Tag: जिंदगी पर कविता

खुद को हार कर देखो – शिशिर मधुकर

किसी को जीतना है तो खुद को हार कर देखो किसी के बिगड़े कामो को तुम संवार कर देखो ख़ुदा को यूँ ही नहीं इंसान यहाँ याद करता है …

खुशहाली की आशा

खुशहाली की आशा ———————- वह दिन कब आएगा ? जब सामने जो दिख रहा गगनचुम्बी ऊँची अट्टालिका के निचे ,पुआल की छज्जा पुआल की झोपडी में सोहराय महीना की …

अब्दुल कलाम, तुझे मै करता रहूँ हमेशा सलाम !! ~Gursevak singh pawar

देश को बुलंदी पर पहुँचाने वाला, अपने आप को देश के लिए बनाने वाला !! अब्दुल कलाम, तुझे मै करता रहूँ हमेशा सलाम !! ख़ुशी-ख़ुशी तुम ने अपना जीवन …

कुदरती रज़ा – शिशिर मधुकर

यादों को जिंदा रखने को मिलते रहो साथी धुंधली तस्वीरों में सूरते नज़र में नहीं आती जो रूकावटे ना हों बीच में धारा नहीं मचले पथरीली राहें तो मिलनी …

पैरों में ज़ंजीरें – शिशिर मधुकर

इन पैरों में ज़ंजीरें हैं रिश्ते नातों की भारी कह दो कैसे कर लूँ फ़िर मैं खोज तुम्हारी तेरा प्रेम सचिदानंद सागर हैं एक अनोखा बड़ी देर से समझ …

देवमानव

देवमानव – 1 क्यों नहीं सारी स्त्रियां डूब कर मर जातीं पानी में क्यों नहीं सारे भूखे नंगे किसान मज़दूर मिलकर आत्मदाह कर लेते क्यों नहीं ज़हर खाकर मर …

सत्य की खातिर – शिशिर मधुकर

सत्य की खातिर लड़ो और अत्याचार कभी ना सहो सर को सदा ऊँचा रखो और अपनी सारी बातें कहो मेरी इस शिक्षा को ही तो मेरी संतान ने ग्रहण …

जीवन का आधार है बेटी………… “मनोज कुमार”

जीवन का आधार है बेटी सुख शक्ति संसार है बेटी बदल देती जो दुनिया को ऐसा एक बदलाव है बेटी अत्याचार करो नही इनपे दुर्गा की अवतार है बेटी …

मजबूरीयां – शिशिर मधुकर

जिन्दगी है तो मजबूरीयां भी यहाँ आम है चाहने भर से तो पूरे होते ना सभी काम हैं लाख तड़पा करें प्रेमी मिलन की आशा में सबको हाँसिल कभी …

मुसीबत – शिशिर मधुकर

मुझे जब कोई भी इच्छा नहीँ थी कठिन तब कोई परीक्षा नहीं थी पर मैंने जब से उम्मीदों को पाला चिंता ने मुझको मुसीबत में डाला शिशिर मधुकर

उरुज से गीरे सीतारे

कहानी अजीब सी थी उन उरुज से गीरे सीतारों की।. पलट कर कभी न देखेते थे ऐसे तकब्बुरी इन्सानो की। मेहनत ने दी दस्तक किस्मत के दरवाजे पर दुआओं …

प्यासे दिलों के मेल – शिशिर मधुकर

कैसे बताएँ आपको हम अपने बुरे हालात तन्हा गुजर रहा हैं सफर कोई नहीं हैं साथ कहने को हर रिश्ता मेरे जीवन में हैं मौजूद सबने ख़त्म किया मगर …

देवी मत बनाओ – शिशिर मधुकर

देवी मत बनाओ औरत को तुम इंसान रहने दो अपने दिल के जज्बात उसको भी तो कहने दो अगर बाँधोगे तुम उनको गुलामी की दीवारों में कभी रंगत ना …