Tag: गीत

धुंधली यादें

यार फिर बैठा हूँ कुछ लिखने, पर गालों पे शबनम और आँखें नम हैं, धुंधली हैं यादें धुंधला ज़माना, धुंधला है कागज़ धुंधली कलम है; जहाँ तक देख सकती हैं आँखें , …

अल्हड़ बेगाना—डी. के. निवातिया

न जगाओ मेरे जमीर को, मुझे नासमझ नादाँ ही रहने दो ! मैं ठहरा अल्हड़ बेगाना, जो कहे ज़माना बेशक कहने दो !! ! इंसानियत का मोल नही यंहा …

गोरे- गोरे गाल…………. तेरा होना पास मेरे |गीत| “मनोज कुमार”

गोरे- गोरे गाल तेरे सिल्की- सिल्की बाल तेरे देता है प्यारा अहसास इनका होना पास मेरे जन्म जन्म साथ मेरे रग रग में वास मेरे देता है मस्ती उल्लास …

अगर दिल महोब्बत में…………….. नही होता |गीत| “मनोज कुमार”

अगर दिल महोब्बत में डूबा ना होता रोता ना दिल दिलबर झूठा ना होता करता ना भूल ना जुदा तुमसे होता ना थे नसीब में एतबार नही होता अगर …

अगर पास आके……….आजमा लेते |गीत| “मनोज कुमार”

अगर पास आके मुस्करा देते मिट जाते शिकवे आजमा लेते दिल की कहानी थोड़ा कह देते तेरे ही तो हैं आजमा लेते अगर पास…………………………………….. आजमा लेते तन्हाई दूर सारी …

ख़्वाब ।

तूने कैसी नज़र से देखा, आकर के मेरे ख़्वाब में? तेरे मुताल्लिक, सारे ख़्वाब, जल गए मेरे ख़्वाब में…! मुताल्लिक = संबंधित; मार्कण्ड दवे । दिनांकः १६ नवम्बर २०१६.

साथ ।

बुरे वक़्त में, साथ दिया था जिन-जिन का, हर वक़्त मैंने, कह कर, आज धतकार दिया, सब ने, `हम तुम्हें जानते नहीं..!` धतकारना = अपमानित करना; मार्कण्ड दवे । …

महोब्बत कर लेते …………………….. गर तुम भी |गीत| “मनोज कुमार”

महोब्बत कर लेते हम भी, साथ गर दे जाते तुम भी जीत लेते हम तो दुनिया, साथ में होते गर तुम भी महोब्बत कर लेते ………………………………………. गर तुम भी …