Tag: प्रेम कवितायें

आँखें जताती हैं – शिशिर मधुकर

मुहब्बत दिल में होती है मगर आँखें जताती हैं खुशबू प्यार की मुझको तेरी बातों से आती है सभी कुछ पास है मेरे मगर फिर भी अधूरा हूँ जिसे …

लम्हें भी ठहरे हैं – शिशिर मधुकर

तेरी एक दीद को हम तो यहाँ कब से तरसते हैं वो बादल गड़गड़ाते हैं मगर फिर ना बरसते हैं उनको मालूम है हाथों में उनके बस करिश्में हैं …

तिनकों से ढहते हैं – शिशिर मधुकर

मुहब्बत जिनसे है मुझको वो हरदम दूर रहते हैं तन्हा तड़पाते हैं मुझको खुद भी तो पीर सहते हैं एक दिन जान ले जाएगी ये दूरी जो बैरन हैं …

हम ना थकते है – शिशिर मधुकर

राहों में जिन पे तुम मिले उन पे भटकते हैं मुद्दत हुई तुम्हें ढूंढते पर हम ना थकते है अमवां पे बौर आ गया पुरवाई जब चली फल मगर …

प्रीत के फेरे – शिशिर मधुकर

तुम्हें दिल दे दिया मैंने नहीं कुछ पास अब मेरे मेरी साँसों की खुशबू बस चुकी है साँसों में तेरे दूरियां अब कभी हमको परेशां कर न पाएंगी हवाएं …

प्रेम चाहे पलों का हो- शिशिर मधुकर

वो तो परियों की रानी थी रूप उसका सलोना था किसी भी हाल में लेकिन उसे मेरा ना होना था मुझे मिलती थी वो जब भी सदा कुछ कहना …

प्रेम का रिश्ता – शिशिर मधुकर

मुझको मालूम है तन्हाइयों में तू भी रोता है तेरा ग़म दूर रह कर भी मुझे महसूस होता है ज़िन्दगी क्या करें अच्छे बुरे रिश्तों का बंधन है मुहब्बत …

प्रीत छलक जाती है- शिशिर मधुकर

मैं कितना भी छिपाऊं पर, प्रीत छलक जाती है तन्हाइयों में हर पल बस एक, याद तेरी आती है मैं सोचती हूँ जब भी, ख्यालों में तुम ही आते …

असर होता है कुछ ऐसा – शिशिर मधुकर

ना तेरे बोल सुनता हूँ ना ही खुशबू अब आती है तेरी आँखों की वो मस्ती मुझे हरदम सताती है हया से नज़रों का झुकना और फिर मुस्कुरा देना …

अमृत ही मिल गया -शिशिर मधुकर

देखा तेरी निगाह ने गुलशन भी खिल गया ऐसा लगा प्यासे को ज्यूँ अमृत ही मिल गया इस प्यार और विश्वास की ताकत अजीब है आहें भरी मैंने तो …

तेरी खुशबुओं में घिर गया- शिशिर मधुकर

अभी कुछ दिनों की तो बात है तुम कितने मेरे करीब थे हर शख़्स मुझसे जल गया कुछ ऐसे अपने नसीब थे तुम फूल थे जिस बाग़ के मैं …

मुहब्बत का असर – शिशिर मधुकर

तेरी सांसों की ख़ुशबू जब मेरी सांसों में रहती थी मेरा चेहरा चमकता था खुशी नस नस में बहती थी सभी ग़म भूल कर यारों सदा जीने की इच्छा …

जो प्रेम करते हैं – शिशिर मधुकर

आज भी बातों से उनकी फूल झरते हैं दिल से जुदा होते नहीं जो प्रेम करते हैं ढल गई है रात देखो दिन निकलने को रोशनी से इसमें चलो …

मुहब्बत और पूजा – शिशिर मधुकर

तूने सौंपा मुझे सब कुछ अहम दिल से मिटाया है मेरे हर क़तरे क़तरे में नाम तेरा समाया है मुहब्बत और पूजा में फर्क कोई नहीँ होता इन्हीं के …

आईने की छवि- शिशिर मधुकर

मुहब्बत ग़र समझता वो तो यूँ रूठा नहीं होता अलि के चूम लेने से फूल झूठा नहीं होता ना संग जाएगा कुछ तेरे ना संग जाएगा कुछ मेरे समझता …

मुहब्बत का सरूर – शिशिर मधुकर

देख के मन लगे गर किसी को पाने में हो गई उस से मुहब्बत तुम्हें ज़माने में अकेले तुम रहोगे बीच में जो लोगों के तन्हा खुद को नहीं …

घटाएं प्यार की- शिशिर मधुकर

प्यार जब दिल में होता है तो आँखों से झलकता है यार ग़र सामने हो सांसों में शोला दहकता है मुहब्बत ज़िन्दगी में फूलों की खुशबू के जैसी है …