Tag: ग़ज़ल

सभी मतलब के रिश्ते हैं – शिशिर मधुकर

तुम्हारे प्यार की खातिर अदावत मोल ली मैंने ग़मों की पोटली खुद के लिए ही खोल ली मैंने मुझे मालूम था ये आंधियां घर को उजाड़ेंगी ना जाने क्या …

तुमसे बिछड़ के…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

तुमसे बिछड़ के मुझ को सब वो यार पुराने याद आये… हर बात पुरानी याद आयी वो दिन सुहाने याद आये… जब देखूं हंसों के जोड़े मेरी सब यादें …

यही बस देखा है मैंने तो- शिशिर मधुकर

मुहब्बत जब किसी से करके मैंने सपने सजाए हैं तूफानों ने सदा आकर मेरे दीपक बुझाए हैं भले ही कोई अपनी बात से कितना भी मुकरा हो मैंने वादे …

भंवर से कश्ती लगेगी किनारे कैसे?

‘ग़ज़ल’ को कौन रख सका है, पहरे में ‘अरुण’ पलक झपकते बदल लेते हैं रुख ‘रदीफ़-काफिये’ बया ने मुश्किलों से बनाया ‘घरौंदा’ अपना तूफां ने इक पल में उड़ा …

अफ़सोस न कर – डी के निवातिया

अफ़सोस न कर *** मेरे वतन के हिस्से ये सौगात हर बार मिली है ! कभी गूंगो की कभी बहरो की सरकार मिली है !! किसी में हुनर सुनने …

उम्मीद है ये मुझको – शिशिर मधुकर

उम्मीद है ये मुझको इंतजार करोगे फिर से अपनी प्रीत का इकरार करोगे जो ना कह सके देख ज़माने को सामने तन्हाइयों में फिर से वो इजहार करोगे अधूरी …

सजे सजाये ताज उतर जाते हैं…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

मेरी तरह आप भी मुस्कुराया कीजिये…. दर्दे सागर हरदम न छलकाया कीजिये…. मुफलिसी भगाने का मजबूत इरादा रखो… हर किसी के आगे हाथ न फैलाया कीजिये… गर पाना है …

आहें सी भरते हैं -शिशिर मधुकर

फूल कितने भी सुन्दर हों मगर शाखों से झरते हैं दर्द से बच नहीं पाते….मुहब्बत जो भी करते हैं कभी वो पास थे अपने तो मन खुशियों में डूबा …

तेरी सांसों की खुशबू – शिशिर मधुकर

तेरी सांसों की खुशबू अब मेरी सांसों में बसती है हज़ारों फूल खिलते हैं जब तू शरमा के हँसती है यूँ तो बंधन मुझे कैसे भी हों अच्छे नहीं …

अगन ये इश्क की – शिशिर मधुकर

तेरी ज़ुल्फ़ों के लहराने से जब खुशबू निकलती है तुझे अपना बना लूँ फिर तो हर धड़कन मचलती है मिलन की आस हो मन में तो फिर दूरी है …

तन्हां इस शहर में नहीं कोई शख्स

तन्हां इस शहर में नहीं कोई शख्स तन्हाई आये भी तो कैसे आये उनके पास सुबह होती है जिनकी, शाम की रोटी की फ़िक्र के साथ , तन्हां इस …

अपने हाथों जां लुटानी, और है…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

इश्क़ मेरे की कहानी, और है… तेरे ज़ख्मों की निशानी, और है… रूह मेरी की तलब बस, एक तू… खुशबु तेरी जाफरानी, और है…. दिल का दिल से मिलना …

मुझको मालूम है – शिशिर मधुकर

मुझको मालूम है तूने मुझे दिल से निकाला है तेरा दर आज भी मेरे लिए लेकिन शिवाला है एक तेरे साथ में ही ज़िंदगी आबाद लगती थी बड़े जतनों …

सृजन फिर से नया होगा – शिशिर मधुकर

अँधेरे जब कभी इंसान के जीवन में आते हैं तभी तो चाँद दिखता है ये तारे टिमटिमाते हैं सरद रातें हुईं लम्बी तो ग़म किस बात का प्यारे सुबह …

वो केवल मुस्कुराते हैं-शिशिर मधुकर

मुहब्बत करके जो मझधार में संग छोड़ जाते हैं लाख चाहा किया भूलें वो फिर भी याद आते हैं अगर बनता है हर इंसान केवल एक मिट्टी से कहो …

मुझे पैग़ाम मिल जाता है – शिशिर मधुकर

मुझसे बात करके तुम जो इतना खिलखिलाती हो अरे जज़्बात अपनी प्रीत के नाहक छुपाती हो तुम्हारा रूप वो मुझको सदा बेचैन करता है शर्म से पल्लू का कोना …

बार-बार – डी के निवातिया

बार-बार *** वो कौन है जो दिल को दुखाता है बार-बार ! अश्क बहते नहीं दिल करहाता है बार-बार !! वफ़ा संग बेवफाई दस्तूर पुराना है जमाने का फिर …

नज़र मिलती है जब तुमसे – शिशिर मधुकर

नज़र मिलती है जब तुमसे तो तुम धीरे से हँसते हो गुमां होता है ना तुमको तुम्हीं इस दिल में बसते हो नशा होता है कुछ ऐसा मुहब्बत का …