Tag: ग़ज़ल

धुंधली ना हो तस्वीर-शिशिर मधुकर

धुंधली ना हो तस्वीर तू रंग इसके उभार दे नज़रों के पास आ ज़रा किस्मत संवार दे सूखी हैं सभी डालियाँ बरसी है ऐसी आग सावन की फुहारों को …

नैन पर फिर भी मिल गए – शिशिर मधुकर

छुपाया बहुत खुद को नैन पर फिर भी मिल गए असर ऐसा हुआ दिल पे फूल खुशियों के खिल गए खौफ ने इस कदर घोला है ज़हर फ़िज़ा में …

प्रेम धागे का बंधन – शिशिर मधुकर

तेरे बिन दिन नहीं कटते तुझे कैसे बताएं हम तू ही जब पास ना आए तुझे कैसे सताएं हम तेरा वो रूठ जाना और मनाना याद आता है समझ …

गुजर गया अब के ये सावन -शिशिर मधुकर

गुजर गया अब के ये सावन बिना कोई बरसात हुए सब शिकवे हमने कह डाले बिन तेरी मेरी बात हुए प्यार लुटा के बैरी होना सबके बस की बात …

वो लम्हें निकल गए – शिशिर मधुकर

जिनमें सुकूं मिला मुझे वो लम्हें निकल गए सपनों के सभी आशियां धू धू हो जल गए चट्टान सा मिला ना मुझे रिश्ता कोई यहाँ मौसम गर्म हुआ तो …

किस्मत के उलट फेरे – शिशिर मधुकर

मुहब्बत दिल में हो जिनके वो ही तो मान करते है मिटा के जिस्मों की दूरी उनको एक जान करते हैं उम्मीदें मैंने पाली थी नाज़ बन माथे पे …

फिर सो ना सका – शिशिर मधुकर

मैंने सोचा बहुत मैं भुला दूँ तुम्हें लेकिन ये मुझसे हो ना सका तेरी छवियां ना दिखला दें आंसू मेरे मैं तो जहाँ में रो ना सका उल्फ़त की …

तेरी चाहतों के जैसा – शिशिर मधुकर

चाहा बहुत ना दिल से तुझे दूर कर सके भूलूँ तुम्हें ना वो मुझे मजबूर कर सके आनंद वो मैंने पा लिया जिसकी तलाश थी बाकी नशे ना मुझको …

बदलते वक्त में -शिशिर मधुकर

क्या करूँ मैं तुम ही बोलो मेरा दिल तुमने तोड़ा है कहाँ ढूँढू सकूँ जब तेरे लिए ज़माने भर को छोड़ा है धारा रोक देने से नदिया घुट घुट …

रिमझिम बारिश निकली मेरी आखों से…सी.एम्. शर्मा(बब्बू)..

(22×5+2) दुनिया के पहरे से डरती रहती है… दिल आँगन में सबसे छिप के मिलती है…. दिल में तेरे जो है वो बतला दे ना…. शाम सवेरे यूं ही …

ढलता रहता हूँ — डी के निवातिया

ढलता रहता हूँ *** हर रोज़, दिन सा, ढलता रहता हूँ ! बनके दिया सा, जलता रहता हूँ !! कोई चिंगारी कहे, कोई चिराग !  यूँ नजरो में, बदलता …

बर्बादी का सबब

मेरी बर्बादी का सबब पूछेंगे। वो क्या, कैसे ओर कब पूछेंगे।। मेरी गजलों को पढ़कर लोग सभी। मेेरे शेरोंं का मतलब पूछेंगे। । मैं ख़ामोश हूँगा तू फ़िक्र ना …

जिंदगी वीरान है- शिशिर मधुकर

तूने दिल से क्या रुखसत किया जिंदगी वीरान है सांसें बदन में तो चल रहीं बाकी ना कोई जान है लाखों जतन मैंने किए तुझे याद करना छोड़ दूँ …

माना मेरी ज़िन्दगी-1….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

माना मेरी ज़िन्दगी है तेरे करार में…. लेकिन खुदा नहीं तू दुनियावी दयार में…. कैसी हवा चली है के लुट गया चमन चमन…. कफ़न तक भी खिंच गए मायावी …

दिल टूटने का खेल – शिशिर मधुकर

तुम्हारा हाथ क्या पकड़ा ज़माना भर खफा हुआ ना मुहब्बत मिली मुझको ना ही कोई नफ़ा हुआ यूँ तो पहले भी मेरी ज़िन्दगी में रब ना था कोई मगर …

आसमाँ देखता रहा…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)..

बिखरते रिश्तों का मैं जहॉं देखता रहा… करीने से बना मकाँ देखता रहा…. जिस गुल से थी चमन में खुशियां कभी… बेआबरू होते उसी को गुलिस्ताँ देखता रहा… नज़रों …

घोंसला वो बदनाम — डी के निवातिया

घोंसला वो बदनाम   परिदो से भी बदतर आज का इंसान हो गया ! पाए थे जहा पंख घोंसला वो बदनाम हो गया !! रूह तरसती रही, जिस्म मालमाल …

नसीब की किताब….सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

सपने सारे डूब गए मेरे आँखों के सैलाब में…. रात जब वो मिले मुझे रकीब संग ख्वाब में…. कुछ दुनिया का सितम कुछ खुदारी मेरी भी … बिक न …

तेरा जो साथ मिलता – शिशिर मधुकर

तेरा चेहरा जो दिख जाता वहीँ बरसात हो जाती बिना बोले ही नज़रो से दिलों की बात हो जाती अगर तुम चाँद के जैसा खुद का श्रृंगार कर लेते …