Tag: जिंदगी पर कविता

रुआना आ गया – डी के निवातिया

रुआना आ गया ! कागज़, कलम, दवात, डायरी के पन्ने, ये सब तो अब बीते ज़माने कि बाते है व्हाट्सप्प, ट्वीटर, फेसबुक, भी छोडो वीडियो कॉलिंग का ज़माना आ …

मैं आधुनिक नारी हूँ

मै अबला नादान नहीं हूँ दबी हुई पहचान नहीं हूँ मै स्वाभिमान से जीती हूँ रखती अंदर ख़ुद्दारी हूँ मै आधुनिक नारी हूँ पुरुष प्रधान जगत में मैंने अपना …

रक्षा बंधन पे, दे दें यह उपहार, – अनु महेश्वरी

कोन तय करेगा हद क्या है, मेरे, चलने की, खाने की, बोलने की, हँसने की, घूमने की, कपड़ो की, मैं या मेरे अपने या यह समाज, क्यों हम इतना …

रिश्तों से ही, ज़िन्दगी है चलती – अनु महेश्वरी

दिलों के बीच अगर, फासले आ जाते है रिश्ते भी तब हाथ से, फिसलने लग जाते है रिश्तों को अगर है संभालना, एक दूसरे का मान तब रखना, एक …

अति विश्वास – शिशिर मधुकर

अति विश्वास में अक्सर यहाँ धोखा ही मिलता है सर्प कैसा भी हो वो तो केवल बिष ही उगलता है करो ना ज़िंदगी के फैसले कभी भी जल्दबाजी में …

विरोधाभास – अनु महेश्वरी

पत्थरों को, ईश्वर मान पूजा जाता है जहाँ, कभी कभी वही, जवानो पे भी, बरसते है| नौरात्र में कन्या की पूजा होती है जहाँ, वही कन्या भ्रूण की भी, …

मानव धर्म को निभा सकें हम – अनु महेश्वरी

हे प्रभु हमें इतना संतोष दे दो, ताकी पास जो है हमारे, उसमे, खुश रह सकें हम| हे प्रभु हम में इतनी दया भर दो, ताकी सामर्थ्य अनुसार औरो …

मिलन बेहद ज़रूरी है – शिशिर मधुकर

तेरे बिन कलम चलती नहीं कविता अधूरी है तेरी खामोशी कुछ ऐसी है ये होती ना पूरी है प्रकृति बिन पुरुष बिखरा हुआ बेचैन रहता है उसको आधार देने …

असल पैगाम – शिशिर मधुकर

जिन आँखों में मुहब्बत का नशीला जाम मिलता है उन्हीं सीनों से लगने में ही तो आराम मिलता है जुबां का क्या करोगे झूठ वो तो कह ही सकती …

हम जीना सीखे – अनु महेश्वरी

पहले मैं भी, बहुत शिकायतें करती थी, उलझने छोटी हो, या हो बड़ी, हमेशा उन्हें सुलझाने की, कोशिश करती रहती थी, उन्ही बातों को सोचती रहती थी, न सुलझने तक …

अपना हौसला बनाए रखना – अनु महेश्वरी

अपने आँसुओ को, हर किसी की बात पे, यूँ ही जाया मत करना, जिसको क़दर नहीं, फ़रक न होगा इस से, वह तो तेरा दिल दुखा, आगे बढ़ जायेंगे, …

जिन्दगी खुली किताब

जिन्दगी खुली किताब पढ़ रहे हैं लोग शब्द–शब्द हाशियों में गढ़ रहे हैं लोग | जिसके पृष्ठ–पृष्ठ पर लिखा ही दर्द है कल्पना में बात सोचना भी व्यर्थ है …