Tag: ग़ज़ल

सृजन फिर से नया होगा – शिशिर मधुकर

अँधेरे जब कभी इंसान के जीवन में आते हैं तभी तो चाँद दिखता है ये तारे टिमटिमाते हैं सरद रातें हुईं लम्बी तो ग़म किस बात का प्यारे सुबह …

वो केवल मुस्कुराते हैं-शिशिर मधुकर

मुहब्बत करके जो मझधार में संग छोड़ जाते हैं लाख चाहा किया भूलें वो फिर भी याद आते हैं अगर बनता है हर इंसान केवल एक मिट्टी से कहो …

मुझे पैग़ाम मिल जाता है – शिशिर मधुकर

मुझसे बात करके तुम जो इतना खिलखिलाती हो अरे जज़्बात अपनी प्रीत के नाहक छुपाती हो तुम्हारा रूप वो मुझको सदा बेचैन करता है शर्म से पल्लू का कोना …

बार-बार – डी के निवातिया

बार-बार *** वो कौन है जो दिल को दुखाता है बार-बार ! अश्क बहते नहीं दिल करहाता है बार-बार !! वफ़ा संग बेवफाई दस्तूर पुराना है जमाने का फिर …

नज़र मिलती है जब तुमसे – शिशिर मधुकर

नज़र मिलती है जब तुमसे तो तुम धीरे से हँसते हो गुमां होता है ना तुमको तुम्हीं इस दिल में बसते हो नशा होता है कुछ ऐसा मुहब्बत का …

रहनुमा ग़ालिब नहीं तो कौन है…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

रूह में न है खुदा तो, कौन है… तुम नहीं गर वो बताओ, कौन है…. लफ्ज़ से वाकिफ नहीं हूँ, उससे मैं… लम्ज़ से मुझको दिखाओ, कौन है…. हार …

किस काम की सांसें – शिशिर मधुकर

मुहब्बत छोड़ दी तुमने– मेरा सुख चैन खोया है बचे ना अब तो आंसू भी ये मनवा इतना रोया है हर तरफ आग नफरत की मेरा तन मन जलाती …

तेरी आँखों से क्यूँ नींद उडी रहती है…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)… 

ये मुहब्बत भी मिटाने से न कभी मिटती है… आग ऐसी है जो बुझाने से और जलती है…. दर्द में सुकून कभी सुकून में दर्द सा उठता है… नब्ज़ …

निशां तो फिर भी रहते हैं – शिशिर मधुकर

भले ही घाव भर जाएं निशां तो फिर भी रहते हैं मुहब्बत के गमों को आज हम तन्हा ही सहते हैं वो पत्थर हैं ज़माने से कभी कुछ भी …

नई शुरुआत करते हैं – शिशिर मधुकर

भले ही मुद्दतों से हम ना तुमसे बात करते हैं तेरे ख़्वाबों में ही लेकिन बसर दिन रात करते हैं ये माना बाग़ उजड़ा है बहारें अब ना आती …

ज़िन्दगी का शायर हूँ..

ज़िन्दगी का शायर हूँ मैं ज़िन्दगी का शायर हूँ, मौत से क्या मतलब मौत की मर्जी है, आज आये, कल आये| टूट रहे हैं, सारे फैलाए भरम ‘हाकिम’ के, …

लोग सुनकर क्यूं मुस्कराने हैं लगे

लोग सुनकर क्यूं मुस्कराने हैं लगे और भी खबसूरत अंदाज हैं मरने के लेकिन इश्क में जीना ‘अरुण’ सुहाना है लगे क्यूं करें इश्क में मरने की बात इश्क …

कली ये प्रेम की – शिशिर मधुकर

रिश्तों की खातिर अक्सर मुहब्बत छूट जाती है अगर कमज़ोर हो धागा तो माला टूट जाती है कोई भी जान कर इस खेल में शामिल नहीं होता कली ये …

नाज़ुक बहुत हैं इश्क़ के धागे…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

जब भी मिलो तुम, मुस्कुरा के बोलना…. अपनी हकीकत को, छुपा के बोलना…. आईने को झूट कहने से पहले तुम… नज़र अपनी खुद से, मिला के बोलना… अपनी  अना  …

अपने हसीन रुख़ से हटा कर निक़ाब को- SALIM RAZA REWA : GAZAL

.. अपने हसीन रुख़ से हटा कर निक़ाब को, शर्मिन्दा कर रहा है कोई माहताब को . कोई गुनाहगार या परहेज़गार हो, रखता है रब सभी केअमल के हिसाब …

ईश्वर भी अब मालिक हो गया है

पत्थर के देवता अब जमाने को रास नहीं आते संगमरमर के गढ़े भगवान हैं अब पूजे जाते, ईश्वर भी अब मालिक हो गया है मुश्किल है उसका अब मिलना …

दो दूना बाइस — डी के निवातिया

दो दूना बाईस — बेवजह में वजह ढूंढने की गुंज़ाइश चाहिये ! काम हो न हो पर होने की नुमाइश चाहिये !! कौन कितना खरा है, किसमे कितनी खोट …

बंद मुठ्ठी की बस ज़मी सी है…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)..

रोज़ मरने की……..जुस्तजू की है…. आपसे मिलके ही….ज़िन्दगी जी है… हर किसी सी………..चाह है न मेरी… बंद मुठ्ठी की बस………..ज़मी सी है… वो मिला दिन चार का…… साथ रहा… …