Tag: प्रेम कवितायें

सांवरे तेरे प्यार में……………….दीवानी हो गयी |भजन| “मनोज कुमार”

सांवरे तेरे प्यार में, गिरधर बातों के जाल में राधा तेरी रानी, दीवानी हो गयी, दीवानी हो गयी कानन कुंडल की ये, मोहिनी मूरत की ये मोहन तेरी रानी, …

विजय दिवस है, आज तिरंगा ऊँचा है………….. |गीत| “मनोज कुमार”

नाचो झूमो गाओ साथी आओ आओ साथी मिलके गाओ आओ विजय दिवस है, आज तिरंगा ऊँचा है मिलके ख़ुशी मनायें, तिरंगा ऊँचा है ऊँचा है तिरंगा अपना ऊँचा है …

नैन पर फिर भी मिल गए – शिशिर मधुकर

छुपाया बहुत खुद को नैन पर फिर भी मिल गए असर ऐसा हुआ दिल पे फूल खुशियों के खिल गए खौफ ने इस कदर घोला है ज़हर फ़िज़ा में …

प्रेम धागे का बंधन – शिशिर मधुकर

तेरे बिन दिन नहीं कटते तुझे कैसे बताएं हम तू ही जब पास ना आए तुझे कैसे सताएं हम तेरा वो रूठ जाना और मनाना याद आता है समझ …

बस तेरे लब के बोसे हैं – शिशिर मधुकर

मुहब्बत खुशियाँ देती है मगर ग़म भी परोसे है ये मुस्कान जानेमन बस अब एक तेरे भरोसे है भिगो देता है ये सावन जब भी मुझको हौले से यूँ …

फिर सो ना सका – शिशिर मधुकर

मैंने सोचा बहुत मैं भुला दूँ तुम्हें लेकिन ये मुझसे हो ना सका तेरी छवियां ना दिखला दें आंसू मेरे मैं तो जहाँ में रो ना सका उल्फ़त की …

तेरी चाहतों के जैसा – शिशिर मधुकर

चाहा बहुत ना दिल से तुझे दूर कर सके भूलूँ तुम्हें ना वो मुझे मजबूर कर सके आनंद वो मैंने पा लिया जिसकी तलाश थी बाकी नशे ना मुझको …

प्यासा – शिशिर मधुकर

प्यासा हूँ तेरी दीद का किस बिधि कहूँ तुझसे ये तन्हाइयां अब तो ना सही जाती हैं मुझसे तेरा करम हो जाए ग़र इन मुश्किलों के बीच कुछ भी …

सीने से लग जाओ – शिशिर मधुकर

मुझे कह दे तो कोई प्यार से सीने से लग जाओ मेरी आँखों में आँखें डाल के नींदों से जग जाओ मुहब्बत की पनाहों में सुख कुछ मिलता है …

खता मेरी ना थी कोई – शिशिर मधुकर

मुहब्बत हो गई तुमसे खता मेरी ना थी कोई खुदा ने चाहा जो इस जहाँ में होता है वो ही नहीं होता है सबके भाग में प्यार का मिलना …

एक रैन मिल जाए – शिशिर मधुकर

तू बाहों में अगर भर ले मुझे तो चैन मिल जाए बड़े नज़दीक से तेरे नैनॊं से मेरे नैन मिल जाए बड़ी तन्हा सी गुजरी है अब तलक जिंदगी …

मुस्कान फिर भी आए – शिशिर मधुकर

मुसीबत में जां फँसी हो पर मुस्कान फिर भी आए काश ऐसी मुहब्बत मुझको इस जहाँ में मिल जाए कुछ पाने या खोने से कोई सुख दुःख तब ना …

ये नज़रें ना हिलती हैं- शिशिर मधुकर

चाहे कुछ भी मिले मुझको जो खुशी तुझसे मिलती है ऐसा लगता है ज्यों मानो जूही की कलियाँ खिलती है मिलन दिल का किसी से जब रब की मर्ज़ी …