Tag: hindi kavita

‘मगर, वह है कि नहीं आती’ के बाद…Raquim Ali

(‘मगर, वह है कि नहीं आती’ के बाद) भाग-2 (07.06.2017) कुछ दिनों बाद: वो बुलबुल फिर से खाली पड़े कमरे में आने लगी थी पुराने घोंसले पर बैठ जाती …

ख़ुदा उनके, वे ख़ुदा के क़रीब रहते हैं…Raquim Ali

*ख़ुदा उनके, वे ख़ुदा के क़रीब रहते हैं* इल्म व आमाल से, जो हैं रोशन जिंदा हैं वे, जिंदग़ी है उनकी वाज़ करते हैं जो सीधी राहों की और …

वाह रे इंसान-Raquim Ali

…भाग -१… वाह रे इंसान कहां पहाड़-समंदर-गहरी खान छोटा-सा कद, पर लेता है सबको छान आकाश छू लेने का पाले रहता अरमान! प्रतिफल है उसकी प्रबल इच्छा-शक्ति का दुनिया …

मेरे ख्वाब कभी जो पास तुम्हारे आते- आशीष अवस्थी

मेरे ख्वाब कभी जो पास तुम्हारे आते चुपके से उनको तुम अपने पास सुलाते धूप शहर की तेज बहोत थी फिर भी हम बच जाते गर तुम गगरी में …

फ़कीर हो गया हूँ तेरे जाने के बाद – आशीष अवस्थी

तेरे साथ रहता था मैं बादशाहों की तरह। फ़कीर हो गया हूँ तेरे जाने के बाद।   रात भर जागता रहा ख्वाबों की तलाश में। नींद आयी भी मुझे …

बहुत मुश्क़िल है, उन्हें पा जाना… Raquim Ali

बहुत मुश्क़िल है बेलगाम नौकरशाही को पटरी पर ला पाना। बहुत मुश्क़िल है किसी से, बिना दबाव के नुक़्ते भर का सुधार करवा पाना। बहुत मुश्क़िल है गर्दिश में …

ये मतवाला संसार

जाने किस दर्द-दंश से रोष दिखाता है समीर अंग-अंग को कम्पित करता तन में पहुंचाता है पीर. चौंक कर गिरते पीले पल्लव कलियों को देता झकझोर नीड़ के अन्दर …

बच्चे चाचा उन्हें बुलाते

इलाहाबाद में जन्म हुआ था थे कश्मीरी ब्राम्हण परिवार पिता मोतीलाल थे उनके स्वरुप रानी से मिला संस्कार. समय की गति के साथ-साथ बने यशस्वी और गुणवान स्वाधीनता संग्राम …

श्रद्धा की अभिव्यक्ति है

आश्विन मास के कृष्ण-पक्ष में आरम्भ महालय का होता है पितरों को नमन करने का अनुपम अवसर ये होता है. जिनकी कृपा से तन-मन मिलता कृतज्ञ ये सारा जीवन …