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स्त्री भृण हत्या

“उलथी घागर; दुर पिया घर; रो मत बाबुल मेरे. सुनी सुबहा; सुनी रैना; आंगन में अब तेरे. सात जनम के दे कर फेरे; दुर किया तु मुझको, मिठी बेरी …