Tag: ग़ज़ल

अब नहीं फुरसत – शिशिर मधुकर

तुम्हारे हुस्न के जलवे हमें अब भी सताते हैं हमें पर कुछ नहीं होता ये गैरों को जताते हैं तुम ही सच जानते हो बस गए कैसे निगाहों में …

चार दिन की चाँदनी के वास्ते…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

वक़्त बदले की निशानी देखना… सड़क पे पगड़ी उछलती देखना…. कमतर लगेंगे ज़हर के तीर भी… बदज़ुबानी चीर करती देखना… शर्म,शील,लिहाज की बात न होगी… बाड़ खुद ही खेत …

ज़लवा दिखाओ तो जाने – डी के निवातिया

ज़लवा दिखाओ तो जाने *** आज भी पहले सा मुस्कराओ तो जाने फिर से वही ज़लवा दिखाओ तो जाने !! मुहब्बत को तरस गयी है प्यासी निगाहें फिर उसी …

जाने ये किसका दोष है – शिशिर मधुकर

ढूंढ़ते हैं हम जहाँ पे ज़िन्दगी मिलती नहीं जाने ये किसका दोष है कलियां अब खिलती नहीं पत्तियां इस पेड़ की खामोश हैं मायूस हैं जब हवा ही ना …

तेरी खुशबुओं में घिर गया- शिशिर मधुकर

अभी कुछ दिनों की तो बात है तुम कितने मेरे करीब थे हर शख़्स मुझसे जल गया कुछ ऐसे अपने नसीब थे तुम फूल थे जिस बाग़ के मैं …

जो साथ कोई देता रहे – शिशिर मधुकर

साथ रहता है जो हरदम सगा नहीं होता वरना मुझको भी यूँ उसने ठगा नहीं होता नैन में स्वप्न लिए नींद भी आ जाती थी वरना तन्हा पड़ा मैं …

कभी मुड़ के देखो ज़रा जिंदगी को…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

कभी मुड़ के देखो ज़रा जिंदगी को… कहाँ छोड़ आये हैं हर इक ख़ुशी को… चले थे जहां से वो परिवार अपना… गये रह वो पीछे ले आये खुदी …

कोई तो झांक कर देखे – शिशिर मधुकर

अधिक पाने की चाहत में यहाँ थोड़ा भी खोया है वही काटा है इंसा नें जो निज हाथों से बोया है स्वप्न जब टूटते हैं आँखों में आंसू नही …

उठा हाथ सब का भला माँगना…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

उठा हाथ सब का भला माँगना… करूँ ना बुरा मैं दुआ मांगना… न हो चमन खौफ परेशाँ ग़मज़दा… करूँ कुछ ऐसा हौसला मांगना… न हो ‘आसिफा’ कोई बेआबरू… जहां …

चल चलें दिल कोई जंगल…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

कैसे कहदें तेरी गलियों से निकलना जो हुआ… आँखों से ख़्वाबों का एक पल में फिसलना जो हुआ… चरमराती हुई दिवारों को क्या देख रहे हो… वायु पानी धरती …

मुहब्बत का असर – शिशिर मधुकर

तेरी सांसों की ख़ुशबू जब मेरी सांसों में रहती थी मेरा चेहरा चमकता था खुशी नस नस में बहती थी सभी ग़म भूल कर यारों सदा जीने की इच्छा …

गुल ना खिलाते हो – शिशिर मधुकर

मेरी नज़रों से तुम अब अपनी नज़रें ना मिलाते हो कली ही नोच देते हो कभी गुल ना खिलाते हो कभी सुख देने की खातिर भरा था चेहरा हाथों …

क्‍या करें

क्‍या करें यह दिल बेचैन हुआ जाता है क्‍या करें वो अहसास दिल को छुआ जाता है क्‍या करें हमने दिल के जज्‍बात रख दिए अल्‍फाजों में वो इसे …

मुहब्बत और पूजा – शिशिर मधुकर

तूने सौंपा मुझे सब कुछ अहम दिल से मिटाया है मेरे हर क़तरे क़तरे में नाम तेरा समाया है मुहब्बत और पूजा में फर्क कोई नहीँ होता इन्हीं के …

छिन गया रुत्बा तो क्या है

छिन गया रुत्बा तो क्या है पास अपने हौसला है तूने मुझको मन से चाहा दिल कहे तू देवता है तूने छोड़ा उसपे सब कुछ देख वो क्या मांगता …

थोड़ा और गहरे उतरा जाये

थोड़ा और गहरे उतरा जाये तब जाकर इश्क में डूबा जाये लफ़्ज़ों में शामिल अहसासों को महसूस करूँ तो समझा जाये है ज़रूरी ये कोरे काग़ज़ पर जो सोचा …

ज़रा खुलने तो दो — डी के निवातिया

ज़रा खुलने तो दो *** शेर सारे पढ़े जायेंगे तुम्हारे मतलब के ज़रा खुलने तो दो बाते तमाम होंगी वफ़ा संग बेवफाई की ज़रा घुलने तो दो !! हर …

अधूरे से – शिशिर मधुकर

अधूरे से दिखे मुझको तुम्हें कल शाम को देखा बिना सिय के तड़पते जैसे अकेले राम को देखा सभी गोपी कृष्ण को घेर कर उल्लास करती थी मगर राधा …

आईने की छवि- शिशिर मधुकर

मुहब्बत ग़र समझता वो तो यूँ रूठा नहीं होता अलि के चूम लेने से फूल झूठा नहीं होता ना संग जाएगा कुछ तेरे ना संग जाएगा कुछ मेरे समझता …

मुहब्बत का सरूर – शिशिर मधुकर

देख के मन लगे गर किसी को पाने में हो गई उस से मुहब्बत तुम्हें ज़माने में अकेले तुम रहोगे बीच में जो लोगों के तन्हा खुद को नहीं …

ज़ारी रहा मेरा…

मंज़िले मिलती रहीं लेकिन सफ़र ज़ारी रहा मेरा, हुए मुख्तलिफ-ए-राह-ए-गुज़र लेकिन खबर जारी रहा मेरा… मुकम्मल ख़्वाब न हो शायद ये भी महसूस होता है उम्मीद-ए-कारवाँ पे लेकिन नज़र …