Tag: इक्कीसवी सदी के इंसान पर कविता

मानव अहन्कार किस बात पर

मानव जाति को है आज किस बात पर अहन्कार! किस प्रगति पर गर्व किया ! क्योकि हमने दूर ग्रहो मे यात्रा किया या फिर अन्तरीक्श मे आधिपत्य जमाया अणु …

दुश्मन भी पेश आए हैं दिलदार की तरह

दुश्मन भी पेश आए हैं दिलदार की तरह; नफरत मिली है उनसे मुझे प्यार की तरह; कैसे मिलेंगे चाहने वाले बताईये; दुनिया खड़ी है राह में दीवार की तरह; …

”इक्कीसवी सदी का इंसान ”

”इक्कीसवी सदी का इंसान ” इक्कीसवी सदी का इंसान, समझ बैठा अपने को भगवान, कर रहा अपने हाथों के उध्वंस से , इस देश का नव निर्माण | गाँधीजी …