Tag: मधुर वाणी

जय चित्रगुप्त भगवान्

Chitrgupt bhajan-deepak srivastava ब्रह्मदेव काया से निकली, अमर ज्योति अविराम तुम्हारी| चित्रगुप्त जी तुम्हे पुकारें, मिलकर के संतान तुम्हारी|| हे प्रभु तुम तो करते रहते, पाप-पुण्य कर्मों का लेखा| …

मोरे कान्हा ले चलो मोहे पार

मोरे कान्हा ले चलो मोहे पार, मै हूँ कब से खड़ा रे तोरे द्वार ।। माया भ्रम की मोरी गगरिया, मारो कान्हा तान कंकरिया। अंग अंग मोरा भीगे ऐसे, …

अजब हेरान हूँ मै

अजब हेरान हूँ मै,भगवन तुझे कैसे रिझाऊँ मै कोई वस्तु नही ऐसी,जिसे सेवा में लाऊं मै हो मूर्ति में तुम व्यापक,तुम हो फूलों में फिर भला भगवान पे,कैसे भगवान …

आँसू

साहित्यिक मूल्यों की दृष्टि से आँसुओं में छिपा रहता है अक्सर किसी अधलिखी कविता या कहानी का अंश जीवविज्ञान के अनुसार वे हमारी प्रजाति का विशेषाधिकार हैं ख़ास तौर …

आँधी

आँधी एक शब्द ही नहीं हादसा है किसी प्रकोप किसी अतीत किसी महीने की पौध हमारे भीतर उगाती हुई यह घडि़यों से गायब कर देती है वक्त थरथराती हुई …

प्रिये तुम्हारी मधुर वाणी में कोई गीत सुना दो

प्रिये तुम्हारी मधुर वाणी में कोई गीत सुना दो मेरे अंतर्मन को उल्लास से भर दो खुशी के अंकुर को प्रस्फुटित कर दो निराशा के भावों को आशा कि …