Tag: समसामयिक

घर वापसी — डी के निवातिया

@ घर वापसी @ *** कोई उनसे पूछे ज़रा, उनके कितने घर है जो पार्टी बदलने को घर वापसी कहते है !! बड़ा सरल और सुन्दर जबाब मिला राजनीति …

नेतागिरी के अड्डे – शिशिर मधुकर

मुंबई की मोटर साइकिल सवार गड्डे में फिसल गई दिल्ली के अनिल गुप्ता की जान नाले में निकल गई नगर निगमों की लापरवाही पर जनता बहुत नाराज़ है खुलकर …

जीवन पर अधिकार किसका ? (कविता)

तुम्हारे ही जीवन पर है अधिकार किसका ? तुम्हारा ? बिलकुल नहीं. तुम प्रयास करो सज्जन बनकर जहाँ में प्यार व् करुणा बाँटने का. सावधान ! तुम्हारे सर पर …

झूठ बिके बेमोल — डी के निवातिया

झूठ बिके बेमोल झूठ के संग झूठ चले, सच ना सच के साथ! चोरो की टोलिया बने, साद अकेले हाथ !! साँच खड़ा बाजार में,  झूठ बिके बेमोल ! …

मिथ्या प्रेम — डी के निवातिया

मिथ्या प्रेम *** एक बकरा पाला था राम किशन ने एक बकरा पाला था रहीम खान ने मर मिटते उनकी  जवानी देखकर कहते थे दोनों, पाला है दिल-ओ-जान से …

योगा (हाइकू) – अनु महेश्वरी

योग दिवस भारत का सन्मान गर्व की बात| देश विदेश उत्साह और जोश अच्छी है बात| योग अभ्यास औषधी छूट जाती आती है ऊर्जा| बच्चे या बड़े आसन भिन्न …

अन्नदाता हमारा (हाइकु) – अनु महेश्वरी

तपती धूप सूरज की रोशनी आग उगले| पानी की कमी किसान परेशान सूखे है खेत| कर्ज़ में डुबा अन्नदाता हमारा हाल बेहाल| आवश्यक है राजनीति बंद हो मुद्दा हल …

कामों का बँटवारा – शिशिर मधुकर

प्रिय मित्रो अक्सर स्त्री विमर्श की रचनाओं में मैंने पुरुष के वर्चस्ववादी समाज को एक षड्यंत्र के रूप में निरूपित होते देखा है. जबकि मेरे विचार में स्त्री के …

वृक्ष लगाये — डी के निवातिया

वृक्ष लगाये आओ मिलजुल कर पर्यावरण दिवस मनाये अपने अपनों के हित में  अनेको वृक्ष लगाये   शुद्ध वायु, जल,थल धरोहर स्वस्थ जीवन की   दे अमूल्य सौगात नव …

पर्यावरण दिवस — डी के निवातिया

  पर्यावरण दिवस चलो, हम भी सब की तरह झूठ मूठ की परम्परा निभा लेते है इस बार भी पांच जून को फिर से पर्यावरण दिवस मना लेते है …

गौ ह्त्या – शिशिर मधुकर

गौ हत्या पर आजकल चर्चाऐं और सवाल हैं मैं तुमको सुनाता हूँ मेरे अपने जो ख़याल हैं जब हर समय मिलजुल के हमको संग रहना है एक दूसरे की …

तुम्हे दोस्ती या दुश्मनी चाहिए – अनु महेश्वरी

हम गाँधी के वंशज है, जो शांति के पुजारी थे, तो हम सुभाष और भगत सिंह, के भी वंशज है, यह ध्यान रहे, किसी भी भ्रांति में मत रहना …

आओ बहस करें – शिशिर मधुकर

बेसुरा बिहार का बैजू बन गया आओ बहस करें व्यापम से फर्जी डाक्टर बन गए आओ बहस करें मेघा को दुत्कार मिल रही आओ बहस करें सामाजिक न्याय की …

सच्चे भक्त — डी के निवातिया

सच्चे भक्त @@@ राम, कृष्ण, और गौ माता भक्तो की मांग विशेष होने लगी है पूजा जो करते आये सदियों से अब भक्ति उनकी खोने लगी है दंगा फसाद …

जो साथ सच्चा है – शिशिर मधुकर

मिले कुछ ना ज़माने में मगर जो साथ सच्चा है मेहरबान है खुदा तुम पे कि मददगार अच्छा है घृणा मन में पाले कोई जब हरदम संग रहता है …

उत्तरदायी हम सभी है – अनु महेश्वरी

सूरत की कायल हुई, दुनिया जब से, सीरत पीछे रह गयी, धन की पूजा होने लगी जब से, ईमानदारी पीछे छूट गई| भारत के इस हालात के लिए, उत्तरदायी …

गलत कानून या उसका प्रयोग — डी के निवातिया

गलत कानून या उसका प्रयोग निर्भया केस में ऐतिहासिक फैसला देतें हुए जंहा कोर्ट ने लोगो में न्याय और समाज के प्रति सवेदनाओ को मूल्य को बरकरार रखते हुए …

एक फैसला

एक फैसला आया हुआ विश्वास गेहरा इन्साफ मिलता है,कानून पर फिर विश्वास ठेहरा दरिन्दे छूट नही सकते अगर हमने है ठानी हैं न्याल्लय,वर्दि वाले बड़ी मेहरबानी मॉ बापु के …

अब तक क्यों ना ठानी है – शिशिर मधुकर

जब भी मेरी भारत माता का कोई लाल बलि चढ़ जाता है कायरता का रोना धोना अपने अखबारों में छप जाता है दुर्दांत पड़ोसी से सभ्य व्यवहार की आकांक्षाएँ …

काले धन की धवल शक्ति -शिशिर मधुकर

भारत की स्कूली शिक्षा में देखो ये कैसा घोटाला है फक्कड़ और पैसे वालों ने मध्य वर्ग को धो डाला है सरकारी स्कूलों पर तो अब भूखे नंगो का …

बदलता वक्त – शिशिर मधुकर

बदलता वक्त है अब उल्फत का कोई दाम नहीं फकत प्यार की बातों से तो मिलता आराम नहीं इस जज़्बात में जो अपनी ज़िंदगी का नास करें ऐसे मूरख …

विकाश की जेट यान पर अब भारत मेरी सवार हुई

मिल गया हॉ मिल गया कोई सितारा मिल गया सूरज की तरह चमकने वाला एक तारा मिल गया भर्ष्टाचारियो के बेड़ियो से भारत आज आजाद हुई हॉ विकाश की …