Tag: दोहे

फल — डी के निवातिया

फल रहीम काम आय भई, ना काम आय राम ! बाबा कि लुटिया डूबी, बड़े भये बदनाम !! राम संग रहीम जुड़े, बाबा काटे जेल ! नेता धोखा दे …

कवि – दोहे – डी के निवातिया

कवि लिख लिख रचना कवि भये, मांगे सबका प्यार ! खुद न  किसी  को  भाव  दे, बन कर रचनाकार !! नवयुग का आधार है, करते मन की बात ! …

झूठ बिके बेमोल — डी के निवातिया

झूठ बिके बेमोल झूठ के संग झूठ चले, सच ना सच के साथ! चोरो की टोलिया बने, साद अकेले हाथ !! साँच खड़ा बाजार में,  झूठ बिके बेमोल ! …

७४. महोब्बत…………….. हो गयी है |गीत| “मनोज कुमार”

महोब्बत हो गयी है हो गयी है हो गयी है कसम से यार जानेमन महोब्बत हो गयी है तुम्हीं से यार बेइन्तहा महोब्बत हो गयी है महोब्बत हो गयी …

सुसंगत — दोहे — डी. के. निवातिया

दोहे मोल तोलकर बोलिये, वचन के न हो पाँव ! कोइ कथन बने औषधि, कोइ दे घने घाव !!………..(१) दोस्त ऐसा  खोजिये, बुरे  समय  हो  साथ ! सुख में …

-दोहे- लिखने का प्रथम प्रयास

“ऐसे क्रोध संभालिए, जो गागर में नीर। कटु वचन मत बोलिए, चुभे ह्रदय में तीर।।” “जाकी छवि निहारन सो, मिले ह्रदय का चैन। वाको सम्मुख राखिए, दिन हो चाहे …

शिक्षा के दोहे—दोहाकार : महावीर उत्तरांचली

दीवाने -ग़ालिब पढो, महावीर यूँ आप उर्दू -अरबी -फारसी, हिन्दी करे मिलाप // १ .// शिक्षा -दीक्षा ताक पर, रखता रोज़ गरीब बचपन बेगारी करे, फूटे हाय नसीब // …

कविनामी दोहे—दोहाकर : महावीर उत्तरांचली

सब कहें उत्तरांचली, ‘महावीर’ है नाम करूँ साहित्य साधना, है मेरा यह काम //१. // ‘महावीर’ बुझती नहीं, अंतरघट तक प्यास मृगतृष्णा मिटती नहीं, मनवा बड़ा हतास //२. // …

कृष्ण नामी दोहे—दोहाकार : महावीर उत्तरांचली

गीता मै श्री कृष्ण ने, कही बात गंभीर औरों से दुनिया लड़े, लड़े स्वयं से वीर //१. // लाल यशोदानंद का, गिरिधर माखन चोर दिखता है मुझको वहां, मै …

राम नामी दोहे—दोहाकार: महावीर उत्तरांचली

देह जाय तक थाम ले, राम नाम की डोर फैले तीनों लोक तक, इस डोरी के छोर //१. // भक्तों में हैं कवि अमर, स्वामी तुलसीदास ‘रामचरित मानस’ रचा, …

प्रदूषण के दोहे—दोहाकार : महावीर उत्तरांचली

शुद्ध नहीं आबो-हवा, दूषित है आकाश सभ्य आदमी कर रहा, स्वयं श्रृष्टि का नाश //१// ओजोन परत गल रही, प्रगति बनी अभिशाप वक़्त अभी है चेतिए, पछ्ताएंगे आप //२// …

पर्यावरण के दोहे—कवि: महावीर उत्तरांचली

छह ऋतु, बारह मास हैं, ग्रीष्म-शरद-बरसात स्वच्छ रहे पर्यावरण, सुबह-शाम, दिन-रात // १ // कूके कोकिल बाग में, नाचे सम्मुख मोर मनोहरी पर्यावरण, आज बना चितचोर // २ // …

महंगाई के दोहे—दोहाकार : महावीर उत्तरांचली

महंगाई डायन डसे, निर्धन को दिन-रात धनवानों की प्रियतमा, पल-पल करती घात //१// महंगाई के राग से, बिगड़ गए सुरताल सिर पर चढ़कर नाचती, झड़ते जाएँ बाल //२// महंगी …

कविजन भाग-2

(इमेज पढने में दिक्कत हो तो ब्लॉग पर जाएँ) महारथी हैं सर्वजीत विषय अकेला होय । एक विषय अनेक भाव लिखना मुश्किल होय । देखन में नेता लगै बन …

मरुभूमि और महाराणा(दोहे) ः उत्कर्ष

★★मरुभूमि और महाराणा★★ पंद्रह सौ चालीसवाँ,कुम्भल राजस्थान । जन्म हुआ परताप का,जो माटी की शान ।। माता जीवत कँवर औ,तात उदय था नाम । पाकर ऐसे वीर को,धन्य हुआ …

अलंकृत दोहे ……

अलंकृत दोहे …… कल कल करलव करती कावेरी बहती करके कलनाद ! शिला सहित अगड बगड, नहाते उतरे जीवन नैया पार !! घन घन करती घटा चली,गरजे घट में …