Tag: चोका

ये खामोशियाँ

डॉ०भावना कुँअर ये खामोशियाँ डुबो गई मुझको दर्द से भरी गहन औ’ अँधेरी कोठरियों में। गूँजती ही रहती मेरी साँसों में प्यार-रंग में रंगी खुशबू भरी जानी पहचानी-सी बावरी …

देखा है मैने

माँ  देखा मैने – बहुत कुछ देखा बेनूर लोग बेरंग ये दुनिया देखा है मैने खुद आगे जाने को कुचला उसे स्वार्थी हुआ इन्सान देखा है मैने धर्म की आँधी …

एक कविता

  मैंने लिखी थी एक कविता ‘खुशी’ तुम्हें दिखाई तुमने सरसरी निगाह डाली उचाट नज़र से यूँ–ही सा देखा तोड़–मसल कर डस्ट–बिन में उछाल कर फेंका ‘खुशी’ मरी थी …

कठपुतली

कठपुतली   बाज़ार में सजी थी ख़ुश, प्रस्तुत कि कोई ख़रीदार आए, ले जाए उसके तन–बँधे डोरे झटके हँसा, रुला उसको रिझा, नचाए मन मज़‍र्ी चलाए ले गया कोई …

पावस बहुरंगी

पहली वर्षा बूँदों की चित्रकारी धूलि के रंग छिप कर बैठी है नीली चिड़िया फूलों के झुरमुट ताल पै फैले घने जल-कुंतल तैरती मीन सखियाँ लिये साथ घास चुप …

वहाँ मुझे पाओगे-(चोका)

पुकारोगे जो   मैं ठहर जाऊँगा तुम्हें छोड़ मैं भला कहाँ जाऊँगा तुम्हारे लिए पलक -पाँवड़े मैं बिछाता रहा गुनगुनाता रहा आज भी वहीं मैं नज़र आऊँगा दूर हो …

बिछोह -घड़ी (चोका)

डॉ०भावना कुँअर सँजोती जाऊँ आँसू मन भीतर भरी मन -गागर। प्रतीक्षारत निहारती हूँ पथ सँभालूँ कैसे उमड़ता सागर। मिलन -घड़ी रोके न रुक पाए कँपकपाती सुबकियों की छड़ी। छलक …