Tag: कविता संग्रह

मैं आधुनिक नारी हूँ

मै अबला नादान नहीं हूँ दबी हुई पहचान नहीं हूँ मै स्वाभिमान से जीती हूँ रखती अंदर ख़ुद्दारी हूँ मै आधुनिक नारी हूँ पुरुष प्रधान जगत में मैंने अपना …

* शब्द का शब्दार्थ *

* शब्द का शब्दार्थ * शब्द का शब्दार्थ भिन्न है या मानसिकता का है बिसात आइए आपको सुनाता हूँ जीवन का एक बात, मित्र का मेहमान ने पूछा क्या …

* अंधियारा *

*अंधियारा* हमें अंधियारा पसंद है जहाँ शान्ति का संगम है, बहुत लोग हैं इसे बुरा मानते बुराई का प्रतिक हैं इसे जानते , सारे प्रकाश का यह केंद्र है …

यह अपना लोकतंत्र है मेरी जान

*यह अपना लोकतंत्र है मेरी जान* यह अपना लोकतंत्र है मेरी जान यहाँ घोड़ा गदहा एक समान भाड़ ढोए या रेस में दौड़ें किसी का भी नहीं रहेगी अलग …

मैं शरीफ था इसलिए चुप रहा- आशीष अवस्थी

मैं शरीफ था इसलिए चुप रहा लोगों ने समझा मुझे जवाब नहीं आता जब से शराफत निकाल के फेंकी मैंने अब लोगों को सवाल नहीं आता  कुछ सोच कर …

जब जब महकती ये यादें तुम्हारी हैं- आशीष अवस्थी

अब मिलता नहीं, जो आंसू छुपा के रखा था कहीं ना ही वो जिंदगी जो तन्हा गुज़ारी है ना ही वो बातें जो तुम करती थी कभी ना ही …

* माँ मुझे बच्चा रहना है *

माँ मुझे बच्चा रहना है बड़ी-बड़ी बातें हमें नहीं करना सहिष्णुता-असहिष्णुता का पाठ हमें नहीं पढ़ना इमाईनुल , मोहन, रहीम संग खेलना है माँ मुझे बच्चा रहना है । …

कम्पित होती धरती ,और प्रेम हमारा हुंकार भर रहा।

एक दूजे को मर मिटने को देखो कैसे बीज वो रहा। पल पल चढ़ते यौवन में हृदय कैसे गंबीर हो रहा। कैसे देखो लौ दीपक की ऊंचाई तक चढ़ने …

सरकारी काम-II

छट गया था अंधियार, …………………., ………………………,क्यूँ की दिन था “शीतलेश” मंगलवार, हो करके मैं घर से तैयार, ………………, चला निपटाने कुछ सरकारी काम, छट गया था अंधियार, …………………., ………………………,क्यूँ …