Tag: जिंदगी पर कविता

हम जीना सीखे – अनु महेश्वरी

पहले मैं भी, बहुत शिकायतें करती थी, उलझने छोटी हो, या हो बड़ी, हमेशा उन्हें सुलझाने की, कोशिश करती रहती थी, उन्ही बातों को सोचती रहती थी, न सुलझने तक …

अपना हौसला बनाए रखना – अनु महेश्वरी

अपने आँसुओ को, हर किसी की बात पे, यूँ ही जाया मत करना, जिसको क़दर नहीं, फ़रक न होगा इस से, वह तो तेरा दिल दुखा, आगे बढ़ जायेंगे, …

जिन्दगी खुली किताब

जिन्दगी खुली किताब पढ़ रहे हैं लोग शब्द–शब्द हाशियों में गढ़ रहे हैं लोग | जिसके पृष्ठ–पृष्ठ पर लिखा ही दर्द है कल्पना में बात सोचना भी व्यर्थ है …

ढोंग पाखण्ड संसार में — डी के निवातिया

ढोंग पाखण्ड संसार में नवदुर्गा के नाम पर भक्त बने हजार भूखे रहकर जता रहे भक्ति व प्यार जीवन में नारी को सम्मान दिया नही मंदिर में लगा रहे …

खुद को हार कर देखो – शिशिर मधुकर

किसी को जीतना है तो खुद को हार कर देखो किसी के बिगड़े कामो को तुम संवार कर देखो ख़ुदा को यूँ ही नहीं इंसान यहाँ याद करता है …

खुशहाली की आशा

खुशहाली की आशा ———————- वह दिन कब आएगा ? जब सामने जो दिख रहा गगनचुम्बी ऊँची अट्टालिका के निचे ,पुआल की छज्जा पुआल की झोपडी में सोहराय महीना की …

अब्दुल कलाम, तुझे मै करता रहूँ हमेशा सलाम !! ~Gursevak singh pawar

देश को बुलंदी पर पहुँचाने वाला, अपने आप को देश के लिए बनाने वाला !! अब्दुल कलाम, तुझे मै करता रहूँ हमेशा सलाम !! ख़ुशी-ख़ुशी तुम ने अपना जीवन …

कुदरती रज़ा – शिशिर मधुकर

यादों को जिंदा रखने को मिलते रहो साथी धुंधली तस्वीरों में सूरते नज़र में नहीं आती जो रूकावटे ना हों बीच में धारा नहीं मचले पथरीली राहें तो मिलनी …

पैरों में ज़ंजीरें – शिशिर मधुकर

इन पैरों में ज़ंजीरें हैं रिश्ते नातों की भारी कह दो कैसे कर लूँ फ़िर मैं खोज तुम्हारी तेरा प्रेम सचिदानंद सागर हैं एक अनोखा बड़ी देर से समझ …

देवमानव

देवमानव – 1 क्यों नहीं सारी स्त्रियां डूब कर मर जातीं पानी में क्यों नहीं सारे भूखे नंगे किसान मज़दूर मिलकर आत्मदाह कर लेते क्यों नहीं ज़हर खाकर मर …

सत्य की खातिर – शिशिर मधुकर

सत्य की खातिर लड़ो और अत्याचार कभी ना सहो सर को सदा ऊँचा रखो और अपनी सारी बातें कहो मेरी इस शिक्षा को ही तो मेरी संतान ने ग्रहण …

३७. जीवन का आधार है बेटी………… “मनोज कुमार”

जीवन का आधार है बेटी सुख शक्ति संसार है बेटी बदल देती जो दुनिया को ऐसा एक बदलाव है बेटी अत्याचार करो नही इनपे दुर्गा की अवतार है बेटी …

मजबूरीयां – शिशिर मधुकर

जिन्दगी है तो मजबूरीयां भी यहाँ आम है चाहने भर से तो पूरे होते ना सभी काम हैं लाख तड़पा करें प्रेमी मिलन की आशा में सबको हाँसिल कभी …

मुसीबत – शिशिर मधुकर

मुझे जब कोई भी इच्छा नहीँ थी कठिन तब कोई परीक्षा नहीं थी पर मैंने जब से उम्मीदों को पाला चिंता ने मुझको मुसीबत में डाला शिशिर मधुकर

उरुज से गीरे सीतारे

कहानी अजीब सी थी उन उरुज से गीरे सीतारों की।. पलट कर कभी न देखेते थे ऐसे तकब्बुरी इन्सानो की। मेहनत ने दी दस्तक किस्मत के दरवाजे पर दुआओं …