Tag: कविता संग्रह

कम्पित होती धरती ,और प्रेम हमारा हुंकार भर रहा।

एक दूजे को मर मिटने को देखो कैसे बीज वो रहा। पल पल चढ़ते यौवन में हृदय कैसे गंबीर हो रहा। कैसे देखो लौ दीपक की ऊंचाई तक चढ़ने …

सरकारी काम-II

छट गया था अंधियार, …………………., ………………………,क्यूँ की दिन था “शीतलेश” मंगलवार, हो करके मैं घर से तैयार, ………………, चला निपटाने कुछ सरकारी काम, छट गया था अंधियार, …………………., ………………………,क्यूँ …

डरपोक नहीं हूँ मैं

मैं डरता हूँ तन्हाइयो से, अकेलेपन से, पर मैं डरपोक नहीं, कायर नहीं हूँ मैं, ठीक है मैं डरता हूँ, तेरे ख्यालो से, तुझसे जुडी हसीन यादों से , …