Tag: समसामयिक

काम जोरो पर है – डी के निवातिया

काम जोरों पर है +++ *** फूटी किस्मत लिखी, कागज़ कोरों पर है, खुद करके काली करतूत दोष औरों पर है !! टूट-फूट कर बिखरें, भू-माता के टुकड़ें उनकी …

अयोध्या विवाद का पूरा इतिहास

अयोध्या विवाद का पूरा इतिहास, जानें अब तक क्या-क्या हुआ, 25 बड़ी बातें अयोध्या में मंदिर मस्जिद के लिए मुकदमा लड़ते सवा सौ साल हो गया है. इस एक …

शोलो से लड़ना होगा – डी. के. निवातिया

शोलो से लड़ना होगा *** सहते – सहते, सह  रहे है हम, सदियों से आतंक की अठखेलियां, कितने आये कितने गए सत्तारूढ़ बुझा रहे आजतक सिर्फ पहेलियाँ, कुछ तो …

पीड़ा की लहरें – शिशिर मधुकर

शहीदों की चिताओं पर उठी पीड़ा के लहरें हैं मगर सोचो ज़रा हम ही तो असली अंधे बहरे है सोचते रहते हैं एक दिन शेर भी घास खाएगा जेहादी …

हमारी हम, तुम्हारी तुम जानों – डी के निवातिया

हमारी हम जानें, तुम्हारी तुम जानों *** *** *** ! तुम में रमते हम और हम में तुम हो ये एहसास-ऐ-दिल कभी तो पहचानों सच, करीब कितने है हम …

क्या कहना – डी के निवातिया

क्या कहना ! मेरे देश के चौकीदारों का, क्या कहना, भई क्या कहना। एक से बढ़कर एक आया, कोई भाई बनकर, कोई बहना ।। क्या कहना भई ,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या कहना। …

जिम्मेदारी – शिशिर मधुकर

अमृतसर में उजडा दशहरे का मेला कैसा ये खेल देखो कुदरत नें खेला नज़र सावधानी से थोड़ी जो हट गई रेल कीं पटरी फिर लाशों से पट गई देखी …

गुमसुम हैं सारे – शिशिर मधुकर

ताकत जब से बढ़ने लग गई कमरे की दीवारों में अब अपनी भी गिनती होती है तन्हाई के मारों में पढ़ लिख के गुमसुम है सारे बात करे न …

लिख नहीं पाता हूँ – डी के निवातिया

लिख नहीं पाता हूँ *** लिखना चाहता हूँ पर लिख नहीं पाता हूँ आँखों के सामने तैरते कुछ ख्वाब, कुछ अनकहे अल्फ़ाज़ आते है क्षण भर के लिए फिर …

जनसंख्या विस्फोट – शिशिर मधुकर

जनसंख्या विस्फोट है एक वोट का सारा खेल भारत का इसके कारण ही निकल रहा है तेल जाहिल जनता आँखें मूंदे भार बढ़ाती जाती है और अधिक भारत भूमि …

माँ बाप का प्यार – डी के निवातिया

माँ बाप का प्यार *** किसी ने बेगैरत कहा, किसी ने पाप का प्यार न पूछो कितना महंगा ,पड़ा है आप का प्यार सारी दुनिया खोजी मैंने सुख दुःख …

शहर की आबो-हवा – डी के निवातिया

शहर की आबो-हवा रुक सा गया है वक़्त क्यूँ थम सा गया है रवानी से बहता लहू, अब जम सा गया है कुछ तो गड़बड़ है, शहर की आबो-हवा …

अब ना राग बाकी है – शिशिर मधुकर

बुलाता है वो अपना पास पर ना आग बाकी है मधुरता खो गई गीतों में अब ना राग बाकी है तपते जेठ की गर्मी में वो सावन की उम्मीदें …

आँचल में झांकना होगा – डी के निवातिया

आँचल में झांकना होगा * जमाने पे ऊँगली उठाने से पहले जांचना होगा हमको पहले खुद के आँचल में झांकना होगा गुनहेगारो के गुनाह पर नज़र डालने से पहले …

ये कौन सा सभ्य समाज है (भाग – तीन) – डी के निवातिया

ये कौन सा सभ्य समाज है (भाग – तीन) *** ये कौन सा सभ्य समाज है, ये किस सदी का राज़ है मानव का मानव दुश्मन, लुप्त प्राय: लोक-लाज …

ये कौन सा सभ्य समाज है (2)- डी के निवातिया

ये कौन सा सभ्य समाज है (भाग – दो) *** ये कौन सा सभ्य समाज है, ये किस सदी का राज़ है मानव का मानव दुश्मन, लुप्त प्राय: लोक-लाज …

ये कौन सा सभ्य समाज है (1)- डी के निवातिया

ये कौन सा सभ्य समाज है (भाग – एक ) *** ये कौन सा सभ्य समाज है, ये किस सदी का राज़ है मानव का मानव दुश्मन, लुप्त प्राय: …

हम ही दुष्ट हो गए – डी के निवातिया

हम ही दुष्ट हो गए *** यार तमाम अपने अब रुष्ट हो गए करके माल हज़म हष्ट-पुष्ट हो गए हमने उन्हें ज़रा सा क्या रोका टोका नजरो में उनकी …

काहे भरमाये — डी के निवातिया

काहे भरमाये *** काहे भरमाये, बन्दे काहे भरमाये नवयुग का ये मेला है बस कुछ पल का खेला है आनी जानी दुनिया के रंग मंच पे नहीं तू अकेला …

शब्द विवेचन- मेरा आईना- प्रेम

शब्द विवेचन – “प्रेम”   शब्द माला के “प” वर्ग के प्रथम और व्यंजन माला के इक्कीस वे अक्षर के साथ स्वर संयोजन के बना “अढाई अक्षर” का शब्द …

शिक्षा ही वरदान है – डी के निवातिया

शिक्षा ही वरदान है *** कल ही की बात है गावं से मैं गुज़र रहा था बुजर्गो की जमात से चौपाल जगमगा रहा था चर्चा बड़ी आम चली थी …

एक काम करे – डी के निवातिया

एक काम करे आओ मिलजुलकर एक काम करे मन के मैल का काम तमाम करे न रहे कोई गिला शिकवा आपसी तुम हमारा हम तुम्हारा नाम करे !! -*-*- …