगा तुझे… जीना कितना दुश्वार था तेरे …

दुनिया – अनु महेश्वरी

झूठ ने इतना पैर पसार लिया, विश्वास हिचकोले खाता अब। संदेह ने नज़रों में घर जो किया, भरोसा भी तो डगमगाता अब। दिल की कैसे कोई सुने जब, दिमाग …

कल्पना का कोई छोर नहीं – डी के निवातिया

कल्पना का कोई छोर नहीं सृजन का इसके ठोर नहीं बिना पंख यह उड़े गगन में इसके आगे कोई और नहीं !! ! ! ! स्वरचित : डी के …

कल्पना – डी के निवातिया

आऒ जानें ….कल्पना क्या है ……….!! *** प्रत्यक्षानात्मक अनुभवों की ये कुँजी है बिंबों और सृजन विचारों की ये पूँजी है विचारणात्मक स्तर की रचनात्मकता ‘कल्पना’ नियोजन पक्ष की …

शातिर – डी के निवातिया

शातिर *** वो देखो, वो जो भोला सा शख्स है ये मत पूछो वो कितना शातिर है, बात न पूछो उसकी हद-ऐ-शराफत की गरीबी का बाज़ार सजाना जानता है …

ज़लवा – डी के निवातिया

ज़लवा *** जरुरी नहीं दुनियाँ में सिर्फ हुस्न का ज़लवा हो हमने तो कीचड़ के हिस्से में कमल को देखा है अभद्र हो या दीन-दरिद्र कद्र हर शै: की …

लिख नहीं पाता हूँ – डी के निवातिया

लिख नहीं पाता हूँ *** लिखना चाहता हूँ पर लिख नहीं पाता हूँ आँखों के सामने तैरते कुछ ख्वाब, कुछ अनकहे अल्फ़ाज़ आते है क्षण भर के लिए फिर …

साफ़ सुथरा कचरा और जीने के लिए मरने की लाचारी

साफ़ सुथरा कचरा और जीने के लिए मरने की लाचारी ख़ूबसूरत कपड़े, शानदार सहायक, साफ़ सुथरा कचरा, ये सब सफाई कर्मचारियों को मिल जाए तो.. गलतफहमी में न रहिये, …

कौन ढलना चाहे – डी के निवातिया

कौन ढलना चाहे ********** है भला कौन मुसाफिर राह में जो संग चलना चाहे हर कोई चाहे नया रंग , मेरे रंग कौन ढलना चाहे !! हर किसी को …

जब तू मुस्काती है – अनु महेश्वरी

दीवारें खिल उठती जब तू मुस्कुराती है, जीने की फिर से एक उम्मीद जगाती है। उताड़ चढ़ाव भरे जीवन के हर मोड़ पे, तेरे हँसने से मेरी ज़िन्दगी भी …

मौत भाग रही है…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

मौत को मेरी ज़िन्दगी ने आईना दिखा दिया…. अपने चेहरे को उसपे लगा दिया…. मौत बदहवास हो भाग रही है… हर पल छुपती…. कभी यहां…कभी वहां…. अपनी पहचान भूल …

नन्द के घर आये लाल…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

नन्द के घर आये लाल…. सब नाचें बिन सुरताल…. नन्द के घर आये लाल…. सब नाचें बिन सुरताल….. सांवली सूरत घुंघराले बाल… देख जग सारा भया निहाल….. कोई बिहारी …

तुम बस कान्हा को याद कर लेना – अनु महेश्वरी 

  जब कोई साथ न दे तेरा, लगे चारो ओर ही अँधेरा, गर तू सच्चे मन से पुकारेगा, कान्हा निश्चय तेरी सुध लेगा, तुम बस कान्हा को याद कर …

भारत की छटा – डी के निवातिया

भारत की छटा   मेरे भारत में जनता की, रीत बड़ी निराली है, जो दिल को बहला दे ये उसकी ही सवाली है दिन को रात कहने वालो की …

सटीक निर्णय लेना – अनु महेश्वरी

  आज के राजनेताओं से क्या अब उम्मीदे होगी इनकी बयानबाजी देखो सब ये लगते है ढोंगी। मतलब निकलते ही देखो मुँह फेर चले जाते है चुनाव के पहले …

कान्हा कान्हा पुकारे ये दिल – अनु महेश्वरी 

कान्हा कान्हा पुकारे ये दिल रे, अपने भक्तो से आकर मिल ले। रात दिन लगी तेरी ही धुन रे, भक्तो की पुकार अब सुन ले, तुम दर्श आकर दिखा …

माँ बाप का प्यार – डी के निवातिया

माँ बाप का प्यार *** किसी ने बेगैरत कहा, किसी ने पाप का प्यार न पूछो कितना महंगा ,पड़ा है आप का प्यार सारी दुनिया खोजी मैंने सुख दुःख …

युग पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी….

“बेनकाब चेहरे हैं, दाग बड़े गहरे हैं, टूटता तिलस्म, आज सच से भय खाता हूँ । गीत नही गाता हूँ ” (श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी) सच में तुमने …

सबसे पहले है देश – अनु महेश्वरी

बधाई हो बधाई हो, स्वतंत्रता दिवस की सबको बधाई हो। पाने के लिए ये आज़ादी, पुर्वजों ने दी है कुर्बानी, देखो इसे अब न कोई, ज़ख्म दे जाए। बधाई …

मिटटी – डी. के. निवातिया

मिटटी *** जीवन का सार है, उत्पत्ति का आधार है जल हो या वायु संपूर्ण जगत की प्राण है मिटटी !! अम्बर को शीश धारे, प्रकृति को सीने पे …

खुदा का है दरबार – अनु महेश्वरी

  जग में हम सभी किरायेदार, दुनिया खुदा की है दरबार, अस्थायी है अपना निवास, बाकी बातें सभी निराधार| सभी को जाना है एकबार, मन में क्यों रखे फिर भार, …