Tag: Hindi poem

इक्कीसवी सदी -कचरे में रोटी ढूंढते हाथ – अनु महेश्वरी

कचरे से रोटी उठाते बच्चे को देख, मेरी आँखें शर्म से झुक गई। उसने जब मेरी ओर देखा, मैं उससे नज़रें मिला न सकी। पास की दुकान से, बिस्कुट …

साधन से ज़्यादा साथ ज़रुरी – अनु महेश्वरी

न शिकवा करें, न शिकायत करें, साधन से ज़्यादा साथ ज़रुरी होता है। न कभी रूठे रहें, न खामोश रहें, बातों से अपनी खुशहाल ये ज़िंदगी है। खुद का …