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प्रेम के बंधन – शिशिर मधुकर

तसव्वुर में तुम्हारे कट रहे हैं रात दिन अब तो ऐसे ही पास जीवन में नहीं आ पाते हैं सब तो तुम्हें नाराज़ होने का मैंने हक़ दे दिया …