Tag: ग़ज़ल

रिश्तों की पौध – शिशिर मधुकर

साफ दिल के साथी से जब नज़रें मिलाओगे वो हँसती हुई खुद की छवि तुम देख पाओगे प्रेम और विश्वास संग जो तुम घर बनाओगे सुख दुःख के हर …

सच क्या होता है—डी के निवातिया

(सच क्या होता है) हमने जो पूछ लिया सच क्या होता है ! तिलमिला के बोले ऐसे न बयां होता है !! लांघ रहे हो आदो-अदब का दायरा जनाब …

एहसास ए मुहब्बत – शिशिर मधुकर

तुमसे कैसे कहें हम तुमको कितना याद करते हैं एहसास ए मुहब्बत क्या कभी चाहने से मरते हैं गमों की खाई से तुमने ही तो हमको निकाला था तुम्हारा …

उल्फ़त का नूर – शिशिर मधुकर

गुल तेरी मुहब्बत के खिलकर के झर गए मौसम बसंत के भी सब आकर गुज़र गए खुशबू दिलों दिमाग से तो मिट ना पाएगी भंवरे खुश है रस पीकर …

मुहब्बत की शाम—डी. के. निवातिया

वफ़ा होने से पहले मुहब्बत की शाम न हो जाये ! प्यार के इम्तिहान में, कही नाकाम न हो जाये !! बेवफ़ा लोगों की सौबत में रहना क़िस्मत ही …

माथे का कुमकुम – शिशिर मधुकर

मेरी जिंदगी में सब कुछ छोड़ कर गर जो आते तुम तुम्हारे मरमरी चेहरे की मय पी मैं रहता नशे में गुम बड़ा वीराना रहता है मेरी मुहब्बतों का …

बेइमान बहुत है—–(डी.के. निवातियाँ )

लोग शहर के अनजान,एक दूजे से हैरान बहुत है ! देखकर हालात इंसानियत के, दिल परेशान बहुत है !! बिकता है देखो मजहब आज आतंक के इस बाजार में …

नूर फिर से लौटा है – शिशिर मधुकर

प्यार ही प्यार था तेरी इन हंसी निगाहों में मैं खुद को भूल गया तूने भरा जो बाहों में जिंदगी में हर ईक चीज तुमको मिल जाए खुशी मिलती …

गुनाह—गजल-नज्म— डी. के. निवातिया

क़त्ल न कोई गुनाह किया हमने ! बस दर्द ऐ दिल बयाँ किया हमने !! जाने क्यों नुक्ताचीनी होने लगी ! जरा लबो को जो हिला दिया हमने !! …

चालाकी से गहते हैं -शिशिर मधुकर

मुहब्बत को भुला दें हम वो हमसे ये कहते हैं दर्द का क्या पता उनको जो ना चोट सहते हैं ईंट गारे का घर भी तोड़ना आसां ना होता …

प्रीत का रंग – शिशिर मधुकर

हाथ छूटे हैं जीवन में मगर बंधन तो नहीं टूटे दूरीयां चाहे हों जैसी ना तुम रूठे ना हम रूठे समय का फेर है सारा इसका क्या करे कोई …

तेरी खुशबू से -शिशिर मधुकर

तेरी खुशबू से हम तुझको यहाँ पहचान ही लेंगे तू आई है हवाओं के रुख से ये भी जान ही लेंगे सरद मौसम ज्यों बीतेगा नरम सी धूप बिखरेगी …

मुँह जो फेरा है – शिशिर मधुकर

अपने हर अंश में तुम झाँक लो मेरा बसेरा है वक्त के साथ में छंट जाएगा जो भी अँधेरा है तुम्हे पाना मेरे लिए बस कुदरत की मर्जी थी …

न भूले तुम न भूला मैं….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

मोहब्बत में मेरे दिल को ये कैसी बेतबारी है… सुकूत-ऐ-मर्ग तारी है, सबसे राज़दारी है… (खामोशी मौत सी छाई है, सबसे राज़दारी है) ये नीला आसमान खूँ रंग हो …

जज्बा मुहब्बत का – शिशिर मधुकर

तेरा भरोसा आज भी खुलकर ये कहता है जज्बा मुहब्बत का तेरी रग रग में रहता है इन दुनियाँ वालों नें जब मुँह पर जड़े ताले दिल की बातें …

परिवर्तन – शिशिर मधुकर

मुझको यकीं हैं अपने खुदा पे वो लम्हा भी आएगा अपने दिल में बसा के मेरी छवि कोई मुस्कुराऐगा फूल खिलते हैं ऋतुओं में कभी मन की नही होती …

हाल-ए-दिल अपना…सी.एम् शर्मा (बब्बू)….

हाल-ए-दिल हमसे अपना, सुनाया न गया…. दर्द सोया था जो मुश्किल से, जगाया न गया… हर वफ़ा जुर्म हो दुनिया में मुमकिन है कहाँ…. दिल से हर वक़्त तुझे …

अंजाम-1…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)……

दर्दे इश्क़ में यूं मेरे, जज़्बात हो पड़े…. बेख्याल बेवजह, दिल है की रो पड़े…. हर्फो हया से दोस्ती, महंगी पड़ी हमें… जज़्बा-ऐ-इश्क़ खुद के, हम कैद हो पड़े… …