Tag: ग़ज़ल

खुदा जितना सिमरते थे – शिशिर मधुकर

तुमसे मिलने की खातिर ही तो हम इतना संवरते थे जाने मन जान लो हम तुम से प्यार कितना करते थे तुम्हारे मुस्कुराते चेहरे का जब हसी दीदार होता …

मुहब्बत चीज़ ऐसी है (2)- शिशिर मधुकर

मुहब्बत चीज़ ऐसी है करती मेहरबानियां हरदम ज़िन्दगी रूठ जाती है अगर हों तन्हाईयां हरदम दूर तुम हो गए मुझ से ये सितारों की मर्जी थी फिर भी रहती …

गुजरे लम्हे – शिशिर मधुकर

मेरे नगमों को वो पढ़ते हैं तो घबरा से जाते हैं गुजरे लम्हे कई लफ्जों में पा शरमा से जाते हैं सम्भल के सोचते है जब उमंगे मन में …

मुहब्बत चीज़ ऐसी है – शिशिर मधुकर

मुहब्बत चीज़ ऐसी है सभी को चाहिए हरदम ज़िंदगी रुठ जाती है अगर हो जाती है ये कम दूर तुम हो गए मुझ से ये सितारों की मर्जी थी …

जिससे था हमें प्यार ……………चला गया |गीत| “मनोज कुमार”

जिससे था हमें प्यार वो साजन चला गया हम रहते थे जिसके दीवाने चला गया हुई मुद्दतों अब तक जिसका पता नही हमें छोड़ अकेला तन्हा करके चला गया …

गुजरे वक्त की याद…………………रुलाती है |गीत| “मनोज कुमार”

गुजरे वक्त की याद याद आती है | चुपसा रहता है दिल वो रुलाती है || जबसे छीनी है प्यार की दौलत | बनके हम तो फ़क़ीर बैठे है …

कब तक छुपाओगे ये प्यार ………….भी नही |गीत| “मनोज कुमार”

कब तक छुपाओगे ये प्यार प्यार बिना कुछ भी नही | कुछ तो करो तुम शरारत शरारत बिना कुछ भी नही || तेरे लाल लाल रचे हुए हाथ हाथ …

हर पल सिमरते थे – शिशिर मधुकर

तुमसे मिलने की खातिर ही तो हम सजते संवरते थे जाने मन जान लो हम तुम से कितना प्यार करते थे तुम्हारे मुस्कुराते चेहरे का जब हसी दीदार होता …

फासले दिल के…..सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

जुस्तजू में ही, बिखर गए, सपने मेरे… चर्चे भी हर तरफ, उम्मीद से, निकले मेरे…. वक़्त गुज़रा है, कुछ इस-तरहा, मेरा… अपने ही रूप में, दुश्मन नज़र, आये मेरे…. …

रावण बदल के राम हो जायेंगे—डी. के. निवातिया

खुली अगर जुबान तो किस्से आम हो जायेंगे। इस शहरे-ऐ-अमन में, दंगे तमाम हो जायेंगे !! न छेड़ो दुखती रग को, अगर आह निकली !   नंगे यंहा सब …

मुक़ाम ए बन्दगी – शिशिर मधुकर

मुहब्बत की झलक देखी पर ना देखी है दीवानगी तूफ़ान में वो डगमगा गए उनसे उम्मीदें जब जगीं उनकी तस्वीर दिल दिमाग में कुछ ऐसी बस गई लाख चाहा …

किस्मत का सितम – शिशिर मधुकर

मुझे इस वक्त ने तन्हाई का जो मंज़र दिखाया है कोई राज़ यूँ लगता है इसके दिल में समाया है सोच कर खान हीरों की मैंने दोनों मुट्ठी भरी …

ज़िन्दगानी गुजरती है – शिशिर मधुकर

हुई ना प्रेम की बारिश मेरा मन आँगन सूखा है मिलन की आस संजोए हरदम रहता ये भूखा है दीवारें देख कर मैंने मकां एक घर समझ डाला इसके …

दिलों के राज़ -शिशिर मधुकर

दिलों के राज़ कितना भी छुपाओ छुप ना पाते हैं वक्त लग सकता है थोड़ा मगर सब जान जाते हैं लाख कोशिश करी हमने उनकी सोच को बदलें इंसा …

चली जिन्दगी अपने रस्ते – शिशिर मधुकर

साथ मिला होता जो मुझ को तेरी इन दो बाहों का नूर कभी न मिटने देता मैं भी इन पाक निगाहों का मौका था तब मैंने भी दिल का …

तेरी सोहबत – शिशिर मधुकर

मेरी नज़रों ने ही तुमको एक हसी मूरत बनाया है देख के मेरी मुहब्बत ख्याल अब सबको आया है तुम्हारा हाथ जब पकड़ा तन्हाई मन में हावी थी तेरे …

नई खुशी की आशा- शिशिर मधुकर

तेरा मुझको मालूम नहीं मैं अपने दिल की कहता हूँ चोट लगीं जो अपनों से उनकी सब पीड़ाए सहता हूँ वो ही दुनियाँ है जीवन है और गर्दिश में …

मन की बाते—डी के निवातिया

आवश्यक सूचना (यह राजनितिक हालातो के परिपेक्ष्य पर लिखी गयी है इसका किसी व्यक्ति विशेष से कोई सम्बन्ध नहीं है ) (मन की बाते) कभी जनता को मन की …

रिश्तों की पौध – शिशिर मधुकर

साफ दिल के साथी से जब नज़रें मिलाओगे वो हँसती हुई खुद की छवि तुम देख पाओगे प्रेम और विश्वास संग जो तुम घर बनाओगे सुख दुःख के हर …

सच क्या होता है—डी के निवातिया

(सच क्या होता है) हमने जो पूछ लिया सच क्या होता है ! तिलमिला के बोले ऐसे न बयां होता है !! लांघ रहे हो आदो-अदब का दायरा जनाब …

एहसास ए मुहब्बत – शिशिर मधुकर

तुमसे कैसे कहें हम तुमको कितना याद करते हैं एहसास ए मुहब्बत क्या कभी चाहने से मरते हैं गमों की खाई से तुमने ही तो हमको निकाला था तुम्हारा …