Tag: छंद

छन्न पकैया….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

छन्न पकैया छन्न पकैया, बसंत राजा आये… बगिया में फूल खिले हैं, भँवरे भी मंडराएं… छन्न पकैया छन्न पकैया,अपनी दिल की बोली.. नासमझा कूंएं में जा, जो समझा हमजोली… …

‘छप्प्य छन्द’ और ‘कुण्डलिया छन्द’ सृजन हेतु—कवि : महावीर उत्तरांचली

‘छप्प्य छन्द‘ हिंदी छन्द परिवार का पुराना छन्द है। ‘कुण्डलिया‘ की तरह यह भी छ: पंक्तियों का छन्द है। फ़र्क़ मात्र यही है कि ‘कुण्डलिया‘ छन्द की शुरूआत ‘दोहे‘ …

मरुभूमि और महाराणा(दोहे) ः उत्कर्ष

★★मरुभूमि और महाराणा★★ पंद्रह सौ चालीसवाँ,कुम्भल राजस्थान । जन्म हुआ परताप का,जो माटी की शान ।। माता जीवत कँवर औ,तात उदय था नाम । पाकर ऐसे वीर को,धन्य हुआ …

श्री रामाष्टकम -राम सदा सुखधाम प्रभो शुचि सुन्दर शील स्वरूप तुम्हारा ||

श्री रामाष्टकम राम सदा सुखधाम प्रभो शुचि सुन्दर शील स्वरूप तुम्हारा || राज्य किये मनु कोशल में बहु काल गए मन माहिं विचारा | भूप कहै शतरूप प्रिये बिनु …

छंद-दिल्ली में रैली हुई बके केजरीवाल |

दिल्ली में रैली हुई बके केजरीवाल | लटके सिंह गजेन्द्र जी जनता है बेहाल || जनता है बेहाल केजरी भाषण देते | सदा कुंवर विश्वास बलाएँ उनकी लेते || …

छंद -हरिगीतिका ,विधाता ,घनाक्षरी

हरिगीतिका श्री रामचंद्र कृपा करो अब भक्ति मुझको दीजिये | दुर्बुद्धि हूँ कमबुद्धि हूँ सदबुद्धि मेरी कीजिये | अटका हुआ भटका हुआ लटका हुआ संसार में | झटका हुआ …

भगवान विश्वकर्मा स्तुति

(छंद गीतिका) भाद्रपदशुभशुक्लपक्षे प्रतिपदाप्रतिशोभितं. मातृभुवने सुतप्रभासे सिद्धिजनकंमोहितं. विश्वकर्माविधिविराटं पञ्चमुखप्रभुपूजितं. सर्वकर्मसुवन्दनंकुरु देवशिल्पीध्यायितं.. –इं० अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर’

श्री गणेश स्तुति हरिगीतिका

शिवशैलजासुत पूज्य प्रथमं मोक्षज्ञानप्रदायकं. गुरुगजबदन गणपतिगजानन विध्ननाशविनायकं. शुभ वंदनं प्रभु पाशधारी अस्त्र अंकुशशोभितं, नत नमन ‘अम्बर’ एकदंतं सिद्धिबुद्धिसुमोहितं || –इं० अम्बरीष श्रीवास्तव ‘अम्बर'(ऋद्धि, सिद्धि व बुद्धि : गणेश जी …

गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता

शिवदीन निरंतर ध्यान लगा, गुरु गोविन्द के सम कौन है दाता वेद  पुराण गुरु  छवूँ शास्तर, राम रामायण सत्य है नाता । गीता का ज्ञान व ज्ञान गुरु श्रुति …

न भूल सके इतने / शिवदीन राम जोशी

मो मन माहीं बसे मन मोहन,और बसी मन राधिका रानी, नन्द यशोमती कौन बिसारत, गुवालन की छबि नाहीं भुलानी | बृज की बृजबाल वे गुजरियां, अहो! कृष्ण के संग …

आई शुभ वसंत / शिवदीन राम जोशी

आनन्द-उमंग रंग, भक्ति-रंग रंग रंगी, एहो ! अनुराग सत्य उर में जगावनी | ज्ञान वैराग्य वृक्ष लता पता चारों फल, प्रेम पुष्प वाटिका सुन्दर सजवानी | सत्संगी समझदार, देखो …

ब्रज की रज शीश चढ़ाया करूँ / शिवदीन राम जोशी

नित्त ध्यान धरूं चित्त से हित से, उर गोविन्द के गुण गाया करूँ | वृंदावन  धाम  में  श्याम  सखा,  मन  ही  मन  में  हरषाया   करूँ | नन्द  यशोमती …

ना सखी श्याम हमारे कहे को / शिवदीन राम जोशी

थाकी गई यसुधा समुझा, हम बरज थकी, सब राम ही जाने | ओलमू लावत नन्द को नंदन, छेर करे री रह्यो नहीं छाने | गुवालनी ढीठ वे गारी बकैं, …