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होली मनाते -शिशिर मधुकर

जिन्दगी में काश ऐसे हसीन लम्हे भी आते तुझे आगोश में ले गालों पर हम रंग लगाते तुझे बस प्रेम कर हाथों से तेरा श्रॄंगार करते कुछ इस तरह …

होली (हाइकु) — डी. के. निवातिया

होली के रंग उड़ाये संग संग मिलके हम  ! ! प्रेम रंग में रंगे उठारगम हर्षाये मन ! ! फागुन मास लहलाये फसल छिटके रंग ! ! धानी चुनर …

होली का त्यौहार – शिशिर “मधुकर”

यह कविता मैने २२ साल पह्ले होली के अवसर पर लिखी थी. आज है पावन, प्यारा प्यारा, होली का त्यौहार जिस में दुश्मन भी मिल के गले, बन जाते …

भोजपुरी होली गीत – आज रंग दा

चढ़त फगुनवा में मोर मन बसिया, भर के गुलाल मारें मोर रंग-रसिया। आईल होली के त्योहार, रंग छाइल बा हजार, भंगवा घोर बार बार, आज रंग द।। गोझिया से …

होली

  आये हो तुम नाच नाचने और किसे तुम नचाओगे पियोगे तुम दिल खोलकर और ठुस ठुस  कर खाओगे जोगीजी सर र जोगीजी सर र जोगीजी ताल न टुटे जोगीजी …

तब आयेगी सच्ची होली

नफरत की लाठी टूटेगी -आँखें खोलेगी जनता भोली तब आयेगी सच्ची होली- तब आयेगी सच्ची होली जब खेलेंगे हम प्रेम ठिठोली, तब आयेगी सच्ची होली जब न होंगे बेरोजगार, …

भोजपुरी होली गीत – फगुवा में भंगवा के ले ल चुसकी

फगुवा में भंगवा के ले ल चुसकी। बुढवा सटक गईल, अब पटकी।। मस्ती के तरंग बा, तरंग में उमंग बा, लागता के सबकर एक्के गो ढंग बा। ऐ चाचा, …

किया जब प्यार होली में (राजकुमार जयसवाल)

दोस्तों मेरे एक प्रिय मित्र  श्री राजकुमार जयसवाल जी, जिनका स्वर्गवास हो चुका है, एक बहुत ही सीधे-सादे, मृदुल स्वभाव के व्यक्ति थे, वे एक बहुत अच्छे कवि भी …

राधा-श्याम संग खेले होली ……

मोहे न रंग डालो श्याम प्यारे अंगिया भीगी, मरी जाउं लाज के मारे संखिया इतराये, देख रास-रंग के नज़ारे मोहे न रंग डालो श्याम प्यारे गौरा रंग मेरा,श्याम तुम …

होली पिचकारी

हां इधर को भी ऐ गुंचादहन पिचकारी। देखें कैसी है तेरी रंगविरंग पिचकारी।। तेरी पिचकारी की तकदीद में ऐ गुल हर सुबह। साथ ले निकले हैं सूरज की किरन …

होली की बहार

हिन्द के गुलशन में जब आती है होली की बहार। जांफिशानी चाही कर जाती है होली की बहार।। एक तरफ से रंग पड़ता, इक तरफ उड़ता गुलाल। जिन्दगी की …

देख बहारें होली की

जब फागुन रंग झमकते हों तब देख बहारें होली की। और दफ़ के शोर खड़कते हों तब देख बहारें होली की। परियों के रंग दमकते हों तब देख बहारें …

मोसों होरी खेलन आयो

(राग कान्हरौ ) मोसों होरी खेलन आयौ । लटपटी पाग, अटपटे बैनन, नैनन बीच सुहायौ ॥ डगर-डगर में, बगर-बगर में, सबहिंन के मन भायौ । ’आनँदघन’ प्रभु कर दृग …