Tag: ग़ज़ल

आँखों से प्याले – शिशिर मधुकर

मुझे तुम पिला दो न आँखों से प्याले गले से उतरते नहीं अब निवाले बड़ी सूनी सूनी है महफ़िल हमारी तुम ही नहीं जब कैसे उजाले सहा जितना मुमकिन …

प्रकृति की पूजा – शिशिर मधुकर

प्रकृति की पूजा है जो लोग करते निशां उनके देखो हरगिज ना मरते जमीं देखो पेड़ो को साधे हुए है तभी फूल इसके आंचल में झरते समा लेगी सबको …

उड़ जो चुका है – शिशिर मधुकर

ये नदिया का पानी रुकेगा ना अब तो समुन्दर की जानिब ये मुड़ जो चुका है करे लाख कोशिश ज़माना ये जालिम ना टूटेगा रिश्ता जुड़ जो चुका है …

कोशिशें – शिशिर मधुकर

मुहब्बत दिल में थी जब तो प्यार आँखों से झरता था मैंने उल्फत का तब हर पल तेरे संग हंस के बरता था कोशिशें गर तेरी मुझको सुकूं देने …

सभी हैं तुम्हारे सभी हैं हमारे…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

सभी हैं तुम्हारे सभी हैं हमारे मगर फिर भी दुनिया अलग जात होगी… जुबां खोलना मत कुफर तोलना मत निगाहों में अपनी हरिक बात होगी… महब्बत का जब ज़िक्र …

हकीकत – शिशिर मधुकर

बड़ा खूबसूरत है रिश्ता हमारा उल्फत का जज्बा कभी कम ना होगा जहाँ रोशनी फैलती हो रवि से नफरत का हरगिज वहाँ तम ना होगा जो रिश्ते बनाते हैं …

मुकरता गया – शिशिर मधुकर

करम ना तेरा हुआ समय यूँ ही गुजरता गया संभलना चाहा मगर मैं तो बस बिखरता गया खुदा मिले ना मिले पूजा मेरी तो सच्ची थी मैं उसका नाम …

वस्ल के वो पल – शिशिर मधुकर

प्यार दिल से जो करते हैं वो ख्यालों में आते हैं झूठे इंसान इस जग में मुझे बिल्कुल ना भाते हैं भले तुम जी रहे हो बेधड़क सब कुछ …

तेरा रूप सादा – शिशिर मधुकर

तेरा रूप सादा करे मुझसे वादा कम ना कभी भी ये प्रीत होगी माना मुश्किल हुआ थोड़ा जीना एक दिन फिर से मगर जीत होगी चलेगा समय तो बदलेंगी …

ज़िन्दगी बिन तुम्हारे थमी रह गयी…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

(जनाब बशीर बद्र साहिब की एक ग़ज़ल है….’ये कसक दिल की दिल में चुभी रह गयी…. ज़िन्दगी में तुम्हारी कमी रह गयी’…उसी ज़मीन में लिखी ग़ज़ल…आपके सुपुर्द…) शमअ तन्हा …

फूल की क्या खता – शिशिर मधुकर

मुझे बरबाद कर वो चैन से मुँह ढक के सोते हैं यहाँ मालिक सभी क्या हुस्न के ऐसे ही होते हैं फूल की क्या खता वो तो खिलेगा वक्त …

मेरे दिल में ज़रा झांको- शिशिर मधुकर (बिना रदीफ की गज़ल )

तुझे पाने की हसरत से टूटता है नहीं नाता भुलाना प्रेम को अपने मुझे देखो नहीं आता मुकद्दर ने मेरे संग हर समय बस खेल है खेला मेरे दिल …

उल्फ़त की मय – शिशिर मधुकर

करूँ दूर तुमको कैसे नज़र से मुश्किल है अब तो बिन तेरे जीना नशा करने वाले सम्भल जा तू जल्दी घातक है उल्फ़त की मय रोज पीना दर्द तुमने …

दीप एक प्रेम का – शिशिर मधुकर

प्रेम उस से करें कैसे मान जिसने घटाया हो एक गुणगान गैरों का मेरे आगे सुनाया हो खड़ा है तन के मेरे सामने वो गैर के जैसा घमंडी सर …