Tag: ग़ज़ल

अपने हसीन रुख़ से हटा कर निक़ाब को- SALIM RAZA REWA : GAZAL

.. अपने हसीन रुख़ से हटा कर निक़ाब को, शर्मिन्दा कर रहा है कोई माहताब को . कोई गुनाहगार या परहेज़गार हो, रखता है रब सभी केअमल के हिसाब …

ईश्वर भी अब मालिक हो गया है

पत्थर के देवता अब जमाने को रास नहीं आते संगमरमर के गढ़े भगवान हैं अब पूजे जाते, ईश्वर भी अब मालिक हो गया है मुश्किल है उसका अब मिलना …

दो दूना बाइस — डी के निवातिया

दो दूना बाईस — बेवजह में वजह ढूंढने की गुंज़ाइश चाहिये ! काम हो न हो पर होने की नुमाइश चाहिये !! कौन कितना खरा है, किसमे कितनी खोट …

बंद मुठ्ठी की बस ज़मी सी है…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)..

रोज़ मरने की……..जुस्तजू की है…. आपसे मिलके ही….ज़िन्दगी जी है… हर किसी सी………..चाह है न मेरी… बंद मुठ्ठी की बस………..ज़मी सी है… वो मिला दिन चार का…… साथ रहा… …

गर्म लावा जो बहता है- शिशिर मधुकर

तेरे दीदार को दिल हर घड़ी बेताब रहता है तू खुश रहे हरदम खुदा से बस ये कहता है संग तन्हाई के जीना कभी आसां नहीं होता पीड़ा बिछड़ने …

जन्नत – सर्वजीत सिंह

जन्नत राहों में भटक रहा था मैं तुमने मुझे सहारा दे दिया मेरी डूबती हुई कश्ती को तुमने किनारा दे दिया मोहब्बत करके जाना मैंने कितनी रोशन है जिंदगी …

मुहब्बत और भरोसा- शिशिर मधुकर

मुहब्बत में दीवाने जन…जिस घड़ी बात करते हैं प्रणय के देवता तब…फूलों की बरसात करते हैं किसी के मन में बस जाए छवि जो कोई हौले से बसर उसके …

तुझको मिटाया न गया…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

दिल मेरा तुझ बिन किसी हाल बहलाया न गया… भीड़  में  हो  के भी तनहा  मन छुपाया न गया… चाँद  चेहरे  पे  सितारों  से  चमकते  ये  नयना… लाख कोशिश …

वो इत्तफाक नहीं – शिशिर मधुकर

मेरे हाथों में तेरा हाथ… जब भी आता है मैं दिल के पास हूँ तेरे..पता चल जाता है तेरे सीने से लग…मुझको सुकून मिलता है सारे ग़म छोड़ के…ये …

चुप रहने वाले – शिशिर मधुकर

सदा चुप रहने वाले जिससे खुल के बात करते हैं बसर उसकी मुहब्बत में ही वो दिन रात करते हैं दिल के हाथों यहाँ मजबूर… सारे हो ही जाते …

बस रिश्ते निभाने में – शिशिर मधुकर

गुज़र जाती है सारी उम्र बस एक प्यार पाने में मुझे तो हार मिलती आई है संगदिल ज़माने में मुहब्बत के लिए मैं ज़िन्दगी भर प्यास से तड़पा सुबह …

तेरा यूँ दूर रहना – शिशिर मधुकर

नशा तेरी मुहब्बत का मुझको हैरान करता है तेरा चेहरा मेरे ख़्वाबों में आ परेशान करता है मुद्दतें हो गईं इस बज़्म में शिरकत ना की तूने तेरा यूँ …

हर घड़ी ख़ास होती है (२) – शिशिर मधुकर

मुहब्बत ज़िंदगी में जब किसी के पास होती है उमंगें दिल में रहती हैं घड़ी हर ख़ास होती है दौर अच्छे बुरे तो हर किसी जीवन में आते हैं …

हर घड़ी ख़ास होती है – शिशिर मधुकर

मुहब्बत ज़िंदगी में जब किसी के पास होती है उमंगें दिल में रहती हैं हर घड़ी ख़ास होती है ज़िंदगी जीने की खातिर दूर रहना भी पड़ता है मिलेंगे …

एतबार…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

अश्क आँखों से बहाकर कोई इकरार करे… संग दिल दुनिया में कैसे कोई इज़हार करे…. ले मुझे डूबा मेरा दोस्त………मांझी वो मेरा… कैसे अपनों पे भी क्यूँ अब कोई …

अभी उम्मीद बाकी है – शिशिर मधुकर

समझ में आ गया मुझको यहाँ ना कोई साकी है मिलेगी कोई तो हाला अभी उम्मीद बाकी है बिना रोके जिसमे पिस रहा है हर पल यहाँ इंसान ज़िन्दगी …

एक ऐसा पाश है – शिशिर मधुकर

प्यार की मुद्दत से फक़त मुझको तलाश है खाली पड़ी सब झोलियां सूना आकाश है शक्ति जहाँ शिव को ही ना आधार दे सके सृष्टि वहां चलती नहीं और …

झूठी शान – शिशिर मधुकर

चाहा बहुत मुझको मगर सच्चा प्रेम ना मिल सका ज़िंदगी सूनी रही और उल्फ़त का गुल ना खिल सका सोचा बहुत मैं दर्द अपना दूसरों से ना कहूं पीड़ा …

लफ्ज़ फिसलने लगे — डी के निवातिया

:””; लफ्ज़ फिसलने लगे ;””; +*””*.*””* + अधरों के पुष्प कँवल उनके खिलने लगे है ! लगता है सनम से अब वो मिलने लगे है !! कुछ तो असर …

बात क्या करें – शिशिर मधुकर

मुहब्बत ना हो जब बीच में तो फिर बात क्या करें तड़पे ना जो मिलन को उससे मुलाक़ात क्या करें दिन ही जब इस शहर में मुश्किलों से गुज़रता …