Tag: Hindi poem

जुआरी दांव पर खुद को लगाने आज बैठा है…

हार कर घर बार सारा सुख, पाने आज बैठा है, जुआरी दांव पर खुद को लगाने आज बैठा है। नहीं बाकी रही कीमत तेरी, तेरी ही नज़रों में, जो …

शरद पूर्णिमा – सोनू सहगम

-: शरद पूर्णिमा :- आज पूर्ण चन्द्रमा, सोलह कलाओं से युक्त धरती पर अपनी, अमृत बरसाने आया है धरा के समीप होगा, दमकते चाँद का ये सुंदर संजोग, शरद …

इक्कीसवी सदी -कचरे में रोटी ढूंढते हाथ – अनु महेश्वरी

कचरे से रोटी उठाते बच्चे को देख, मेरी आँखें शर्म से झुक गई। उसने जब मेरी ओर देखा, मैं उससे नज़रें मिला न सकी। पास की दुकान से, बिस्कुट …

साधन से ज़्यादा साथ ज़रुरी – अनु महेश्वरी

न शिकवा करें, न शिकायत करें, साधन से ज़्यादा साथ ज़रुरी होता है। न कभी रूठे रहें, न खामोश रहें, बातों से अपनी खुशहाल ये ज़िंदगी है। खुद का …