Tag: समसामयिक

इंसानी फितरत — डी के निवातिया

इंसानी फितरत @ अपने पराये के फेर में दुनिया रहती है इंसानी फितरत है ये मेरी माँ कहती है हर दुःख दर्द का इलाज़ है आत्ममंथन कहने को भावो …

कुर्सी…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

हे कुर्सी तू बहुत ही प्यारी है… तेरी लीला बहुत न्यारी है…. तेरे जन्म पे मैं बलिहारी है… हे कुर्सी तू बहुत ही प्यारी है… अपना तेरा कोई धर्म …

इंसानियत बड़ी — डी के निवातिया

इंसानियत बड़ी *** मंदिर बने या मस्जिद इस पर बहस लड़ी है ईश्वर रहेगा या अल्लाह इस पर बात अडी है जब पूछा जरूररतमंद, भूखे-प्यासे इंसान से बोला, मिले …

दिवंगतों को मत बदनाम करो — डी के निवातिया

दिवंगतों को मत बदनाम करो *** अपने पूर्वजो की गैरत कटघरे ला दी तुमने आकर मीठी बातो में ! सत्तर साल की कामयाबी मिटा दी तुमने आकर के जज्बातो …

लकीर के फकीर — डी के निवातिया

लकीर के फकीर ! अब से अच्छा तो, कल परसो का बीता जमाना था अनपढ़, लाचारी में, लकीर के फकीर बन जाना था क्या हुआ, पढ़-लिखकर, चाँद या मंगल …

आला-रे-आला — डी के निवातिया

आला-रे-आला *** आला-रे-आला, सुन मेरे लाला, लगा ले अपनी जुबान पे ताला जो बोलेगा सच्ची सच्ची बाते, किया जायेगा उसका मुँह काला वतन व्यवस्था का टूटा पलंग है चरमारती …

फल — डी के निवातिया

फल रहीम काम आय भई, ना काम आय राम ! बाबा कि लुटिया डूबी, बड़े भये बदनाम !! राम संग रहीम जुड़े, बाबा काटे जेल ! नेता धोखा दे …

चर्चा अब खुलकर होनी चाहिए — डी के निवातिया

चर्चा अब खुलकर होनी चाहिए *** कुछ हो न हो चर्चा अब खुलकर होनी चाहिए घर से संसद तक बहस जमकर होनी चाहिए !! सियासत के गलियारों की भी …

एक ख्याल — डी के निवातिया

एक ख्याल ***@*** अक्सर मेरे घर आने से कतराने लगे है मेरे अपने चाहने वाले लोग   क्योकि झुकना उनकी शान के खिलाफ है इधर मेरे घर की चौखट …

झूठ और पाखण्ड — डी के निवातिया

झूठ और पाखण्ड शिक्षा में कितने  भी अग्रणी हो जाइएगा भले आप मंगल और चाँद पे हो आइएगा ढोंगी बाबाओ से जब तक मुक्ति न मिले झूठ – पाखण्ड …

सलाह…..सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

कैसे हैं आप…. अच्छा हूँ…आप कैसे…. बढ़िया हूँ…बस सीने में दर्द उठता है कभी कभी…. अच्छा…डॉक्टर को दिखाना था… डॉक्टर क्या करेगा… नहीं चेक करवा लो…कई बार अटैक हो …

घर वापसी — डी के निवातिया

@ घर वापसी @ *** कोई उनसे पूछे ज़रा, उनके कितने घर है जो पार्टी बदलने को घर वापसी कहते है !! बड़ा सरल और सुन्दर जबाब मिला राजनीति …

नेतागिरी के अड्डे – शिशिर मधुकर

मुंबई की मोटर साइकिल सवार गड्डे में फिसल गई दिल्ली के अनिल गुप्ता की जान नाले में निकल गई नगर निगमों की लापरवाही पर जनता बहुत नाराज़ है खुलकर …

जीवन पर अधिकार किसका ? (कविता)

तुम्हारे ही जीवन पर है अधिकार किसका ? तुम्हारा ? बिलकुल नहीं. तुम प्रयास करो सज्जन बनकर जहाँ में प्यार व् करुणा बाँटने का. सावधान ! तुम्हारे सर पर …

झूठ बिके बेमोल — डी के निवातिया

झूठ बिके बेमोल झूठ के संग झूठ चले, सच ना सच के साथ! चोरो की टोलिया बने, साद अकेले हाथ !! साँच खड़ा बाजार में,  झूठ बिके बेमोल ! …

मिथ्या प्रेम — डी के निवातिया

मिथ्या प्रेम *** एक बकरा पाला था राम किशन ने एक बकरा पाला था रहीम खान ने मर मिटते उनकी  जवानी देखकर कहते थे दोनों, पाला है दिल-ओ-जान से …

योगा (हाइकू) – अनु महेश्वरी

योग दिवस भारत का सन्मान गर्व की बात| देश विदेश उत्साह और जोश अच्छी है बात| योग अभ्यास औषधी छूट जाती आती है ऊर्जा| बच्चे या बड़े आसन भिन्न …

अन्नदाता हमारा (हाइकु) – अनु महेश्वरी

तपती धूप सूरज की रोशनी आग उगले| पानी की कमी किसान परेशान सूखे है खेत| कर्ज़ में डुबा अन्नदाता हमारा हाल बेहाल| आवश्यक है राजनीति बंद हो मुद्दा हल …

कामों का बँटवारा – शिशिर मधुकर

प्रिय मित्रो अक्सर स्त्री विमर्श की रचनाओं में मैंने पुरुष के वर्चस्ववादी समाज को एक षड्यंत्र के रूप में निरूपित होते देखा है. जबकि मेरे विचार में स्त्री के …

वृक्ष लगाये — डी के निवातिया

वृक्ष लगाये आओ मिलजुल कर पर्यावरण दिवस मनाये अपने अपनों के हित में  अनेको वृक्ष लगाये   शुद्ध वायु, जल,थल धरोहर स्वस्थ जीवन की   दे अमूल्य सौगात नव …

पर्यावरण दिवस — डी के निवातिया

  पर्यावरण दिवस चलो, हम भी सब की तरह झूठ मूठ की परम्परा निभा लेते है इस बार भी पांच जून को फिर से पर्यावरण दिवस मना लेते है …