Tag: कविता

रोलिंग कुर्सी – अनु महेश्वरी

बैठ, रोलिंग कुर्सी पे, घड़ी की सुई को, निहारती आँखे, कभी नज़रे उठती है, दरवाजे की तरफ़, कभी टेबल पे रखें, फ़ोन की तरफ है| आस उसने अभी भी, …

रिश्तों को जीना सीखें – अनु महेश्वरी

निभाते निभाते रिश्ते भी, बोझ से लगने लगते है| आसान अगर बनाना है, रिश्तों को जीना सीखें| आप जुड़े हो, किसी भी पेशे से, एक बार उसे अपना, मान …

गद्दारों की हामी न भरें…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

नेता एक हवा में उड़ता…. जूते चप्पल लहराता… हवा में उड़ने से जब महरूम हो गया… संसद भी उसके साथ खड़ा हो गया… बेशर्मी की हद्द हो गयी… सारी …

बयानबाज़ी – अनु महेश्वरी

कभी कभी सोचती हूँ, क्या कोई इंसान जन्म से बुरा होता होगा? कोई भी जन्म से बुरा, सायद नहीं होता है, लगता है, परिस्थितियां इंसान को बुरा बना देती …

सोशल साईट हुई मेहरबान — डी. के. निवातिया

नवयुग में लोगो पर सोशल साईट हुई मेहरबान है व्हाट्सएप, फेसबुक पर हर कोई बाँट रहा ज्ञान है सीखने वाले भी वही यंहा, सिखाने वाले भी वो ही फिर …

हम जीना सीखे – अनु महेश्वरी

पहले मैं भी, बहुत शिकायतें करती थी, उलझने छोटी हो, या हो बड़ी, हमेशा उन्हें सुलझाने की, कोशिश करती रहती थी, उन्ही बातों को सोचती रहती थी, न सुलझने तक …

मीठी यादें – अनु महेश्वरी

चलते चलते इस ज़िन्दगी में, लोग भी मिलते रहेंगे राहों में, कुछ चलेंगे अपने साथ, कुछ छोड़ जाएंगे साथ, कुछ बस दो पल का ही देंगे साथ| जो छूट …

अपना हौसला बनाए रखना – अनु महेश्वरी

अपने आँसुओ को, हर किसी की बात पे, यूँ ही जाया मत करना, जिसको क़दर नहीं, फ़रक न होगा इस से, वह तो तेरा दिल दुखा, आगे बढ़ जायेंगे, …

भगवन सुन ले मेरी ये पुकार – अनु महेश्वरी

भगवन सुन ले मेरी ये पुकार, भाईचारा रहे धरा में अपार| अँधियारा मिटा के राहों से, सबके जीवन में उजाला भरदे, भगवन सुन ले मेरी ये पुकार, भाईचारा रहे …

अलबेला हूँ — डी के निवातिया

अलबेला हूँ ! भीड़ में खड़ा हूँ, फिर भी अकेला हूँ कदाचित इसीलिए मै अलबेला हूँ ! ! शोरगुल में धँसा पड़ा हूँ आफतो में फँसा पड़ा हूँ रोता …

जिस्म मिटटी है…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

जिस्म मिटटी है सुना बहुत मैंने… पहले यकीं न था पर अब… यकीं होने लगा है…. जिस्म मिटटी है… हर कोई आता है नश्तर ले के… खोदता है अच्छी …

विचारधारा – अनु महेश्वरी

सब विचारों की ही तो कहानी है, सोच सकारात्मक हो तो शांति बनी रहती , और सुकून रहता है, नकारात्मक हो तो अशांति फैलती, और नुकसान होता है| यह …

ज़िन्दगी बहुत अनमोल होती है – अनु महेश्वरी

सपने देखना या सपने बुनना अच्छी बात है, परन्तु उसमे पूरी तरह खो जाना सही नहीं है, सपने बुनने के पहले खुद को जानना जरुरी है, अपनी क्षमता को …

दिलकश मिठाईयाँ

दिलकस मिठाईयाँ खुशियों भरी बातें हमे खुशियाँ देती है, जिन्दगी के सारे गम वो छीन लेती है, मुश्किल से मामले भी हल हो जाते है, आगे बड़ने के रास्ते …

नारी की अभिलाषा – अनु महेश्वरी

क्या साल में एक दिन, नारी दिवस मना कर, बाकी बचे हर रोज, उसकी अवहेलना करने से, आ पायेगा परिवर्तन समाज में? वैसे तो हम देवी को भी पूजते …

व्याकुल इंसान – – – डी के निवातिया

व्याकुल इंसान   दरखत झूमे, सरोवर तीर, निर्झर निर्झर बहे बयार पर्ण:समूह के  स्पंदन से, सरगम की निकले तान शीतल प्रतिच्छाया में, पंछी समूह करते विहार मानुष त्रस्त अविचल, …

मौसम गर्मी का — डी. के. निवातिया

मौसम गर्मी का सूरज ने जब दिखलाई  हेकड़ी तरबूज बोला फिर मुँह फुलाये तू करेगा जितना ज्यादा तंग भाव मेरा उतना ही बढ़ जाये ! ! खीरा, ककड़ी, और …

मैं एक भारतीय हूँ – अनु महेश्वरी

बचपन से लेकर अबतक, जितने भी फॉर्म भरें होंगे हमने, किसी भी काम के लिए, जैसे राशन कार्ड बनवाने के लिए, या फिर पासपोर्ट बनवाने के लिए, या फिर …